ताज़ा खबरे

कॉलेजिमय सिफारिश के 27 माह बाद एडवोकेट अरुण कुमार की नियुक्ति को मिली मंजूरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज बनेगे
कॉलेजिमय सिफारिश के 27 माह बाद एडवोकेट अरुण कुमार की नियुक्ति को मिली मंजूरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज बनेगे

केंद्र सरकार ने सोमवार को एडवोकेट अरुण कुमार की नियुक्ति को मंजूरी दी। वह अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज बनेंगे। उल्लेखनीय है कि यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 9 मई 2023 की सिफारिश के लगभग 27 महीने बाद हुई।एडवोकेट की फाइल लंबे समय तक केंद्र सरकार के पास लंबित रही, जिसके चलते उनकी पदोन्नति में देरी हुई।यह मामला कोई अपवाद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट कई बार केंद्र सरकार द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों पर कार्रवाई में देरी को लेकर चिंता जता चुका है। कुछ सिफारिशें वर्ष 2019 से लंबित हैं, जबकि कॉलेजियम ने...

विवादित जल निकायों की पहचान विशेषज्ञ करें, केवल राजस्व रिकॉर्ड प्रविष्टियां सत्यापन के लिए पर्याप्त नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
'विवादित' जल निकायों की पहचान विशेषज्ञ करें, केवल राजस्व रिकॉर्ड प्रविष्टियां सत्यापन के लिए पर्याप्त नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने विवादित जल निकायों की पहचान और संरक्षण के लिए तकनीकी विशेषज्ञ मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल राजस्व अभिलेख प्रविष्टियाँ ही पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि ज़मीनी हकीकत का सत्यापन सक्षम विशेषज्ञ प्राधिकारी द्वारा किया जाना आवश्यक है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसमें याचिकाकर्ता के आवंटित खनन क्षेत्र में जाने के अधिकार को राज्य सरकार ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि संबंधित भूमि चारागाह होने के साथ-साथ एक जल निकाय भी है।यह देखते हुए...

सुप्रीम कोर्ट ने दलितों के बहिष्कार के मामले में याचिका खारिज की, कहा- हाईकोर्ट जाए
सुप्रीम कोर्ट ने दलितों के बहिष्कार के मामले में याचिका खारिज की, कहा- हाईकोर्ट जाए

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के एक गांव में दलितों के कथित सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव से संबंधित याचिका खारिज की। अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह इस मामले में हाईकोर्ट या अन्य वैधानिक उपायों का सहारा लें।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश सुनाया।यह याचिका दासरी चेन्ना केसवलु ने स्वयं दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश के पिथापुरम विधानसभा क्षेत्र (जो उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण का निर्वाचन क्षेत्र है) के एक गांव में दलितों को भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार का...

लाभकारी निजी प्रैक्टिस में बिताई गई निलंबन अवधि को अवकाश माना जाएगा; कर्मचारी वेतन पाने का हकदार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
लाभकारी निजी प्रैक्टिस में बिताई गई निलंबन अवधि को अवकाश माना जाएगा; कर्मचारी वेतन पाने का हकदार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने कहा कि जिस निलंबन अवधि के दौरान कर्मचारी निजी प्रैक्टिस में लाभप्रद रूप से लगा हुआ था, उसे अवकाश माना जाना चाहिए और कर्मचारी ऐसी अवधि के लिए वेतन पाने का पात्र नहीं है। तथ्यप्रतिवादी अनंतनाग जिला अस्पताल में सर्जरी में बी-ग्रेड विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत था। 16.08.2006 को उसने एक महिला मरीज की पित्ताशय की थैली की सर्जरी की। दुर्भाग्य से उसी शाम उसकी मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने 19.08.2006 के आदेश द्वारा चिकित्सीय...

BREAKING| अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE Act से छूट देने वाले फैसले की सत्यता पर सुप्रीम कोर्ट को संदेह, मामला सीजेआई को भेजा
BREAKING| अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE Act से छूट देने वाले फैसले की सत्यता पर सुप्रीम कोर्ट को संदेह, मामला सीजेआई को भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट के फैसले की सत्यता पर संदेह व्यक्त किया, क्योंकि इसमें कहा गया कि बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार, 2009 (RTE Act) अल्पसंख्यक स्कूलों, चाहे वे सहायता प्राप्त हों या गैर-सहायता प्राप्त, को RTE Act के दायरे से छूट देता है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने कहा,"पूर्वोक्त चर्चाओं के मद्देनजर, हम सम्मानपूर्वक अपनी शंका व्यक्त करते हैं कि क्या प्रमति द्वारा खंड 1 के अंतर्गत आने वाले अल्पसंख्यक स्कूलों,...

राजस्थान हाईकोर्ट ने अनियमितताओं के कारण 2021 SI भर्ती रद्द की; RPSC में प्रणालीगत कदाचार का स्वतः संज्ञान लिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अनियमितताओं के कारण 2021 SI भर्ती रद्द की; RPSC में प्रणालीगत कदाचार का स्वतः संज्ञान लिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा उप-निरीक्षकों के पदों पर 2021 में की गई भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया में व्यवस्थागत अनियमितताएं - पेपर लीक, परीक्षा के दौरान नकल, फर्जी उम्मीदवारों का इस्तेमाल - सामने आई थीं। अदालत ने कहा कि ऐसी भर्ती प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए और यह रद्दीकरण "सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं के संचालन में राज्य की अखंडता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है"। ऐसा करते हुए, अदालत ने राज्य में RPSC के भीतर "व्यवस्थागत कदाचार" का स्वतः...

दृष्टि से परे न्याय; दृष्टिबाधित कानून के छात्र के नज़रिए से न्यायालयों और कानूनी विद्यालयों की सुगम्यता पर आलोचनात्मक दृष्टि
दृष्टि से परे न्याय; दृष्टिबाधित कानून के छात्र के नज़रिए से न्यायालयों और कानूनी विद्यालयों की सुगम्यता पर आलोचनात्मक दृष्टि

न्याय के पवित्र कक्ष समानता का आश्रय स्थल माने जाते हैं, जहां कानून की निष्पक्षता का वादा सभी के लिए स्पष्ट है। फिर भी, कई दिव्यांग व्यक्तियों के लिए, यही कक्ष दृश्य और अदृश्य, दोनों तरह की बाधाओं का एक दुर्जेय घेरा हैं। एक ऐसी न्यायिक प्रणाली का विरोधाभास, जो अधिकारों की रक्षा तो करती है, लेकिन अक्सर एक वास्तविक सुलभ वातावरण प्रदान करने में विफल रहती है, एक ऐसी वास्तविकता है जिससे मैं, एक दृष्टिबाधित विधि छात्र के रूप में, प्रतिदिन जूझता हूं। मेरी व्यक्तिगत यात्रा ने यह उजागर किया है कि...

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI को लिखी चिट्ठी, जजों के बार-बार तबादले पर जताई चिंता
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI को लिखी चिट्ठी, जजों के बार-बार तबादले पर जताई चिंता

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) और अन्य कोलेजियम सदस्यों को पत्र लिखकर दिल्ली हाईकोर्ट के जजों के लगातार तबादलों को लेकर चिंता जाहिर की।बार एसोसिएशन ने कहा कि नियुक्ति और तबादले की प्रक्रिया में पारदर्शिता और परामर्श बढ़ाने से न केवल वकीलों का न्यायपालिका पर विश्वास मजबूत होगा बल्कि जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।पत्र में कहा गया,“बार यह मानता है कि नियुक्ति और तबादले का अधिकार पूरी तरह से कोलेजियम के पास है, लेकिन यह भी सच है कि न्याय व्यवस्था में बार बराबर का...

चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्यवाही से छूट देने वाले प्रावधान को पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्यवाही से छूट देने वाले प्रावधान को पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने शुक्रवार (29 अगस्त) को पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 को चुनौती दी।धारा 16 में यह प्रावधान किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल के दौरान लिए गए किसी भी निर्णय, कार्रवाई या कथन के संबंध में उनके विरुद्ध कोई भी दीवानी या फौजदारी कार्यवाही किसी भी न्यायालय में नहीं चलाई जाएगी।अमिताभ ठाकुर...

महिला क्लाइंट्स को बिना सुरक्षा इंतज़ाम ट्रेनिंग देना गंभीर चिंता का विषय: इलाहाबाद हाईकोर्ट
महिला क्लाइंट्स को बिना सुरक्षा इंतज़ाम ट्रेनिंग देना गंभीर चिंता का विषय: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में जिम में महिला क्लाइंट्स को पुरुष ट्रेनर्स द्वारा बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम के ट्रेनिंग देने पर गंभीर चिंता जताई।जस्टिस शेखर कुमार यादव की बेंच एक जिम ट्रेनर की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर आरोप है कि उसने एक महिला क्लाइंट के साथ जातिसूचक टिप्पणी की उसे धक्का दिया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।महिला ने अपने बयान (धारा 164 दं.प्र.सं. के तहत) में यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ट्रेनर ने उसकी सहेली के अश्लील वीडियो बनाए और उन्हें भेजा भी।इन आरोपों को देखते हुए कोर्ट...

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना अधिवास नियम को बरकरार रखा, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को छूट के साथ राज्य में 4 साल तक लगातार पढ़ाई अनिवार्य है
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना अधिवास नियम को बरकरार रखा, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को छूट के साथ राज्य में 4 साल तक लगातार पढ़ाई अनिवार्य है

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (एक सितंबर) को तेलंगाना राज्य की ओर से तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश के विरुद्ध दायर अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया था कि मेडिकल प्रवेश में स्थानीय निवासी कोटे का लाभ पाने के लिए किसी स्थायी निवासी को तेलंगाना में लगातार चार वर्षों तक अध्ययन या निवास करने की आवश्यकता नहीं है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने 2017 के नियमों को बरकरार रखा, जिसके अनुसार MBBS और BDS पाठ्यक्रमों में "स्थानीय उम्मीदवार" कोटे के लिए अर्हता प्राप्त करने...

Bihar SIR : ECI ने सुप्रीम कोर्ट में कहा: 1 सितंबर की समय-सीमा के बाद भी दायर दावों/आपत्तियों पर विचार किया जाएगा
Bihar SIR : ECI ने सुप्रीम कोर्ट में कहा: 1 सितंबर की समय-सीमा के बाद भी दायर दावों/आपत्तियों पर विचार किया जाएगा

बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मसौदा मतदाता सूची के संबंध में दावे/आपत्तियां 1 सितंबर की समय-सीमा के बाद भी दायर की जा सकती हैं। नामांकन की अंतिम तिथि से पहले दायर किए गए ऐसे सभी दावों/आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।इस दलील पर गौर करते हुए न्यायालय ने 1 सितंबर की समय-सीमा बढ़ाने का कोई आदेश नहीं दिया।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ राजनीतिक दलों द्वारा दायर उन आवेदनों पर विचार कर रही थी, जिनमें समय...

परिसीमा अधिनियम की धारा 5 बिहार लोक निर्माण संविदा विवाद मध्यस्थता अधिनियम के तहत पुनरीक्षण याचिकाओं पर लागू होती है: पटना हाईकोर्ट
परिसीमा अधिनियम की धारा 5 बिहार लोक निर्माण संविदा विवाद मध्यस्थता अधिनियम के तहत पुनरीक्षण याचिकाओं पर लागू होती है: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि परिसीमा अधिनियम की धारा 5, बिहार लोक निर्माण संविदा विवाद मध्यस्थता अधिनियम, 2008 (BPWCDA एक्ट) की धारा 13 के अंतर्गत संशोधनों पर लागू होती है, जिसका अर्थ है कि BPWCDA अधिनियम के अंतर्गत पारित पंचाटों को चुनौती देने में हुई देरी को परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत क्षमा किया जा सकता है। जस्टिस रमेश चंद मालवीय की पीठ ने फैसले में माना कि चूंकि उक्त बिंदु पर पटना हाईकोर्ट के मत परस्पर विरोधी थे, इसलिए मामले को एक बड़ी पीठ को भेज दिया...

स्कूल की किताबों में ट्रांसजेंडर-इन्क्लूसिव सेक्स एजुकेशन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी
स्कूल की किताबों में ट्रांसजेंडर-इन्क्लूसिव सेक्स एजुकेशन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 सितंबर) को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया। यह याचिका कक्षा 12 की स्टूडेंट ने दायर की, जिसमें मांग की गई कि स्कूल कोर्स और NCERT और SCERTs द्वारा तैयार की गई पाठ्य-पुस्तकों में ट्रांसजेंडर-समावेशी "कॉम्प्रिहेंसिव सेक्सुअलिटी एजुकेशन" (CSE) शामिल की जाए।चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।याचिका की पृष्ठभूमियाचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के NALSA बनाम यूनियन ऑफ...

BREAKING| जारी रहेगी केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल नीति, सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती देने वाली याचिका की खारिज
BREAKING| जारी रहेगी केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल नीति, सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती देने वाली याचिका की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 सितंबर) को केंद्र सरकार के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की। केंद्र सरकार के इस कार्यक्रम के तहत 20% इथेनॉल (E20) मिश्रित पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य की गई है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने नीति आयोग की 2021 की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि E20 मानकों का पालन न करने वाले पुराने वाहनों के प्रभाव के बारे में...

कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति की आत्महत्या मामले में पत्नी को अग्रिम ज़मानत
कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति की आत्महत्या मामले में पत्नी को अग्रिम ज़मानत

कलकत्ता हाईकोर्ट ने उस महिला को अग्रिम ज़मानत दी, जिस पर अपने अलग रह रहे पति की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया। यह आरोप पति की मां ने लगाया, जब उनके बेटे ने पत्नी के वैवाहिक घर न लौटने पर फांसी लगाकर जान दे दी थी।जस्टिस जय सेनगुप्ता ने आदेश देते हुए कहा,“अंततः यह अदालत पर निर्भर करेगा कि इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसावे का कोई तत्व है या नहीं। लेकिन केस डायरी में उपलब्ध सामग्री और याचिकाकर्ता पर लगाए गए कथित आरोपों को देखते हुए मुझे नहीं लगता कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ की...

घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान खोलना संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 का उल्लंघन : राजस्थान हाईकोर्ट
घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान खोलना संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 का उल्लंघन : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान आवंटन को संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 के प्रावधानों के खिलाफ़ करार दिया। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है और साथ ही संयम नीति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।मामला जयपुर के किशनपोल बाज़ार का है, जहां वर्ष 2021-22 की आबकारी नीति के तहत एक महिला को शराब की दुकान आवंटित की गई। लेकिन 13 अगस्त 2025 को आबकारी विभाग ने जन आक्रोश का हवाला देते हुए दुकान को किसी आपत्तिहीन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। इसी...

झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 से अब तक हुई हिरासत में मौतों का ब्योरा पेश करने का निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 से अब तक हुई हिरासत में मौतों का ब्योरा पेश करने का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों को लेकर गंभीर रुख अपनाया। कोर्ट ने राज्य के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफ़नामा दाख़िल करने का आदेश दिया।इस हलफ़नामे में वर्ष 2018 से अब तक हुई सभी हिरासत में मौतों का ब्योरा देना होगा। यह भी स्पष्ट करना होगा कि क्या इन मौतों की सूचना संबंधित मजिस्ट्रेट को जांच के लिए दी गई थी।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई कि 2018 से अब...