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फैक्ट्रियों का गंदा पानी यमुना में मिल रहा, दिल्ली हाईकोर्ट ने DPCC से सुधारात्मक कदमों पर जवाब मांगा
फैक्ट्रियों का गंदा पानी यमुना में मिल रहा, दिल्ली हाईकोर्ट ने DPCC से सुधारात्मक कदमों पर जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (11 सितंबर) को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को निर्देश दिया कि वह अदालत के सामने सभी औद्योगिक क्षेत्रों का पूरा चार्ट रखे और यह बताए कि फैक्ट्रियों व उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट के उपचार की नियमित निगरानी के लिए वह क्या कदम उठा रही है।अदालत ने आगे समिति को अगली तारीख पर पेश होने और उस विशेष समिति की रिपोर्ट पर अपनी दलीलें रखने का आदेश दिया, जिसने शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर फैक्ट्रियां सीवेज सीधे...

सुप्रीम कोर्ट ने पिस्तौल से हमला करने वाले की हत्या के मामले में आरोपी को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने पिस्तौल से हमला करने वाले की हत्या के मामले में आरोपी को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तराखंड के एक डॉक्टर की सजा और उम्रकैद को रद्द कर दिया, जिसे एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने डॉक्टर की आत्मरक्षा की दलील को स्वीकार कर लिया।जस्टिस एम.एम. सुनेद्रेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर की खंडपीठ ने दरशन सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले में तय किए गए 10 सिद्धांतों का हवाला दिया और कहा कि आत्मरक्षा के अधिकार को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता और इसे “सोने की तराजू” में नहीं तौला जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति आरोपी के...

फेसबुक पर बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर पोस्ट करने वाले व्यक्ति को राहत नहीं
फेसबुक पर बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर पोस्ट करने वाले व्यक्ति को राहत नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को बाबरी मस्जिद पर कथित फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार किया। इस पोस्ट में कहा गया था कि "बाबरी मस्जिद एक दिन तुर्की की सोफिया मस्जिद की तरह फिर से बनाई जाएगी"।हालांकि, जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने आरोपी (मोहम्मद फैय्याज मंसूरी) के खिलाफ मामले की सुनवाई तेज की।बता दें, मंसूरी के खिलाफ 6 अगस्त, 2020 को FIR दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर अपमानजनक संदेश पोस्ट किया, जिस पर समरीन बानो नाम की एक...

SRM यूनिवर्सिटी विध्वंस विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा अंतरिम राहत याचिका पर निर्णय होने तक बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक लगाई
SRM यूनिवर्सिटी विध्वंस विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा अंतरिम राहत याचिका पर निर्णय होने तक बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने बुधवार को श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRM) बाराबंकी के विरुद्ध चल रही विध्वंस कार्रवाई सहित बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक लगाई। यह रोक उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के तहत पारित बेदखली और दंडात्मक आदेश के अनुसरण में लगाई गई।जस्टिस आलोक माथुर की पीठ ने यह आदेश श्री रामस्वरूप मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट लखनऊ द्वारा अपने प्रबंध न्यासी के माध्यम से दायर रिट याचिका पर पारित किया, जिसमें यूनिवर्सिटी परिसर के एक हिस्से को ध्वस्त करने की राज्य सरकार की...

दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐश्वर्या राय बच्चन के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की, कहा- बिना अनुमति उपयोग निजता का उल्लंघन
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐश्वर्या राय बच्चन के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की, कहा- बिना अनुमति उपयोग निजता का उल्लंघन

दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की रक्षा करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के व्यक्तिगत गुणों का बिना अनुमति शोषण (exploitation) उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन है और उसके साथ गरिमा के साथ जीने के अधिकार को भी प्रभावित करता है।जस्टिस तेजस करिया ने विभिन्न संस्थाओं को अभिनेत्री के नाम और तस्वीरों सहित उनके व्यक्तिगत गुणों का दुरुपयोग करने से रोक दिया। कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके उनके नाम...

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: न्यायिक डिक्री सिर्फ दिखावा नहीं, तकनीकी आधार पर राहत देने से इनकार नहीं कर सकता कोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: न्यायिक डिक्री सिर्फ दिखावा नहीं, तकनीकी आधार पर राहत देने से इनकार नहीं कर सकता कोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम न्यायालय द्वारा पारित डिक्री को केवल कागज़ी दस्तावेज़ या दीवार पर टंगी शो-पीस बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता। निष्पादन न्यायालय तकनीकी कारणों के आधार पर वास्तविक राहत से इनकार नहीं कर सकता।जस्टिस फ़र्ज़न्द अली ने कहा,“डिक्री का उद्देश्य महज़ कागज़ पर बने रहना नहीं है। इसे वास्तविकता में लागू किया जाना चाहिए ताकि सफल पक्षकार को वह संपूर्ण लाभ मिल सके, जो निर्णय और डिक्री में निहित है। अन्यथा, पूरा न्यायिक प्रक्रिया ही निरर्थक हो जाएगी।”मामला ऐसे समझौता आधारित...

प्रक्रिया न्याय की दासी, इसे मूल अधिकारों के नाम पर पराजित नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
प्रक्रिया न्याय की दासी, इसे मूल अधिकारों के नाम पर पराजित नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि प्रक्रिया न्याय की दासी है और तकनीकी पहलुओं को पक्षकारों के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, मूल अधिकारों के नाम पर प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को नष्ट नहीं किया जा सकता।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा, "मूल अधिकारों का दावा और प्रदानीकरण भी कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए किया जाना चाहिए...यदि इसका पालन नहीं किया गया तो दीवानी प्रक्रिया के संहिताकरण का पूरा उद्देश्य ही निरर्थक हो जाएगा।"पीठ ICAR...

बीमा पॉलिसी की संदिग्ध शर्तों की व्याख्या बीमाधारक के पक्ष में होगी : बॉम्बे हाईकोर्ट
बीमा पॉलिसी की संदिग्ध शर्तों की व्याख्या बीमाधारक के पक्ष में होगी : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि यदि बीमा पॉलिसी की शर्तों में अस्पष्टता हो, तो कॉन्ट्रा प्रोफेरेंटम सिद्धांत लागू होगा और उसकी व्याख्या बीमाधारक के पक्ष में की जाएगी। अदालत ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई जिसने एक विधवा का बीमा दावा केवल तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था।जस्टिस संदीप वी. मार्ने एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें बीमा कंपनी ने बीमा लोकपाल के 21 नवंबर 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कंपनी को विधवा को 27 लाख का भुगतान करने का निर्देश दिया गया...

बाजार में जनता के लिए बना मंदिर निजी नहीं, इसके आसपास मांस की दुकानों के संचालन पर प्रतिबंध लागू: राजस्थान हाईकोर्ट
बाजार में जनता के लिए बना मंदिर निजी नहीं, इसके आसपास मांस की दुकानों के संचालन पर प्रतिबंध लागू: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 269 सहपठित धारा 340 के तहत जारी 22 मार्च 2021 के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के खंड 4 के अनुसार पूजा स्थलों के 50 मीटर के दायरे में स्थापित मांस की दुकानों के लाइसेंस रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा मंदिर के कुछ दुकानदारों की निजी संपत्ति होने के तर्क को खारिज किया। साथ ही कहा कि जब तक अन्यथा साबित न हो प्रत्येक मंदिर एक सार्वजनिक संपत्ति है चूंकि और विचाराधीन मंदिर एक खुले...

तेलंगाना हाईकोर्ट राजनीतिक भाषणों पर FIR दर्ज करने पर रोक लगाई, सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों में जारी कीं विस्तृत गाइडलाइन्स
तेलंगाना हाईकोर्ट राजनीतिक भाषणों पर FIR दर्ज करने पर रोक लगाई, सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों में जारी कीं विस्तृत गाइडलाइन्स

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि कठोर, आपत्तिजनक या आलोचनात्मक राजनीतिक भाषणों पर पुलिस को स्वचालित या यांत्रिक ढंग से FIR दर्ज नहीं करनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पोस्ट के मामलों में केवल तभी FIR दर्ज की जा सकती है, जब साम्प्रदायिक विद्वेष फैलाने, सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पहुंचाने या हिंसा भड़काने का स्पष्ट प्रथम दृष्टया मामला बने।जस्टिस एन. तुकारामजी ने विस्तृत आदेश पारित करते हुए कहा कि राजनीतिक अभिव्यक्ति से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करने से पहले अनिवार्य रूप से विधिक राय ली...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SRM यूनिवर्सिटी को बिना मंजूरी के लॉ कोर्स चलाने के मामले में राहत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SRM यूनिवर्सिटी को बिना मंजूरी के लॉ कोर्स चलाने के मामले में राहत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRM) बाराबंकी और उसके अधिकारियों को FIR के संबंध में जबरन कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। आरोपियों में यूनिवर्सिटी का रजिस्ट्रार भी शामिल है। इस FIR में आरोप लगाया गया कि यूनिवर्सिटी ने बिना किसी वैध मंजूरी के लॉ कोर्सों में स्टूडेंट्स का दाखिला लिया और उनकी परीक्षाएं आयोजित कीं।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस सैयद क़मर हसन रिज़वी की खंडपीठ ने यह आदेश यूनिवर्सिटी और उसकी रजिस्ट्रार द्वारा दायर रिट याचिका पर पारित किया। इस याचिका में...

CrPC की धारा 197 के तहत मंजूरी का मुद्दा कार्यवाही के किसी भी चरण में निचली अदालत में उठाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
CrPC की धारा 197 के तहत मंजूरी का मुद्दा कार्यवाही के किसी भी चरण में निचली अदालत में उठाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में किसी लोक सेवक के विरुद्ध निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 197 के तहत मंजूरी के प्रश्न पर कार्यवाही के किसी भी चरण में विचार किया जा सकता है, क्योंकि यह मुद्दा प्रस्तुत साक्ष्य की प्रकृति पर निर्भर करता है कि क्या कृत्य आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में किए गए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें याचिकाकर्ता-लोक सेवक पर IPC की धारा...

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार-हत्या मामले में मौत की सज़ा पाए व्यक्ति को बरी किया, कहा- सबूत गढ़ने का मज़बूत अनुमान
सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार-हत्या मामले में मौत की सज़ा पाए व्यक्ति को बरी किया, कहा- 'सबूत गढ़ने का मज़बूत अनुमान'

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2014 में सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी मौत के मामले में दोषी ठहराए गए अख्तर अली की मौत की सज़ा रद्द की। अदालत ने सह-आरोपी प्रेम पाल वर्मा को भी बरी कर दिया, जिसे अपराधी को शरण देने का दोषी ठहराया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 18 अक्टूबर, 2019 के फैसले के खिलाफ दोनों आरोपियों द्वारा दायर आपराधिक अपीलों को स्वीकार कर लिया, जिसमें दोषसिद्धि और मौत की सज़ा बरकरार रखी गई थी।अदालत ने कहा,"कानून में...

राज्यपाल को विधेयकों को अंतहीन काल तक अपने पास रखने का अधिकार नहीं है, लेकिन समय-सीमा तय नहीं की जा सकती: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
राज्यपाल को विधेयकों को अंतहीन काल तक अपने पास रखने का अधिकार नहीं है, लेकिन समय-सीमा तय नहीं की जा सकती: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

राष्ट्रपति संदर्भ की सुनवाई के आखिरी दिन सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्यपाल विधेयकों पर अंतहीन रूप से नहीं बैठ सकते।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चूंकि अनुच्छेद 200 में "जितनी जल्दी हो सके" शब्द का प्रयोग किया गया, इसलिए राज्यपाल विधेयकों पर "सदाबहार या तीन या चार साल तक" नहीं बैठ सकते। साथ ही सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय द्वारा "सीधे-सादे फॉर्मूले" के रूप में निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने का विरोध किया।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पांच जजों की पीठ के समक्ष कहा,"यद्यपि...

पेंशन स्थायी आय नहीं, मकान मालिक के परिवार की परिसर की वास्तविक आवश्यकता को दरकिनार नहीं कर सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
पेंशन स्थायी आय नहीं, मकान मालिक के परिवार की परिसर की वास्तविक आवश्यकता को दरकिनार नहीं कर सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पेंशन आय मकान मालिक द्वारा अपने बेटे को व्यवसाय में स्थापित करने के लिए परिसर की वास्तविक आवश्यकता का स्थान नहीं ले सकती।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने टिप्पणी की,"पेंशन की आय भी एक स्थायी आय नहीं है। मकान मालिक की मृत्यु के बाद उसके छोटे बेटे सहित उसके परिवार के सदस्य किसी भी पेंशन के हकदार नहीं होंगे।"मकान मालिक ने हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 की धारा 14(3)(बी)(i) के तहत बेदखली याचिका इस आधार पर दायर की कि उसे अपने छोटे बेटे, जो उसकी और उसकी...

स्टूडेंट आत्महत्याएं अधिक हो रही हैं, एक एक्टिव एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन अत्यंत आवश्यक: दिल्ली हाईकोर्ट
स्टूडेंट आत्महत्याएं अधिक हो रही हैं, एक एक्टिव एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन अत्यंत आवश्यक: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि स्टूडेंट्स की आत्महत्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इसे रोकने के लिए एक उचित, एक्टिव और प्रभावी एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन की तत्काल आवश्यकता है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल की खंडपीठ ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई देरी नहीं होनी चाहिए ताकि हम इस खतरे से और अधिक युवा जीवन न खो दें।अदालत ने कहा कि वह स्टूडेंट आत्महत्याओं के मुद्दे को लेकर बहुत चिंतित है, जो कि बार-बार हो रही हैं। यह मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अमित कुमार और अन्य बनाम भारत संघ मामले में...