ताज़ा खबरे
पैरोडी की डोर: बाबूराव विवाद में बौद्धिक संपदा और हास्य स्वतंत्रता की सीमाएं
जब हास्य कॉपीराइट के दावे से टकराता है, तो हंसी भारी भरकम होती है। यह मज़ाक नेटफ्लिक्स और कपिल शर्मा की टीम के लिए महंगा साबित हुआ है, जिन्हें एक प्रतिष्ठित किरदार बाबूराव गणपतराव आप्टे के अभिनय के लिए ₹25 करोड़ का कानूनी नोटिस मिला है।22 सितंबर 2025 को, नेटफ्लिक्स पर प्रसारित होने वाले ग्रेट इंडियन कपिल शो के खिलाफ एक कानूनी नोटिस भेजा गया, जो अभिनेता अक्षय कुमार के साथ अपना अंतिम एपिसोड प्रसारित करने के लिए तैयार था। यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब "हेरा फेरी" फ्रैंचाइज़ी के निर्माता और मालिक...
थके हुए लोगों के लिए कोई आराम नहीं: भारत में दिव्यांगता अधिकारों के प्रवर्तन की बदहाल स्थिति
यह लेख कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम केवीएस मामले और उन परिचालन वास्तविकताओं की पड़ताल करता है जो भारत में दिव्यांग लोगों को अपने अधिकारों का पूर्ण प्रयोग करने से रोकती रहती हैं।दिसंबर 2022 में राष्ट्रीय बधिर संघ द्वारा न्यायालयों को लिखा गया एक पत्र, जिसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों को अपनी भर्ती प्रक्रियाओं में शामिल करने से संस्थागत इनकार पर प्रकाश डाला गया था, भारत में दिव्यांगता कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया। कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम केवीएस मामले...
NEET-UG अभ्यर्थी की OMR शीट की दोबारा जांच की मांग वाली याचिका खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उसने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (UG) 2025 के संबंध में अपने OMR मूल्यांकन की पुनर्गणना और अपने परिणाम व रैंक में संशोधन की मांग की थी।जस्टिस विकास महाजन ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा ओएमआर शीट की जाँच के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में कोई भेदभाव या मनमानी नहीं हुई।अदालत ने कहा,"सभी अभ्यर्थियों की OMR शीट की जांच OMR स्कैनर द्वारा बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के की गई, इसलिए प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए एक ही मानदंड...
दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के बिना याचिका दायर करने पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के बिना याचिका दायर करने की प्रथा की निंदा की और कहा है कि मामलों को वापस लेने के चरण में भी जुर्माना लगाना आवश्यक हो सकता है।जस्टिस प्रतीक जालान ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने की प्रथा शुरू होने से पहले आदेश की कॉपी दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को भेजी जाए।अदालत ने कहा,"सुप्रीम कोर्ट और इस अदालत के स्पष्ट निर्णयों के बावजूद, अदालत को हर हफ्ते कई याचिकाओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें अधिकार क्षेत्र की स्थिति...
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर नागार्जुन के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की, उनके नाम और इमेज के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने तेलुगु एक्टर नागार्जुन अक्किनेनी के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरिम आदेश पारित किया। इस आदेश के तहत विभिन्न संस्थाओं को उनकी सहमति या अनुमति के बिना उनकी इमेज, नाम, आवाज़ या उनके व्यक्तित्व के अन्य तत्वों का आर्थिक लाभ के लिए दुरुपयोग करने से रोका गया।जस्टिस तेजस करिया ने विभिन्न वेबसाइटों और जॉन डो (अज्ञात संस्थाओं) को एक्टर के नाम, इमेज या उनके व्यक्तित्व के अन्य गुणों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग, शोषण या दुरुपयोग करके उनके व्यक्तित्व या नैतिक अधिकारों...
हाईकोर्ट ने नरेश गोयल को राहत, लोन अकाउंट को 'धोखाधड़ी' के रूप में वर्गीकृत करने वाला आदेश रद्द
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में जेट एयरवेज़ के संस्थापक नरेश गोयल को जारी कारण बताओ नोटिस रद्द किया, जिसके तहत बैंक ऑफ इंडिया (BoI) ने उनके लोन अकाउंट को 'धोखाधड़ी' के रूप में वर्गीकृत किया था।जस्टिस रियाज़ छागला और जस्टिस फरहान दुबाश की खंडपीठ ने कहा कि बैंक ने गोयल को 1 जुलाई, 2025 को उनके खाते को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने वाले कारण बताओ नोटिस के खिलाफ पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया।खंडपीठ ने 25 सितंबर को पारित आदेश में कहा,"याचिकाकर्ता के खाते को "धोखाधड़ी" के रूप में वर्गीकृत करने से पहले...
CrPC की धारा 436ए के तहत रिहाई स्वतः नहीं होती, भले ही अपराध में मृत्युदंड का प्रावधान न हो: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि CrPC की धारा 436ए के तहत ज़मानत पर रिहाई स्वतः नहीं होती, भले ही कथित अपराध में मृत्युदंड का प्रावधान न हो।बता दें, CrPC की धारा 436ए विचाराधीन कैदी को हिरासत में रखने की अधिकतम अवधि निर्धारित करती है।इसमें कहा गया कि किसी अभियुक्त (जिस पर मृत्युदंड के प्रावधान वाले अपराध का आरोप नहीं है), जिसने उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम कारावास की आधी अवधि तक हिरासत में रखा हो, उसे ज़मानत पर रिहा किया जाएगा।हालांकि, जस्टिस संजीव नरूला ने उस प्रावधान का हवाला दिया, जो...
Krishna Janmabhoomi Dispute | 'कोई पर्याप्त कारण नहीं दिखाया गया': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाद नंबर 7 में देवता के नेक्स्ट फ्रेंड को हटाने की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह स्वामित्व विवाद मामले के वाद नंबर 7 में वादी नंबर 2 से 5 द्वारा दायर आवेदन खारिज कर दिया, जिसमें वादी नंबर 1, भगवान श्री कृष्ण लाला विराजमान के अगले मित्र के रूप में श्री कौशल किशोर ठाकुर जी उर्फ कौशल सिंह तोमर को हटाने की मांग की गई।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने कहा कि आवेदन में दिए गए आधार नेक्स्ट फ्रेंड को हटाने के लिए पर्याप्त नहीं थे, जो कि एक 'कठोर' कार्रवाई थी। यह तभी की जा सकती है जब यह साबित हो जाए कि अगला मित्र...
S.156(3) CrPC | ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दे सकते मजिस्ट्रेट: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 (Drugs & Cosmetics Act) के तहत FIR रद्द की, जो पुलिस द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट के निर्देश पर दर्ज की गई।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत उल्लंघन केवल औषधि निरीक्षक के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और पुलिस द्वारा उनकी जाँच नहीं की जा सकती।भारत संघ बनाम अशोक कुमार शर्मा (2020) का हवाला दिया गया, जहां ड्रग्स एक्ट की धारा 32 के अधिदेश और औषधि निरीक्षक को प्राप्त...
पीड़िता के गुप्तांगों को चोट पहुंचाना हमेशा सामूहिक बलात्कार के अपराध को स्थापित करने के लिए साक्ष्य के रूप में आवश्यक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि बलात्कार पीड़िता के गुप्तांगों को चोट पहुंचाना हमेशा सामूहिक बलात्कार सहित बलात्कार के अपराध को स्थापित करने के लिए साक्ष्य के रूप में आवश्यक नहीं होता।हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता के गुप्तांगों को चोट न पहुंचना, उन मामलों में अपराध को अंजाम देते समय बल प्रयोग न किए जाने के कारण हो सकता है, जहां उसे इस हद तक भयभीत किया गया हो कि उसने कृत्य का विरोध न किया हो।जस्टिस जे.जे. मुनीर की पीठ ने कहा कि दूसरी संभावना यह हो सकती है कि पीड़िता किसी मादक पदार्थ, जैसे...
Interpretation of Law किसे कहते हैं?
अदालतों द्वारा संविधियों की भाषा, शब्दों एवं अभिव्यक्तियों के अर्थ- निर्धारण की प्रक्रिया को ही निर्वाचन अथवा व्याख्या कहा जाता है। निर्वाचन के माध्यम से न्यायालयों द्वारा संविधि में प्रयुक्त भाषा या शब्दों का अर्थान्वयन या अर्थ-निर्धारण किया जाता है। Interpretation (व्याख्या) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा कोर्ट संविधि में प्रयुक्त शब्दों का विधायिका के आशय के अनुरूप अर्थ लगाते हैं। इस प्रकार निर्वचन द्वारा संविधि में प्रयुक्त शब्दों को अर्थ प्रदान किया जाता है या उनका अर्थ निर्धारित किया...
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को सूचित किए बिना दिल्ली से दो नाबालिगों को गिरफ्तार करने पर राजस्थान पुलिस की खिंचाई की
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस को राष्ट्रीय राजधानी से दो नाबालिगों को दिल्ली पुलिस को सूचित किए बिना गिरफ्तार करने पर फटकार लगाई।संदीप कुमार बनाम राज्य (दिल्ली सरकार) एवं अन्य, (2019) मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दिशानिर्देश जारी किए, जिनका पालन एक राज्य की पुलिस को किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में गिरफ्तारी करने के लिए जाने पर करना होगा।इसमें कहा गया कि दूसरे राज्य का दौरा करने से पहले पुलिस अधिकारी को उस स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए, जिसके...
तलाकशुदा पत्नी तलाक के आधार या तरीके की परवाह किए बिना CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि तलाकशुदा पत्नी तलाक के आधार या तरीके की परवाह किए बिना CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण पाने की हकदार है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा,"यह ध्यान रखना उचित है कि एक बार जब पत्नी तलाक ले लेती है तो वह CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण पाने की हकदार होती है, चाहे तलाक का आधार या तरीका कुछ भी हो।"अदालत एक पति की उस याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें पत्नी द्वारा निचली अदालत में दायर भरण-पोषण याचिका रद्द करने की मांग की गई थी।दोनों पक्षकारों ने 2018 में इस्लामी रीति-रिवाजों...
पूर्व चीफ जस्टिस की पेंशन याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा-दोहरी पेंशन का कोई कानूनी आधार नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस फरजंद अली के नेतृत्व वाली खण्डपीठ ने झारखण्ड हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस प्रकाश टाटिया द्वारा राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद की पेंशन के लिए दायर याचिका खारिज की।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सिंघी की खण्डपीठ ने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट किया कि राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को अलग से पेंशन का अधिकार नहीं है, यदि वह पहले से उच्च संवैधानिक पद से पेंशन प्राप्त कर रहे हों।जस्टिस टाटिया ने राज्य सरकार द्वारा पेंशन लाभ से वंचित करने के आदेशों को चुनौती...
किसी भी फैसले में केस लॉ का महत्व
किसी बड़ी अदालत का दिया कोई निर्णय उसकी अधीनस्थ अदालत पर लागू होता है, अधीनस्थ अदालत अपनी उच्च अदालत के दिए निर्णय से परे नहीं हो सकती है। इसलिए कानून में पूर्व निर्णय अति महत्वपूर्ण हो जाते हैं। सामान्य बोलचाल की भाषा में इन्हें रुलिंग अथवा केस लॉ कहा जाता है। बहस के दौरान अधिवक्ताओं द्वारा अपने-अपने पक्ष समर्थन में ऐसे निर्णय न्यायालय के समक्ष पेश किये जाते हैं जो न्यायनिर्णयन में अदालतों का मार्गदर्शन करते हैं।जहाँ तक पूर्व-निर्णयों की प्रयोज्यता का प्रश्न है, हर निर्णय को उस मामले के...
पीड़िता और आरोपी के बीच शत्रुतापूर्ण संबंधों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन आवश्यक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ मामले में बरी करने का फैसला बरकरार रखा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के मामले में आरोपी को बरी करने का फैसला बरकरार रखते हुए कहा कि जब पीड़िता ने कहा कि उसके आरोपी के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं। वह उससे बातचीत नहीं करती थी, तो उसकी गवाही में और अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।जस्टिस राकेश कैंथला ने कहा:"सूचना देने वाली महिला ने स्वीकार किया कि उसके आरोपी के साथ शत्रुतापूर्ण संबंध थे। वह आरोपी से बातचीत नहीं करती थी। इसलिए उसकी गवाही को पूरी सावधानी और सतर्कता से देखा जाना आवश्यक है, खासकर पुलिस को मामले की सूचना देने में हुई...
रूपा प्रकाशन को हाईकोर्ट से झटका, संविधान के 'पॉकेट' संस्करण के प्रकाशन और बिक्री पर रोक
ईस्टर्न बुक कंपनी (EBC) द्वारा दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे में दिल्ली हाईकोर्ट ने रूपा प्रकाशन को भारतीय संविधान के 'कोट-पॉकेट' संस्करण को प्रकाशित करने या बेचने से रोक दिया।जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने पाया कि विवादित संस्करण का ट्रेड ड्रेस EBC के 2009 में लॉन्च किए गए "प्रतिष्ठित" लाल और काले रंग के कोट-पॉकेट संस्करण से भ्रामक रूप से मिलता-जुलता है।पीठ ने कहा,"प्रतिवादी ने एक समान रंग योजना, पाठ और फ़ॉन्ट, सोने का पानी चढ़ा किनारा, पुस्तक का रंग और उभरे हुए सुनहरे रंग का विवरण...
नाबालिग द्वारा प्रारंभिक बयानों में यौन कृत्यों को बलपूर्वक न बताना, POCSO Act के तहत आरोपी को दोषमुक्त नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग पीड़िता द्वारा अपने प्रारंभिक बयानों में यौन कृत्यों को बलपूर्वक न कहना, POCSO Act के तहत आरोपी को दोषमुक्त नहीं कर सकता।14 वर्षीय नाबालिग लड़की से बलात्कार के एक मामले में 21 वर्षीय युवक की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए जस्टिस संजीव नरूला ने कहा:“भले ही पीड़िता ने अपने शुरुआती बयानों में यौन कृत्यों को बलपूर्वक न बताया हो, या अपनी MLC में उन्हें सहमति से किया गया न बताया हो, ऐसे बयान आरोपी को दोषमुक्त नहीं करते।”अदालत ने कहा कि उम्र और परिपक्वता में अंतर के कारण...
मुकदमा लंबित होने पर भी अपराधी को अपनी जमीन बेचने का अधिकार: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होना, उसकी अचल संपत्ति बेचने के अधिकार से उसे वंचित करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “अपराधी को भी अपनी जमीन बेचने का अधिकार है।”जस्टिस संजय धर की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की जिसे अरुण देव सिंह ने दायर किया था। उन्होंने यह याचिका इसलिए दाखिल की थी क्योंकि राजस्व अधिकारियों ने उनकी ज़मीन (गांव कहनाल, तहसील बिश्नाह, जिला जम्मू) के लिए फर्द इंतिखाब (राजस्व अभिलेख)...
समझौते की राशि लेने के बाद आपसी तलाक से पीछे हटने की पत्नी की अपील खारिज
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पत्नी द्वारा दायर वैवाहिक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने आपसी सहमति से तलाक की याचिका से पीछे हटने की मांग की थी, जिसे उसने अपने पति के साथ मिलकर दाखिल किया था।पत्नी ने यह कहते हुए सहमति से तलाक देने से इनकार कर दिया था कि समझौते की शर्तों में उसे धोखे से फंसाया गया। लेकिन डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस देवन् रामचन्द्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता शामिल थे, ने पाया कि पत्नी ने पति द्वारा समझौते के तहत जमा कराई गई राशि निकाल ली थी। ...



















