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शिक्षकों की अनुपस्थिति गरीब स्टूडेंट्स के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट
शिक्षक के कर्तव्य की पवित्रता और प्रत्येक बच्चे के शिक्षा के संवैधानिक अधिकार को रेखांकित करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ग्रामीण प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में शिक्षकों की पूरे स्कूल समय में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम बनाने का आह्वान किया।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने कहा कि प्राथमिक संस्थानों में शिक्षकों की अनुपस्थिति निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 के मूल उद्देश्य को विफल करती है। इस प्रकार गरीब ग्रामीण बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती...
मंदिर के दान का सरकारी योजनाओं में उपयोग भक्तों के विश्वास से धोखा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि मंदिरों में श्रद्धालु जो धन दान करते हैं, वह केवल देवी-देवताओं की देखभाल मंदिर के रखरखाव और धार्मिक कार्यों के लिए ही इस्तेमाल होना चाहिए।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर के दान को राज्य के सामान्य राजस्व या सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में खर्च करना भक्तों के अटूट विश्वास को धोखा देना है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस राकेश कैंथला की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"मंदिर के कोष का हर रुपया मंदिर के धार्मिक उद्देश्य या धर्मार्थ कार्यों के लिए ही उपयोग...
केंद्र सरकार के कहने पर जस्टिस अतुल श्रीधरन का तबादला: न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर मंडराता खतरा
हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस अतुल श्रीधरन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का फैसला लिया गया। इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कॉलेजियम ने अपने प्रस्ताव में खुलकर यह दर्ज किया कि यह तबादला केंद्र सरकार के अनुरोध पर किया गया।यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि न्यायपालिका की संवैधानिक रूप से स्वतंत्र प्रक्रिया में कार्यपालिका का कितना बड़ा दखल हो चुका है।जस्टिस श्रीधरन अपने निर्भीक फैसलों के लिए जाने जाते हैं।...
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 (HSA) अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों पर लागू नहीं होता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा जारी उस निर्देश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया कि राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में बेटियों को संपत्ति का उत्तराधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार मिलेगा, न कि आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा निर्देश हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 2(2) के विपरीत है।अधिनियम की...
सिखों पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका खारिज
उत्तर प्रदेश की वाराणसी जिला कोर्ट ने पिछले हफ्ते भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दायक आवेदन खारिज किया, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। इस साल की शुरुआत में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान सिख समुदाय के बारे में की गई उनकी कथित 'भड़काऊ' टिप्पणियों के लिए यह याचिका दायर की गई थी।वाराणसी की एमपी/एमएलए कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि आवेदक ने केवल यह 'आशंका' व्यक्त की कि खालिस्तानी आतंकवादी गांधी के...
दंगा मामले में नाबालिगों को झूठा फंसाए जाने पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहराइच के एसपी को निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने हाल ही में बहराइच के पुलिस अधीक्षक को भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) और SC/ST Act के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज FIR में 13 और 11 वर्ष की आयु के दो नाबालिगों को 'झूठे फंसाए जाने' की जांच करने का निर्देश दिया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यदि एसपी को लगता है कि नाबालिगों को झूठा फंसाया गया है तो दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।खंडपीठ ने यह आदेश छह याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका...
'HMA के तहत तलाक की दूसरी याचिका उसी अदालत में स्थानांतरित की जानी चाहिए, जहां पहली याचिका दायर की गई थी': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जब एक ही पक्ष के बीच तलाक या न्यायिक पृथक्करण के लिए दो याचिकाएं अलग-अलग अदालतों में दायर की जाती हैं तो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 21-ए के अनुसार, दूसरी याचिका उसी अदालत में स्थानांतरित की जानी चाहिए, जहां पहली याचिका दायर की गई थी।जस्टिस राजेश एस. पाटिल पति-पत्नी द्वारा दायर दो स्थानांतरण आवेदनों पर सुनवाई कर रहे थे। पत्नी ने अपने पति की तलाक याचिका को मुंबई के बांद्रा स्थित फैमिली कोर्ट से कल्याण के सीनियर कैटेगरी के सिविल जज के यहां ट्रांसफर करने का अनुरोध...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कथित पीड़िता द्वारा रिहाई की गुहार लगाने पर व्यक्ति की POCSO के तहत दोषसिद्धि निलंबित की और जमानत दी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की का कथित रूप से अपहरण, बलात्कार और गंभीर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में फंसे व्यक्ति के खिलाफ दोषसिद्धि और सजा का आदेश निलंबित कर दिया। पीड़िता ने स्वयं उसकी सजा को निलंबित करने और जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी।चीफ जस्टिस जी. नरेंद्र और जस्टिस आलोक माहरा की खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट का फैसला "बिना किसी सबूत" पर आधारित है और आलोचनात्मक टिप्पणी की -"अपराध के स्थान से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य, या आरोपी को अपराध से जोड़ने वाले किसी भी...
IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या की CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के सीनियर IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।हरियाणा के गैर सरकारी संगठन के अध्यक्ष नवनीत कुमार द्वारा दायर याचिका में चंडीगढ़ पुलिस के नेतृत्व में चल रही जांच की निष्पक्षता पर चिंता जताते हुए अधिकारी की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई।कथित तौर पर कुमार ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर खुद को गोली मार ली थी और एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा...
डेस्क पर तैनात ED क्लर्क द्वारा समन तामील कराने पर गंभीर संदेह: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PMLA मामले में 'अनुचित' सेवा की ओर इशारा किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने हाल ही में कथित उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती पेपर लीक से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा समन तामील कराने की कार्रवाई पर गंभीर संदेह जताया, जबकि एक उच्च श्रेणी लिपिक (UDC), जिसे आमतौर पर डेस्क पर काम सौंपा जाता है, वह समन तामील कराता है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि ED क्लर्क द्वारा समन तामील उचित तरीके से नहीं किया गया और उसे समन तामील कराने में इस्तेमाल की जा सकने वाली आधुनिक तकनीक की जानकारी नहीं थी।पीठ ने...
नौकरी के विज्ञापन के अनुसार पुरानी पेंशन योजना को इसलिए अस्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि कर्मचारी अंतिम तिथि के बाद नियुक्त हुए: झारखंड हाईकोर्ट
चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि 01.01.2004 से पहले जारी विज्ञापनों के आधार पर चयनित कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना के लाभों के हकदार हैं, भले ही उनकी वास्तविक नियुक्ति या कार्यभार नई पेंशन योजना लागू होने के बाद हुआ हो।पृष्ठभूमि तथ्यभारतीय खनन विद्यालय, धनबाद द्वारा 02.09.2003 को सीनियर मेडिकल अधिकारी के पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि इस पद पर सामान्य भविष्य निधि (GPF)-सह-पेंशन लाभ मिलेगा। प्रतिवादी इंडियन...
रद्दीकरण रिपोर्ट के बावजूद अभियुक्त को समन जारी करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को पुनर्विचार क्षेत्राधिकार में चुनौती दी जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस द्वारा रद्दीकरण रिपोर्ट दाखिल करने के बावजूद, मजिस्ट्रेट द्वारा किसी अभियुक्त को समन जारी करने या प्रक्रिया जारी करने के आदेश को सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट में पुनर्विचार क्षेत्राधिकार में चुनौती दी जा सकती है।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा,"इस प्रकार, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 200 से 204 के तहत किसी अभियुक्त को समन जारी करने या प्रक्रिया जारी करने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश CrPC की धारा 397(2) के अंतर्गत नहीं आता है।...
'व्यवस्थागत विफलता': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता संबंधी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी पर न्यायिक अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक कड़े आदेश में घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत गुजारा भत्ता संबंधी मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने में अधीनस्थ कोर्ट द्वारा "व्यवस्थागत विफलता" और "उदासीनता की स्थिति" पर गंभीर चिंता व्यक्त की।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने वाराणसी में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत एक शिकायत मामले में कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह...
POCSO Act में देखरेख में रखा जाने वाला बालक कौन है?
देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाला बालक से ऐसा बालक अभिप्रेत है-(i) जिसके बारे में यह पाया जाता है कि उसका कोई घर या निश्चित निवास स्थान नहीं है और जिसके पास जीवन निर्वाह के कोई दृश्यमान साधन नहीं हैं; या(ii) जिसके बारे में यह पाया जाता है कि उसने तत्समय प्रवृत्त श्रम विधियों का उल्लंघन किया है या पथ पर भीख मांगते या वहाँ रहते पाया जाता है; या(iii) जो किसी व्यक्ति के साथ रहता है (चाहे वह बालक का संरक्षक हो या नहीं) और ऐसे व्यक्ति ने,(क) बालक को क्षति पहुँचाई है, उसका शोषण किया है, उसके साथ...
POCSO Act में बालक किसे कहा गया है?
इस एक्ट में बालक का सामान्य अर्थ ऐसा कोई व्यक्ति है, जो अट्ठारह वर्ष से कम आयु का हो और इसमें कोई दत्तकग्रहीत, सौतेला अथवा धात्रेय बालक शामिल है।"बालक" का तात्पर्य ऐसा युवा मानव है, जो अभी वयस्क न हुआ हो, जबकि बालक के अधिकारों पर अभिसमय "बालक" को निम्न प्रकार से परिभाषित करती थी :"प्रत्येक मानव, जो अट्ठारह वर्ष से कम आयु का हो, जब तक बालक के द्वारा प्रयोज्यनीय विधि के अधीन वयस्कता पहले ही प्राप्त न कर ली गयी हो ।" 192 देशों के द्वारा अनुसमर्थित दिनांक 20.11.1989 को आयोजित बालक के अधिकारों पर...
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की NSG सुरक्षा बहाल करने की मांग वाली याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने पिछले सप्ताह समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज की, जिसमें केंद्र सरकार को सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) सुरक्षा बहाल करने का निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यादव ने स्वयं इस तरह की राहत के लिए कोर्ट का रुख नहीं किया।खंडपीठ ने कहा,"जिस व्यक्ति के लिए सुरक्षा मांगी जा रही है, वह कोर्ट...
रविवार की सुनवाई | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में पुलिस अधीक्षक को तलब करने के बाद FIR का आरोप लगाने वाले वकील को राहत दी
रविवार की एक तत्काल सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक वकील को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया, जिसने आरोप लगाया कि फतेहगढ़ की पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के कहने पर उसके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण FIR दर्ज की गई। यह आरोप अदालत द्वारा अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में पुलिस अधीक्षक को तलब किए जाने के कुछ ही दिनों बाद लगाया गया।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता (वकील अवधेश मिश्रा) को संगठित अपराध, आपराधिक षडयंत्र, जबरन वसूली और अन्य कथित अपराधों के लिए...
समान कार्य करने वाले एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के बीच वर्गीकरण अनुचित: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने माना कि समान कार्य करने वाले एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के बीच वर्गीकरण अनुचित है। आयुर्वेदिक डॉक्टर भी सभी परिणामी लाभों के साथ 62 वर्ष की समान बढ़ी हुई सेवानिवृत्ति आयु के हकदार हैं।पृष्ठभूमि तथ्ययाचिकाकर्ता राजस्थान सरकार के आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग के अंतर्गत कार्यरत आयुर्वेदिक डॉक्टर है। उन्होंने अपनी रिटायरमेंट आयु बढ़ाने के संबंध में पूर्व के न्यायिक निर्देशों को लागू करने के लिए राजस्थान...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 76 वकीलों को सीनियर एडवोकेट के रूप में डेजिग्नेट किया
एक उल्लेखनीय घटनाक्रम में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 76 वकीलों को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया, जिनमें से पांच महिलाएं हैं। 2024 में वरिष्ठ पद के लिए 210 वकीलों ने आवेदन किया था।हाईकोर्ट द्वारा सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा गया कि सीनियर एडवोकेट्स को इस शर्त पर नामित किया जा रहा है कि वे हर साल 10 'निःशुल्क कानूनी सहायता' मामलों का निःशुल्क संचालन करेंगे। पंजाब के एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी और एडवोकेट संजीव कौशिक को स्वप्रेरणा से सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किए जाने की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में व्यक्ति को बरी किया, कहा- बिना सबूत के 'शारीरिक संबंध' का आरोप बलात्कार की पुष्टि नहीं करता
POCSO मामले में एक व्यक्ति को बरी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना किसी सबूत के केवल "शारीरिक संबंध" शब्द का प्रयोग बलात्कार या गंभीर यौन उत्पीड़न की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण मामला है, जहां पीड़िता के माता-पिता ने बार-बार कहा कि "शारीरिक संबंध" स्थापित हुए, लेकिन इस अभिव्यक्ति का क्या अर्थ था, यह स्पष्ट नहीं था।कोर्ट ने कहा,"इस मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों में बिना किसी सबूत के "शारीरिक संबंध" शब्द का प्रयोग यह...




















