मूल अपराध में तो चार्जशीट, न ही समन: PMLA मामले में महिला आरोपी को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत
Amir Ahmad
1 Jan 2026 1:03 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत दर्ज एक मामले में महिला आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जिस महिला को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया, वह न तो मूल अपराध में पुलिस द्वारा चार्जशीट की गई और न ही मजिस्ट्रेट द्वारा समन जारी किया गया।
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पुलिस जांच के स्तर पर भी आवेदिका को दोषी नहीं पाया गया और निजी शिकायत की कार्यवाही में भी मजिस्ट्रेट ने उसके खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं माना।
मामला
आवेदिका संदीपा विर्क को अगस्त, 2025 में प्रवर्तन निदेशालय ने ECIR के तहत गिरफ्तार किया था। यह ECIR कथित मूल अपराध के लगभग नौ साल बाद दर्ज की गई थी। मूल अपराध 2016 में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता को फिल्म में मुख्य अभिनेत्री बनाने के आश्वासन पर निवेश कराए जाने और बाद में धोखाधड़ी व आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया गया था।
FIR में कई लोगों के नाम थे, लेकिन 2017 में दाखिल पुलिस चार्जशीट केवल मुख्य आरोपी अमित गुप्ता के खिलाफ दाखिल की गई। संदीपा विर्क के खिलाफ न तो कोई भूमिका तय की गई और न ही उन्हें आरोपी बनाया गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 200 के तहत निजी शिकायत दाखिल की, लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट रूप से यह कहते हुए संदीपा विर्क को समन करने से इनकार कर दिया कि उनके खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। मजिस्ट्रेट ने यह भी दर्ज किया कि शिकायतकर्ता को 2.7 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही वापस की जा चुकी है।
इन तथ्यों के बावजूद, प्रवर्तन निदेशालय ने अगस्त, 2025 में ECIR दर्ज की और 24 घंटे के भीतर संदीपा विर्क को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में PMLA के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल की गई।
हाईकोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि मूल अपराध का मुख्य आरोपी घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) है। अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया, जबकि आवेदिका लगातार हिरासत में रही।
अदालत ने यह भी कहा कि आवेदिका महिला है और उसे PMLA की धारा 45 के पहले प्रावधान का लाभ मिलता है, जिसके तहत महिलाओं पर जमानत के लिए लागू कठोर ट्विन कंडीशंस लागू नहीं होतीं।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने यह भी नोट किया कि कथित कुल लगभग 6 करोड़ रुपये में से करीब 2.7 करोड़ रुपये पहले ही शिकायतकर्ता को वापस किए जा चुके हैं। ऐसे में इस स्तर पर पूरे धन को छिपाने या अवैध रूप से प्रोजेक्ट करने का मामला नहीं माना जा सकता।
इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने संदीपा विर्क को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब मूल अपराध में ही आवेदिका के खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं पाई गई और उसे कभी आरोपी के रूप में आगे नहीं बढ़ाया गया तो PMLA के तहत उसकी गिरफ्तारी और निरंतर हिरासत उचित नहीं ठहराई जा सकती।

