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बेटी के विवाह खर्च और भरण-पोषण की कानूनी–नैतिक जिम्मेदारी पिता पर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि पिता अपनी अविवाहित बेटी के भरण-पोषण और विवाह खर्च उठाने के लिए न केवल कानूनी रूप से, बल्कि नैतिक रूप से भी बाध्य है, भले ही बेटी बालिग क्यों न हो।मामला एक 25 वर्षीय अविवाहित बेटी से संबंधित था, जिसने हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 20 और 3(b) के तहत आवेदन दायर कर कहा कि वह स्वयं को संभालने में असमर्थ है, जबकि उसका पिता सरकारी शिक्षक है और ₹44,642 मासिक वेतन प्राप्त करता है। बेटी ने मासिक भरण-पोषण और ₹15 लाख विवाह खर्च की...
'नो इंस्ट्रक्शंस' पर्सिस पर 7 दिन की नोटिस जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि जब कोई अधिवक्ता केवल यह बताते हुए “नो इंस्ट्रक्शंस” पर्सिस दाखिल करता है कि उसे अपने मुवक्किल से निर्देश नहीं मिल रहे, तो इसे वकालतनामा वापस लेना नहीं माना जा सकता, और ऐसे में Bombay High Court Appellate Side Rules, 1960 तथा Civil Manual में निर्धारित सात दिन पहले की अनिवार्य नोटिस की आवश्यकता लागू नहीं होती।एक मकान मालिक द्वारा दायर बेदखली वाद में किरायेदारों के वकील द्वारा “नो इंस्ट्रक्शंस” पर्सिस दाखिल किए जाने और उसके बाद ट्रायल...
'समाज को जाति के आधार पर न बाँटें': महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव मामले में CJI सूर्यकांत
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने आज महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि समाज को किसी भी हाल में जाति की लाइनों पर विभाजित नहीं किया जाना चाहिए।सुनवाई में सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने चिंता जताई कि यदि 50% आरक्षण की सीमा को अनिवार्य रखा गया, तो महाराष्ट्र के कई इलाकों में जहाँ SC-ST आबादी अधिक है, वहाँ केवल SC-ST आरक्षण ही 50% तक पहुँच जाएगा और OBC के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 1931 के बाद...
सभी दस्तावेज़ पहले ही जांचे जा चुके थे: बॉम्बे हाईकोर्ट ने री-असेसमेंट नोटिस रद्द किया, कहा- विचार बदलने से नहीं खुल सकता आकलन'
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि आयकर अधिनियम 1961 (IT Act) की धारा 148 और 148A के तहत पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) की कार्यवाही का उपयोग उन मुद्दों को दोबारा खोलने के लिए नहीं किया जा सकता, जिन्हें मूल आकलन के दौरान पहले ही जांचकर स्वीकार कर लिया गया था।अदालत ने स्पष्ट किया कि आकलन अधिकारी का केवल विचार बदल जाना विश्वास का कारण नहीं बन सकता और न ही यह पुनर्मूल्यांकन का आधार हो सकता है।जस्टिस बी.पी. कोलाबा वाला और जस्टिस अमित एस. जमसंदेकर की खंडपीठ ने ट्रस्ट की याचिका स्वीकार करते...
नेचुरल जस्टिस का उल्लंघन: GST डिमांड के खिलाफ व्यक्तिगत सुनवाई के लिए एक दिन का नोटिस देने पर दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित GST डिमांड के संबंध में व्यक्तिगत सुनवाई में शामिल होने के लिए किसी असेसी को सिर्फ एक दिन का नोटिस देना नेचुरल जस्टिस का उल्लंघन है।यह बात जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और सौरभ बनर्जी की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता फर्म की उस अपील को खारिज करने के खिलाफ चुनौती पर सुनवाई करते हुए कही, जिसमें देरी के कारण अपील को खारिज कर दिया गया था।यह डिमांड कुछ कम पेमेंट और इनपुट टैक्स क्रेडिट में अंतर के साथ-साथ GSTR-I (मासिक/तिमाही रिटर्न) और GSTR-3B (समरी रिटर्न) में रिपोर्ट की...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: पार्ट-टाइम या गेस्ट फैकल्टी से फुल टाइम की असिस्टेंट प्रोफेसर की जगह नहीं भर सकती यूनिवर्सिटी
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पार्ट-टाइम या गेस्ट फैकल्टी को उन विषयों के लिए स्थायी समाधान की तरह उपयोग नहीं किया जा सकता, जिनके लिए संपूर्ण समय (फुल-टाइम) असिस्टेंट प्रोफेसर की आवश्यकता होती है।कोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी विशेष अथवा नए विषयों के लिए विशेषज्ञों को अतिथि शिक्षक के रूप में बुला सकते हैं लेकिन इससे पूर्णकालिक शिक्षकों की अनिवार्यता समाप्त नहीं होती।यह निर्णय उस समय दिया गया, जब कश्मीर यूनिवर्सिटी की ओर से दायर कई अपीलों पर सुनवाई की जा रही थी। इन अपीलों में...
देश की अंतरात्मा पर धब्बा: कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीवर में चार मैनुअल स्कैवेंजर्स की मौत पर हर परिवार को 30 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया
एक कड़े फैसले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) और अन्य राज्य अधिकारियों को फरवरी 2021 में दक्षिण कोलकाता में सीवर की सफाई के दौरान चार मजदूरों की मौत और तीन अन्य के घायल होने के लिए गंभीर कमियों और लापरवाही का ज़िम्मेदार ठहराया।कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बढ़ा हुआ मुआवज़ा देने का निर्देश दिया और कई कंप्लायंस-ओरिएंटेड निर्देश जारी किए।एक्टिंग चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस चैताली चटर्जी दास की डिवीजन बेंच ने एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स...
महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त, कहा: आगे की अधिसूचनाएं 50% आरक्षण सीमा के भीतर ही जारी हों
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र में लंबित स्थानीय निकाय चुनावों पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर दिया कि आगे से जारी होने वाली किसी भी चुनाव अधिसूचना में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की, जब महाराष्ट्र सरकार ने समय मांगते हुए बताया कि वह इस मुद्दे पर राज्य निर्वाचन आयोग से विचार-विमर्श कर रही है।इसके साथ ही अदालत ने सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी।चीफ जस्टिस सुर्याकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष राज्य निर्वाचन आयोग के लिए सीनियर...
ISKCON संचालित स्कूलों में यौन शोषण के आरोप : सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बाल अधिकार आयोगों से संपर्क करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (ISKCON) द्वारा संचालित स्कूलों में कथित यौन शोषण की शिकायतों की जांच की मांग करने वाली याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल के राज्य बाल अधिकार आयोगों के पास नया प्रतिवेदन देने की अनुमति दी।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि आंतरिक रिकॉर्ड गंभीर यौन शोषण की घटनाओं की ओर संकेत करते...
BNSS की धारा 106 के तहत जांच एजेंसी को बैंक खाता फ्रीज करने का अधिकार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: BNSS की धारा 106 के तहत पुलिस बैंक खाते फ्रीज नहीं कर सकती, अटैचमेंट केवल मजिस्ट्रेट के आदेश से संभवबॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी जांच एजेंसी को भारतिया नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 106 के तहत बैंक खाता फ्रीज या अटैच करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि धारा 106 केवल जांच के उद्देश्य से संपत्ति जप्त करने की अनुमति देती है, जबकि बैंक खाते का अटैचमेंट या अपराध से अर्जित धन को रोकना केवल धारा 107 के तहत मजिस्ट्रेट के आदेश से ही किया जा...
अंतरिम रोक लगाने वाली एप्लीकेशन में पास किए गए इंटरलोक्यूटरी ऑर्डर के खिलाफ रिवीजन मेंटेनेबल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम रोक लगाने वाली एप्लीकेशन में पास किए गए इंटरलोक्यूटरी ऑर्डर के खिलाफ रिवीजन मेंटेनेबल नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इसे रिट ज्यूरिस्डिक्शन में चैलेंज किया जा सकता है।1985 में मृतक ने रेस्पोंडेंट नंबर 5 के फेवर में एक वसीयत लिखी थी। इसके बाद रेस्पोंडेंट नंबर 4 और याचिकाकर्ता के फेवर में क्रमशः दूसरी और तीसरी वसीयत लिखी गईं। वसीयत करने वाले की मौत के बाद रेस्पोंडेंट नंबर 5 ने याचिकाकर्ता के फेवर में लिखी गई वसीयत को छिपाकर रेवेन्यू रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा...
कहीं कुछ गड़बड़ है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 साल पुराने मामले में एक बुजुर्ग व्यक्ति के खिलाफ ट्रायल जज की 'सुस्ती' पर फटकार लगाई, कार्रवाई की चेतावनी दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते प्रयागराज की एक ट्रायल कोर्ट को 20 साल पुराने आपराधिक मामले को 'सुस्ती' से संभालने के लिए फटकार लगाई। साथ ही कहा कि कोर्ट के बार-बार टालने और पिछले 13 सालों से प्रॉसिक्यूशन द्वारा एक भी गवाह पेश न करने के कारण 73 साल के आरोपी को 'परेशान' किया गया।यह देखते हुए कि ट्रायल कोर्ट के कामकाज में कहीं कुछ गड़बड़ लग रहा है, जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने पीठासीन अधिकारी को सख्त अल्टीमेटम दिया कि वह एक महीने के अंदर ट्रायल पूरा करें नहीं तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना...
धार्मिक परेड से इनकार पर बड़ा फैसला : सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई अधिकारी की बर्खास्तगी को सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना के अधिकारी सैमुअल कमलेसन की याचिका खारिज करते हुए उनकी सेवा से बर्खास्तगी को सही ठहराया। कमलेसन ने अपने पद से हटाए जाने को चुनौती दी थी, जो उन्हें साप्ताहिक रेजिमेंटल धार्मिक परेड में भाग लेने से लगातार इनकार करने के कारण किया गया था।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से साफ इंकार कर दिया।सुनवाई के दौरान कमलेसन की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने केवल...
अगर ट्रायल कोर्ट ने केस खारिज कर दिया, तब भी अपीलेट कोर्ट अंतरिम राहत दे सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर वास्तविक केस खारिज भी हो गया हो तब भी अपीलेट कोर्ट अंतरिम राहत दे सकता है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा,"सिर्फ इसलिए कि ओरिजिनल केस खारिज हो गया, इसका मतलब यह नहीं है कि पेंडिंग अपील में अपीलेट कोर्ट मांगी गई सही राहत नहीं दे सकता।"बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें हाई कोर्ट ने इस आधार पर वादी की यथास्थिति ऑर्डर की रिक्वेस्ट को मना कर दिया था कि केस पहले ही खारिज हो चुका है।कोर्ट ने कहा,"अपील को ओरिजिनल केस...
बिना मांगी रिश्वत ठुकराना भी उकसाने का अपराध: सरकारी कर्मचारी को ऑफर देने पर होगी सज़ा: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी को रिश्वत की बिना मांगी पेशकश करना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12 के तहत दंडनीय उकसाने का अपराध है, भले ही पहले कोई मांग की गई हो या बाद में उसे स्वीकार किया गया हो।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा,“PC एक्ट के पीछे कानून बनाने वालों का मकसद भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनों को मजबूत करना और उन्हें एक साथ लाना था। यह मानना कि रिश्वत की पेशकश तब तक अपराध नहीं है जब तक उसे स्वीकार न कर लिया जाए यह कानून के मकसद को ही खत्म कर देगा। रिश्वत देने का काम एक...
आसाराम की याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट का नोटिस: सस्पेंडेड सज़ा के दौरान पुलिस निगरानी की शर्त में ढील देने की मांग
गुजरात हाईकोर्ट ने आसाराम की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें रेप केस में उनकी उम्रकैद की सज़ा 6 महीने के लिए सस्पेंड होने के दौरान उनके आस-पास तीन पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी की शर्त में बदलाव/हटाने की मांग की गई।बता दें, 6 नवंबर को हाईकोर्ट ने आसाराम को छह महीने के लिए सज़ा सस्पेंड कर दी थी।आसाराम को गांधीनगर की एक सेशंस कोर्ट ने 2013 के रेप केस में दोषी ठहराया था और वह उम्रकैद की सज़ा काट रहे हैं। उन्हें रिहा करते समय एक शर्त यह लगाई गई कि वह अपने फॉलोअर्स से ग्रुप में नहीं मिलेंगे और...
तय समय के अंदर रिजेक्ट न होने पर वॉलंटरी रिटायरमेंट अपने आप मंज़ूर माना जाएगा, बाद में टेक्निकल इस्तीफ़े की मांग गलत: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि अगर तय समय के अंदर वॉलंटरी रिटायरमेंट को साफ़ तौर पर रिजेक्ट नहीं किया जाता है तो उसे अपने आप मंज़ूर मान लिया जाएगा। बाद में टेक्निकल इस्तीफ़े की कोई भी मांग पहले से लागू हो चुके रिटायरमेंट को खत्म नहीं कर सकती।मामले के तथ्यकर्मचारी इंडियन कोस्ट गार्ड में प्रधान सहायक इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था। 2016 में उसने UPSC के ज़रिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ एरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस (DGAQA) में सीनियर साइंटिफिक...
'97 कानूनों में कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव करने वाले नियम': NHRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया, दिए सुझाव
नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सेंट्रल/स्टेट लेवल पर 97 मौजूदा कानून हैं, जिनमें कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव करने वाले नियम हैं।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच 2010 में शुरू की गई एक PIL पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने राज्यों को कमेटी बनाने का निर्देश दिया ताकि अलग-अलग कानूनों वगैरह में ऐसे नियमों की पहचान की जा सके जो कुष्ठ रोग से पीड़ित या ठीक हो चुके लोगों के साथ भेदभाव करते हैं और उन्हें हटाने के लिए कदम उठाए जाएं...
S.144 BNSS | अगर पत्नी की टेम्पररी नौकरी से इनकम काफ़ी नहीं है तो वह पति से भरण-पोषण का दावा करने की हक़दार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया कि अगर पत्नी कहती है कि उसकी इनकम काफ़ी नहीं है तो वह CrPC की धारा 125 CrPC/BNSS की धारा 144 के तहत अपने पति से मेंटेनेंस क्लेम करने से हक़दार नहीं होगी, भले ही उसके पास टेम्पररी नौकरी हो जिससे उसे कुछ इनकम हो रही हो।डॉ. जस्टिस कौसर एडप्पागथ एक पत्नी की अपने पति के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर विचार कर रहे थे, जिसमें उसने अपने दो बच्चों को दिए जाने वाले मेंटेनेंस की रकम और फ़ैमिली कोर्ट द्वारा उसके क्लेम को खारिज़ करने को चुनौती दी थी। पति ने बच्चों को दिए जाने...
'डिस्ट्रिक्ट जज अपने PSO से बदला लेने के लिए इतना नीचे गिर गए': सुप्रीम कोर्ट ने विजिलेंस जांच के खिलाफ याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट जज की विजिलेंस जांच के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया, क्योंकि उन पर अपने ही पूर्व पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) से बदला लेने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल करने का आरोप था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई की। सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू याचिकाकर्ता-जज की ओर से पेश हुए।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत रजिस्ट्रार (विजिलेंस) को उनके खिलाफ पावर के गलत इस्तेमाल और भेदभाव...



















