क्या आरोपी के बरी होने पर न्यूज़ रिपोर्ट डिलीट कर देनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट करेगा 'राइट टू बी फॉरगॉटन' के दायरे की जांच

Shahadat

6 Feb 2026 9:52 PM IST

  • क्या आरोपी के बरी होने पर न्यूज़ रिपोर्ट डिलीट कर देनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट करेगा राइट टू बी फॉरगॉटन के दायरे की जांच

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि इंडियन एक्सप्रेस के डिजिटल प्लेटफॉर्म को मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व बैंकर की गिरफ्तारी से जुड़ी कुछ न्यूज़ रिपोर्ट हटाने का दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश दूसरे मामलों में मिसाल के तौर पर लागू नहीं होगा।

    जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच IE ऑनलाइन मीडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें बैंकर के अपराध से बरी होने के बाद कुछ आर्टिकल हटाने और डी-इंडेक्स करने का निर्देश दिया गया।

    कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया और इंडियन एक्सप्रेस को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि विवादित फैसला बाद के मामलों में मिसाल के तौर पर लागू नहीं होगा।

    कोर्ट ने आदेश दिया,

    “सीनियर वकील मिस्टर अरविंद दातार ने कहा कि जिस सामग्री को पहला प्रतिवादी आपत्तिजनक बता रहा है, उसे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद पहले ही हटा दिया गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि विवादित निर्देश बाद के मामलों के लिए मिसाल नहीं बनने चाहिए। इसलिए संबंधित पक्षों के हितों को संतुलित करते हुए विवादित आदेश पर रोक लगाई जा सकती है। हमें सीनियर वकील मिस्टर दातार द्वारा दिए गए तर्कों में दम लगता है। इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता के संबंध में विवादित आदेश का पालन किया गया, विवादित आदेश बाद के मामलों के लिए मिसाल नहीं होगा।”

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इस मामले में यह सवाल शामिल है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार और भूल जाने के अधिकार को अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रेस की स्वतंत्रता के साथ कैसे संतुलित किया जाए।

    जस्टिस भुयान ने कहा,

    “निजता की एक दीवार खड़ी करने की कोशिश की जा रही है ताकि नागरिकों को जानकारी तक पहुंच न मिल सके। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।”

    Case Title – IE Online Media Services Private Limited v. N B

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