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The Indian Contract Act में Bailment के कॉन्ट्रैक्ट में अचानक होने वाली घटना पर Bailee की क्या जिम्मेदारी होगी
कुछ घटनाएं ऐसी होती है जो प्राकृतिक होती है। उन घटनाओं पर मनुष्य का कोई निर्णय नियंत्रण नहीं होता है। यह बिल्कुल अप्रत्याशित घटना होती है, इस प्रकार की अप्रत्याशित घटना के घटित होने के परिणामस्वरूप कोई हानि हो जाती है तो ऐसी स्थिति में उक्त प्रकार की क्षति के लिए प्रतिवादी दायीं होगा परंतु इसके लिए एक सिद्धांत है। प्रतिवादी केवल उन्हीं हानियों के लिए उत्तरदायीं ठहराया जा सकता है जिसके अंतर्गत वह-अपने प्रयास से हानि को बचा सकता था-जिनका सुरक्षित कर लिया जाना युक्तिसंगत प्रयास के द्वारा उचित और...
The Indian Contract Act में Bailment के Contract में Bailee जिम्मेदारी
उपनिधान की संविदा के अंतर्गत Bailee और उपनिधाता के बीच संविदा होती है। किसी कार्य के प्रयोजन हेतु इस प्रकार की संविदा का निर्माण किया जाता है तथा उस कार्य के पूरा हो जाने के पश्चात संविदा के अंतर्गत दी गई वस्तु Bailee द्वारा वापस लौटा दी जाती है।जैसे कि किसी साइकिल स्टैंड पर साइकिल रखने वाला उपनिधाता होता है तथा उस स्टैंड का मालिक Bailee होता है। जितने समय तक साइकिल को स्टैंड पर रखने की संविदा होती है उस समय के पूरा हो जाने के बाद साइकिल स्टैंड का मालिक साइकिल को उसके मूल मालिक को सौंप देता है।...
The Indian Contract Act में Bailment के Contract में डिलीवरी का तरीका
कब्जे में परिवर्तन होना चाहिए मात्र अभिरक्षा से ही Bailment का सृजन नहीं हो जाता है। इस संबंध में इस धारा के स्पष्टीकरण पर भी प्रकाश डालना चाहिए। स्पष्टीकरण में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है यदि वह व्यक्ति जो किसी अन्य माल पर पहले से ही कब्जा रखता है उसका उपनिहिती के रूप में करने की संविदा करता है तो वह एतद्द्वारा उपनिहिती हो जाता है और माल का स्वामी उसका उपनिधाता हो जाता है।इसे एक उदाहरण की सहायता से भली प्रकार समझा जा सकता है। यदि क अपनी कार ख को बेच देता है परंतु ख, क को कहता है कि वह 6 माह उसे...
The Indian Contract Act में Bailment का Contract
इस एक्ट की धारा 148 के अंतर्गत उपनिधान, उपनिहिती और उपनिधाता के शब्द की परिभाषा प्रस्तुत की गई है। इस धारा में Bailment के संदर्भ में विस्तृत उल्लेख कर दिया गया है। Bailment में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किसी प्रयोजन हेतु माल का प्रदान करना होता है इससे संबंधित शर्त विवक्षित अथवा अभिव्यक्त होती है। यह एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किसी प्रयोजन के लिए इस संविदा के अंतर्गत माल का प्रदान करना है की उक्त प्रायोजन के पूरा होने पर वह माल प्रदान करने वाले व्यक्ति को वापस कर दिया जाएगा अथवा...
The Indian Contract Act में Surety के अधिकार
The Indian Contract Act की धारा 140, 141 एवं 145 में Suretyके ऋण दाता मूल ऋणी एवं सह Surety के विरुद्ध अधिकारों का उल्लेख किया गया है। जहां कोई Surety मुख्य ऋणी के ऋणों का भुगतान कर देता है तो वह मुख्य ऋणी के विरुद्ध उन सभी अधिकारों एवं प्रतिभूतियों का हकदार हो जाता है जो कि ऋण दाता को उसके विरुद्ध प्राप्त थे। ऐसी स्थिति में मुख्य ऋणी के स्थान पर Surety प्रतिस्थापित हो जाता है। ऐसे अधिकार प्रतिभूओं में स्वतः उस समय अवस्थित हो जाते हैं और उन्हें अंतरित किए जाने की आवश्यकता नहीं होती।ऋण दाता की...
The Indian Contract Act में गारंटी के Contract में Surety की जिम्मेदारी
The Indian Contract Act की धारा 128 प्रतिभूओं के दायित्वों से संव्यवहार करती है। इसके अनुसार Surety के दायित्व जब तक संविदा द्वारा अन्यथा उपबंधित न हो मुख्य ऋणी के दायित्व के सामान विस्तृत हैं। Surety मुख्य ऋणी के लिए उत्तरदायित्व लेता है तो वह मुख्य ऋणी के पूर्ण ऋण के लिए उत्तरदायी है।धारा 128 में Surety के दायित्व को व्यापकता के सामान्य नियम का प्रतिपादन किया गया है। जब तक कि कोई विपरीत संविदा न हो Surety के दायित्व का विस्तार में मुख्य ऋणी के दायित्व के समान ही होता है लेकिन यदि संविदा करते...
The Indian Contract Act में बैंक द्वारा निष्पादित Guarantee
जहां दो पक्षकार आपस में संविदाबद्ध होते हैं और उनमें से किसी के द्वारा संविदा पालन किए जाने के लिए बैंक प्रत्याभूति दी जाती है तो इसे बैंक द्वारा निष्पादित प्रत्याभूति की संज्ञा दी जाती है। बैंक द्वारा जो प्रत्याभूति प्रस्तुत की जाती है वह बैंक के द्वारा निष्पादित प्रत्याभूति के रूप में की जानी होती है। बैंक द्वारा प्रदत उक्त प्रकार की प्रत्याभूति मूल पक्षकारों के मध्य हुई संविदा से स्वतंत्र होती है।देना बैंक बनाम फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड एआईआर 1990 पटना 446 के प्रकरण में कहा गया...
The Indian Contract Act में Guarantee के Contract
भारतीय संविदा अधिनियम 1872 की धारा 126 के अंतर्गत ग्यारंटी की संविदा को परिभाषित किया गया है। धारा 126 के अनुसार प्रत्याभूति की संविदा किसी पर व्यक्ति द्वारा व्यतिक्रम की दशा में उनके वचन का पालन या उसके दायित्व का निर्वहन करने की संविदा है। इसका तात्पर्य यह हुआ कि किसी पर व्यक्ति द्वारा व्यतिक्रम की दशा में उसकी प्रतिज्ञा का पालन नहीं करता है या अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करता है तो वह उसकी प्रतिज्ञा का पालन करेगा।कुछ यूं भी समझा जा सकता है कि जब कोई व्यक्ति अपने वचन का पालन न करें तब उसकी ओर...
The Indian Contract Act की धारा 125 के प्रावधान
भारतीय संविदा अधिनियम 1872 की धारा 124 के अंतर्गत क्षतिपूर्ति के संबंध में उल्लेख किया गया है तथा क्षतिपूर्ति की संविदा कौन सी संविदा होती है इस पर स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए, लेकिन धारा 124 केवल क्षतिपूर्ति की संविदा क्या होती है इस संदर्भ में उल्लेख कर रही है परंतु क्षतिपूर्तिधारी के अधिकारों पर कोई उल्लेख नहीं है, उस पर कोई प्रावधान नहीं है।धारा 125 क्षतिपूर्तिधारी के अधिकार के संबंध में उल्लेख कर रही है। इस धारा में स्पष्ट है कि दाता के क्या दायित्व होंगे और धारी के क्या अधिकार होंगे।यह धारा...
The Indian Contract Act में Indemnity को लेकर प्रावधान
Indemnity की संविदा एक प्रकार की समाश्रित संविदा है, समाश्रित संविदा का ही एक आधुनिक रूप Indemnity की संविदा होता है। क्षतिपूर्ति की संविदा को ही केवल समाश्रित संविदा नहीं कहते अपितु इसके साथ में प्रत्याभूति की संविदा भी उपलब्ध है। धारा 124 के अनुसार वह संविदा जिसके द्वारा एक पक्षकार दूसरे पक्षकार को स्वयं वचनदाता के आचरण से या किसी अन्य व्यक्ति के आचरण से उस दूसरे पक्षकार को हुई हानि से बचाने का वचन देता है, क्षतिपूर्ति की संविदा कहलाती है।इस प्रकार की संविदा से तात्पर्य ऐसी संविदा से है जिसके...
क्या Negotiable Instruments Act में हुई दोषसिद्धि को Compounding of Offences से खत्म किया जा सकता है?
भारत में चेक बाउंस (Cheque Bounce) से जुड़े मामले सबसे अधिक संख्या में अदालतों में लंबित हैं। भारतीय दंड न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) के सामने यह एक गंभीर चुनौती है।Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 (Section 138) के अंतर्गत यह अपराध बनाया गया ताकि चेक जैसे वित्तीय साधनों (Financial Instruments) पर लोगों का विश्वास बना रहे। लेकिन समय के साथ अदालतों ने यह महसूस किया कि ऐसे मामलों में असली मकसद पीड़ित पक्ष को राशि की भरपाई (Compensation) दिलाना है, न कि केवल आरोपी को जेल...
जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 12 से 16 : राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और संरचना
जैव विविधता अधिनियम, 2002 भारत में जैव संसाधनों के संरक्षण, टिकाऊ उपयोग और लाभ-साझाकरण के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचा स्थापित करता है। इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्थापना की गई थी।अधिनियम की धारा 12 से 16 तक, इस प्राधिकरण के आंतरिक कामकाज, बैठकों के संचालन, समितियों के गठन, अधिकारियों की नियुक्ति और शक्तियों के प्रत्यायोजन (Delegation of Powers) से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों का विवरण दिया गया है। ये धाराएँ सुनिश्चित करती हैं कि NBA एक...
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 38C, 38D, और 38E : केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण: कार्य, प्रक्रिया और वित्तपोषण
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority - CZA) की स्थापना की, जैसा कि अध्याय IVA की धारा 38A में निर्दिष्ट है। जबकि धारा 38B ने प्राधिकरण की संरचना और सदस्यों की सेवा की शर्तों को परिभाषित किया, धारा 38C, 38D, और 38E इसके मुख्य कार्यों, संचालन प्रक्रियाओं और वित्तीय प्रबंधन के लिए आवश्यक रूपरेखा प्रदान करती हैं। ये खंड सुनिश्चित करते हैं कि प्राधिकरण देश में चिड़ियाघरों के विनियमन और विकास में एक प्रभावी भूमिका निभा...
जल अधिनियम, 1974 की धारा 39 और 40 : वार्षिक प्रतिवेदन और लेखा-परीक्षा की अनिवार्यता
जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 का प्रमुख उद्देश्य देश में जल प्रदूषण को नियंत्रित करना और स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यह अधिनियम न केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को विभिन्न नियामक शक्तियाँ प्रदान करता है, बल्कि उनके कार्यों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और जवाबदेही को भी अनिवार्य बनाता है।इसी दृष्टि से अधिनियम की धारा 39 और धारा 40 अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये प्रावधान वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) और लेखा-परीक्षा (Audit of Accounts) से संबंधित हैं। इन धाराओं...
The Indian Contract Act के अनुसार रास्ते में पड़ी हुई मिलने वाली चीज़ के प्रति जिम्मेदारी
कई चीज़ें वस्तु गुम हो जाती है तथा किसी अन्य व्यक्ति को पड़ी हुई प्राप्त होती है। इस परिस्थिति में भी संविदा का नियम लागू होता है। इस के संदर्भ में Contract Act की धारा 71 है जो इस संबंध में उल्लेख कर रही है। इस धारा के अनुसार जो व्यक्ति किसी अन्य की वस्तुओं को पाता है उन्हें अपनी अभिरक्षा में लेता है वैसे ही दायित्व के अधीन होना होगा जैसे कि एक उपनिहिती होता है।यदि वस्तुओं को पाने वाला किसी अन्य की वस्तु को एक बार अपनी अभिरक्षा में लेता है तो यह विधि में उपनिहिती माना जाता है तथा संविदा अधिनियम...
The Indian Contract Act में Quasi Contracts कैसे होता है?
संविदा होने के लिए करार की आवश्यकता होती है तब संविदा का निर्माण होता है परंतु सदैव ऐसा नहीं होता है। कुछ संविदाएं तो ऐसी होती हैं जिनमें कोई प्रस्ताव नहीं होता कोई स्वीकृति नहीं होती कोई प्रतिफल का निर्धारण नहीं होता परंतु संविदा का निर्माण हो जाता है। इसे सदृश्य संविदा कहते हैं अर्थात ऐसी संविदा जिसमें संविदा नजर नहीं आती है परंतु संविदा का अस्तित्व होता है। संव्यवहार जिसमें संविदा नजर नहीं आती है परंतु संविदा का निर्माण हो जाता है।कोई नजर आने वाली संविदा नहीं होने के बाद भी कुछ व्यवहारों को...
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 38-38B : केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित क्षेत्रों की घोषणा और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की स्थापना
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) भारत में वन्यजीव संरक्षण (wildlife conservation) के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा (legal framework) प्रदान करता है। अधिनियम की धारा 38 केंद्र सरकार (Central Government) को अभयारण्यों (sanctuaries) और राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) को घोषित करने की शक्ति देती है, जबकि अध्याय IVA केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) की स्थापना और संरचना (structure) का विवरण देता है, जो देश में चिड़ियाघरों के विनियमन (regulation) के लिए...
जल अधिनियम 1974 की धारा 34 से 38 : प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की निरीक्षणीय शक्तियों तथा अनुपालन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया
धारा 34 : केंद्र सरकार का अंशदान (Contributions by Central Government)धारा 34 के अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि केंद्र सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष (Financial Year) में केंद्रीय बोर्ड को अंशदान (Contribution) दे सकती है। यह अंशदान तभी दिया जा सकता है जब संसद (Parliament) द्वारा विधि (Law) के माध्यम से उपयुक्त विनियोजन (Appropriation) किया गया हो। इसका उद्देश्य यह है कि केंद्रीय बोर्ड (Central Board) को इस अधिनियम (Act) के अंतर्गत अपने कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता (Financial...
जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 8- 11 : राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना और संरचना
प्राधिकरण (National Biodiversity Authority - NBA) को एक वैधानिक निकाय (statutory body) के रूप में स्थापित किया ताकि अनुसंधान, वाणिज्यिक उपयोग और जैव-अन्वेषण (bioprospecting) के उद्देश्यों के लिए जैविक संसाधनों (biological resources) और संबंधित पारंपरिक ज्ञान (associated traditional knowledge) तक पहुंच को विनियमित (regulate) किया जा सके।एनबीए का प्राथमिक कार्य अधिनियम के उद्देश्यों को लागू करना है, जिसमें जैविक विविधता का संरक्षण (conservation of biological diversity), इसके घटकों का सतत उपयोग...
क्या UAPA राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करते हुए मौलिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी सुरक्षित रखता है?
Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 यानी UAPA भारत का ऐसा क़ानून है जिसे देश की एकता (Unity), अखंडता (Integrity) और संप्रभुता (Sovereignty) को ख़तरे में डालने वाली गतिविधियों और आतंकवाद से निपटने के लिए बनाया गया। लेकिन इसके साथ ही, यह क़ानून बार-बार इस आधार पर चुनौती दिया गया कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) और संविधान द्वारा गारंटी किए गए अधिकारों को प्रभावित करता है।न्यायपालिका (Judiciary) ने इस संतुलन को तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है यानी एक ओर नागरिक अधिकार और...


















