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The Indian Contract Act में एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट में एजेंट को परिश्रमिक प्राप्त करने का अधिकार
The Indian Contract Act में एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट में एजेंट को परिश्रमिक प्राप्त करने का अधिकार

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 219 सर्वप्रथम एजेंट के पारिश्रमिक का उल्लेख करती है। इस धारा के अनुसार एजेंट का सबसे पहला अधिकार है कि वह अपने मालिक से पारिश्रमिक प्राप्त करें। जब एजेंट को सौंपा गया कार्य पूर्ण हो जाता है तब एजेंट उस कार्य के लिए अपने मालिक से पारिश्रमिक प्राप्त करने का हकदार हो जाता है।जैसे राम से 1000 वसूल करने के लिए शाम को घनश्याम ने नियोजित किया, श्याम के कपट के कारण धन वसूल नहीं होता है, यहां पर श्याम अपनी सेवाओं के लिए किसी भी पारिश्रमिक का हकदार नहीं है।श्री दिग्विजय...

The Indian Contract Act में एजेंट को दी गयी पॉवर ऑफ़ एटॉर्नी का रेवोकेशन और एजेंट के अन्य अधिकार
The Indian Contract Act में एजेंट को दी गयी पॉवर ऑफ़ एटॉर्नी का रेवोकेशन और एजेंट के अन्य अधिकार

यह मालिक की इच्छा पर है कि वह मुख्तारनामा का प्रतिसंहरण कर दे अर्थात उसे रद्द कर दे, किंतु जहां कोई मुख्तारनामा किसी अभिकर्ता के संबंध में सृजित किया गया है तो वह उसी मुख्तारनामा के अनुसार कार्य करेगा वरना मुख्तारनामा की बाबत अप्रतिसंहरण शब्द का प्रयोग हुआ है किंतु यह ध्यान देने की बात है कि मालिक इसके बावजूद भी मुख्तारनामा का रेवोकेशन करने के लिए अधिकृत है।जब भी कोई एजेंसी की संविदा की जाती है तो इसमें मालिक द्वारा एजेंट को मुख्तारनामा दे दिया जाता है तथा कई शक्तियां दे दी जाती हैं। जिन शर्तों...