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Transfer Of Property में होने वाली लीज के बीच पारिवारिक समझौते के आधार पर संपत्ति का ट्रांसफर
यदि एक व्यक्ति से अपनी सम्पत्ति पट्टे पर किसी व्यक्ति को अन्तरित करता है तथा अन्तरण के उपरान्त उसकी मृत्यु हो जाती है एवं मृत्यु के समय उसके पाँच भाई एवं पाँच बहनें वारिस के रूप में विद्यमान थे जिन्होंने सम्पत्ति में हित प्राप्त किया। पर्याप्त विचार-विमर्श के उपरान्त सम्पति एक व्यक्ति को दे दी गयी। बहनों ने अपना-अपना अंश भी भाइयों के पक्ष में छोड़ दिया था। पाँच भाइयों में से एक तत्समय विदेश में था तथा उसने इस पारिवारिक समझौते पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं किया। 'स' इस प्रकार प्राप्त सम्पूर्ण सम्पति...
Transfer Of Property में होने वाली लीज के बीच Lessor प्रॉपर्टी जिसे ट्रांसफर कर दे उस व्यक्ति के राइट्स
Transfer Of Property Act,1882 की धारा 109 के अंतर्गत Lessor के अन्तरिती के अधिकार भी स्पष्ट किए गए। कभी-कभी ऐसी परिस्थिति होती है कि किसी संपत्ति का Lessor संपत्ति में विधामान अपने अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को अंतरित कर देता है। ऐसी स्थिति में जिस व्यक्ति को लीज़ संपत्ति के अधिकार अंतरित किए गए हैं उस व्यक्ति को Lessor का अन्तरिती कहा जाता है तथा इस धारा के अंतर्गत इसी प्रकार के अन्तरिती के अधिकारों का वर्णन किया गया है।धारा 109पट्टे के माध्यम से एक व्यक्ति अपनी अचल सम्पत्ति एक निर्धारित अवधि के...
Transfer Of Property में Lessee लीज संपत्ति को कैसे इस्तेमाल करेगा
Lessee सम्पत्ति का और उसकी उपज का (यदि कोई हो) ऐसे उपयोग कर सकेगा जैसे एक मामूली प्रज्ञा वाला व्यक्ति करता है, यदि यह उसको अपनी होती, किन्तु सम्पत्ति का उस प्रयोजन से भिन्न, जिसके लिए वह पट्टे पर दी गयी थी, उपयोग न तो स्वयं करेगा न किसी अन्य को करने देगा, न काष्ठ काटेगा, न बेचेगा, न Lessor के निर्माणों को गिराएगा, न नुकसान पहुँचाएगा, न ऐसी खानों या खदानों को खुदवाएगा जो लीज़ देने के समय खुली नहीं थी, न कोई ऐसा अन्य कार्य करेगा जो उस सम्पत्ति के लिए नाशक हो स्थायी रूप से क्षतिकर हो।यह प्रावधान एक...
Transfer Of Property में Lessee की लायबिलिटी
संपत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 108 एक वृहद धारा है तथा इसमे अनेक प्रावधान Lessor और Lessee के दायित्व और अधिकारों के संबंध में प्रस्तुत किये गए है।Lessee की लाइबिलिटी-तथ्य प्रकट करने का दायित्वयह धारा उपबन्धित करती है Lessee उस हित की, जिसे वह लेने वाला है, प्रकृति या विस्तार के में ऐसा तथ्य, जिसे Lessee जानता है और Lessor नहीं जानता और जिससे ऐसे हित के मूल्य में तात्विक वृद्धि होती है, Lessor को प्रकट करने के लिए आबद्ध है। Lessee का यह कर्तव्य होता है कि वह पट्टे पर लो जाने वाली सम्पत्ति की...
अनिश्चित मूल्य वाले मामलों में स्टाम्प शुल्क - धारा 26 और 27, भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) विभिन्न कानूनी दस्तावेजों (Legal Instruments) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने के नियम निर्धारित करता है। इस अधिनियम की धारा 26 और 27 उन स्थितियों से संबंधित हैं जहाँ किसी दस्तावेज़ की विषय-वस्तु (Subject-Matter) का मूल्य (Value) निश्चित नहीं होता या जहाँ दस्तावेज़ में सभी प्रासंगिक तथ्य (Relevant Facts) दर्ज करना आवश्यक होता है।धारा 26 मुख्य रूप से उन मामलों पर लागू होती है जहाँ दस्तावेज़ के निष्पादन (Execution) के समय उसका सटीक मूल्य...
मानसिक रूप से अस्वस्थ आरोपी की जमानत और न्यायिक प्रक्रिया : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 369
भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) यह सुनिश्चित करती है कि हर व्यक्ति को न्याय मिले, चाहे वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो या नहीं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS) में उन मामलों के लिए विशेष प्रावधान (Provision) हैं जहाँ आरोपी (Accused) मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) हो या बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability) से ग्रस्त हो।धारा 367 और 368 (Section 367 and 368) में यह निर्धारित करने की प्रक्रिया दी गई है कि क्या कोई...
क्या पति की पहली शादी से हुए बच्चों के कारण महिला का Maternity Leaveरोका जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने दीपिका सिंह बनाम सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल & अन्य (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल पर फैसला सुनाया कि क्या एक महिला को उसके जैविक (Biological) बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) से वंचित किया जा सकता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसके पति की पहली शादी से दो बच्चे हैं?कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश कोई विशेषाधिकार (Privilege) नहीं बल्कि एक कानूनी अधिकार (Legal Right) है, जो महिला कर्मचारियों को सेंट्रल सिविल सर्विसेज (Central Civil...
मकान मालिक का किरायेदार को बेदखल करने का अधिकार : धारा 14 हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम भाग 2
इस लेख के पिछले भाग में, हमने हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) की धारा 14 के तहत किरायेदार को बेदखल (Eviction) करने के सामान्य नियमों पर चर्चा की थी। उसमें यह बताया गया था कि मकान मालिक किन परिस्थितियों में किरायेदार को हटाने के लिए आवेदन कर सकता है, जैसे किराया न देना, बिना अनुमति के सबलेट (Sublet) करना, संपत्ति का अनुचित उपयोग करना या नुकसान पहुँचाना। इस दूसरे भाग में, हम उन परिस्थितियों को विस्तार से समझेंगे, जब मकान मालिक व्यक्तिगत उपयोग या अन्य विशेष...
Know The Law | 'साम्यिक बंधक' और 'कानूनी बंधक' के बीच अंतर: सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
कोर्ट ने समझाया कि एक कानूनी बंधक (इस मामले में, टाइटल डीड जमा करके बंधक) तब बनता है जब संपत्ति के अधिकार बंधकदार (उधारदाता) को हस्तांतरित किए जाते हैं, जिससे बंधकदार को डिफ़ॉल्ट के मामले में संपत्ति पर लागू करने योग्य अधिकार मिल जाता है। इसके विपरीत, एक साम्यिक बंधक को अधूरा बंधक माना जाता है, क्योंकि इसमें संपत्ति के अधिकारों का हस्तांतरण शामिल नहीं होता है, बल्कि यह केवल पक्षकारों के बंधक बनाने के इरादे पर आधारित होता है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने एक ऐसे मामले पर...
किरायेदार का निष्कासन और मकान मालिक के अधिकार : हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 की धारा 14
कानून के तहत किरायेदार (Tenant) को कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है, और उन्हें बिना किसी वैध कारण और कानूनी प्रक्रिया के मकान मालिक (Landlord) द्वारा घर या दुकान से निकाला (Eviction) नहीं जा सकता। धारा 14 (Section 14) के अनुसार, किसी भी किरायेदार को बिना इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन किए बाहर नहीं किया जा सकता।यह कानून सुनिश्चित करता है कि मकान मालिक मनमाने ढंग से किरायेदार को बेदखल (Arbitrarily Evict) न कर सके। यह नियम उन मामलों पर लागू होता है जहां किराये की अवधि समाप्त हो गई हो या न हुई हो।...
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के मुकदमे की प्रक्रिया: धारा 368 BNSS 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS), जो पहले लागू आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code - CrPC) का स्थान ले चुकी है, मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान (Provisions) प्रदान करती है।यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी ऐसे व्यक्ति, जो मुकदमे के दौरान अपने बचाव (Defense) में सक्षम नहीं है, के साथ उचित न्याय हो और उसे आवश्यक चिकित्सा (Medical Treatment) मिल सके। धारा 368 उन मामलों की प्रक्रिया निर्धारित करती...
कैसे जटिल और अस्पष्ट फैसले न्याय प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं?
मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम अजय कुमार सूद (2022) में, भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार किया कि न्यायालयों (Courts) को अपने फैसले (Judgments) कैसे लिखने चाहिए ताकि वे सभी लोगों के लिए स्पष्ट और समझने योग्य हों।इस मामले में मुख्य विवाद एक कर्मचारी की अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) से जुड़ा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस अवसर का उपयोग न्यायिक तर्क (Judicial Reasoning), फैसले की संरचना (Structure of Judgment), और कानूनी लेखन (Legal Writing) की...
Annuity और Periodic Payments के मूल्यांकन का नियम - धारा 25 भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) विभिन्न कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) और लेन-देन (Transactions) पर स्टांप शुल्क (Stamp Duty) लगाने के नियमों को निर्धारित करता है।इस अधिनियम के तहत, यदि कोई दस्तावेज वार्षिकी (Annuity) या किसी अन्य प्रकार के आवधिक भुगतान (Periodic Payment) को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है, तो उस पर स्टांप शुल्क कैसे लगाया जाएगा, यह धारा 25 (Section 25) में स्पष्ट किया गया है। वार्षिकी (Annuity) एक निश्चित राशि होती है, जो एक निश्चित अंतराल (Fixed...
Transfer Of Property में होने वाली लीज में हित अन्तरित करने का अधिकार
इस एक्ट की धारा 108 (अ) के अनुसार Lessee को महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करता है। इसके अनुसार Lessee लीज़ सम्पत्ति में अपने पूर्ण हित को या उसके भाग को आत्यन्तिक रूप से अथवा बंधक या उपपट्टे द्वारा अन्तरित कर सकेगा और ऐसे हित को भाग का अन्तरिती उसे पुनः अन्तरित कर सकेगा। Lessee का मात्र ऐसे अन्तरण के फलस्वरूप पट्टे से संलग्न दायित्यों में से किसी के अध्यधीन रहना प्रविरत न हो जाएगा। उस उपबन्ध में प्रदत्त अन्तरण का अधिकार निम्न परिस्थितियों में प्रवर्तित नहीं होगा।(1) Lessee के पास अनन्तरणीय धारणाधिकार...
Transfer Of Property में किसी भी लीज के Lessor की लाइबिलिटी
धारा 108 Lessor तथा Lessee के अधिकारों एवं दायित्वों के सम्बन्ध में प्रावधान प्रस्तुत करता है, परन्तु ये अधिकरण एवं दायित्व आत्यन्तिक नहीं हैं। ये संविदा या स्थानीय प्रथा के अध्यधीन होते हैं, किन्तु किसी स्थानीय विधि के अध्यधीन नहीं होते हैं। Lessor तथा Lessee स्वयं इसमें वर्णित अधिकारों एवं कर्तव्यों से भिन्न अधिकारों एवं कर्तव्यों पर सहमत हो सकते हैं। यह धारा केवल तब प्रवर्तित होती है जब कोई तत्प्रतिकूल संविदा न हो ।Lessor की लाइबिलिटीसम्पत्ति में के किसी अप्रत्यक्ष सारवान दोष प्रकट करने का...
अपराध के आरोपी अस्वस्थ मानसिकता वाले व्यक्तियों के लिए धारा 367, BNSS 2023 के प्रावधान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 – BNSS), जो पहले की दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure – CrPC) की जगह लाई गई है, इसमें यह सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान (Provisions) किए गए हैं कि अस्वस्थ मानसिकता (Unsound Mind) या बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability) वाले व्यक्तियों को न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में उचित तरीके से संभाला जाए।धारा 367 (Section 367) विशेष रूप से इस बात को तय करती है कि अगर किसी आरोपी (Accused) के मानसिक रूप...
ऋण या भविष्य में भुगतान के आधार पर संपत्ति हस्तांतरण : भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की धारा 24
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) विभिन्न प्रकार के दस्तावेज़ों (Documents) पर स्टांप शुल्क (Stamp Duty) के भुगतान से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी कानूनी दस्तावेज मान्यता प्राप्त और लागू करने योग्य (Legally Enforceable) हों।धारा 24 उन परिस्थितियों से संबंधित है जब किसी संपत्ति (Property) को किसी ऋण (Debt) के बदले हस्तांतरित (Transferred) किया जाता है या जब हस्तांतरण (Transfer) के लिए भविष्य में भुगतान करने की शर्त होती है। इस स्थिति में,...
रिहायशी इमारत को गैर-रिहायशी इमारत में बदलना और मकान मालिक की मरम्मत की ज़िम्मेदारी – हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 की धारा 12 और 13
हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 (Himachal Pradesh Urban Rent Control Act, 1987) मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के बीच संबंधों को नियंत्रित करता है ताकि दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहें। इस अधिनियम के तहत धारा 12 और धारा 13 (Section 12 and Section 13) बहुत महत्वपूर्ण हैं।धारा 12 (Section 12) यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति बिना लिखित अनुमति (Written Permission) के रिहायशी (Residential) इमारत को गैर-रिहायशी (Non-Residential) इमारत में न बदले। इससे यह...
क्या सरकार किसी कानून को पिछली तारीख से लागू करके लोगों को सजा दे सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने Union of India v. Ganpati Dealcom Pvt. Ltd. मामले में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक (Constitutional) प्रश्न पर फैसला दिया, जिसमें यह तय किया गया कि क्या Prohibition of Benami Property Transactions Act, 1988 (1988 अधिनियम) और Benami Transactions (Prohibition) Amendment Act, 2016 (2016 अधिनियम) के तहत अपराधों (Criminal Provisions) को पिछली तारीख से लागू किया जा सकता है।इस फैसले में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20(1) (Article 20(1)) की व्याख्या की गई, जो किसी भी अपराध (Offense) के लिए...
दूसरी FIR कब दर्ज की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट ने बताया
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक ही अपराध के लिए दूसरी FIR की अनुमति नहीं है, जबकि दूसरे अपराध के लिए दूसरी FIR की अनुमति है।कोर्ट ने कहा कि दोनों FIR में आरोपों की प्रकृति की जांच की जानी चाहिए, जिससे बाद में FIR दर्ज करने की अनुमति निर्धारित की जा सके।न्यायालय ने निम्नलिखित परिस्थितियों का वर्णन किया जब दूसरी FIR दर्ज करना अनुमेय है:"1. जब दूसरी FIR प्रति-शिकायत हो या तथ्यों के सेट का प्रतिद्वंद्वी संस्करण प्रस्तुत करती हो, जिसके संदर्भ में पहले से ही एक FIR दर्ज है।2. जब दो FIR का दायरा...



















