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Transfer Of Property में एक साल से ज्यादा की लीज
इस एक्ट की धारा 107 में प्रावधान हैं कि एक मकान का लीज़ यदि निश्चित एक वर्ष की अवधि मात्र के लिए तो ऐसे पट्टे को मौखिक साक्ष्य तथा पट्टे के परिदान के द्वारा साबित किया जा सकेगा। एक वर्ष को निश्चित अवधि का लीज़ तथा पट्टेदार द्वारा यह अभिव्यक्ति कि वह यदि Lessor सहमत हो तो उसी रेन्ट पर सम्पत्ति को एक वर्ष की अवधि से अधिक की अवधि का लीज़ धारण करने को तैयार है, तो ऐसा लीज़ एक वर्ष से अधिक की अवधि का लीज़ नहीं होगा।इसी प्रकार एक ऐसा लीज़ जिसके तहत Lessor अपनी सम्पत्ति एक वर्ष की अवधि के लिए पट्टे पर देने...
Transfer Of Property में लीज किस तरह से होती है?
एक्ट की धारा 107 धारा उन विधियों या तरीकों का उल्लेख करती है जिनके द्वारा पट्टों को निष्पादित किया जा सकेगा। धारा का पैराग्राफ एक अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण के सम्बन्ध में प्रावधान प्रस्तुत करता है। पट्टे के मामले में रजिस्ट्रीकरण की अनिवार्यता हस्तान्तरित हित के मूल्य पर निर्भर नहीं करता है, जैसा कि विक्रय या बन्धक के मामलों में होता है, अपितु यह अन्तरण भी शर्तों पर निर्भर करता है। चौक लीज़ के मामलों में हित का मूल्य निर्धारित करना कठिन होता है जिसे रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजन के लिए युक्तियुक्त आँकड़ा...
स्टाम्प शुल्क के लिए दस्तावेजों का मूल्यांकन: भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 20 से 23
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) में यह निर्धारित किया गया है कि किसी दस्तावेज़ (Instrument) का मूल्यांकन कैसे किया जाएगा ताकि उचित स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाया जा सके। अलग-अलग प्रकार के दस्तावेजों पर अलग-अलग स्टाम्प शुल्क लागू होता है, जो आमतौर पर उसमें दर्ज किए गए लेन-देन (Transaction) के मूल्य पर निर्भर करता है।धारा 20 से 23 में यह बताया गया है कि विदेशी मुद्रा (Foreign Currency), शेयर बाजार (Stock Market), विनिमय दर (Exchange Rate), और ब्याज (Interest) से जुड़े...
किराएदार की आवश्यक सेवाओं को रोकना या बंद करना – हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 की धारा 11
हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 (Himachal Pradesh Urban Rent Control Act, 1987) किराएदारों (Tenants) को मकान मालिकों (Landlords) द्वारा किए जाने वाले अन्यायपूर्ण (Unfair) व्यवहार से बचाने के लिए बनाया गया है।इस अधिनियम की धारा 11 (Section 11) बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मकान मालिक को किराएदार द्वारा उपयोग की जा रही आवश्यक सेवाओं (Essential Supply or Service) को रोकने या बंद करने से रोकती है। यह प्रावधान (Provision) यह सुनिश्चित करता है कि मकान मालिक किराएदार को परेशान करने के...
क्या Commercial Courts Act, 2015 की धारा 12A के तहत मुकदमा दायर करने से पहले मध्यस्थता करना अनिवार्य है?
सुप्रीम कोर्ट ने Patil Automation Private Limited बनाम Rakheja Engineers Private Limited के मामले में एक महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर दिया है कि क्या Commercial Courts Act, 2015 की धारा 12A के तहत मुकदमा दायर करने से पहले मध्यस्थता (Mediation) करना अनिवार्य है।इस धारा को 2018 में एक संशोधन (Amendment) के माध्यम से जोड़ा गया था, ताकि मुकदमेबाजी (Litigation) को कम किया जा सके और वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution - ADR) को बढ़ावा दिया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा...
BNSS, 2023 की धारा 366 और CrPC, 1973 की धारा 327 में अंतर: Open Court की नई व्यवस्था
न्यायपालिका में खुले न्यायालय (Open Court) का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिससे न्याय प्रक्रिया पारदर्शी (Transparent) और जवाबदेह (Accountable) बनी रहती है। इससे जनता को यह भरोसा रहता है कि न्याय निष्पक्ष और उचित तरीके से दिया जा रहा है।दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Criminal Procedure Code, 1973 - CrPC) में धारा 327 (Section 327) के तहत खुले न्यायालय का प्रावधान था, जिसे अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS, 2023) की धारा 366 (Section 366)...
'सामान्य इरादा' (S. 34 IPC) और 'सामान्य उद्देश्य' (S. 149 IPC) के बीच अंतर: सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरणों के साथ समझाया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय दंड संहिता, 1860 (आईपीसी) की धारा 34 (सामान्य इरादा) और 149 (सामान्य उद्देश्य) के बीच अंतर को स्पष्ट किया। इसने फैसला सुनाया कि धारा 34 में सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है, जिसमें व्यक्ति के इरादे को एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में महत्व दिया गया है। इसके विपरीत, धारा 149 के तहत, किसी व्यक्ति को केवल एक विशिष्ट अपराध करने के लिए एक सामान्य उद्देश्य के साथ एक गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा होने के लिए दोषी ठहराया जा सकता है, भले ही अपराध करने का उनका व्यक्तिगत इरादा...
Transfer Of Property में एग्रीमेंट के बिना लीज़ में संपत्ति को खाली करवाने के लिए नोटिस किस तरह होगा
लीज़ के पर्यवसान हेतु नोटिस देना आवश्यक है। धारा 106 की उपधारा (4) नोटिस दिए जाने के सम्बन्ध में प्रावधान प्रस्तुत करती है, जिसके अनुसार(1) नोटिस लिखित हो,(2) नोटिस देने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरित हो,(3) नोटिस अपेक्षित व्यक्ति पर तामील हो -(क) डाक द्वारा या(ख) व्यक्तिगत रूप में परिदत्त हो, या(ग) सम्पत्ति के सहज भाग पर चस्पा की गयी हो।यदि नोटिस व्यक्तिगत रूप में देने का आशय है तो यह आवश्यक नहीं है कि नोटिस सम्बन्धित व्यक्ति को ही तामील हो उपधारा (4) के अनुसार यदि नोटिस परिवार के...
Transfer Of Property एग्रीमेंट के बिना लीज़ का पीरियड
लीज़ भी संपत्ति के अन्तरण का एक माध्यम है जिसमें संपत्ति का टाइटल तो उसके स्वामी के पास पर रहता है परंतु संपत्ति पर उपभोग का अधिकार अंतरिती उपलब्ध हो जाता।धारा 106 से अधिनियम का उद्देश्य है Lessee के हित को सुरक्षित रखना जो, इसमें उल्लिखित नियम के सिवाय पूर्णतया, असुरक्षित रहेगा। यथेच्छ लीज़धारी की तरह वह किसी भी क्षण lessor के विकल्प पर इस कारण कि Lessee द्वारा मुक्त कर देने पर उस सम्पत्ति का वह बेहतर उपयोग कर सकेगा, सम्पत्ति से बेदखल कर दिया जाएगा। यदि Lessee यकायक सम्पत्ति को मुक्त कर देता है...
जब किसी व्यक्ति के मृत्यु से पूर्व दिए गए दो Dying Declaration सामने आते हैं तो न्यायालय को किसे सही मानकर निर्णय देना चाहिए?
जब किसी व्यक्ति के अंतिम क्षणों में दिए गए बयान, जिन्हें हम Dying Declarations कहते हैं, को अदालत में सबूत के रूप में पेश किया जाता है, तो इनकी सही समझ और विश्वसनीयता का आकलन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है।अदालतें मानती हैं कि जब कोई व्यक्ति अपने अंतिम समय में बिना किसी दबाव (Duress) के अपना बयान देता है, तो वह बयान अक्सर सच्चा होता है। हाल ही में, Supreme Court ने Makhan Singh v. State of Haryana के मामले में यह मुद्दा उठाया कि दो विरोधाभासी Dying Declarations में से किस पर भरोसा किया जाए। इस...
हिमाचल प्रदेश अर्बन रेंट कंट्रोल अधिनियम, 1987: गलत तरीके से दिए गए किराए की वसूली और स्थानीय करों के कारण किराए में बढ़ोतरी के नियम
हिमाचल प्रदेश अर्बन रेंट कंट्रोल अधिनियम, 1987 (Himachal Pradesh Urban Rent Control Act, 1987) किरायेदारों (Tenants) के अधिकारों की सुरक्षा करता है और मकान मालिकों (Landlords) को उनके दायित्व (Responsibilities) निर्धारित करता है।इस अधिनियम के सेक्शन (Section) 9 और 10 दो महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े हुए हैं—पहला, यदि किरायेदार ने कोई ऐसा किराया (Rent) या राशि (Amount) का भुगतान किया है जो कानूनन उसे नहीं देना चाहिए था, तो वह इसे वापस कैसे प्राप्त कर सकता है। दूसरा, किन परिस्थितियों में मकान मालिक...
क्या सभी अदालतों की कार्यवाही सार्वजनिक होती है? धारा 366 BNSS, 2023
न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता (Transparency) यह सुनिश्चित करती है कि न्याय न केवल किया जाए, बल्कि उसे होते हुए देखा भी जाए।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 366 इसी सिद्धांत को लागू करती है, जिसके तहत अपराध से जुड़े मुकदमों (Criminal Cases) की सुनवाई आम जनता के लिए खुली (Open Court) होती है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और जनता को यह विश्वास रहता है कि मामलों का निपटारा निष्पक्ष रूप से किया जा रहा है। हालांकि, कुछ संवेदनशील...
दस्तावेजों पर स्टाम्प लगाने का सही समय: भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 17 - 19
भारतीय स्टैम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) उन नियमों को निर्धारित करता है जिनके तहत दस्तावेजों पर स्टैम्प लगाया जाना आवश्यक है ताकि वे कानूनी रूप से वैध (Legally Valid) बने रहें और टैक्स चोरी को रोका जा सके। इस अधिनियम के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि दस्तावेजों पर स्टैम्प लगाने का सही समय क्या है और यदि कोई व्यक्ति इसका पालन नहीं करता है तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं।धारा 17 से 19 (Sections 17 to 19) के तहत यह बताया गया है कि दस्तावेज कब और कैसे स्टैम्प किए जाने चाहिए, इस आधार पर कि...
जब किसी मामले की सुनवाई एक से अधिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जाती है : धारा 365 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS) में ऐसे कई प्रावधान (Provisions) हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) प्रभावी और निष्पक्ष बनी रहे।धारा 365 (Section 365) उन्हीं महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक है, जो यह स्पष्ट करती है कि अगर किसी न्यायाधीश (Judge) या मजिस्ट्रेट (Magistrate) ने किसी मामले की सुनवाई आंशिक रूप (Partially) से की हो और फिर उसे दूसरे न्यायाधीश को सौंप दिया जाए, तो उस स्थिति में मामले को कैसे आगे बढ़ाया...
इम्प्रेस्ड स्टैम्प के उपयोग और संबंधित कानूनी प्रावधान : धारा 13- 16 भारतीय स्टैम्प अधिनियम, 1899
भारतीय स्टैम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) भारत में स्टैम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने और उपयोग करने के नियमों को निर्धारित करता है। स्टैम्प किसी दस्तावेज़ (Document) को कानूनी रूप से मान्य (Legally Valid) बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। विभिन्न प्रकार के स्टैम्प में, इम्प्रेस्ड स्टैम्प (Impressed Stamp) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इम्प्रेस्ड स्टैम्प वे स्टैम्प होते हैं जो पेपर पर पहले से छपे या उभरे होते हैं, और इन्हें दस्तावेज़ लिखने से पहले ही लगाया जाता है। यह लेख धारा 13 से 16...
हिमाचल प्रदेश अर्बन रेंट कंट्रोल अधिनियम, 1987: मकान मालिक और किरायेदार के अधिकार और ज़िम्मेदारी
हिमाचल प्रदेश अर्बन रेंट कंट्रोल अधिनियम, 1987 एक ऐसा कानून (Law) है जो मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के बीच संबंधों को नियंत्रित (Regulate) करता है।यह कानून किराए (Rent) को तय करने, किराए में बढ़ोतरी पर रोक लगाने और किरायेदारों को अनुचित (Unfair) रूप से निकाले जाने से बचाने के लिए बनाया गया है। अधिनियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मकान मालिक अनुचित तरीके से अधिक किराया न वसूलें और किरायेदार भी उचित किराया चुकाएं। इस कानून में किराए में बढ़ोतरी (Increase in Rent), ज्यादा...
सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को संवेदनशील और निष्पक्ष बनाने के लिए क्या महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं?
यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) के मामले न्याय प्रणाली (Legal System) के लिए एक बड़ी चुनौती होते हैं। अदालतों को आरोपी (Accused) के अधिकारों और पीड़िता (Victim) को न्याय (Justice) दिलाने के बीच संतुलन (Balance) बनाना होता है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने XYZ बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2022 LiveLaw (SC) 676) के मामले में इस विषय पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।इस फैसले में अदालतों और पुलिस (Police) की जिम्मेदारियों को दोहराया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पीड़िता को अनावश्यक मानसिक आघात...
अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित 26 सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
सुप्रीम कोर्ट ( जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस पीके मिश्रा की पीठ) ने अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित सिद्धांतों का सारांश दिया।1) अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति, जो मानवीय आधार पर दी जाती है, सार्वजनिक रोजगार के मामले में समानता के नियम का अपवाद है [देखें महाप्रबंधक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम अंजू जैन (2008) 8 SCC 475]2) नियमों या निर्देशों के अभाव में अनुकंपा नियुक्ति नहीं की जा सकती [देखें हरियाणा राज्य विद्युत बोर्ड बनाम कृष्णा देवी (2002) 10 SCC 246]3) अनुकंपा नियुक्ति आम तौर पर दो आकस्मिकताओं में...
Transfer Of Property में लीज का अंतरण
लीज़ का सम्व्यवहार एक ऐसा संव्यवहार है जिसमें अन्तरण आंशिक होता है, आत्यंतिक नहीं। दूसरे शब्दों में सम्पत्ति पर अन्तरक एवं अन्तरिती दोनों का हो अधिकार होता है। दोनों में फर्क यह होता है कि सम्पत्ति का भौतिक कब्जा अन्तरितों के पास होता है जबकि स्वामित्वाधिकार अन्तरक के पास ही रहता है। सम्पत्ति का उपभोग, लीज़ की अवधि के दौरान अन्तरिती या लीज़ग्रहीता करता है जबकि अन्तरक अथवा लीज़कर्ता तद् कालावधि में लीज़ के उपयोग के अधिकार से वंचित रहता है। इस प्रकार के संव्यवहार के लिए इंग्लिश विधि में डिमाइस' शब्द का...
Transfer Of Property में लीज का पीरियड
पीरियड पट्टे का एक महत्वपूर्ण घटक है। शाश्वतता के लिए लीज़ का सृजन एक निश्चित कालावधि हेतु किया गया। यह कालावधि प्रत्यक्षतः या परोक्षतः निर्धारित होगी। लीज़ के प्रारम्भ होने की तिथि साधारणतया लीज़कर्ता एवं लीज़ग्रहीता द्वारा आपसी करार के माध्यम से निर्धारित की जाती है,लेकिन यदि किसी कारणवश या उदासीनता के फलस्वरूप तिथि का निर्धारण नहीं हुआ है जिससे लीज़ का प्रारम्भ हुआ माना जा सके, तो इस अधिनियम की धारा 110 के अन्तर्गत लीज़ निष्पादन की तिथि से प्रारम्भ हुआ माना जाएगा। परन्तु यह नियम निष्पाद्य मामलों...



















