जानिए हमारा कानून
अपराध के समय मानसिक अस्वस्थता के आधार पर दोषमुक्ति – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 373
कानूनी व्यवस्था यह स्वीकार करती है कि यदि कोई व्यक्ति अपराध करने के समय अपनी मानसिक स्थिति (Mental State) पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा था, तो उसे एक सामान्य व्यक्ति की तरह आपराधिक उत्तरदायित्व (Criminal Responsibility) नहीं दिया जा सकता।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 373 उन्हीं मामलों से संबंधित है जहाँ आरोपी (Accused) को मानसिक अस्वस्थता के आधार पर दोषमुक्त (Acquitted) किया जाता है। यह प्रावधान (Provision) यह सुनिश्चित करता है कि अदालत केवल आरोपी को छोड़ने का आदेश न दे, बल्कि यह भी...
विशेष परिस्थितियों में मकान खाली कराने का अधिकार : धारा 15 का दूसरा भाग, हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) मकान मालिकों को कुछ विशेष परिस्थितियों में अपने किराए पर दिए गए मकान को तुरंत खाली कराने का अधिकार देता है। यह प्रावधान उन मकान मालिकों के लिए खास तौर पर है जो सरकारी कर्मचारी (Government Employee) हैं या जो रिटायर हो चुके हैं।धारा 15 का दूसरा भाग यह बताता है कि अगर मकान मालिक की मृत्यु हो जाती है तो उनके परिवार के कुछ सदस्य भी मकान खाली कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, यह भाग एडवांस किराए (Advance Rent) की...
क्या संविधान के तहत एक ही देश में राज्य विशेष का अलग निवास स्थान संभव है?
State of Telangana v. B. Subba Rayudu का फैसला, जो 14 सितंबर 2022 को भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा सुनाया गया, राज्य पुनर्गठन (State Reorganization), कर्मचारियों के आवंटन (Allocation of Employees) और भारतीय संविधान (Indian Constitution) के तहत Domicile की अवधारणा से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करता है।यह मामला मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के दो राज्यों - आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विभाजन के संबंध में था, जो Andhra Pradesh State Reorganisation Act, 2014 के तहत किया गया।...
मानसिक रूप से अस्वस्थता के बाद ठीक हुए आरोपी की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 372
भारत की न्याय व्यवस्था (Justice System) यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि हर व्यक्ति को निष्पक्ष (Fair) और न्यायसंगत (Just) सुनवाई मिले, चाहे वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो या नहीं।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) में ऐसे मामलों के लिए विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं, जहां आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) होने के कारण मुकदमे की सुनवाई में असमर्थ हो। लेकिन जब वही व्यक्ति मानसिक रूप से ठीक हो जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया (Legal...
कलेक्टर द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने की शर्तें : भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 32
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) के नियमों को नियंत्रित करता है।इस अधिनियम की धारा 32 (Section 32) यह प्रावधान करती है कि जब कोई दस्तावेज स्टाम्प शुल्क की जाँच के लिए कलेक्टर (Collector) के पास लाया जाता है, तो वह यह प्रमाणित कर सकता है कि दस्तावेज़ पर पूरा शुल्क दिया गया है या यह शुल्क से मुक्त है। यह प्रमाण पत्र (Certificate) कानूनी रूप से बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि...
विशेष परिस्थितियों में किराए पर दिए गए मकान का तुरंत कब्जा पाने का अधिकार – धारा 15, हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) किराएदारों और मकान मालिकों (Landlords and Tenants) के अधिकारों को संतुलित करता है। इस अधिनियम की धारा 15 उन मकान मालिकों को एक विशेष अधिकार देती है, जो सरकारी आवास (Government Accommodation) में रह रहे हैं और जिन्हें सरकार के आदेश से इसे खाली करना पड़ रहा है।इसके अलावा, यह उन सरकारी कर्मचारियों को भी अधिकार देता है, जो सेवानिवृत्त (Retired) हो चुके हैं या होने वाले हैं, ताकि वे अपनी किराए पर दी गई संपत्ति को फिर से प्राप्त...
क्या न्यायालय शव को कब्र से निकालने की अनुमति दे सकता है या यह केवल विशेष परिस्थितियों में संभव है?
सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद लतीफ मगरे बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (2022) मामले में यह तय किया कि क्या संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21 - Right to Life) के तहत गरिमा का अधिकार (Right to Dignity) केवल जीवित व्यक्तियों तक सीमित है, या यह मृत्यु के बाद भी लागू होता है।यह मामला सरकारी अधिकारियों द्वारा मृतक के शव को परिवार को सौंपने से इनकार करने और उसे धार्मिक रीति-रिवाजों (Religious Rites) के अनुसार दफनाने के अधिकार से जुड़ा था। अदालत ने इस फैसले में दफनाए गए शव को बाहर निकालने...
Transfer Of Property में लीज की शर्त और रेस्ट्रिक्शन में अंतर
इस एक्ट के अंतर्गत लीज़ के संदर्भ में इन दोनों ही चीज़ों में अंतर माना गया है। इन दोनों ही परिस्थितियों में विभेद होता है। शर्त तब अतित्य में आती है जब Lessor एक निश्चित कालावधि के लिए लीज़ प्रदान करता है परन्तु इसमें एक उपबन्ध होता है जो लीज़ के पर्यवसान हेतु एक विशिष्ट घटना का उल्लेख करता है। इसके वि निबन्धन में उल्लिखित घटना प्राइमरी फार्मूला में परिवर्तित हो जाती है जो उस कालावधि का निर्धारण करती है जिसके लिए लीज़ अस्तित्व में रहेगा तथा घटना के घटित होने पर पट्टे का स्वमेव पर्यवसान हो जाएगा...
Transfer Of Property में समपहरण द्वारा कोई लीज खत्म होना
Transfer Of Property Act की धारा 111 के अंतर्गत उन आधारों का उल्लेख किया गया है जिन पर कोई लीज़ खत्म होती है। उन आधारों में से एक आधार समपहरण द्वारा संपत्ति के पट्टे का पर्यवसान भी है। इस आलेख के अंतर्गत धारा 111 के खंड (छ) पर जो समपहरण द्वारा संपत्ति के पट्टे का पर्यवसान के संबंध में उल्लेख कर रहा है।धारा 111 के इस खंड के अनुसारउस दशा में जबकि Lessee किसी ऐसी अभिव्यक्त शर्त को भंग करता है जिससे यह उपबन्धित है कि उक्त शर्त के भंग होने पर Lessor पुनः लीज़ सम्पत्ति में प्रवेश कर सकेगा; याउस दशा में,...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 को सावधानी से लागू किया जाना चाहिए, इसका उपयोग अभियोजन पक्ष की अक्षमता को छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांतों की व्याख्या की
सप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 106 को आपराधिक मामलों में तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक कि अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में सफल न हो जाए। साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के अनुसार, किसी व्यक्ति के विशेष ज्ञान में मौजूद चीजों को साबित करने का भार उस व्यक्ति पर होता है। यदि कोई तथ्य अभियुक्त के विशेष ज्ञान में है, तो बचाव पक्ष के लिए ऐसे तथ्य को साबित करने का भार अभियुक्त पर आ जाता है।न्यायालय ने याद दिलाया कि साक्ष्य अधिनियम की धारा...
मानसिक रूप से अस्वस्थ आरोपी के दोबारा न्यायालय में लाए जाने की प्रक्रिया: धारा 371, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारत की न्याय प्रणाली मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान देती है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS) की धारा 367, 368 और 369 मानसिक रूप से अस्वस्थ आरोपियों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को स्पष्ट करती है।इन धाराओं के तहत यह तय किया जाता है कि आरोपी मानसिक रूप से स्वस्थ है या नहीं, मुकदमे को स्थगित (Postpone) किया जाता है, ज़मानत (Bail) दी जाती है, और इलाज की व्यवस्था की जाती है। धारा 371 इस पूरी प्रक्रिया का एक...
संपत्ति के विक्रय और पुनर्विक्रय की विभिन्न स्थितियों में लगने वाले स्टांप शुल्क की प्रक्रिया : भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 31
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) भारत में कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने से संबंधित एक महत्वपूर्ण कानून है।इस अधिनियम की धारा 31 (Section 31) उन व्यक्तियों को अधिकार देती है जो यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई दस्तावेज सही ढंग से स्टाम्प किया गया है या नहीं। यह प्रावधान किसी दस्तावेज़ को उपयोग में लाने से पहले उचित स्टाम्प शुल्क की जांच करने का एक तरीका प्रदान करता है ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद (Legal Dispute) या दंड...
बेदखली की प्रक्रिया, शर्तें और किरायेदार का पुनर्स्थापन का अधिकार : हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 14 अंतिम भाग
यह लेख हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) की धारा 14 के चौथे और अंतिम भाग पर आधारित है। पिछले भागों में हमने उन विभिन्न आधारों (Grounds) को समझाया, जिनके तहत मकान मालिक (Landlord) किरायेदार (Tenant) को बेदखल (Evict) कर सकता है।पहले भाग में किराया न चुकाने, बिना अनुमति के सबलेटिंग (Subletting) करने और संपत्ति के दुरुपयोग (Misuse) जैसे सामान्य कारणों को बताया गया। दूसरे भाग में मकान मालिक द्वारा अपने या अपने परिवार की व्यक्तिगत जरूरतों (Personal Needs) के लिए...
क्या संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है यदि धारा 432 और 433 के पात्र कैदियों को समय पर रिहा नहीं किया जाता?
क्या संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है यदि धारा 432 और 433 के पात्र कैदियों को समय पर रिहा नहीं किया जाता? सुप्रीम कोर्ट ने रशीदुल जाफर @ छोटा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (2022) मामले में यह स्पष्ट किया कि जिन कैदियों को रिहाई (Remission) का पात्र (Eligible) माना जाता है, उनकी रिहाई के लिए आवेदन (Application) देने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।इस फैसले ने संविधान के समानता (Equality) और स्वतंत्रता (Liberty) के अधिकार को मजबूत किया है, ताकि कैदियों को उनकी रिहाई से अनुचित रूप से वंचित...
Transfer Of Property में लीज का सरेंडर करना
इस एक्ट की धारा धारा 111 (ङ) लीज़ सरेंडर के बारे में प्रावधान करती है। अभिव्यक्त सरेंडर द्वारा अर्थात् उस दशा में जबकि Lessee के अधीन अपना हित पारस्परिक करार द्वारा Lessor के प्रति छोड़ देता है, पट्टे का अवसान हो जाता है। एक वैध एवं आबद्धकारी सरेंडर के लिए लीज़ सदैव आवश्यक नहीं है कि Lessee लीज़ सम्पत्ति का कब्जा Lessor को सौंपे। कमला बाई बनाम मांगीलाल के वाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए अभिप्रेक्षण से यह सुस्पष्ट है जो इस प्रकार है:'अतः यह स्पष्ट है कि जब पक्षकार Lesseeों का सरेंडर करता है तथा...
Transfer Of Property में लीज का समाप्त होना
Transfer Of Property Act, 1882 की धारा 111 किसी भी पट्टे के समाप्त होने के आधारों का वर्णन करती है। किसी भी पट्टे का पर्यवसान इन आधारों पर होता है। यह इस अधिनियम की महत्वपूर्ण धाराओं में से एक धारा है इस धारा के अंतर्गत कुल 8 प्रकार के आधार प्रस्तुत किए गए हैं जो किसी पट्टे को समाप्त करने हेतु प्रस्तुत किए गए है। जहां रेंट कंट्रोल अधिनियम लागू होता है वहां इस धारा के प्रावधान लागू नहीं होते परंतु फिर भी इस धारा का अत्यधिक महत्व है तथा न्यायालय पट्टे के पर्यवसान के समय इन आधारों पर भी जांच कर...
मानसिक अस्वस्थता के कारण स्थगित हुए मामलों की पुनः सुनवाई : धारा 370, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) यह सुनिश्चित करती है कि हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) का अधिकार मिले, चाहे वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो या अस्वस्थ।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) में मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) अभियुक्तों (Accused) के लिए विशेष प्रावधान दिए गए हैं। धारा 370 इस संहिता का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो यह निर्धारित करता है कि यदि किसी आरोपी का मुकदमा (Trial) मानसिक अस्वस्थता के कारण स्थगित...
मकान मालिक द्वारा किरायेदार को विकास, मरम्मत या व्यक्तिगत उपयोग के लिए बेदखल करने का अधिकार : धारा 14 हिमाचल प्रदेश रेंट कंट्रोल एक्ट भाग 3
इस लेख के पिछले भागों में, हमने हिमाचल प्रदेश रेंट कंट्रोल एक्ट (Himachal Pradesh Rent Control Act) की धारा 14 के तहत मकान मालिक (Landlord) द्वारा किरायेदार (Tenant) को बेदखल (Eviction) करने के विभिन्न आधारों पर चर्चा की थी।पहले भाग में हमने उन सामान्य कारणों को समझाया था, जैसे किराया न देना, बिना अनुमति सबलेटिंग (Subletting) करना या संपत्ति का गलत उपयोग। दूसरे भाग में यह बताया गया कि मकान मालिक किस प्रकार व्यक्तिगत उपयोग (Personal Use) के लिए किरायेदार को बेदखल कर सकता है, जिसमें मकान मालिक की...
भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 की धारा 28 के तहत संपत्ति विक्रय से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों पर लगने वाले शुल्क
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) विभिन्न कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टांप शुल्क (Stamp Duty) लगाने के नियमों को निर्धारित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार को उचित राजस्व (Revenue) प्राप्त हो और दस्तावेजों की कानूनी वैधता (Legal Validity) बनी रहे।धारा 28 विशेष रूप से उन परिस्थितियों को संबोधित करती है जहां एक ही संपत्ति (Property) को कई अलग-अलग दस्तावेजों के माध्यम से स्थानांतरित (Transfer) किया जाता है। यह उन मामलों पर लागू होता है जहां संपत्ति को अलग-अलग...
क्या सुप्रीम कोर्ट के अनुसार Arbitrators का शुल्क तय करने में पक्षकार की सहमति अनिवार्य है?
Arbitration (मध्यस्थता) एक ऐसा तरीका है जिससे कानूनी विवादों (Legal Disputes) का हल जल्दी, गोपनीयता (Confidentiality) और लचीलापन (Flexibility) के साथ निकाला जाता है। लेकिन, यह सवाल कई बार उठता है कि Arbitrators (मध्यस्थ) अपने Fees (शुल्क) खुद तय कर सकते हैं या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को स्पष्ट किया है और पार्टी स्वायत्तता (Party Autonomy) तथा कानूनी प्रावधानों (Legal Provisions) पर जोर दिया है।भारत में Arbitrators (मध्यस्थ) के Fees (शुल्क) का कानूनी ढांचा (Legal Framework) Arbitration...
















