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ग्रेच्युटी कानून के बारे में जानिए खास बातें

Shadab Salim
16 Jan 2020 5:31 AM GMT
ग्रेच्युटी कानून के बारे में जानिए खास बातें
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ग्रेच्युटी को हिंदी भाषा में उपदान कहा जाता है। इसका अर्थ नौकरी पेशा व्यक्तियों को रिटायरमेंट या बीमारी के कारण नौकरी नहीं कर पाने के कारण एक निश्चित धनराशि दी जाती है। यह धनराशि उस नियोजक द्वारा दी जाती है जिस नियोजक के पास में व्यक्ति नौकरी कर रहा था।

ग्रेच्युटी को मोटे तौर पर इस तरह समझ सकते हैं कि कोई व्यक्ति किसी रजिस्टर्ड कंपनी में कम से कम पांच साल तक नौकरी करता है और किसी कारण वह नौकरी जारी नहीं रखता है तो वह अपने नियोक्ता से ग्रेच्युटी के रूप में एक निश्चित धनराशि पाने का हकदार होगा।

ग्रेच्युटी जैसी विचारधारा का जन्म नौकरी पेशा लोगों के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। व्यक्ति के लिए यह सरल नहीं होता है कि वह कोई निश्चित धनराशि अपने भविष्य के लिए एकत्र करके रख सके। व्यक्ति जितना धन अपने जीवन काल में अर्जित करता है वह पूरे धन को ख़र्च कर देता है। नौकरीपेशा व्यक्ति धन को एकत्र करके नहीं रख पाता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए भारत की केंद्रीय सरकार ने 1972 में कानून जिसका नाम उपदान संदाय अधिनियम 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972) है, पारित किया।

यह अधिनियम केंद्रीय अधिनियम है एवं जम्मू कश्मीर को छोड़कर संपूर्ण भारत पर लागू था, लेकिन अब यहां संपूर्ण भारत पर पूरी तरह लागू है। इस अधिनियम का उद्देश्य नौकरी कर रहे व्यक्तियों को भविष्य में एक निश्चित धनराशि प्रदान करना है, जिससे उन व्यक्तियों का भविष्य सुरक्षित हो सके तथा व्यक्ति का वृद्धा अवस्था बेहतर तरीके से बीत सके तथा वह उस परिस्थिति में जिस परिस्थिति में उसका शरीर काम ना कर रहा हो तथा कोई कार्य करने की स्थिति में ना हो ऐसी प्रस्थिति में व्यक्ति को अपनी जीविकोपार्जन हेतु एक निश्चित धनराशि नियोजक द्वारा प्रदान की जाए।

यह न्याय की बात है कि किसी व्यक्ति ने यदि अगर किसी नियोजक के लिए अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया तथा अपने जीवन के लंबे समय को एक नियोजक के लिए किया व्यय कर दिया तो ऐसे व्यक्ति की भविष्य की जिम्मेदारी भी उस नियोजक की बनती है।

इस उद्देश्य हेतु केंद्र सरकार ने उपदान संदाय अधिनियम को 10 से अधिक कर्मचारियों की किसी भी संस्था संगठन पर आवश्यक रूप से लागू किया है। ग्रेज्युटी का संदाय नहीं करने पर नियोजकों पर दंड अधिरोपित किया है एवं यह पूर्ण व्यवस्था की है किस सरकारी और निजी कर्मचारियों को पूर्ण रूप से यह धनराशि अदा की जाती रहे इसके संदाय में कोई कठिनाई नहीं आए तथा व्यक्तियों का भविष्य सुरक्षित रहे।

कौन से नियोजक इसमें शामिल हैं

अधिनियम की धारा 2 में बताया गया है कि सभी तरह के नियोजक जिनमें कर्मचारियों की संख्या 10 से अधिक है, वह इस अधिनियम के अधीन नियोजक कहलाएंगे। इसमें कारखाने, खदान, बागान, दुकान और वह सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्था जो केंद्रीय राज्य सरकारों तथा लोकल अथॉरिटी द्वारा शासित किए जा रहे हैं। अर्थात 10 कर्मचारियों से अधिक काम करने वाली संस्थाएं इस अधिनियम के अंतर्गत शासित होगी तथा उन्हें अपने कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की धनराशि देना होगी।

कितनी होगी ग्रेज्युटी की रकम

अधिनियम के पुराने प्रावधानों के मुताबिक ग्रेच्युटी 1000000 रुपए तक थी अर्थात कोई भी उपदान का संदाय 10 लाख से अधिक नहीं होगा परंतु 2018 में के संशोधन के बाद इस सीमा को बढ़ाकर ₹2000000 कर दिया गया है अब मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक ₹2000000 तक ग्रेच्युटी की रकम हो सकती है।

किन कर्मचारियों को उपदान दिया जाएगा

अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत-

जिन कर्मचारियों ने 5 वर्ष से अधिक अवधि तक निरंतर सेवा दी है, उसके उपरांत अधिवर्षिता के कारण पद से गए है या सेवानिवृत्त हुए है या फिर पद त्यागा है या फिर निःशक्तता के कारण कार्य करने में असमर्थ हैं या फिर उनकी मृत्यु हो गई है तो ऐसी प्रस्तुति में कर्मचारी को उपदान का संदाय किया जाएगा।

जिन व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है उनके उपदान का संदाय उनके वारिसों को किया जाएगा। वारिसों में कर्मचारी पर निर्भर वारिसों को उपदान का संदाय किया जाएगा।

उपदान की गणना

अधिनियम के अनुसार उपदान की गढ़ना सेवा के अंतिम माह की मूल सैलरी के पंद्रह दिवस की सैलरी को औसत मान कर कार्य के वर्षों से गुणा कर की जायेगी।निम्न उदहारण द्वारा सरलतापूर्वक समझा जा सकता है।

यह फॉर्मूला है-(15 X पिछली सैलरी X काम करने की अवधि) भाग 26 यहां पिछली सैलरी का मतलब बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और बिक्री पर मिलने वाला कमीशन है।

मान लीजिए किसी व्यक्ति का पिछला वेतन 50,000 रुपये महीना है। उसने किसी कंपनी में 15 साल 8 महीने काम किया। ऐसे में उसकी ग्रेच्युटी होगी-(15 X 50,000 X 16)/26 = 4.61 लाख रुपये होगी। इस मामले में काम करने के दिन 15 साल 8 महीने होने के कारण इसे 16 लिया गया है। अगर काम करने के दिन 15 साल 5 महीने होते तो इसे 15 साल ही माना जाता।

उपदान देने से छूट

कुछ विशेष परिस्थितियों में नियोजक को उपदान का संदाय करने हेतु समुचित सरकार से छूट प्राप्त हो सकती है अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत वह निम्न परिस्थितियों में हो सकती है।

यदि नियोजक द्वारा कर्मचारियों को ऐसी पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है जो पेंशन योजना इस अधिनियम के अंतर्गत बताई गई उपदान योजना से कम अनुकूल नहीं है तो ऐसी परिस्थिति में ग्रेच्युटी से छूट नियोजक को प्राप्त हो सकती है, लेकिन भान रहे छूट केवल उस परिस्थितियों में प्राप्त होगी जिस परिस्थिति में अन्य योजना का लाभ कर्मचारियों को मिल रहा है ।अर्थात किसी भी सूरत में कर्मचारियों का नुकसान नहीं होना चाहिए उन्हें एक जैसी धनराशि किसी अन्य योजना से प्राप्त होनी चाहिए।

उपदान के संदाय किए जाने हेतु समयावधि

अधिनियम के अंतर्गत उपदान का संदाय करने हेतु नियोजक को 30 दिन का समय दिया गया है। कर्मचारी जिस दिन से उपदान के संदाय हेतु आवेदन जमा करता है उससे 30 दिन की अवधि के भीतर नियोजक को उपदान का संदाय कर देना चाहिए। यदि वह उपदान का संदाय इस समय अवधि के भीतर नहीं करता है। उसके बाद कुछ समय और लेता है तो ऐसी परिस्थिति में नियोजक को कर्मचारी को एक निश्चित दर से ब्याज देना होगा।

उपदान की वसूली

यदि कर्मचारी द्वारा नियोजक को उपदान के संदाय हेतु आवेदन किया जाता है और नियोजक कर्मचारी को उपदान का संदाय नहीं करता है। ऐसी परिस्थिति में नियोजक की शिकायत यदि नियंत्रक अधिकारी को की जाती है तो वह प्राधिकारी जिले के कलेक्टर को यह प्रमाण पत्र जारी करेगा कि वह भू राजस्व की वसूली की तरह ग्रेज्युटी की रकम को वसूल करें तथा वसूल करके उस रकम को कर्मचारी को प्रदान करे।

अपराध दंड

अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत कुछ अपराध हैं। उनके दंड भी रखे गए यदि कोई नियोजक इस अधिनियम के अंतर्गत बताए गए उपदान का संदाय करने से बचता है या बचने का प्रयास करता है जब कोई ऐसी विवेचना बनाता है, जिससे वह उपदान का संदाय करने से बच जाए तो यह इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध है इसके लिए 6 माह तक का कारावास रखा गया है।

अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियम और विनियमो का उल्लंघन किया जाता है और कोई ऐसा प्रयास किया जाता है, जिससे किसी कर्मचारी को उपदान किए जाने के संबंध में कोई नुकसान पहुंचाया जाए तो ऐसी परिस्थिति में 1 वर्ष तक का कारावास रखा गया है। ऐसा कारावास नियोजक यानी संस्था के कर्ताधर्ता को दिया जाएगा।

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