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जानिए रेल प्रशासन दुर्घटना/अनपेक्षित घटना के मामलों में कब देता है मुआवजा

SPARSH UPADHYAY
13 May 2020 2:03 PM GMT
जानिए रेल प्रशासन दुर्घटना/अनपेक्षित घटना के मामलों में कब देता है मुआवजा

एक बेहद दर्दनाक हादसे में, बीते 8 मई 2020 को नांदेड़ डिवीजन में बदलापुर और करमद स्टेशनों के बीच 16 प्रवासी मज़दूर एक माल गाड़ी की चपेट में आकर मारे गए थे। यह दर्दनाक हादसा तब हुआ जब रेलवे लाइन पर ये श्रमिक सो रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाँ चौदह मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी वहीँ दो अन्य मजदूरों ने बाद में दम तोड़ दिया था। ये मज़दूर मध्यप्रदेश लौटने के लिए "श्रमिक स्पेशल" ट्रेन में सवार होने के लिए जालौन से भुसावल की ओर जा रहे थे।

कथित तौर पर, लगभग 20 श्रमिक, जालना से भुसावल तक पैदल जा रहे थे, जो लगभग 150 किलोमीटर दूर है। कुछ आराम करने के लिए लगभग 45 किलोमीटर चलने के बाद वे रुक गए और रेलवे पटरियों पर ही सो गए। इसके बाद यह दर्दनाक हादसा हुआ जब सुबह करीब 5:15 बजे एक मालगाड़ी उनके ऊपर से गुजरी जिससे इनकी मृत्यु हो गयी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया था मामले पर स्वतः संज्ञान

इसके हादसे के पश्च्यात, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, महाराष्ट्र सरकार और जिला मजिस्ट्रेट, औरंगाबाद को नोटिस जारी किया। NHRC ने यह भी कहा कि,

"उनकी (श्रमिकों की) थका देने वाली यात्रा के दौरान उनके आश्रय या पड़ाव के लिए कुछ व्यवस्था की जा सकती थी और दर्दनाक त्रासदी को रोका जा सकता था।"

हालाँकि, वह बात जिसपर यहाँ गौर किया जाना चाहिए वह यह है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मामले में रेल प्रशासन को नोटिस न जारी करते हुए मुख्य सचिव, महाराष्ट्र सरकार और जिला मजिस्ट्रेट, औरंगाबाद को नोटिस जारी किया।

इसका कारण बेहद स्पष्ट है कि यह हादसा, रेल अधिनियम, 1989 एवं सम्बंधित नियमों के मुताबिक, न तो रेल प्रशासन के कारण हुआ, और न ही रेल प्रशासन ऐसी दुर्घटनाओं के मामलों में प्रतिकर (Compensation) देता है। यही कारण है कि महाराष्ट्र सरकार ने पीड़ितों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है, न कि रेल प्रशासन ने।

हालांकि, कार्यपालिका ऐसे मामलों में मुआवजे/प्रतिकर का भुगतान करने के लिए स्वतंत्र है (जैसे कि महाराष्ट्र सरकार ने किया), यदि उन्हें ऐसा करना आवश्यक लगे तो और यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 12-मई-2020 को इस हादसे में मारे गए 16 प्रवासी मजदूरों में से प्रत्येक के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की मंजूरी दी है।

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के मुताबिक, सूत्रों ने उन्हें बताया है कि पीएम राष्ट्रीय राहत कोष से यह प्रतिकर/मुआवजा दिया जाएगा। वहीँ, गंभीर रूप से चोटिल लोगों को 50,000-50,000 रुपये दिए जाएंगे। हालाँकि, ऐसी कोई भी घोषणा रेल प्रशासन की तरफ से नहीं की गयी है।

मौजूदा लेख में हम यह जानेंगे कि आखिर रेल प्रशासन कब रेल-दुर्घटना के मामलों में प्रतिकर (Compensation) देता है। हम यह भी समझेंगे कि रेल अधिनियम, 1989 के अंतर्गत 'दुर्घटना' किसे कहा जाता है, जिसके चलते रेल प्रशासन पर प्रतिकर देने का दायित्व पैदा होता है। तो चलिए इस लेख की शुरुआत करते हैं।

रेल प्रशासन किन मामलों को मानता है दुर्घटना?

यदि हम रेल अधिनियम, 1989 पर नजर डालें तो हम यह पाएंगे कि इस अधिनियम का 'अध्याय 13', 'दुघर्टना के कारण यात्रियों की मृत्यु और क्षति के लिए रेल प्रशासन के दायित्व' के विषय में बात करता है। इस अध्याय की प्रथम धारा, धारा 123 है, जो परिभाषाओं के सम्बन्ध में प्रावधान करती है।

इस धारा का खंड (क़) यह कहता है कि -

"दुघर्टना" से धारा 124 में वर्णित प्रकार की दुघर्टना अभिप्रेत है [(a) "accident" means an accident of the nature described in section 124;]। यानी कि इस धारा का खंड (क) केवल इतना कहता है कि 'दुर्घटना', उन मामलों को कहा जायेगा जो धारा 124 में वर्णित हैं।

अब धारा 124 यह बताती है कि रेल रेल प्रशासन के दायित्व की सीमा क्या होगी। इस धारा को यदि भागों में समझा जाए तो यह धारा सर्वप्रथम दुर्घटना के विषय में यह कहती है कि रेल प्रशासन प्रतिकर (Compensation) देने के लिए बाध्य है, "जब किसी रेल के कायर्करण के अनुक्रम (course of working) में कोई दुघर्टना होती है, जो या तो ऐसी रेलगाड़ियों के बीच टक्कर हो जिनमे एक यात्रियों का वहन करने वाली रेलगाड़ी है अथवा यात्रियों का वहन करने वाली किसी रेलगाड़ी या ऐसी रेलगाड़ी का कोई भाग पटरी से उतर गया हो या कोई अन्य दुघर्टना हुई हो"

अनपेक्षित घटनाएँ (Untoward Incidents) क्या हैं?

गौरतलब है कि दुर्घटना के मामले के अलावा, रेल अधिनियम, 1989 की धारा 124-ए के तहत [जोकि 01-अगस्त-1994 से प्रभाव में है], रेल प्रशासन, उन रेल यात्रियों को जानमाल की हानि या चोट के लिए प्रतिकर का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी बन गया है, जो किसी 'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) का शिकार हुए हैं।

अब यह 'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) क्या है इस बात को अधिनियम की धारा 123 (ग़) (1) एवं (2) के अंतर्गत को परिभाषित किया गया है। इन मामलों में भी रेलवे प्रतिकर देने के लिए बाध्य है। इस धारा के अनुसार, 'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) से अभिप्रेत है,—

(1) यात्रियों को वहन करने वाली किसी रेलगाड़ी में या उस पर अथवा किसी रेल स्टेशन की परिसीमा के भीतर प्रतीक्षालय, यात्री सामान घर अथवा आरक्षण या बुकिंग कायार्लय में या किसी प्लेटफार्म पर या किसी अन्य स्थान में किसी व्यक्ति द्वारा,—

(i) आतंकवादी और विध्वंसक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1987 (1987 का 28) की धारा 3 की उपधारा (1) के अर्थ में कोई आतंकवादी कार्य किया जाना;

(ii) कोई हिंसात्मक आक्रमण (Violent attack) किया जाना अथवा लूट (Robbery) या डकैती (Dacoity) किया जाना;

(iii) बलवा (Rioting) किया जाना, गोली मारना (Shoot-out) या आग लगाया जाना (Arson);

(2) यात्रियों को वहन करने वाली किसी रेलगाड़ी से किसी व्यक्ति का दुघर्टनावश गिर जाना।]

संक्षेप में, रेल प्रशासन को केवल उन मामलों में ही प्रतिकर देने के लिया बाध्य किया जा सकता है जहाँ दुर्घटनाओं का स्वभाव, 'धारा 124' में उल्लिखित परिस्थितियों जैसा हो या 'धारा 123 (ग़) (1) एवं (2)' में उल्लिखित 'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) जैसा हो।

रेल का दुर्घटना एवं 'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) के लिए प्रतिकर देने का दायित्व

धारा 124 आगे यह भी बताती है कि यह प्रतिकर (Compensation) तब भी रेल प्रशासन द्वारा दिया जायेगा जब, "चाहे रेल प्रशासन की ओर से ऐसा कोई दोषपूर्ण कार्य, उपेक्षा या व्यतिक्रम हुआ हो या न हुआ हो"। दुर्घटना के किन मामलों में रेलवे यह प्रतिकर देगा इसे हम ऊपर समझ ही चुके हैं।

इस प्रतिकर की सीमा के बारे में आगे धारा 124 यह कहती है कि, "रेल प्रशासन, किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी दुघर्टना के परिणामस्वरूप मरने वाले यात्री की मृत्यु के कारण हुई हानि के लिए और ऐसी दुघर्टना के परिणामस्वरूप हुई वैयक्तिक क्षति तथा यात्री के स्वामित्व में ऐसे माल की, जो उसके साथ उस कक्ष में या उस रेलगाड़ी में हो, हानि, नाश, नुकसान, या क्षय के लिए, उस सीमा तक, जो विहित की जाए, और केवल उस सीमा तक ही, प्रतिकर देने के दायित्वाधीन होगा।"

'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) क्या है इसे हम ऊपर समझ चुके हैं, जिसे रेल अधिनियम, 1989 की 'धारा 123 (ग़) (1) एवं (2)' में बताया गया है। और ऐसी घटना के लिए प्रतिकर देने का दायित्व और उसकी सीमा का उल्लेख हमे धारा 124A में मिलता है,

यह धारा यह कहती है कि,

"जब किसी रेल के कायर्करण के अनुक्रम में कोई अनपेक्षित घटना होती है तब चाहे रेल प्रशासन की ओर से ऐसा कोई दोषपूर्ण कार्य, उपेक्षा या व्यतिक्रम हुआ हो या न हुआ हो, जिसका उस यात्री को जो उससे क्षतिग्रस्त हुआ है या उस यात्री के जिसकी मृत्यु हो गई है, आश्रित को उसके बारे में अनुयोजन करने और नुकसानी वसूल करने के लिए हकदार बनाता है, रेल प्रशासन, किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी अनपेक्षित घटना के परिणामस्वरूप किसी यात्री की हुई मृत्यु, या उसको हुई क्षति द्वारा पहुंची हानि के लिए उस सीमा तक, जो विहित की जाए, और केवल उस सीमा तक ही, प्रतिकर देने के दायित्वाधीन होगा।"

कब रेल प्रशासन प्रतिकर देने के लिए नहीं होगा दायित्वाधीन?

गौरतलब है कि, धारा 124 के अंतर्गत तो रेल प्रशासन प्रतिकर देने के लिए दायित्वाधीन होगा (यदि उस धारा की समस्त शर्तें पूरी हो जाएँ)। लेकिन, धारा 124A यह स्पष्ट करती है कि कौनसी घटनाएँ, 'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) नहीं मानी जाएगी इसलिए उन मामलों में, रेल प्रशासन प्रतिकर देने के लिए दायित्वाधीन नहीं होगा

धारा 124A आगे यह कहती है कि, "परन्तु इस धारा के अधीन रेल प्रशासन द्वारा कोई प्रतिकर संदेय नहीं होगा, यदि यात्री की निम्नलिखित के कारण मृत्यु होती है या उसको क्षति होती है, अर्थात:—

(क) उसके द्वारा आत्महत्या या किया गया आत्महत्या का प्रयत्न;

(ख) उसके द्वारा स्वयं को पहुंचाई गई क्षति;

(ग) उसका अपना आपराधिक कार्य;

(घ) उसके द्वारा मत्तता या उन्मत्तता की हालत में किया गया कोई कार्य;

(ङ) कोई प्राकृतिक कारण या बीमारी अथवा चिकित्सीय या शल्य चिकित्सीय उपचार जब तक कि ऐसा उपचार उक्त अनपेक्षित घटना द्वारा हुई क्षित के लिए आवश्यक नहीं हो जाता है।

क्या इन श्रमिकों को मिलेगा प्रतिकर?

धारा 123 (ग़) (1) एवं (2), धारा 124 एवं धारा 124A को पढने के पश्च्यात, हमे यह पता चल सकता है कि रेल प्रशासन, इन श्रमिकों को प्रतिकर देने के लिए बाध्य नहीं है, क्योंकि यह हादसा/दुर्घटना/ और इन श्रमिकों की मौत, रेल अधिनियम, 1989 के अनुसार एक 'दुर्घटना' या 'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) नहीं है, जिसके चलते, रेल प्रशासन पर प्रतिकर देने का कोई दायित्व बनता हो।

वास्तव में, श्रमिकों द्वारा रेल पटरियों पर चलना, रेल अधिनियम, 1989 की धारा 147 के अनुसार एक अपराध है। यह धारा किसी व्यक्ति के, किसी रेल पर या उसके किसी भाग में विधिपूर्ण अधिकार के बिना प्रवेश करने के कृत्य को छह मास तक के कारावास से या जुर्माने या दोनों से दण्डित करती है।

और जैसा कि धारा 124A कहती है, रेल प्रशासन 'अनपेक्षित घटना' (Untoward Incident) के लिए तब बाध्य नहीं होगा जब, जब व्यक्ति द्वारा स्वयं को क्षति पहुंचाई जाए या उसका अपना आपराधिक कार्य हो।

यही नहीं, पटरियों पर सोने के मामले और उसके पश्च्यात हुई दुर्घटना, रेलवे अधिनियम या उसके नियमों के अंतर्गत, रेलवे की गलती से होते हुए नहीं माने जाते और न ही ऐसे मामलों में रेलवे प्रशासन की ओर से कोई प्रतिकर देय होता है।

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