जानिए हमारा कानून
मकान या जमीन खरीदते समय कौन सी कानूनी बातों की जांच करें
संपत्ति खरीदना आज के समय में हर व्यक्ति का सपना है। संपत्ति अत्यधिक महंगी होती है जिसे खरीदने में किसी व्यक्ति द्वारा अपने समस्त जीवन की आय लगा दी जाती है। ऐसी संपत्ति को खरीदते समय उससे जुड़ी हुई कानूनी जानकारियों की भलीभांति जांच कर लेना चाहिए। कौन सी बातों को जानना चाहिए इसकी जानकारी होना सभी के लिए जरूरी हो जाता है।कौन सी बातों की जांच करेंसंपत्ति दो प्रकार की हो सकती है। पहली वह संपत्ति जो किसी व्यक्ति द्वारा उपभोग की जा रही है और उसके उपभोग की जाने में एक लंबी यात्रा है। एक लंबे समय से वह...
क्या एक पत्नी को अपने पति और ससुराल वालों की संपत्ति में कोई हक है
भारत में कानून को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां हैं। उन भ्रांतियों में एक भ्रांति यह भी है कि एक महिला को उसके पति की संपत्ति में अधिकार होता है या फिर पति के माता पिता की संपत्ति में कोई अधिकार होता है। इस मामले में भारत का कानून अत्यंत स्पष्ट है।क्या है कानून:-संपत्ति के उत्तराधिकार के मामले में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम और मुस्लिम पर्सनल लॉ में उत्तराधिकार के नियम लागू होते हैं। किसी भी व्यक्ति की संपत्ति दो प्रकार की होती है। पहली प्रकार की वह संपत्ति होती है जो उसमे...
क्या करें जब वाहन का एक्सीडेंट हो जाए, क्या है कानून?
मोटर वाहन मौजूदा समय की मांग है। आज हर व्यक्ति किसी न किसी मोटरयान से यात्रा कर रहा है इसलिए कहा जाता है कि वाहन वर्तमान समय की मांग है। जल्दबाजी उतावलेपन के कारण सड़क हादसे भी अधिक होते हैं। ऐसे सड़क हादसों से निपटने के लिए कुछ कानून बनाए गए हैं। उन कानूनों के जरिए सड़क हादसों से बचाने की कोशिश सरकार द्वारा की गई है।आज सड़क हादसे अत्यधिक हो रहे हैं ऐसे में इनसे संबंधित कानूनों की जानकारी होना आवश्यक हो जाता है।क्या है कानून:-सड़क हादसे अनेक प्रकार के होते हैं जैस दो पहिया वाहन का किसी ट्रक से...
भरण पोषण का आदेश हो जाने के बाद कैसे करें वसूली
भरण पोषण एक प्रसिद्ध कानूनी अवधारणा है वर्तमान परिस्थितियों में भरण पोषण पति द्वारा छोड़ी गई पत्नी को प्राप्त हो रहा है। हालांकि कानून में ऐसा भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार हर उस व्यक्ति को है जो दूसरे व्यक्ति के ऊपर आश्रित रहता है। जैसे बच्चे को माता पिता से भरण-पोषण करने का अधिकार है, माता पिता को बच्चों से भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार है परंतु समाज में साधारण रूप से पति द्वारा छोड़ी गई पत्नी अधिकांश रूप से ऐसी भरण पोषण की याचिका लेकर न्यायालय में आती है।इन कानूनों में प्राप्त होता है...
किराया अनुबंध 11 महीने का क्यों होता है और किराएदार क्या कभी मकान मालिक हो सकता है
आधुनिक समय में किराएदार और मकान मालिक व्यवस्था अधिक देखने को मिल रही है क्योंकि शहरो का विस्तार हो रहा है और शहरों में दूसरे शहर के लोग आकर रह रहे हैं जिससे वे किसी मकान में कुछ समय के लिए किराएदार के नाते से रहते हैं। किसी संपत्ति के मालिक के लिए भी यह कच्छी आय का साधन हो गया है। संपत्ति के मालिक अपनी संपत्तियों को किराए पर देकर एक बेहतरीन आय अर्जित करते हैं।किराया अनुबंध एक कानूनी विषय है तो इस पर सभी कानूनी जानकारियां उन व्यक्तियों को होना चाहिए जो किसी संपत्ति को किराए पर देते हैं और जो किसी...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:19 इस अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा लगाए जाने की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) से संबंधित सभी आलेखों में इस अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर चर्चा की गई है। उनसे संबंधित न्याय निर्णय प्रस्तुत किए गए हैं। इस आलेख के अंतर्गत इस अधिनियम के अंतर्गत कोई भी शिकायत दर्ज किए जाने की प्रक्रिया से संबंधित जानकारियां प्रस्तुत की जा रही है और किसी मुकदमे को दर्ज करवाने हेतु उसमें लगने वाले आवश्यक दस्तावेजों की सूची प्रस्तुत की जा रही है।कैसे दर्ज करवाएं मुकदमा-जैसा की विदित है इस अधिनियम के अंतर्गत त्रिस्तरीय आयोग...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:18 इस अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने हेतु लगने वाली कोर्ट फीस
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) के तहत बनाए गए नियम शिकायत दायर करने के लिए शुल्क के संबंध में उल्लेख करते हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इस अधिनियम के अंतर्गत यह प्रयास किया गया है कि एक उपभोक्ता को शीघ्र और सरल तथा सस्ता न्याय मिल सके। सिविल न्यायालय में कोई भी मुकदमा दर्ज करने हेतु अत्यधिक कोर्ट फीस लगती है। इस कोर्ट फीस के कारण अनेक लोग सिविल न्यायालय में मुकदमा दर्ज भी नहीं कर पाते हैं। उपभोक्ता...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:17 इस अधिनियम पर कोई अन्य अधिनियम लागू नहीं होना
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 100 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के संदर्भ में इस विषय पर अन्य अधिनियम के अल्पीकरण के संबंध में अर्थात उनके लागू न होने के संबंध में उल्लेख करती है। इस आलेख के अंतर्गत धारा 100 से संबंधित प्रावधानों पर चर्चा की जा रही है।यह अधिनियम में प्रस्तुत की गई धारा का मूल स्वरूप है:-धारा-100अधिनियम का किसी अन्य विधि के अल्पीकरण में न होना इस अधिनियम के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अतिरिक्त होंगे न कि उनके...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:16 अधिनियम के अंतर्गत दाण्डिक प्रावधान
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 88, 90, 91 आपराधिक प्रावधान करती है। इन धाराओं के अंतर्गत अधिनियम में कुछ कामों को अपराध बनाया है और उनके लिए दंड तय किया गया है। यह अधिनियम एक सिविल प्रकृति का अधिनियम है परंतु इसमें कहीं कहीं कुछ प्रावधान दाण्डिक प्रकृति के हैं। अंत में इस अधिनियम के अंतर्गत इन धाराओं को दिए जाने का उद्देश्य इस अधिनियम को समाज में प्रभावशाली बनाना है जिससे उपभोक्ताओं का शोषण करने वाले व्यापारियों के भीतर भय बना रहे। अधिनियम की इन धाराओं...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:15 आयोग के आदेशों का प्रवर्तन और अनुपालन न करने पर पेनाल्टी
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 71 एवं 72 में आयोग द्वारा दिए गए आदेशो के पालन के विषय में तथा उनका पालन नहीं करने पर शास्ति अर्थात पेनाल्टी का उल्लेख किया गया है। इस आलेख के अंतर्गत इन ही दो धाराओं पर सारगर्भित टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।यह अधिनियम में प्रस्तुत की गई धारा का मूल स्वरूप है:-धारा- 71जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग के आदेशों का प्रवर्तन जिला आयोग, राज्य आयोग या राष्ट्रीय आयोग द्वारा किया गया प्रत्येक आदेश इसके द्वारा उस रीति...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:14 मुकदमा दर्ज करवाने हेतु परिसीमा की अवधि
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 69 इस अधिनियम के महत्वपूर्ण धाराओं में से एक है। यह अधिनियम अपने आप में एक संपूर्ण संहिता है जो इस अधिनियम से संबंधित प्रक्रिया को भी स्थापित करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत मुकदमों को संस्थित करने हेतु परिसीमा का भी निर्धारण कर दिया गया है।यदि कोई मुकदमा इस परिसीमा अवधि के भीतर आयोग के समक्ष लाया जाता है तभी उस मुकदमे को सुनवाई योग्य माना जाता है। यदि इस अवधि के बाहर किसी मुकदमे को लाया जाता है तब उस मुकदमे पर सुनवाई नहीं...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:13 राष्ट्रीय आयोग के आदेश के विरुद्ध अपील
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 67 राष्ट्र आयोग के दिए गए आदेश के विरुद्ध अपील के संबंध में प्रावधान करती है। यह अधिनियम राष्ट्र आयोग के आदेश को भी अंतिम नहीं मानता है तथा उसके आदेश के विरुद्ध भी अपील का अधिकार देता है। इस आलेख के अंतर्गत धारा 67 से संबंधित प्रावधानों पर चर्चा की जा रही है।यह अधिनियम में प्रस्तुत की गई धारा का मूल स्वरूप है:-धारा- 67राष्ट्रीय आयोग के आदेश के विरुद्ध अपील-धारा 58 की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (i) या (ii) द्वारा...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:12 राष्ट्रीय आयोग की अधिकारिकता संबंधित कानून
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 58 राष्ट्रीय आयोग की अधिकारिता के संबंध में प्रावधान करती है। इस अधिनियम के अंतर्गत त्रिस्तरीय आयोग बनाए गए हैं जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग। इससे पूर्व के आलेख में जिला आयोग और राज्य आयोग के संबंध में विस्तार पूर्वक चर्चा की जा चुकी है। इस आलेख के अंतर्गत राष्ट्र आयोग की अधिकारिता के संबंध में चर्चा की जा रही है और उससे संबंधित न्याय निर्णय प्रस्तुत किए जा रहे है।यह अधिनियम में प्रस्तुत की गई धारा का मूल रूप...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:11 राष्ट्रीय आयोग को अपील संबंधित कानून
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 51 इस अधिनियम के महत्वपूर्ण धाराओं में से एक धारा है। इस धारा के अंतर्गत राष्ट्रीय आयोग को अपील के संबंध में प्रावधान किए गए। जैसा की विधित है इस अधिनियम के अंतर्गत तीन स्तरों पर आयोग बनाए गए हैं तथा तीनों ही आयोगों को अपनी अपनी अधिकारिता दी गई है। एक आयोग से किसी मुकदमे में निर्णय के बाद उसके ऊपर के आयोग में अपील की व्यवस्था दी गई है। राज्य आयोग के निर्णय किए गए मामले में राष्ट्रीय आयोग द्वारा अपील को सुना जाता है। इस...
शादी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया क्या है
भारत में शादियां अनेक तरह से होती है जिसमें हिंदू विवाह मुस्लिम विवाह ईसाई विवाह और स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मैरिज।यह ध्यान देना चाहिए कि कोर्ट मैरिज सिर्फ स्पेशल मैरिज एक्ट, 1955 के तहत होती है किसी नोटरी पर कोर्ट मैरिज नहीं होती है और इस आलेख में भी कोर्ट मैरिज के बारे में प्रक्रिया नहीं बताई जा रही है बल्कि किसी भी शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रक्रिया बताई जा रही है।अब शादी कोई भी हो उसका रजिस्ट्रेशन भारत की बहुत सारी स्टेट में अनिवार्य कर दिया गया है। कुछ स्टेट के अंदर यह रजिस्ट्रेशन...
क्या करें जब कोई झूठी एफआईआर दर्ज करवा दें
कानून समाज की सुरक्षा हेतु बनाया गया है परंतु समाज में सभी लोगों को भिन्न-भिन्न पद और प्रतिष्ठा मिली हुई है। भारत का कानून अत्यंत विषाद है और व्यवस्था में भ्रष्टाचार दीमक की तरह लगा हुआ है।कभी-कभी यह स्थिति होती है कि किसी व्यक्ति द्वारा किसी निर्दोष व्यक्ति पर किसी अपराध का झूठा आरोप लगाया जाता है। भारत के कानून ने ऐसे झूठे आरोप पर एफआईआर नहीं किए जाने के निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिए हैं।पुलिस अधिकारी एक निष्पक्ष व्यक्ति होता है जो अत्यंत तटस्थ है, उसका झुकाव न शिकायतकर्ता की तरफ होता है और...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:10 राज्य आयोग की अधिकारिकता
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 47 के अंतर्गत राज्य आयोग की अधिकारिता के संबंध में प्रावधान किए गए हैं। जैसा की विदित है इस अधिनियम के अंतर्गत त्रिस्तरीय आयोग बनाए गए हैं। जिला आयोग, राज्य आयोग तथा राष्ट्रीय आयोग। जिला आयोग प्राथमिक स्तर पर किसी प्रकरण को सुनने की अधिकारिता रखता है उससे संबंधित प्रावधानों को इससे पूर्व के आलेखों में उल्लेखित किया जा चुका है। एक करोड़ रुपए के ऊपर से संबंधित मामले तथा जिला आयोग से निर्णित किए गए मामले अपील हेतु राज्य आयोग...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:9 जिला आयोग के आदेश के विरुद्ध अपील
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 41 के अंतर्गत अपील का अधिकार दिया गया है। किसी भी कानूनी प्रक्रिया के लिए केवल एक अदालत के निर्णय से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता है अपितु उस निर्णय का उससे वरिष्ठ अदालत अवलोकन करती है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत भी कुछ इसी प्रकार से अपील के प्रावधान दिए गए हैं। इस आलेख के अंतर्गत अधिनियम की धारा 41 जो जिला आयोग के आदेश के विरुद्ध अपील का प्रावधान करती है से संबंधित न्याय निर्णय और मूल विधि पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग:8 जिला आयोग के निष्कर्ष से संबंधित कानून
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 39 जिला आयोग के द्वारा किसी मामले के निष्कर्ष के संबंध में प्रावधानों का उल्लेख करती है। इस धारा से ठीक पूर्व की धारा जिला आयोग में प्रकरणों को संस्थित करने से संबंधित प्रक्रिया का उल्लेख करती है और इस धारा के अंतर्गत जिला आयोग के निष्कर्ष के संबंध में उल्लेख किया गया है। इस आलेख में धारा 39 से संबंधित टीका प्रस्तुत किया जा रहा है।यह अधिनियम में प्रस्तुत की गई धारा का मूल स्वरूप है:-धारा-39जिला आयोग के निष्कर्ष:-(1) जिला...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भाग: 7 परिवाद को ग्रहण होने पर प्रक्रिया संबंधित कानून
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) की धारा 38 परिवाद के ग्रहण हो जाने पर प्रक्रिया से संबंधित प्रावधानों को उल्लेखित करती है। यह अधिनियम की महत्वपूर्ण धारा इसलिए बन जाती है क्योंकि इस धारा के अंतर्गत प्रक्रिया स्थापित की गई है इस प्रक्रिया के माध्यम से किसी प्रकरण के ग्रहण हो जाने के बाद मुकदमे को चलाया जाता है। इस आलेख के अंतर्गत इस ही धारा 38 पर संक्षिप्त टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है तथा साथ ही इससे संबंधित न्याय निर्णय का उल्लेख किया जा रहा है।अधिनियम के...











