'EVM हैकिंग' के बारे में कथित रूप से झूठी खबरें फैलाने के लिए राहुल गांधी, ध्रुव राठी, उद्धव ठाकरे के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका

Shahadat

11 July 2024 8:43 AM GMT

  • EVM हैकिंग के बारे में कथित रूप से झूठी खबरें फैलाने के लिए राहुल गांधी, ध्रुव राठी, उद्धव ठाकरे के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका

    कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी, शिवसेना (UTB) के नेता उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, संजय राउत और यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ कथित रूप से विचाराधीन मामले में हस्तक्षेप करने के लिए अवमानना ​​कार्यवाही की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

    याचिका के अनुसार, प्रतिवादी - राहुल गांधी और अन्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर समाचार पत्र 'मिड-डे' की स्टोरी पोस्ट की, जिसमें शिंदे गुट के शिवसेना नेता रवींद्र वायकर के परिवार के सदस्यों द्वारा कथित रूप से EVM हैकिंग के लिए एफआईआर दर्ज किए जाने की बात कही गई। याचिका में दावा किया गया कि उक्त समाचार तथ्यात्मक रूप से गलत था और समाचार पत्र ने इसके लिए माफी भी मांगी। हालांकि, प्रतिवादियों ने इस मुद्दे के बारे में झूठी खबरें बनाना जारी रखा।

    याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों के खिलाफ “झूठी कहानियां और षड्यंत्र के सिद्धांत फैलाकर और जांच तथा कानून की उचित प्रक्रिया में हस्तक्षेप करके उनकी अत्यधिक गैरकानूनी गतिविधियों” के लिए कार्रवाई करने की मांग की।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि ध्रुव राठी और अन्य प्रतिवादी लंबित जांच और विचाराधीन मामलों को पूर्वाग्रहित करने के लिए झूठी कहानियां और षड्यंत्र के सिद्धांत बनाने के आदी हैं। इसमें आरोप लगाया गया कि वे अपने “गुप्त उद्देश्यों” की पूर्ति के लिए अलग-अलग धारणाएं बनाकर लोगों को गुमराह करने और नागरिकों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।

    याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि प्रतिवादियों का कृत्य नीलेश नवलखा बनाम भारत संघ (2021) में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है, जिसमें मीडिया को 'मीडिया ट्रायल' का सहारा लेने से बचने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए। याचिका के अनुसार, प्रतिवादियों का आचरण उस निर्णय का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें घोषित किया गया था कि मीडिया ट्रायल या विचाराधीन मामले में हस्तक्षेप करने का कोई भी प्रयास आपराधिक अवमानना ​​होगी और न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम की धारा 2(सी) के तहत दंडनीय होगी।

    जस्टिस श्याम चांडक और जस्टिस मोहिते-डेरे की खंडपीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध है।

    याचिकाकर्ता ने जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे को इस मामले की सुनवाई से अलग करने के लिए अंतरिम आवेदन दायर किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि जस्टिस डेरे की बहन शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से निकटता से जुड़ी हुई हैं।

    हालांकि, पीठ ने मुख्य मामले की सुनवाई करने से इनकार किया। साथ ही कहा कि इसे गलत तरीके से उसके समक्ष रखा गया। याचिकाकर्ताओं से कहा गया कि वे चीफ जस्टिस से संपर्क करें और अपनी याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का अनुरोध करें।

    याचिकाकर्ता ने न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 की धारा 2(बी) और 12 के तहत प्रतिवादियों को दंडित करने का अनुरोध किया। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अदालत से पुलिस अधिकारियों को आईपीसी की धारा 192, 193, 107, 409, 120(बी) और 34 के तहत लंबित जांच के संबंध में सार्वजनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने और झूठे साक्ष्य बनाने के लिए प्रतिवादियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

    याचिकाकर्ता ने CBI, IB और ED सहित विशेष जांच दल (SIT) के गठन की भी मांग की है, जिससे “…झूठी कहानियां और षड्यंत्र के सिद्धांत फैलाने की बड़ी साजिश…” और “…नागरिकों के बीच विभिन्न सरकारी संस्थानों और देश के खिलाफ नफरत और वैमनस्य फैलाने की गुप्त मंशा से इस देश की प्रगति और विकास में बाधा डालने की साजिश की जांच की जा सके।”

    केस टाइटल: मुर्सलीन ए. शेख बनाम ध्रुव राठी और अन्य।

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