हाईकोर्ट

अलग रह रही विधवा जेठानी को दहेज से कोई लाभ नहीं होना था, उसके खिलाफ 498ए का मामला रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट
अलग रह रही विधवा जेठानी को दहेज से कोई लाभ नहीं होना था, उसके खिलाफ 498ए का मामला रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में महिला की जेठानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। अदालत ने कहा कि विधवा और ससुराल परिवार से अलग रह रही जेठानी को कथित दहेज से कोई लाभ मिलने की संभावना नहीं थी, इसलिए उसके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया टिकाऊ नहीं हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता जेठानी का उन नकदी या दहेज के सामानों से कोई लेना-देना नहीं था, जो कथित रूप से महिला के पति और सास-ससुर को दिए जाने थे।अदालत ने कहा...

ChatGPT शिक्षक का विकल्प नहीं, कक्षा में पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
ChatGPT शिक्षक का विकल्प नहीं, कक्षा में पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के उन छात्रों को राहत देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया, जिन्हें अनिवार्य उपस्थिति पूरी न होने के बावजूद कक्षाओं और परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित उपकरण, जैसे ChatGPT, कभी भी योग्य शिक्षकों और जीवंत कक्षा वातावरण का विकल्प नहीं बन सकते।जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने कहा कि नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने से...

गैर-जमानती गंभीर धाराएं जुड़ते ही पहले मिली जमानत का लाभ समाप्त होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
गैर-जमानती गंभीर धाराएं जुड़ते ही पहले मिली जमानत का लाभ समाप्त होगा: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी आरोपी को शुरू में केवल जमानती अपराधों में जमानत मिली हो और बाद में जांच के दौरान उससे संबंधित गंभीर गैर-जमानती धाराएं जोड़ दी जाएं, तो पहले दी गई जमानत का लाभ स्वतः जारी नहीं रह सकता। ऐसी स्थिति में जमानत निरस्त की जा सकती है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति मामलों की विशेष अदालत द्वारा जमानत निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले में आरोपी के खिलाफ FIR...

1993 बड़ाबाजार विस्फोट मामले में दोषी की समयपूर्व रिहाई पर रोक की मांग, पश्चिम बंगाल सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
1993 बड़ाबाजार विस्फोट मामले में दोषी की समयपूर्व रिहाई पर रोक की मांग, पश्चिम बंगाल सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

पश्चिम बंगाल सरकार ने 1993 के चर्चित बड़ाबाजार विस्फोट मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी मोहम्मद राशिद खान की समयपूर्व रिहाई के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। राज्य सरकार ने दिल्ली हाइकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की, जिसमें दोषी को रिहा करने का निर्देश दिया गया।मामले का उल्लेख राज्य सरकार की ओर से भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य की सजा समीक्षा बोर्ड ने दोषी की रिहाई के...

विदेश में नौकरी का हवाला देकर विशेष विवाह अधिनियम की 30 दिन की अवधि में छूट नहीं मिल सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
विदेश में नौकरी का हवाला देकर विशेष विवाह अधिनियम की 30 दिन की अवधि में छूट नहीं मिल सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करने की इच्छुक एक जोड़ी को 30 दिन की अनिवार्य नोटिस अवधि में छूट देने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत कठिनाई या वास्तविक असुविधा भी कानून द्वारा निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया को कमजोर करने या उससे बचने का आधार नहीं बन सकती।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह फैसला उस याचिका पर सुनाया, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत निर्धारित 30 दिन की प्रतीक्षा अवधि को कम करने और निर्धारित समय से पहले विवाह पंजीकरण की अनुमति देने की...

रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मान्यता देने के फैसले पर रोक से इनकार: कलकत्ता हाईकोर्ट ने मांगे जवाब
रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मान्यता देने के फैसले पर रोक से इनकार: कलकत्ता हाईकोर्ट ने मांगे जवाब

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी तृणमूल कांग्रेस विधायक रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मान्यता देने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया। यह याचिका तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने दायर की थी, जिन्होंने दावा किया कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा उन्हें विपक्ष का नेता चुने जाने के बावजूद अध्यक्ष ने उस निर्णय को नजरअंदाज किया।जस्टिस कृष्णा राव ने मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए सभी पक्षों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का...

अभिषेक बनर्जी की गिरफ़्तारी को हरी झंड़ी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP नेता के मानहानि केस में गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटाई
अभिषेक बनर्जी की गिरफ़्तारी को हरी झंड़ी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP नेता के मानहानि केस में गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (17 जून) को मानहानि के मामले में TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अमल पर लगी अंतरिम रोक हटाई, क्योंकि इस मामले में उनकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ। [2026 LiveLaw (MP) 215]बनर्जी ने BJP नेता आकाश विजयवर्गीय द्वारा दायर मानहानि के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में भोपाल के MP/MLA स्पेशल जज द्वारा जारी...

अगर सहमति हुई हो तो वकील क्लाइंट के लिए मिले मुआवज़े से अपनी बकाया प्रोफेशनल फ़ीस एडजस्ट कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
अगर सहमति हुई हो तो वकील क्लाइंट के लिए मिले मुआवज़े से अपनी बकाया प्रोफेशनल फ़ीस एडजस्ट कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर क्लाइंट और वकील के बीच यह सहमति हुई कि केस में मिले मुआवज़े की रक़म से प्रोफेशनल फ़ीस एडजस्ट की जाएगी तो वकील ऐसा एडजस्टमेंट करने का हक़दार होगा, बशर्ते क्लाइंट तय फ़ीस का भुगतान साबित न कर पाए।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने वकील के ₹36,000 की प्रोफेशनल फ़ीस की वसूली के काउंटरक्लेम को मंज़ूरी देने वाला फ़ैसला बरकरार रखा और क्लाइंट की दूसरी अपील खारिज की।बेंच ने कहा,"सबूतों से पता चलता है कि वादी (क्लाइंट) को वकील को फ़ीस देनी थी, जिसका भुगतान उसने कभी नहीं किया। उनके...

POSH Act | एम्प्लॉयर द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए ट्रांसपोर्ट में हुई यौन उत्पीड़न की शिकायत पर ICC सुनवाई नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
POSH Act | एम्प्लॉयर द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए ट्रांसपोर्ट में हुई यौन उत्पीड़न की शिकायत पर ICC सुनवाई नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अगर यौन उत्पीड़न का कोई कथित मामला ऐसे ट्रांसपोर्ट में होता है, जो आरोपी या पीड़ित के एम्प्लॉयर (नियोक्ता) ने उपलब्ध नहीं कराया है, तो उस पर 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम' (POSH Act) के प्रावधानों के तहत विचार नहीं किया जा सकता। [साइटेशन: 2026 LiveLaw (Bom) 290]इसलिए कोर्ट ने एक बैंकर के खिलाफ चल रही कार्यवाही रद्द की, जिस पर ऑफिस जाते समय एक शेयर्ड ऑटो-रिक्शा में एक महिला को गलत तरीके से छूने का आरोप था।जस्टिस सुमन श्याम और...

तत्काल कोई राहत नहीं: टेलीग्राम पर अस्थायी बैन के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
तत्काल कोई राहत नहीं: टेलीग्राम पर अस्थायी बैन के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। टेलीग्राम ने भारत में 22 जून तक अपनी सर्विस पर अस्थायी रोक लगाने के सरकार के फैसले को चुनौती दी। यह रोक 21 जून को होने वाली NEET 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले पेपर लीक को रोकने के लिए लगाई गई है।जस्टिस तेजस करिया ने केंद्र की कल (गुरुवार) तक जवाब दाखिल करने की अपील को मंज़ूरी दी और मामले की सुनवाई के लिए दोपहर 2.30 बजे का समय तय किया।हालांकि, फिलहाल टेलीग्राम को कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई।जज...

DPC में देरी होने मात्र से पूर्व प्रभाव से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
DPC में देरी होने मात्र से पूर्व प्रभाव से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) का गठन देर से हुआ कोई कर्मचारी पूर्व प्रभाव से पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी नियम या दिशा-निर्देश में काल्पनिक अथवा पूर्व निर्धारित तिथि से पदोन्नति देने का प्रावधान न हो, तब तक ऐसा दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी एम्स ऋषिकेश के नर्सिंग अधिकारियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2017-18 में हुई...

हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता।जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।...

सिर्फ आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का पर रोक नहीं लगाई जा सकती, लाउंज के खिलाफ कार्रवाई पर रोक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
सिर्फ आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का पर रोक नहीं लगाई जा सकती, लाउंज के खिलाफ कार्रवाई पर रोक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि केवल संभावित दुरुपयोग की आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने 'द हाई ट्राइब' नामक लाउंज को राहत देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उसके खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न करें, बशर्ते वहां केवल तंबाकू और निकोटिन रहित हर्बल हुक्का ही परोसा जाए और सभी कानूनी नियमों का पालन किया जाए।जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने कहा कि संबंधित कानूनों का उद्देश्य तंबाकू और उससे जुड़े पदार्थों के सेवन एवं...

अंजना ओम कश्यप की मानहानि याचिका पर फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई में तय की अगली सुनवाई
अंजना ओम कश्यप की मानहानि याचिका पर फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई में तय की अगली सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क द्वारा दायर मानहानि वाद में फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया। यह मामला शिक्षाविद् फैसल खान उर्फ खान सर तथा अन्य शिक्षकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं द्वारा कथित रूप से की गई मानहानिकारक टिप्पणियों से जुड़ा है।जस्टिस मधु जैन ने अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग पर तत्काल कोई आदेश पारित नहीं किया और मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की।सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कुछ प्रतिवादियों ने अभी तक अंतरिम राहत आवेदन पर अपना जवाब...

EWS अभ्यर्थी आयु सीमा में छूट का दावा अधिकार के रूप में नहीं कर सकते, नियमों में प्रावधान जरूरी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
EWS अभ्यर्थी 'आयु सीमा में छूट का दावा' अधिकार के रूप में नहीं कर सकते, नियमों में प्रावधान जरूरी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थी केवल संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर आयु सीमा में छूट का दावा अधिकार के रूप में नहीं कर सकते। यदि संबंधित भर्ती नियमों या सरकारी नीति में ऐसी छूट का प्रावधान नहीं है तो अदालत उसे प्रदान करने का निर्देश नहीं दे सकती।जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पद की भर्ती में आयु सीमा में छूट की मांग करने वाले अभ्यर्थी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी...