हाईकोर्ट

अपील लंबित रहते नगर निकाय अधिकारी एकतरफा तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं कर सकते: त्रिपुरा हाईकोर्ट

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कथित अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ का आदेश जारी होने के बाद यदि उसके विरुद्ध सक्षम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष वैधानिक अपील लंबित है तो नगर निकाय अधिकारियों को उसी मामले में शिकायत पर विचार कर आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।जस्टिस डॉ. टी. अमरनाथ गौड़ ने कहा कि ऐसी स्थिति में शिकायत पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। नगर निकाय अधिकारी शिकायतकर्ता को लंबित अपील के संबंध में अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष जाने की सलाह दे सकते थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों...

न्यायिक आदेशों का पालन न करने पर यूपी के खाद्य विभाग के प्रधान सचिव के खिलाफ हाईकोर्ट ने शुरू की अवमानना ​​की कार्यवाही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव रणवीर प्रसाद के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। यह आदेश इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होंने तय समय में मध्यस्थता (Arbitration) शुरू करने के डिवीज़न बेंच के आदेश का पालन नहीं किया और यह भी कहा कि सरकारी आदेशों के कारण मध्यस्थता नहीं हो सकती।रणवीर प्रसाद के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने का आदेश देते हुए जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा,"इसके अलावा, प्रधान...

पारिवारिक झगड़ा का मतलब पीढ़ियों तक चलने वाला विवाद नहीं, एक ही पीढ़ी के सदस्यों के बीच का विवाद भी इसमें शामिल हो सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि "पारिवारिक झगड़ा" का मतलब ज़रूरी नहीं कि पीढ़ियों से चला आ रहा विवाद हो; एक ही पीढ़ी के परिवार के सदस्यों के बीच पहले हुआ विवाद भी पारिवारिक झगड़ा माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि जब किसी मामले के तथ्य एक ही गाइडलाइन के तहत अलग-अलग कैटेगरी में आते हैं, तो दोषी के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद कैटेगरी लागू की जानी चाहिए।जस्टिस वैशाली पाटिल-जाधव और जस्टिस संदीपकुमार सी. मोरे की डिवीज़न बेंच एक दोषी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दोषी ने राज्य के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें...

क्लेमंट की साक्षरता और आर्थिक स्थिति के आधार पर मुआवज़ा रोकने की ट्रिब्यूनल की इजाज़त देने वाले नियम आर्टिकल 14 का उल्लंघन करते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'रेलवे दुर्घटना और अप्रिय घटना (मुआवज़ा) नियम, 1990' के नियम 5.1 और 5.4.1(i) और (ii) - जो रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल को क्लेमंट की साक्षरता और आर्थिक स्थिति के आधार पर तय मुआवज़े का सिर्फ़ कुछ हिस्सा जारी करने और बाकी हिस्सा फिक्स्ड डिपॉज़िट में रखने की इजाज़त देते हैं - क्लेमंट्स के बीच भेदभाव करते हैं और भारत के संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन करते हैं।इन प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि जो क्लेमंट बालिग हैं और नियम 5.2 के दायरे में नहीं आते...

ड्यूटी से गैर-हाज़िरी और अपनी जगह किसी और से पढ़ाना ज़्यादा-से-ज़्यादा सर्विस मिसकंडक्ट, धोखाधड़ी नहीं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सरकारी टीचर के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी की FIR रद्द की। टीचर पर आरोप है कि उसने अपनी जगह किसी और व्यक्ति को पढ़ाने का काम सौंपा है। कोर्ट ने कहा कि ये आरोप ज़्यादा से ज़्यादा सर्विस मिसकंडक्ट (नौकरी से जुड़ी गड़बड़ी) के दायरे में आते हैं। [2026 LiveLaw (MP) 377]यह देखते हुए कि FIR में धोखाधड़ी के ज़रूरी तत्व नहीं है, जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा,"इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) को पढ़ने से पता चलता है कि धोखाधड़ी के ज़रूरी तत्वों में धोखा देना,...

दिल्ली हाईकोर्ट ने मज़दूरों को कम वेतन और उनकी अनदेखी पर चिंता जताई, कहा- समाज उनके काम की अहमियत नहीं समझता

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि समाज शारीरिक मेहनत करने वाले मज़दूरों के काम की अहमियत और उनका सम्मान करने में नाकाम रहा है, क्योंकि देश में उन्हें "सबसे कम वेतन मिलता है, उनकी सबसे कम परवाह की जाती है और उनकी सबसे कम चिंता की जाती है।"जस्टिस विमल कुमार यादव ने यह टिप्पणी 2002 में शहर की लाजपत राय मार्केट में एक दुकान पर सो रहे मज़दूर पर हुए हमले से जुड़ी अपील पर सुनवाई करते हुए की।कोर्ट ने अपील करने वाले वीर पाल की सज़ा को IPC की धारा 307 (हत्या की कोशिश) से बदलकर IPC की धारा 324 (खतरनाक हथियारों से...

यूक्रेन में MBBS कर रहे स्टूडेंट की एमपी हाईकोर्ट में गुहार- युद्ध के बीच NMC के 12 महीने की इंटर्नशिप वाले नियम का पालन करना नामुमकिन

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई कर रहे एक स्टूडेंट की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। स्टूडेंट ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के 'फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंशिएट (FMGL) रेगुलेशंस 2021' को चुनौती दी है, खासकर उस नियम को जिसके तहत उसी विदेशी मेडिकल संस्थान में 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी करना ज़रूरी है।याचिकाकर्ता का तर्क है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस शर्त को पूरा करना नामुमकिन हो गया, क्योंकि वह अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करने और ज़रूरी सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए यूक्रेन...

हैरान करने वाला: पटना हाईकोर्ट ने असम से पटना तक 65 किलो गांजा ले जाने वाले नाबालिगों को ज़मानत दी, जांच के आदेश दिए

पटना हाईकोर्ट ने 65 किलो से ज़्यादा गांजा के साथ पकड़े गए दो नाबालिगों को ज़मानत दे दी है। साथ ही, कोर्ट ने इस बात की जांच के आदेश दिए कि वे बिना पहचान-पत्र या गाड़ी के कागज़ात के गुवाहाटी (असम) से पटना तक इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सामान (गांजा) लेकर कैसे पहुंचे।जस्टिस अरुण कुमार झा की सिंगल जज बेंच DRI के मामले से जुड़ी दो क्रिमिनल रिविज़न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में एक महिंद्रा TUV गाड़ी के चेसिस में बनी गुप्त जगह और चेसिस व फुटस्टेप के बीच छिपाए गए 109 प्लास्टिक पैकेट से...

अनिवार्य आरक्षण शर्तों को नज़रअंदाज़ करके की गई शिक्षक की नियुक्ति को मान ली गई मंज़ूरी के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाई स्कूल) (शिक्षकों की भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 1978' के नियम 10(5)(iii) के तहत 'मान ली गई मंज़ूरी' (Deemed Approval) के प्रावधान का इस्तेमाल उस शिक्षक की नियुक्ति को वैध बनाने के लिए नहीं किया जा सकता, जो पद से जुड़ी अनिवार्य आरक्षण शर्तों का पालन किए बिना की गई।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“'मान ली गई मंज़ूरी' के प्रावधान का इस्तेमाल ऐसी नियुक्ति को वैध बनाने के लिए नहीं किया जा सकता, जो शुरू में ही भर्ती और...

कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने महिपालपुर में जलभराव और ट्रैफ़िक जाम को लेकर एजेंसियों को फटकार लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के महिपालपुर इलाके में लगातार हो रहे जलभराव और ट्रैफ़िक जाम को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI), दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) और अन्य एजेंसियों को फटकार लगाई। [2026 LiveLaw (Del) 881]जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने कहा कि कई बैठकों और "बहुत ज़्यादा कागज़ी कार्रवाई" के बावजूद, इस समस्या को हल करने के लिए कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं की गई और न ही कोई समय-सीमा तय की गई।बेंच ने कहा कि एयरपोर्ट के पास और गुरुग्राम...

परिवार की पसंद के व्यक्ति से शादी करने के दबाव का सामने कर रही महिला वकील को हाईकोर्ट ने दी सुरक्षा

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को 26 साल की महिला वकील को सुरक्षा देने का निर्देश दिया। महिला ने आरोप लगाया कि परिवार द्वारा चुने गए व्यक्ति से शादी करने से इनकार करने पर उसे माता-पिता और रिश्तेदारों से धमकियां मिल रही है, उस पर दबाव डाला जा रहा है और उसके मामलों में दखल दिया जा रहा है। [2026 LiveLaw (Del) 875]जस्टिस सौरभ बनर्जी ने महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। महिला ने अपनी जान, व्यक्तिगत आज़ादी और सम्मान की सुरक्षा की मांग की।बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली (BCD) में रजिस्टर्ड महिला ने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1988 की अपील में 6,290 दिनों की देरी माफ़ करने से इनकार किया, कहा- वकील से संपर्क टूटना देरी माफ़ करने का आधार नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1988 में दायर अपील बहाल करने की मांग में 6,290 दिनों (यानी 17 साल से ज़्यादा) की देरी को माफ़ करने से इनकार किया। यह अपील 2002 में सुनवाई आगे न बढ़ाने (Non-Prosecution) के कारण खारिज कर दी गई थी। [2026 LiveLaw (Del) 874]जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने कहा कि वकील से संपर्क टूट जाना इतनी लंबी देरी को माफ़ करने का आधार नहीं हो सकता और मुक़दमा करने वाला व्यक्ति केस को आगे बढ़ाने की पूरी ज़िम्मेदारी अपने पुराने वकील पर नहीं डाल सकता।कोर्ट ने कहा कि मुक़दमा करने वाले का यह तर्क कि उसका...

सर्जरी से पहले गर्भावस्था शुरू होने के कारण नसबंदी के बाद पैदा हुए बच्चे के लिए कोई मुआवज़ा नहीं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें नसबंदी की प्रक्रिया फेल होने के आरोप पर मेडिकल लापरवाही के लिए मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया गया। कोर्ट ने माना कि महिला की गर्भावस्था सर्जरी से पहले ही शुरू हो गई। [2026 LiveLaw (MP) 378]जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया:"इसलिए ट्रायल कोर्ट ने मामले के तथ्यों और सबूतों को सही ढंग से समझा और माना कि वादी (महिला) 04.07.2004 को हुए ऑपरेशन से पहले ही गर्भवती हो गई। इस प्रकार, यह आरोप साबित नहीं होता कि ऑपरेशन फेल...

असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी गई: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि नियुक्त व्यक्ति ने अपनी पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी थी, जबकि उस बात का उसकी योग्यता या चयन पर कोई असर नहीं है।कोर्ट ने कहा कि ऐसी जानकारी न देने पर नियुक्ति तभी रद्द की जा सकती है, जब जानकारी न देने और नियुक्ति मिलने के बीच कोई साफ़ और सीधा संबंध हो।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,"असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि...

FDR में रखे मुआवज़े को जारी करने से मना करने से पहले MACT को दावेदार की ज़रूरत पर विचार करना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) फिक्स्ड डिपॉज़िट में रखे मुआवज़े को जारी करने की मांग वाली अर्जियों को बिना सोचे-समझे खारिज नहीं कर सकते। उन्हें यह तय करने से पहले कि रकम जारी की जानी चाहिए या नहीं, दावेदारों की वास्तविक ज़रूरतों पर विचार करना चाहिए।जस्टिस अनीश दयाल ने कहा कि MACT के अधिकार क्षेत्र में यह नहीं आता कि वे उस दावेदार द्वारा बताए गए कारणों की "गहराई से जांच" करें जो पहले से ही कोर्ट द्वारा मंज़ूर और कन्फर्म किए गए मुआवज़े को जारी करने की मांग कर...

सुप्रीम कोर्ट परिसर में व्यक्ति के साथ मारपीट करने और उसका वीडियो फैलाने का मामला: हाईकोर्ट ने आरोपियों को जारी समन आदेश बरकरार रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने उन दो लोगों के खिलाफ समन रद्द करने से इनकार किया, जिन पर सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक व्यक्ति के साथ मारपीट और बदसलूकी करने और बाद में इस घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर फैलाने का आरोप है।जस्टिस मधु जैन को आदेश में कोई स्पष्ट गैर-कानूनी बात, मनमानी या कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं मिला, जिसके कारण आदेश में दखल देने की ज़रूरत हो। इसलिए उन्होंने दोनों आरोपियों की याचिका खारिज की।यह घटना 30 जनवरी को हुई। शिकायत के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में शिकायतकर्ता के...

S.144 BNSS | विवादित वैवाहिक रिश्ते के लिए ट्रायल में सबूत की ज़रूरत: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गुज़ारा-भत्ता की कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि गुज़ारा-भत्ता (मेंटेनेंस) की कार्यवाही तब रद्द नहीं की जा सकती, जब पार्टियों के बीच कथित वैवाहिक रिश्ते की प्रकृति का पता लगाने के लिए ट्रायल में सबूत की ज़रूरत हो।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने कहा,"हालांकि शादी की तारीखों और जगहों के बारे में अलग-अलग कार्यवाहियों में प्रतिवादी (रेस्पॉन्डेंट) के विरोधाभासी बयानों से शादी के तथ्य पर कुछ संदेह पैदा होता है, लेकिन यह स्थापित कानून है कि BNSS की धारा 144 के तहत कार्यवाही में पति-पत्नी जैसे रिश्ते को साबित करना ही काफी है और...

जजों के साथ बदसलूकी के लिए अवमानना ​​का सामना कर रहे व्यक्ति के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को आदेश दिया कि वह उस व्यक्ति के खिलाफ इंटरपोल के ज़रिए 'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी करे, जिस पर जजों को धमकाने और उनके खिलाफ अपमानजनक बातें कहने के आरोप में आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही चल रही है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब उन्हें पता चला कि अवमानना ​​के आरोपी - अदीश्वर सिंघल - का पता अभी नहीं चल पा रहा है, जबकि उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए जा चुके हैं।यह आदेश 18 सितंबर को तब...