हाईकोर्ट

आउटसोर्स कर्मचारी भी गोपनीय जानकारी लीक नहीं कर सकते, आधिकारिक गोपनीयता कानून लागू न होने पर भी जिम्मेदारी बरकरार: उत्तराखंड हाईकोर्ट
आउटसोर्स कर्मचारी भी गोपनीय जानकारी लीक नहीं कर सकते, आधिकारिक गोपनीयता कानून लागू न होने पर भी जिम्मेदारी बरकरार: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही किसी आउटसोर्स कर्मचारी पर आधिकारिक गोपनीयता कानून के प्रावधान सीधे लागू न होते हों, फिर भी उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह विभाग की संवेदनशील और गोपनीय जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा न करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जिम्मेदारी सरकारी विभाग में कार्यरत नियमित और आउटसोर्स, दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होती है।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड के...

तलाकशुदा पत्नी को पति की मृत्यु के बाद भी मिल सकता है भरण-पोषण, लेकिन बढ़ोतरी की मांग नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
तलाकशुदा पत्नी को पति की मृत्यु के बाद भी मिल सकता है भरण-पोषण, लेकिन बढ़ोतरी की मांग नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि तलाकशुदा पत्नी अपने पूर्व पति की मृत्यु के बाद भी उसके संपत्ति-उत्तराधिकारियों या संपत्ति से भरण-पोषण प्राप्त करने की हकदार रह सकती है, यदि उसके पक्ष में पहले से भरण-पोषण का वैध आदेश या डिक्री मौजूद हो। हालांकि, पति की मृत्यु के बाद वह उस भरण-पोषण राशि में बढ़ोतरी की मांग नहीं कर सकती।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने यह फैसला एक महिला की याचिका पर सुनाते हुए दिया। महिला ने अपने पूर्व पति की मृत्यु के बाद उसकी...

भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी की जीत को ममता बनर्जी ने दी चुनौती: हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल
भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी की जीत को ममता बनर्जी ने दी चुनौती: हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्वाचन को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। इस संबंध में मंगलवार को चुनाव याचिका दायर की गई। ममता बनर्जी स्वयं हाइकोर्ट परिसर पहुंचीं और याचिका दाखिल की।यह विवाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जिसमें शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की थी। भवानीपुर को लंबे समय से ममता बनर्जी का...

सिर्फ FIR के आधार पर पायलट का लाइसेंस निलंबित नहीं कर सकता DGCA, कारण बताओ नोटिस जरूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट
सिर्फ FIR के आधार पर पायलट का लाइसेंस निलंबित नहीं कर सकता DGCA, कारण बताओ नोटिस जरूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल FIR दर्ज होने या फर्जी दस्तावेजों के आरोप सामने आने के आधार पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) किसी पायलट का लाइसेंस निलंबित नहीं कर सकता। ऐसा कदम उठाने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस देना और सुनवाई का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है।जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की खंडपीठ एक पायलट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 12 मार्च 2011 के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके जरिए DGCA ने उसका एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट...

NEET पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची कंपनी
NEET पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची कंपनी

NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देते हुए मैसेजिंग मंच टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। केंद्र ने 22 जून तक भारत में टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया। सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और उससे जुड़े संगठित गिरोहों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया।मामले का उल्लेख अवकाशकालीन पीठ के समक्ष किया गया, जिस पर जस्टिस तेजस कारिया ने तत्काल सुनवाई की अनुमति दी।यह कार्रवाई राष्ट्रीय परीक्षा...

समय से पहले दायर चेक बाउंस शिकायत वापस लेने के बाद नई शिकायत वैध, कार्यवाही रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार
समय से पहले दायर चेक बाउंस शिकायत वापस लेने के बाद नई शिकायत वैध, कार्यवाही रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि चेक बाउंस मामले में पहले दायर की गई शिकायत समय से पूर्व होने के कारण वापस ले ली गई हो तो उसके बाद दायर की गई नई शिकायत को केवल इस आधार पर समय-सीमा से बाहर नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर एक आरोपी की याचिका खारिज की, जिसमें उसने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने कहा कि समय से पहले दायर शिकायत वापस लेने के बाद प्रस्तुत की गई नई शिकायत को विलंबित नहीं माना जा...

जजों पर प्रभाव का दावा करके पैसे ऐंठने से न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा कम होता है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया
जजों पर प्रभाव का दावा करके पैसे ऐंठने से न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा कम होता है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को रेगुलर ज़मानत देने से इनकार किया। उस पर एक धोखाधड़ी की योजना में शामिल होने का आरोप है, जिसमें हाईकोर्ट के जजों पर प्रभाव डालकर कोर्ट से अपने पक्ष में आदेश दिलाने के झूठे बहाने से एक मुक़दमेबाज़ से बड़ी रकम ऐंठी गई थी।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने कहा,"यह कोर्ट याचिकाकर्ता पर लगे उन खास आरोपों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता, जिनमें कहा गया कि वह पैसे इकट्ठा करने में सक्रिय रूप से शामिल है और शिकायतकर्ता को बार-बार भरोसा दिलाता है कि सह-आरोपियों द्वारा...

प्राइवेट स्कूल में कर्मचारी को शिक्षा निदेशक की मंज़ूरी के बिना नौकरी से हटाने का आदेश अमान्य: दिल्ली हाईकोर्ट
प्राइवेट स्कूल में कर्मचारी को शिक्षा निदेशक की मंज़ूरी के बिना नौकरी से हटाने का आदेश अमान्य: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला डिवीज़न बेंच ने कहा कि नौकरी से हटाने का आदेश अमान्य है, क्योंकि इसने दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 8(2) का उल्लंघन किया। इस धारा के तहत प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूल के किसी कर्मचारी को नौकरी से हटाने की सज़ा देने से पहले शिक्षा निदेशक की मंज़ूरी लेना ज़रूरी है।पृष्ठभूमि की जानकारीअपीलकर्ता 'साई मेमोरियल गर्ल्स स्कूल' (एक प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाला स्कूल) में असिस्टेंट टीचर के तौर पर काम कर रही थी। उसके खिलाफ...

टेंडर का हिस्सा न होने वाली शर्त के आधार पर बोली लगाने वाले को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
'टेंडर का हिस्सा न होने वाली शर्त के आधार पर बोली लगाने वाले को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता': पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी बोली लगाने वाले को ऐसी शर्त के आधार पर दंडित, अयोग्य या ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता जो मूल टेंडर नोटिस (NIT) का हिस्सा नहीं थी। कोर्ट ने दोहराया कि राज्य के अधिकारियों को टेंडर की शर्तों के अनुसार ही सख्ती से काम करना होता है और वे मनमाने ढंग से उनसे हट नहीं सकते।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीजन बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में बिहार राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम (BSFC), कैमूर के जिला प्रबंधक द्वारा 29.12.2017 को जारी...

सज़ा के बदले सुधार पर ज़ोर: दिल्ली हाईकोर्ट ने 1993 के बोबाज़ार ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे व्यक्ति को समय से पहले किया रिहा
'सज़ा के बदले सुधार पर ज़ोर': दिल्ली हाईकोर्ट ने 1993 के बोबाज़ार ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे व्यक्ति को समय से पहले किया रिहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने सज़ा के मामले में सुधारवादी नज़रिया अपनाते हुए 1993 के बोबाज़ार ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे मोहम्मद राशिद खान को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली सज़ा के बदले सज़ा देने (retributive) के सिद्धांत से आगे बढ़कर सुधारवादी नज़रिए को अपना चुकी है।कोर्ट ने कहा,"असल में, यह मामला याचिकाकर्ता मोहम्मद राशिद खान की समय से पहले रिहाई से जुड़ा है। वह 3 मार्च 1993 से यानी लगभग 33 साल से न्यायिक हिरासत में है। उसे...

पति के घर छोड़ने के बाद पत्नी ननद की प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा नहीं बनाए रख सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
पति के घर छोड़ने के बाद पत्नी ननद की प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा नहीं बनाए रख सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई महिला अपनी ननद की प्रॉपर्टी पर तब तक कब्ज़ा नहीं बनाए रख सकती, जब उसका पति—जो वहां इजाज़त से रह रहा था—वह जगह खाली कर दे।ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा,"...उसके पति एमके को ही उस प्रॉपर्टी में रहने की इजाज़त दी गई और शादी के बाद वह सिर्फ़ अपने पति के साथ परिवार के सदस्य के तौर पर वहां रहने आई। एक बार जब एमके का अधिकार खत्म हो गया और उसने वह जगह खाली की तो अपील करने वाली महिला की स्थिति किसी घुसपैठिए से बेहतर नहीं रह जाती और उसे...

क्या लिव-इन कपल्स कानूनी शर्तें पूरी किए बिना पुलिस सुरक्षा मांग सकते हैं?: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का जवाब
क्या लिव-इन कपल्स कानूनी शर्तें पूरी किए बिना पुलिस सुरक्षा मांग सकते हैं?: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का जवाब

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक कपल की याचिका खारिज की। इस कपल ने अपने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर रिश्तेदारों द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने से सुरक्षा की मांग की। कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कानूनी रूप से मान्य शर्तों को पूरा किए बिना ऐसी सुरक्षा नहीं दी जा सकती। [2026 LiveLaw (PH) 196]जस्टिस संदीप मौदगिल ने गौर किया कि याचिकाकर्ता लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रह रहे थे, लेकिन याचिकाकर्ता नंबर 2 (लड़का) की उम्र अभी शादी के लायक नहीं हुई। वह बाद में याचिकाकर्ता नंबर 1 (लड़की) से शादी...

परीक्षा तभी रद्द होगी जब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो, केवल संदिग्ध उम्मीदवारों को अलग किया जाए: गुवाहाटी हाईकोर्ट
परीक्षा तभी रद्द होगी जब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो, केवल संदिग्ध उम्मीदवारों को अलग किया जाए: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना तभी उचित है जब उसकी निष्पक्षता प्रणालीगत स्तर पर प्रभावित हो और दोषी तथा निर्दोष उम्मीदवारों को अलग करना संभव न हो। यदि संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की जा सकती है, तो उन्हें अलग कर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।चीफ़ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एन.एफ. रेलवे में चीफ लॉ असिस्टेंट पद की विभागीय पदोन्नति परीक्षा से जुड़े मामले में की। उत्तर कुंजी विवाद के बाद पुनर्मूल्यांकन कराया गया था,...

लोकायुक्त की एसपीई को RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की एमपी सरकार की अधिसूचना
लोकायुक्त की एसपीई को RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की एमपी सरकार की अधिसूचना

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन की स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (SPE) को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम से छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने राज्य सरकार की वर्ष 2011 की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसके तहत एसपीई को RTI कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने कहा कि एसपीई भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करती है और इसे RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत "खुफिया एवं सुरक्षा संगठन" नहीं माना...

देर से मिला न्याय, कमज़ोर हुआ लोकतंत्र: सुप्रीम कोर्ट की नाकामियों पर एक दशक का फ़ैसला
देर से मिला न्याय, कमज़ोर हुआ लोकतंत्र: सुप्रीम कोर्ट की नाकामियों पर एक दशक का फ़ैसला

लोकतंत्र के लिए एक ऐसा ज़ख्म जो उसे बर्दाश्त नहींभारतीय संवैधानिक न्याय-व्यवस्था में एक दुखद घटना बार-बार दोहराई जाती है। यह घटना 'उचित प्रक्रिया' (due process) का सम्मानजनक चोला पहनती है, कानूनी प्रक्रियाओं की पेचीदगियों में छिप जाती है और सालों बाद एक ऐसे फ़ैसले के रूप में सामने आती है, जो कानूनी तौर पर तो सही होता है, लेकिन लोकतांत्रिक नज़रिए से बेमतलब। इस दुखद घटना का एक नाम है: चुनावी और संवैधानिक विवादों में न्याय मिलने में देरी। इसका सबसे परेशान करने वाला पहलू यह नहीं है कि ऐसा होता है,...

पंजाब सरकार ने पत्रकार रत्तनदीप ढालीवाल की याचिका का किया विरोध, हाईकोर्ट में कहा- समय से पहले दायर की गई याचिका
पंजाब सरकार ने पत्रकार रत्तनदीप ढालीवाल की याचिका का किया विरोध, हाईकोर्ट में कहा- समय से पहले दायर की गई याचिका

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पत्रकार और यूट्यूबर रत्तनदीप सिंह ढालीवाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने उसका विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका समय से पहले दायर की गई और सुनवाई योग्य नहीं है।मामले की सुनवाई जस्टिस राजेश भारद्वाज की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जरनल मनींदरजीत सिंह बेदी ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता को अपने दावों के समर्थन में शपथपत्र दाखिल करने के लिए कहा गया।हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि शपथपत्र दाखिल किया...

पत्नी को जिंदा जलाकर दरवाजा बाहर से बंद करना हत्या की मंशा का स्पष्ट प्रमाण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरकरार रखी दोषसिद्धि
पत्नी को जिंदा जलाकर दरवाजा बाहर से बंद करना हत्या की मंशा का स्पष्ट प्रमाण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरकरार रखी दोषसिद्धि

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर ऐसी चोट पहुंचाई हो जो स्वाभाविक रूप से मृत्यु का कारण बन सकती है, तो केवल इस आधार पर हत्या का अपराध कम नहीं हो जाता कि पीड़ित की मौत कुछ दिनों बाद संक्रमण (सेप्टीसीमिया) के कारण हुई।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने आठ माह की गर्भवती पत्नी को मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जलाने वाले पति की हत्या के मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा।हालांकि, अदालत ने सुधारात्मक न्याय के सिद्धांत को ध्यान में...

DTC कंडक्टर को नौकरी से निकालना गलत: बिना कैश वेरिफ़िकेशन के टिकट दिए बिना किराया वसूलने का आरोप साबित नहीं होता - दिल्ली हाईकोर्ट
DTC कंडक्टर को नौकरी से निकालना गलत: बिना कैश वेरिफ़िकेशन के टिकट दिए बिना किराया वसूलने का आरोप साबित नहीं होता - दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया डिवीज़न बेंच ने कहा कि ज़रूरी दस्तावेज़ (जैसे लॉग बुक और पिछला सर्विस रिकॉर्ड) न देने और पैसे के हेरफेर को साबित करने के लिए कैश वेरिफ़िकेशन न होने से अनुशासनात्मक जांच गलत हो जाती है। इसलिए कंडक्टर को नौकरी में वापस बहाल किया जाना चाहिए और उसकी सर्विस की निरंतरता (continuity of service) बनी रहनी चाहिए।मामले की पृष्ठभूमिकर्मचारी जुलाई 1983 में दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) में डेली-रेटेड कंडक्टर के तौर पर शामिल हुआ।...

क्या स्पीकर अपनी मर्ज़ी से बहुमत वाली पार्टी के LoP के प्रस्ताव को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं? कलकत्ता हाईकोर्ट ने रिताब्रत बनर्जी की नियुक्ति पर उठाए सवाल
क्या स्पीकर अपनी मर्ज़ी से बहुमत वाली पार्टी के LoP के प्रस्ताव को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं? कलकत्ता हाईकोर्ट ने रिताब्रत बनर्जी की नियुक्ति पर उठाए सवाल

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को सवाल उठाया कि क्या पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बहुमत वाली राजनीतिक पार्टी द्वारा विपक्ष के नेता (LoP) के तौर पर प्रस्तावित नाम को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं और किसी दूसरे व्यक्ति को नियुक्त करने का आदेश दे सकते हैं।जस्टिस कृष्णा राव ने यह सवाल तब उठाया, जब वह बागी विधायक रिताब्रत बनर्जी को LoP के तौर पर मान्यता देने के स्पीकर के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। स्पीकर ने ममता बनर्जी के गुट के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय बनर्जी को...

बैंक अकाउंट में जमा धन खाताधारक की संपत्ति, बिना कानूनी आदेश अनिश्चितकाल तक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
बैंक अकाउंट में जमा धन खाताधारक की संपत्ति, बिना कानूनी आदेश अनिश्चितकाल तक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी नागरिक का बैंक अकाउंट केवल आंतरिक पत्राचार, पोर्टल अलर्ट या अनौपचारिक इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के आधार पर अनिश्चितकाल तक फ्रीज नहीं किया जा सकता, जब तक कि ऐसी कार्रवाई किसी वैधानिक अधिकार के तहत न की गई हो।जस्टिस नागेश भीमपाका की एकल पीठ ने कहा कि बैंक अकाउंट में जमा धन खाताधारक की संपत्ति है और खाते के संचालन पर रोक लगाना व्यक्ति के आजीविका के अधिकार, संपत्ति के अधिकार तथा उसके वैध धन तक पहुंच को प्रभावित करता है।अदालत ने कहा,“बैंक अकाउंट...