हाईकोर्ट

निष्पक्ष सुनवाई के लिए कॉल रिकॉर्ड ज़रूरी हों तो सिर्फ़ पीड़ित की प्राइवेसी के लिए उन्हें देने से मना नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर-लोकेशन की जानकारी मांगने वाली अर्ज़ी को "सिर्फ़ पीड़ित के प्राइवेसी के अधिकार के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, जब ये रिकॉर्ड मामले के सही फ़ैसले के लिए शुरुआती तौर पर ज़रूरी हों"।जस्टिस आलोक महरा ने कहा कि हालांकि आर्टिकल 21 के तहत आरोपी का निष्पक्ष सुनवाई और जांच का अधिकार और पीड़ित का प्राइवेसी का अधिकार, दोनों ही संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं। फिर भी ट्रायल कोर्ट को "इन दोनों अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा" और ऐसा करने के लिए...

पति का दावा- शादी के समय वह नशे में था: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की तलाक की अर्ज़ी
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की शादी खत्म करने की अपील खारिज की। व्यक्ति का दावा था कि उसकी शादी अमान्य है, क्योंकि 2008 में शादी की रस्में निभाते समय वह किसी नशीली दवा (सेडेटिव) के असर में था।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीजन बेंच ने कहा कि पति का दावा ज़्यादा से ज़्यादा हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 12(1)(c) के तहत आ सकता है। यह धारा कहती है कि अगर शादी के लिए सहमति ज़बरदस्ती या धोखाधड़ी से ली गई हो, तो शादी को 'वॉयडएबल' (रद्द करने योग्य) माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में धोखाधड़ी...

Electronic Evidence | दिल्ली हाईकोर्ट ने कानूनी सहायता पाने वालों के लिए मुफ़्त फ़ोरेंसिक मदद की मांग वाली PIL पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक PIL पर नोटिस जारी किया। इस PIL में कानूनी सहायता पाने के हकदार लोगों को मुफ़्त फ़ोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद देने के लिए एक सिस्टम बनाने की मांग की गई, ताकि वे 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023' (BSA) की धारा 63 के तहत इलेक्ट्रॉनिक-सबूत सर्टिफ़िकेशन की ज़रूरतों को पूरा कर सकें।चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने नेशनल लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (NALSA) और केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय से जवाब मांगा।ज़ीशान अख़लाक और अमन भिड़े द्वारा...

NEET-UG 2026: NTA ने पेश की ओरिजिनल OMR शीट, सिग्नेचर की पुष्टि के बाद हाईकोर्ट ने खारिज की OMR में गड़बड़ी से जुड़ी याचिका
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने NEET UG कैंडिडेट की एक याचिका खारिज की। इस याचिका में कैंडिडेट ने अपनी ओरिजिनल फिजिकल OMR आंसर शीट की तुलना ऑफिशियल पोर्टल पर अपलोड की गई स्कैन की हुई OMR शीट से करने की मांग की थी। यह याचिका तब खारिज की गई, जब कैंडिडेट ने पुष्टि की कि NTA की ओर से पेश की गई ओरिजिनल OMR शीट वास्तव में उसी की थी। [2026 LiveLaw (MP) 330]कैंडिडेट का मुख्य मुद्दा यह था कि "क्या फिजिकल OMR शीट और ERP के रेफरेंस कॉलम में रेस्पॉन्डेंट्स द्वारा अपलोड की गई डिजिटल OMR शीट एक जैसी हैं या नहीं"।...

वेश्यालय में ग्राहक के तौर पर जाने वाले व्यक्ति पर अनैतिक व्यापार रोकथाम कानून के तहत मुकदमा नहीं चल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वेश्यालय में ग्राहक के तौर पर जाने वाले व्यक्ति पर केवल पैसे देकर यौन संतुष्टि प्राप्त करने के आधार पर अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 की धारा 3, 5 और 7 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत संतुष्टि के लिए किसी यौनकर्मी को पैसे देना अधिनियम के तहत वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से किसी व्यक्ति को उपलब्ध कराने या वेश्यावृत्ति के व्यावसायिक शोषण के समान नहीं है।जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी ने एक आरोपी की याचिका स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ लंबित...

तलाक के बाद अलग रहने से वैवाहिक अपराध का मामला खत्म नहीं हो सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर वैवाहिक अपराध से जुड़े आपराधिक मामले को खत्म नहीं किया जा सकता कि पति-पत्नी का तलाक हो चुका है और दोनों अब अलग-अलग रह रहे हैं। अदालत ने कहा कि वैवाहिक विवाद में यदि अपराध के आरोप लगाए गए हैं तो उनका समाधान कानून के तहत ही होना चाहिए।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने पति की ओर से दायर वह याचिका खारिज की, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत दर्ज FIR और उसके आधार पर चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई।मामले में पति-पत्नी की शादी...

लंबी सेवा और बाद की मान्यता से अवैध नियुक्ति वैध नहीं होती, सरकारी खजाने से वेतन का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सहायता प्राप्त संस्थान में लंबे समय तक सेवा करने या बाद में प्रशासनिक स्तर पर मिली मान्यता के आधार पर कर्मचारी सरकारी खजाने से वेतन का अधिकार नहीं मांग सकता, यदि सक्षम प्राधिकारी ने मूल नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था और नए सिरे से चयन का निर्देश दिया था।जस्टिस इरशाद अली ने कहा कि सरकारी धन से वेतन के भुगतान का आदेश देने से पहले यह साबित होना जरूरी है कि जिस नियुक्ति के आधार पर वेतन का दावा किया जा रहा है, वह कानूनी रूप से वैध थी। केवल लंबे समय तक...

अधिकारी का नामित प्रतिनिधि चयन समिति में नहीं आया तो चयन रद्द नहीं होगा, इसी आधार पर वेतन भी नहीं रोका जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा चयन समिति में अपना नामित प्रतिनिधि नहीं भेजना चयन प्रक्रिया को अवैध नहीं बनाता। केवल इस आधार पर चयनित कर्मचारी का वेतन रोका नहीं जा सकता।जस्टिस इरशाद अली ने 1984 के उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल नियमों का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने चयनित कर्मचारी को वेतन देने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि चयन समिति के बहुमत सदस्यों ने विधि के अनुसार निर्णय लिया है तो केवल अधिकारी के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति से चयन अमान्य नहीं...

'कोर्ट यह तय नहीं कर सकता कि सावरकर बहादुर थे या कायर': राहुल गांधी के ट्रायल पर रोक के लिए हाईकोर्ट में याचिका
पुणे स्पेशल MP/MLA कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि के मामले में दखल देने की पंकज फड़नीस की अर्जी खारिज की थी। यह मामला दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर की कथित तौर पर बदनामी करने से जुड़ा है। इसके बाद फड़नीस ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। उनका दावा है कि स्पेशल कोर्ट अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के मुद्दों पर विचार कर रही है और यह तय करने की कोशिश कर रही है कि सावरकर बहादुर थे या कायर।पेशे से प्रोफेसर फड़नीस, जिनका दावा है कि उन्हें सावरकर के जीवन के बारे में...

POCSO Act बच्चे से क्रॉस एग्जामिनेशन पर रोक नहीं लगाता, लेकिन आक्रामक सवालों और चरित्र हनन से सुरक्षा जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO Act के तहत बाल गवाह से जिरह करने पर बचाव पक्ष को रोक नहीं है लेकिन मुकदमे के दौरान बच्चे को आक्रामक सवालों और चरित्र हनन से सुरक्षा देना जरूरी है।अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे की गरिमा की रक्षा का मतलब यह नहीं है कि बचाव पक्ष को उससे सवाल पूछने या अपने बचाव में जरूरी सुझाव देने से पूरी तरह रोक दिया जाए। जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने दुष्कर्म और POCSO Act के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा...

हम कैसे निगरानी करेंगे? बेघर और तोड़फोड़ से विस्थापित लोगों को SIR में शामिल करने की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बेघर लोगों और तोड़फोड़ अभियान के कारण विस्थापित हुए लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की मांग वाली जनहित याचिका पर बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि हर जिम्मेदारी अदालत पर नहीं डाली जा सकती और वह नीति के क्रियान्वयन की निगरानी नहीं करेगी।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि संबंधित संवैधानिक संस्थाओं को अपने संवैधानिक दायरे में इस समस्या का समाधान करने के लिए...

राज्य द्वारा वकीलों की फीस रोकना गलत, लेकिन 4.8 करोड़ की फीस वसूली के लिए रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से अपने मामलों की पैरवी करने वाले वकीलों की पेशेवर फीस का भुगतान नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। हालांकि करीब 4.8 करोड़ रुपये की फीस और उस पर ब्याज की मांग को लेकर दायर चार रिट याचिकाओं को अदालत ने सुनवाई योग्य नहीं माना।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने कहा कि वकील और मुवक्किल के बीच पेशेवर फीस का विवाद सामान्य तौर पर अदालत में नहीं पहुंचना चाहिए। ऐसे विवादों को आपसी बातचीत, मध्यस्थता या सुलह के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाना...

बाल संरक्षण का मतलब किशोरावस्था को अपराध बनाना नहीं: 17 वर्षीय लड़की और 21 वर्षीय युवक के संबंध पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 17 वर्षीय लड़की और करीब 21 वर्षीय युवक के बीच प्रेम संबंध से जुड़े मामले में POCSO Act के तहत दर्ज FIR और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि बाल संरक्षण का उद्देश्य किशोरावस्था को अपराध की श्रेणी में डालना नहीं हो सकता।जस्टिस आलोक महरा ने कहा कि 17 वर्षीय लड़की और 21 वर्षीय युवक के बीच सहमति से बने संबंधों को यौन हमले के बराबर मानना महत्वपूर्ण अंतर को खत्म करता है और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत स्पष्ट मनमानी की स्थिति पैदा करता है।अदालत रामनगर...

FIR दर्ज होने से पुलिसकर्मी की विभागीय जांच नहीं रुकेगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ उसी घटना को लेकर FIR दर्ज होने मात्र से विभागीय जांच पर रोक नहीं लगती। आपराधिक मामला और विभागीय कार्रवाई अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हैं और दोनों समानांतर चल सकते हैं।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की पीठ ने एक सब-इंस्पेक्टर की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। अधिकारी पर पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपी बदन सिंह उर्फ बड्डो के फरार होने के मामले में लापरवाही का आरोप था।अधिकारी पांच पुलिसकर्मियों की एस्कॉर्ट टीम का प्रभारी...

विवाह संबंध कायम होने की बात अभियोजन सामग्री में हो तो धारा 376 प्रथम दृष्टया लागू नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोप में आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति को राहत देते हुए उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत लगाए गए आरोप रद्द किया।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि अभियोजन की अपनी सामग्री से यह सामने आ रहा है कि संबंधित अवधि में आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच पति-पत्नी का संबंध कायम था। ऐसे में प्रथम दृष्टया धारा 376 के तहत दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। अदालत ने यह फैसला आरोपी की ओर से आरोप तय किए जाने को चुनौती देते हुए दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनाया।...

पत्नी का लगातार झगड़ना, पति के माता-पिता का विरोध और शारीरिक संबंध से इनकार 'क्रूरता': दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी का लगातार झगड़ना, पति द्वारा अपने माता-पिता की मदद का विरोध, अलग रहने के बावजूद विवाद जारी रखना और शारीरिक संबंधों से इनकार करना, परिस्थितियों के आधार पर वैवाहिक क्रूरता माना जा सकता है।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की खंडपीठ ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा पति को दिए गए तलाक को बरकरार रखा। तलाक हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता के आधार पर दिया गया था।पति ने आरोप लगाया था कि शादी की शुरुआत से ही पत्नी उससे और...

शादी के झूठे वादे पर सहमति से बने संबंध तभी अपराध, जब सहमति झूठे वादे से प्रभावित हो: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि शादी का झूठा वादा कर किसी महिला को यौन संबंध के लिए राजी करना अपराध हो सकता है लेकिन हर सहमति से बने संबंध को बाद में शादी के वादे के आरोप के आधार पर आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।अदालत को यह जांचना होगा कि महिला की सहमति वास्तव में शादी के झूठे वादे से प्रभावित हुई, या संबंध दोनों वयस्कों की स्वतंत्र सहमति से बने थे।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने दुष्कर्म और आपराधिक धमकी के आरोप में जेल में बंद एक व्यक्ति को नियमित जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड...

जीविका का अधिकार अधिसूचित वेंडिंग जोन के बाहर सड़क किनारे कारोबार की अनुमति नहीं देता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने सड़क किनारे वाहन मरम्मत की अस्थायी दुकान चलाने वाले व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जीविका कमाने का अधिकार किसी व्यक्ति को ऐसे स्थान पर दुकान या अस्थायी ढांचा लगाने का असीमित अधिकार नहीं देता, जिसे राज्य सरकार ने वेंडिंग जोन के रूप में अधिसूचित नहीं किया।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(छ) के तहत जीविका कमाने के अधिकार से मनमाने ढंग से वंचित नहीं किया जा सकता लेकिन यह अधिकार निरंकुश और असीमित भी नहीं है। जहां राज्य सरकार ने विधिवत अधिसूचना...

महिला की आधी रात में गिरफ्तारी कानून के खिलाफ, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर NDPS मामला रद्द नहीं होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार करने के लिए विशेष परिस्थितियों में संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति जरूरी है। ऐसी अनुमति के बिना आधी रात में महिला की गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन है।हालांकि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई इस गंभीर कानूनी चूक के आधार पर अकेले NDPS मामले की FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने एक महिला की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। महिला के खिलाफ मादक...

लिव-इन रिलेशनशिप शादी जैसा ही, अपनी मर्ज़ी से साथ रहने वाले बालिग़ों को पुलिस सुरक्षा का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप शादी के समान ही होते हैं, भले ही उन्हें कानूनी तौर पर शादी न माना गया हो। ऐसे रिश्तों में रहने वाले बालिग़ों को पुलिस सुरक्षा पाने का अधिकार है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों को भारत के संविधान के आर्टिकल 19 और 21 के तहत आज़ादी, जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार मिलते हैं।कोर्ट ने कहा कि अपनी मर्ज़ी से साथ रहने वाले बालिग़ों को अपना पार्टनर चुनने और उनके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का पूरा अधिकार है, जिसमें...
