हाईकोर्ट

हद पार मत कीजिए: हाईकोर्ट ने Republic TV से अनिल अंबानी से जुड़े मामलों की कवरेज में नरमी बरतने को कहा
'हद पार मत कीजिए': हाईकोर्ट ने Republic TV से अनिल अंबानी से जुड़े मामलों की कवरेज में नरमी बरतने को कहा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को Republic TV और उसके एडिटर-इन-चीफ़ अर्णब गोस्वामी से मौखिक रूप से कहा कि वे उद्योगपति अनिल अंबानी और Reliance ग्रुप की कंपनियों से जुड़ी जाँच की रिपोर्टिंग करते समय अपमानजनक विशेषणों का इस्तेमाल करने से बचें।चैनल के ख़िलाफ़ रोक लगाने की मांग करने वाले अंबानी के मानहानि के मुक़दमे की सुनवाई करते हुए जस्टिस मिलिंद जाधव ने हालिया कवरेज में इस्तेमाल की गई सनसनीखेज़ टैगिंग और तीखी टिप्पणी के ख़िलाफ़ कड़ी टिप्पणियां कीं।जज ने चैनल की तरफ़ से पेश वकील से कहा,"अपनी बयानबाज़ी...

बसों में एक ही दरवाजा यात्रियों की जान के लिए खतरा: हाईकोर्ट ने दो दरवाजे अनिवार्य करने का आदेश दिया
बसों में एक ही दरवाजा यात्रियों की जान के लिए खतरा: हाईकोर्ट ने दो दरवाजे अनिवार्य करने का आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यात्री सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य की सभी स्टेज कैरिज और टूरिस्ट बसों में अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार अनिवार्य करने का निर्देश दिया।अदालत ने क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण को 45 दिनों के भीतर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि बसों में एक ही दरवाजा होना यात्रियों की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता है। खासकर आग या दुर्घटना की स्थिति में।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“यह अत्यंत खेदजनक स्थिति है कि अनेक वातानुकूलित...

बरेली नमाज़ विवाद—बड़े जमावड़े पर रोक, शांति भंग हुई तो राज्य कार्रवाई को स्वतंत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बरेली नमाज़ विवाद—बड़े जमावड़े पर रोक, शांति भंग हुई तो राज्य कार्रवाई को स्वतंत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में, जिसमें एक व्यक्ति को अपने घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के आरोप पर पहले 24 घंटे सुरक्षा प्रदान की गई थी, अब यह निर्देश दिया है कि वह अपने आवास पर बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र न करे।यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने 25 मार्च को पारित किया।मामला बरेली निवासी हसीन खान से जुड़ा है, जिन्हें पहले एक अन्य पीठ द्वारा सुरक्षा दी गई थी। हालांकि, बाद में बेंच के पुनर्गठन के बाद मामले की सुनवाई नई पीठ के समक्ष हुई।सुनवाई के...

गुरु ग्रंथ साहिब के गायब सरूप मामले में SGPC के पूर्व सचिव को अग्रिम जमानत: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
गुरु ग्रंथ साहिब के 'गायब' सरूप मामले में SGPC के पूर्व सचिव को अग्रिम जमानत: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व सचिव को 328 पवित्र 'सरूप' (गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियों के कथित रूप से गायब होने के मामले में अग्रिम जमानत दे दी है।अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपों से यह प्रतीत नहीं होता कि याचिकाकर्ता किसी गबन या धार्मिक ग्रंथों के अपमान में शामिल था।जस्टिस मनीषा बत्रा की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप मुख्यतः लापरवाही से जुड़े हैं, न कि किसी आपराधिक मंशा या हेराफेरी से। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कथित...

AGMUT कैडर के IAS अधिकारियों पर गृह मंत्रालय को कार्रवाई का अधिकार : दिल्ली हाईकोर्ट
AGMUT कैडर के IAS अधिकारियों पर गृह मंत्रालय को कार्रवाई का अधिकार : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि गृह मंत्रालय AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के IAS अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और दंड देने के लिए विधिक रूप से सक्षम है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने कहा कि संयुक्त कैडर प्राधिकरण के प्रतिनिधि के रूप में गृह मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई को कानून के अधिकार से बाहर नहीं माना जा सकता।यह फैसला उस याचिका पर आया, जिसमें केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश...

एकतरफा भरण-पोषण आदेश को चुनौती में केवल नोटिस न मिलने का मुद्दा उठेगा, मेरिट पर बहस नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एकतरफा भरण-पोषण आदेश को चुनौती में केवल नोटिस न मिलने का मुद्दा उठेगा, मेरिट पर बहस नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भरण-पोषण मामले में पारित एकतरफा अंतरिम आदेश को चुनौती देते समय पक्षकार मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर बहस नहीं कर सकता।कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी चुनौती का दायरा केवल यह साबित करने तक सीमित होता है कि उसे नोटिस नहीं मिला था या उसके अनुपस्थित रहने का पर्याप्त कारण था।यह टिप्पणी जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने पति द्वारा दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की।मामले में ट्रायल कोर्ट ने घरेलू हिंसा कानून के तहत पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण के...

अनीता आडवाणी का दावा खारिज, राजेश खन्ना संग संबंध को विवाह मानने से इनकार: बॉम्बे हाईकोर्ट
अनीता आडवाणी का दावा खारिज, राजेश खन्ना संग संबंध को 'विवाह' मानने से इनकार: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने संबंध को विवाह का दर्जा देने की मांग की थी।जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने अनीता आडवाणी द्वारा दायर प्रथम अपील को खारिज करते हुए 2017 में मुंबई के डिंडोशी सिविल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सिविल कोर्ट ने उनके मुकदमे को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था।अनीता आडवाणी का दावा था कि वह राजेश खन्ना के साथ लगभग एक दशक तक लिव-इन संबंध में रहीं और वर्ष 2012 में उनके निधन तक...

मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को भी मिलेगा इलाज खर्च का हक: हाईकोर्ट ने नियम में किया बदलाव
मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को भी मिलेगा इलाज खर्च का हक: हाईकोर्ट ने नियम में किया बदलाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा उपस्थिति) नियम 2011 के नियम 16 की व्याख्या को व्यापक बनाते हुए कहा कि अब मृत या असमर्थ कर्मचारी के कानूनी वारिस भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) का दावा कर सकेंगे।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नियम 16 को रीड डाउन करते हुए इस तरह पढ़ा जाना चाहिए कि यदि लाभार्थी (बेनेफिशियरी) की मृत्यु हो जाए या वह दावा करने में असमर्थ हो, तो उसके कानूनी वारिस भी दावा प्रस्तुत कर...

शराब व्यक्तिगत पसंद, लेकिन सार्वजनिक असुविधा नहीं—रिक्रिएशन क्लब का लाइसेंस रद्द: मद्रास हाईकोर्ट
'शराब व्यक्तिगत पसंद, लेकिन सार्वजनिक असुविधा नहीं'—रिक्रिएशन क्लब का लाइसेंस रद्द: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मनोरंजन क्लब को दिए गए शराब लाइसेंस (FL2) को रद्द करते हुए कहा है कि शराब पीना भले ही व्यक्तिगत पसंद हो, लेकिन इससे किसी इलाके के निवासियों को असुविधा या खतरा नहीं होना चाहिए।जस्टिस एन. सतीश कुमार और जस्टिस एम. जोतिरामन की खंडपीठ मदुरै के थंडलाई गांव स्थित PONS Recreation Club को दिए गए लाइसेंस के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह इलाका जल्लिकट्टू जैसी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है और स्थानीय लोग...

समन न मानने पर केजरीवाल की बरी पर ED की चुनौती, आबकारी नीति मामले में नोटिस जारी: दिल्ली हाईकोर्ट
समन न मानने पर केजरीवाल की बरी पर ED की चुनौती, आबकारी नीति मामले में नोटिस जारी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन का पालन न करने के मामलों में बरी किए जाने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।यह आदेश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने पारित किया। अदालत ने केजरीवाल से जवाब मांगा है और मामले को 29 अप्रैल को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही, ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड (TCR) भी तलब किया गया है।मामला कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़ा है, जिसमें ED ने...

दस्तावेज के अभाव में एडमिशन से इनकार गलत, हाईकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी को दिलाया दाखिला
दस्तावेज के अभाव में एडमिशन से इनकार गलत, हाईकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी को दिलाया दाखिला

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में NEET-PG 2025 की अभ्यर्थी को राहत देते हुए उसे कॉलेज में एडमिशन देने का निर्देश दिया। अभ्यर्थी को स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र (परमानेंट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) न होने के आधार पर प्रवेश से वंचित कर दिया गया।डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्देश या सूचना पुस्तिका (इन्फॉर्मेशन बुलेटिन) किसी वैधानिक नियम को कमजोर या निरस्त नहीं कर सकती।मामले में याचिकाकर्ता ने MBBS के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अस्थायी पंजीकरण प्राप्त किया और...

बच्चे के भरण-पोषण के दावे में पिता के खिलाफ कमाने वाली माँ को पक्षकार बनाना ज़रूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बच्चे के भरण-पोषण के दावे में पिता के खिलाफ कमाने वाली माँ को पक्षकार बनाना ज़रूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी बच्चे द्वारा अपने पिता के खिलाफ दायर भरण-पोषण की याचिका में कमाने वाली माँ को औपचारिक रूप से एक पक्षकार के तौर पर शामिल करना ज़रूरी नहीं है।हालांकि, जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में ट्रायल कोर्ट को 'साझी माता-पिता की ज़िम्मेदारी' के सिद्धांत के आधार पर भरण-पोषण की अंतिम राशि तय करते समय, कमाने वाले दोनों माता-पिता की आर्थिक क्षमता पर विचार करना चाहिए।सिंगल जज ने यह आदेश तब पारित किया, जब वह पिता द्वारा दायर एक आपराधिक...

मालिकाना हक के विवाद के कारण किसी कब्जेदार को बिजली की सप्लाई से मना नहीं किया जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
मालिकाना हक के विवाद के कारण किसी कब्जेदार को बिजली की सप्लाई से मना नहीं किया जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बिजली एक बुनियादी ज़रूरत है, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ कोई सिविल केस पेंडिंग होने के आधार पर किसी उपभोक्ता की बिजली सप्लाई बंद नहीं की जा सकती, जब तक कि बिजली सप्लाई रोकने का कोई साफ़-साफ़ आदेश न हो।जस्टिस निनाला जयसूर्या 62 साल की एक महिला की दायर की गई रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस महिला ने साल 2000 में एक प्रॉपर्टी खरीदी थी और वह उस जगह पर खुद रहते हुए (घरेलू इस्तेमाल के लिए) एक होटल (व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए) चला रही थी। हालांकि, तब एक विवाद...

तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन उसका ऐलान किया जाता है; कोर्ट का बाद का आदेश सिर्फ़ ऐलानिया होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन उसका ऐलान किया जाता है; कोर्ट का बाद का आदेश सिर्फ़ ऐलानिया होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि मोहम्मदिया कानून के तहत, तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन पति तलाक का ऐलान करता है। बाद में कोर्ट का जो आदेश इसकी पुष्टि करता है, वह सिर्फ़ ऐलानिया प्रकृति का होता है।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने यह साफ़ किया कि कोर्ट का ऐसा आदेश फ़ैसले की तारीख से कोई नया तलाक नहीं बनाता, बल्कि यह तलाक के ऐलान की मूल तारीख से ही जुड़ा माना जाता है।बेंच ने साफ़ किया,"यह भी तय है कि जहाँ कोई पति तलाक का ऐलान करता है। बाद में उसी के संबंध में आदेश लेने के लिए कोर्ट...

भरण-पोषण तय करते समय पत्नी की पेशेवर काबिलियत और कमाने की क्षमता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भरण-पोषण तय करते समय पत्नी की पेशेवर काबिलियत और कमाने की क्षमता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि भरण-पोषण देते समय पत्नी की पेशेवर काबिलियत और उसकी कमाने की क्षमता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने पत्नी की पेशेवर योग्यताओं और रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर उसके पिछले काम को ध्यान में रखते हुए CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को दिए जाने वाले मासिक भरण-पोषण की रकम कम की।सिंगल जज ने फैमिली कोर्ट के आदेश में बदलाव करते हुए भरण-पोषण की रकम 18,000 रुपये से घटाकर 12,000 रुपये प्रति माह की थी।संक्षेप में कहें तो यह क्रिमिनल रिवीजन याचिका...

कोर्ट मार्शल प्रक्रिया में फाइनल ऑर्डर से पहले रिट याचिका स्वीकार्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
कोर्ट मार्शल प्रक्रिया में फाइनल ऑर्डर से पहले रिट याचिका स्वीकार्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि अनुशासनात्मक और कोर्ट मार्शल की कार्यवाही को चुनौती देने वाली रिट याचिका, अंतिम आदेश पारित होने से पहले स्वीकार्य नहीं है।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की एक डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की,“यह कानून की एक स्थापित स्थिति है कि जब तक इस तरह की कार्यवाही में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक हाई कोर्ट द्वारा रिट याचिका में कार्यवाही पर अंतिम निर्णय का इंतज़ार किए बिना कोई भी हस्तक्षेप अनुचित है।”इसके लिए 'यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम...

ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ इसलिए नकली नहीं माना जा सकता कि उसे स्मार्ट कार्ड में नहीं बदला गया: दिल्ली हाईकोर्ट
ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ इसलिए नकली नहीं माना जा सकता कि उसे स्मार्ट कार्ड में नहीं बदला गया: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी ड्राइविंग लाइसेंस को सिर्फ इसलिए नकली नहीं माना जा सकता कि वह बुकलेट के रूप में था और उसे स्मार्ट कार्ड में नहीं बदला गया।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस तरह बीमित व्यक्ति के पक्ष में दिए गए एक फैसले के खिलाफ एक बीमा कंपनी द्वारा दायर अपील खारिज की।बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें 'द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड' को निर्देश दिया गया कि वह M/s कपूर डीजल्स गैराज प्राइवेट लिमिटेड को एक दुर्घटना में नष्ट हुए ट्रक के नुकसान की भरपाई के...

हिरासत में बंद आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने से पहले कानूनी सहायता या कम से कम सुनवाई अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
हिरासत में बंद आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने से पहले कानूनी सहायता या कम से कम सुनवाई अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब आरोपी न्यायिक हिरासत में हो तो ट्रायल कोर्ट द्वारा उसे डिस्चार्ज अर्जी दाखिल करने के लिए एक कानूनी वकील मुहैया कराया जाना चाहिए। वहीं, यदि आरोपी ऐसे वकील को लेने से इनकार करता है तो आरोपों को तय करने के मुद्दे पर एक कानूनी वकील की सहायता से सुनवाई का अवसर अवश्य दिया जाना चाहिए।BNSS की धारा 262 और 263 का हवाला देते हुए, जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने कहा:“यह बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि एक ओर, कानून आरोपी को दस्तावेजों की प्रतियां मिलने के 60...

DoE की पहले से मंज़ूरी के बिना प्राइवेट स्कूल को बंद नहीं माना जा सकता, स्टाफ़ सैलरी का हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
DoE की पहले से मंज़ूरी के बिना प्राइवेट स्कूल को बंद नहीं माना जा सकता, स्टाफ़ सैलरी का हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि किसी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल को सिर्फ़ इसलिए "कानूनी तौर पर बंद" नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसने शिक्षा निदेशालय (DoE) से पहले से मंज़ूरी लिए बिना काम करना बंद कर दिया> इस तरह एकतरफ़ा तौर पर काम बंद कर देने से कर्मचारियों की सैलरी और सर्विस के अधिकार खत्म नहीं हो जाते।जस्टिस संजीव नरूला यहां के एक प्राइवेट, बिना सरकारी मदद वाले स्कूल - दयानंद आदर्श विद्यालय - से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।ये याचिकाएं टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ़ ने अपनी बकाया...

बिना क्रॉस एक्जामिनेशन के प्रारंभिक जांच के सबूत विभागीय निष्कर्षों का आधार नहीं बन सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
बिना क्रॉस एक्जामिनेशन के प्रारंभिक जांच के सबूत विभागीय निष्कर्षों का आधार नहीं बन सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारी के खिलाफ पारित बर्खास्तगी आदेश रद्द किया। कोर्ट ने माना कि अनुशासनात्मक कार्यवाही दोषपूर्ण थी, क्योंकि जांच अधिकारी ने प्रारंभिक जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों पर भरोसा किया, जबकि दोषी कर्मचारी को गवाहों से जिरह करने का अवसर नहीं दिया गया।कोर्ट ने दोहराया कि प्रारंभिक जांच से मिले सबूतों का इस्तेमाल नियमित विभागीय जांच में नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा।कोर्ट एक...