संपादकीय
फ्लैट की डिलीवरी में 2 साल की देरी के लिए NCDRC ने बिल्डर को दिया होमबॉयर्स को 68 लाख रुपये रिफंड करने का निर्देश
नेशनल कंज़्यूमर डिस्प्यूट्स रेड्रेसल कमीशन (NCDRC या राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग) ने 'मूल स्थित में पुनर्स्थापना' (Restitutio in integrum) के सिद्धांत को लागू करते हुए रियल एस्टेट प्रमुख सुपरटेक लिमिटेड को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ एक पीड़ित होमबॉयर को पूरी राशि वापस करने का निर्देश दिया। दरअसल 'Restitutio in integrum' के सिद्धांत के अनुसार, एक पीड़ित पक्ष की उस स्थिति को बहाल किया जाता है जो स्थिति, यदि उसे क्षति न हुई होती तो उसकी होती। दूसरे शब्दों में इस सिद्धांत को मूल या...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया सिविक बॉडी को निर्देश, दीवार ढहने से मरने वाली सब्जी विक्रेता की मां को अंतरिम मुआवजे के रूप में दिए जाएं दो लाख रुपए, पढ़िए फैसला
प्रतिवादी की तरफ से भी ऐसी कोई दलील नहीं दी गई कि भारी बारिश,भूकंप या कुछ अन्य प्राकृतिक कारणों से दीवार ढ़ह गई थी। ऐसे में साफ है कि निमार्ण की ठीक से देखभाल नहीं की गई।
मोटर वाहन दुर्घटना के मुआवज़ा पर मिलने वाले ब्याज पर आयकर नहीं लगाया जा सकता, पढ़िए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि मोटर वाहन दुर्घटना में मिलने वाले मुआवज़ा पर अगर कोई ब्याज दिया जाता है तो उसपर आयकर अधिनियम 1961 के तहत आयकर नहीं लगाया जा सकता क्योंकि यह 'आय' नहीं है। यह फ़ैसला न्यायमूर्ति अकील कुरेशी और एसजे कठवल्ला ने रूपेश रश्मिकांत शाह की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया। शाह को 40 साल पहले एक कार ने ठोकर मार दिया था जब वह मात्र आठ साल का था और इस वजह से वह बिस्तर पर ही परे रहने के लिए बाध्य हो गया। शाह ने याचिका दायर कर अदालत की राय जाननी चाही कि उसे...
एक अंपजीकृत वाहन को दूसरे वाहन के पंजीकृत नंबर के साथ चलाना न तो धोखा है और न ही जालसाजी, पढ़िए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
यह अभियोजन का मामला नहीं था कि पंजीकरण की नंबर प्लेट नकली थी या काल्पनिक रूप से बनाई गई थी या वह अस्तित्व में ही नहीं थी। दूसरी तरफ याचिकाकर्ता अपनी अन्य कार के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत बताई गई प्रक्रिया का पालन करते हुए पंजीकरण नंबर ले चुका है।
निकाहनामा है तो अंतर धार्मिक जोड़े पर विशेष विवाह अधिनयम के तहत पंजीकरण के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जोड़े को दिशानिर्देश जारी किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक शादी करने वाले जोड़े को विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी को पंजीकृत कराने का निर्देश जारी किया था, जबकि इस जोड़े ने पहले ही निकाहनामा हासिल कर लिया था। एक जोड़े ने पुलिस सुरक्षा के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्ज़ी दी। हाईकोर्ट ने यह जानने के बाद कि लड़की इस्लाम धर्म क़बूल करने से पहले और उस लड़के से शादी करने से पूर्व हिंदू थी, इस जोड़े को अपनी शादी...
चेक पर जिसे रुपए मिलने हैं, उसका नाम आरोपी ने ख़ुद बदला यह साबित करने की ज़िम्मेदारी शिकायतकर्ता की : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि जब किसी चेक में जिसको राशि का भुगतान होना है उसका नाम बदला जाता है तो यह साबित करने की ज़िम्मेदारी शिकायतकर्ता की है कि आरोपी ने ख़ुद यह बदलाव किया है या फिर आरोपी की सहमति से ऐसा किया गया है। न्यायमूर्ति आर नारायण पिशारदी ने ने जीमोल जोसेफ़ बनाम कौशतुभं मामले में यह भी कहा कि अधिनियम की धारा 138 के तहत पावर ऑफ़ अटर्नी के माध्यम से शिकायत दर्ज करना क़ानूनन वैध है। इस मामले में चेक पर पाने वाले का नाम "कौस्थुभन" (आरोपी का नाम) लिखा था जिसे काटकर उस जगह पर...
पत्थलगढ़ी आंदोलन का समर्थन करने वाले आदिवासियों के खिलाफ बनता है प्रथम दृष्टया दंगे का मामला : झारखंड हाईकोर्ट
सभी दलीलों पर विचार करने के बाद एक सदस्यीय पीठ ने कहा कि जब कोई आलोचना सरकार के खिलाफ घृणा की हिंसा को जन्म देती है तो यह आईपीसी की धारा 124ए के तहत अपराध के समान है,जो संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत नहीं आता है। कोर्ट ने कहा कि फेसबुक पोस्ट से साफ जाहिर है कि प्रथम दृष्टया मंशा देशद्रोह करने की ही थी।
आखिर कब करती है CBI किसी मामले की जांच? जानिए कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब
स्पर्श उपाध्यायअक्सर हम अख़बारों में एवं न्यूज़ चैनल पर सुनते हैं की सीबीआई (केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो) किसी मामले की जांच कर रही है, या सीबीआई जांच के हुए आदेश. पर क्या आप जानते हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में और किन मामलों में सीबीआई जांच करती है? आखिर क्यूँ नहीं सीबीआई हर मामले की जांच करती है? कौन तय करता है कि किन मामलों में सीबीआई जांच की जायेगी? सीबीआई का क्या है इतिहास है यह कैसे करती है काम? हम यह सब आज के इस लेख में समझेंगे| सीबीआई का इतिहास क्या है? द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान,...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोहराया , बर्ख़ास्तगी का आदेश अगर जारी नहीं हुआ है तो ग्रेच्युटी को ज़ब्त नहीं किया जा सकता, पढ़िए फैसला
अदालत प्रतिवादी की दलील से सहमत नहीं हुई और कहा कि याचिकाकर्ता को कभी भी बर्ख़ास्तगी का नोटिस नहीं दिया गया और इस तरह उसको कभी भी सेवा से बर्खास्त नहीं किया गया....बेहतर होता अगर उसे बर्ख़ास्तगी का नोटिस दिया जाता।
अयोध्या दिन -4 : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, रोजाना ही करेंगे सुनवाई, मुस्लिम पक्ष के वकील चाहें तो बीच में ब्रेक ले सकते हैं
बेंच ने मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन को यह कहा कि पीठ इस विवाद पर रोजाना सुनवाई करेगी। हालांकि CJI रंजन गोगोई ने यह कहा कि जब उनकी दलीलें शुरू होंगी तो धवन अपनी तैयारी के लिए सप्ताह के बीच में ब्रेक ले सकते हैं और पीठ को सूचित कर सकते हैं।
अयोध्या भूमि विवाद : मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में पांचों दिन सुनवाई का किया विरोध, बताया यह कारण
CJI रंजन गोगोई ने यह कहा कि उनकी बात सुन ली गई है और इस पर विचार कर उन्हें बताया जाएगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में यह परंपरा है कि संवैधानिक मामलों व नियमित मामलों की सुनवाई सप्ताह में 3 दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होती है।
सिविल विवाद को निपटाने के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज कराना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
शिकायत में आरोपों की प्रकृति पर विचार करते हुए हम इस दृढ़ राय से हैं कि आईपीसी की धारा 420/34 के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए कोई मामला नहीं बनता है। मामले में एक सिविल विवाद शामिल है और सिविल विवाद को निपटाने के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है जो कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा कुछ और नहीं है," यह कहते हुए पीठ ने इस मामले में सभी आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया।
कब्जे या आधिपत्य की बहाली के लिए शीर्षक का दावा करने वाला व्यक्ति कर सकता है केस दायर, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पढ़ें
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि कोई भी व्यक्ति जिसके पास प्रतिकूल आधिपत्य के आधार पर पूर्णकालिक शीर्षक है,वह निर्वासन या बेदखली की स्थिति में कब्जे या आधिपत्य की बहाली के लिए सूट या केस दायर कर सकता है। जस्टिस अरूण मिश्रा ,जस्टिस एस.अब्दुल नजीर और जस्टिस एम.आर शाह की पीठ ने कहा कि प्रतिकूल आधिपत्य के आधार पर शीर्षक के अधिग्रहण की दलील वादी द्वारा सीमा अधिनियम के अनुच्छेद 65 के तहत ली जा सकती है और एक वादी पर किसी भी अधिकार के उल्लंघन के मामले में परिसीमा अधिनियम 1963 के तहत वाद चलाने के लिए कोई...
महिला कांस्टेबल से दुष्कर्म के आरोपी को मिली बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत, पढ़िए कोर्ट का फैसला
वह एक बालिग शादीशुदा महिला है और उसका एक बेटा भी है। उसकी उम्र 31 साल है, जो इस मामले में महत्वपूर्ण है। अगर प्राथमिकी में बताए गए इन तथ्यों को दोनों पक्षों के बीच आपस में भेजे गए लिखित मैसेज के साथ देखा जाए तो प्रथम दृष्टया, हमारा मानना है कि यह मामला आपसी सहमति का है।
पीड़ित को दंडाधिकारी के समक्ष सुनवाई में सहायता करने का अधिकार, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
दंडाधिकारी सिर्फ पूछने या कहने भर से अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं है,परंतु पीड़ित को यह अधिकार है कि दंडाधिकारी के समक्ष सुनवाई में सहायता कर सके। दंडाधिकारी इस बात पर विचार कर सकता है कि पीड़ित कोर्ट की सहायता करने की स्थिति में है और क्या सुनवाई में ऐसी कोई जटिलताएं शामिल नहीं है,जिन्हें पीड़ित द्वारा नियंत्रित न किया जा सके।
CJI को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 करने के बिल को राज्यसभा ने भी मंजूरी दी
संसद में राज्यसभा ने बुधवार को उस बिल को पास कर दिया है जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 करने का प्रस्ताव दिया गया था। इससे पहले सोमवार को लोकसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। राष्ट्रपति के अनुमति देते ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। "3 और न्यायाधीशों की मंजूरी एक महान निर्णय" केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई को इस विधेयक को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय सूचना...
सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा, बचाव में कमज़ोरी को अभियोजन अपनी ताक़त नहीं बना सकता, पढ़िए यह निर्णय
सही आपराधिक सुनवाई के लिए सुनवाई से पहले सही जाँच ज़रूरी है, सही सुनवाई ऐसी जिसमें अभियोजन अदालत से कुछ भी नहीं छिपाता है और क़ानून के अनुरूप बिना किसी पक्षपात के अपने उत्तरदायितों को पूरा करता है ताकि न्याय के हित में अदालत को सही और उचित निर्णय लेने में मदद मिल सके…






