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महिला कांस्टेबल से दुष्कर्म के आरोपी को मिली बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत, पढ़िए कोर्ट का फैसला

LiveLaw News Network
9 Aug 2019 4:40 AM GMT
महिला कांस्टेबल से दुष्कर्म के आरोपी को मिली बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत, पढ़िए कोर्ट का फैसला
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वह एक बालिग शादीशुदा महिला है और उसका एक बेटा भी है। उसकी उम्र 31 साल है, जो इस मामले में महत्वपूर्ण है। अगर प्राथमिकी में बताए गए इन तथ्यों को दोनों पक्षों के बीच आपस में भेजे गए लिखित मैसेज के साथ देखा जाए तो प्रथम दृष्टया, हमारा मानना है कि यह मामला आपसी सहमति का है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले दिनों मुम्बई पुलिस की अपराध शाखा में तैनात सब-इंस्पेक्टर अमित शेलार को अग्रिम ज़मानत दे दी। अमित के खिलाफ एक महिला कांस्टेबल ने दुष्कर्म का केस दायर किया है। जस्टिस इंद्रजीत महंती और जस्टिस ए.एम बदर की पीठ ने कहा कि आरोपी व शिकायकर्ता के बीच आपस में भेजे गए लिखित मैसेज को देखने के बाद प्रथम दृष्टया यह आपसी सहमति का मामला लगता है।

यह था मामला

प्राथमिकी के अनुसार शिकायतकर्ता एक शादीशुदा 31 वर्षीय महिला है। उसके पति एक राष्ट्रीयकृत बैंक में काम करते हैं और वह पुलिस विभाग में वर्ष 2009 से बतौर कांस्टेबल काम कर रही है। इस मामले में 16 नवम्बर 2018 को प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें बताया गया कि वह याचिकाकर्ता के परिचय में उस समय आई थी, जब याचिकाकर्ता बतौर एसआई वाशी पुलिस स्टेशन में तैनात था।

आरोपी अमित शेलार, जो कि प्रमोशन पाकर सब-इंस्पेक्टर बन गया था, वह महिला की प्रमोशन पाने के लिए पढ़ने में मदद करता था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि याचिकाकर्ता ने उसके साथ मार्च 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच में अपनी कार में, लॉज में, खार घर के कमरे में, अपने घर में व कई बार होटल में दुष्कर्म किया।

उक्त घटनाएं शेलार की कार में हुई थी, क्योंकि उसने उसका दिया हुआ ड्रिंक पिया था, जिसके बाद कथित तौर पर उसका शोषण किया गया, क्योंकि शेलार ने इस घटना को फोन में रिकॉर्ड कर लिया और उसे वायरल करने की धमकी दी।

अंतिम तौर पर शिकायकर्ता ने आरोप लगाया कि 13 नवम्बर 2018 को वह याचिकाकर्ता के साथ उसकी कार में थी, तब उसने उसके साथ सेक्स करने की बात कही। उसके मना करने के बाद याचिकाकर्ता ने उसे बुरे तरीके से पीटा, जिसके कारण उसके नाक से खून बहने लगा और उसके पति ने उसकी इस चोट के बारे में उससे पूछा, जिसके बाद उसने अपने पति को सबकुछ बता दिया और प्राथमिकी दर्ज करवा दी गई।

शेलार ने थाणे सेशन कोर्ट द्वारा उसकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करने के बाद हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की। उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(सी)(जे)(एन),328,323,504,506 व अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम की धारा 3(12) के तहत केस दर्ज किया गया है।

आरोपी पुलिसकर्मी की तरफ से पेश अधिवक्ता तनवीर निजाम ने दलील दी कि प्राथमिकी से साफ जाहिर है कि याचिकाकर्ता आरोपी व शिकायतकर्ता के बीच जो भी हुआ है, वह आपसी सहमति से हुआ था। इस बात की पुष्टि दोनों पक्षकारों के बीच भेजे गए लिखित मैसेज से हो रही है। बचाव पक्ष ने दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की प्रतिलिपि भी पेश की।

अधिवक्ता निज़ाम ने दलील दी कि मामले में प्राथमिकी 18 महीने बाद दर्ज की गई, वह भी तब जब शिकायकर्ता के पति को कुछ संदेह हुआ।

एपीपी एम.एम देशमुख ने इस अपील को विरोध किया और कहा कि शिकायतकर्ता के फोन से प्राप्त स्क्रीन शॉट्स अपीलकर्ता सब-इंस्पेक्टर पर दोष लगा रहे हैं और प्राथमिकी भी एक लोक सेवक द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 376 साथ ही एससीएसटी अधिनियम के तहत अपराध का संकेत दे रही है।

फैसला :

कोर्ट ने शिकायतकर्ता के केस का अवलोकन किया और पाया कि

''वह एक बालिग शादीशुदा महिला है और उसका एक बेटा भी है। उसकी उम्र 31 साल है, जो इस मामले में महत्वपूर्ण है। अगर प्राथमिकी में बताए गए इन तथ्यों को दोनों पक्षों के बीच आपस में भेजे गए लिखित मैसेज के साथ देखा जाए तो प्रथम दृष्टया, हमारा मानना है कि यह मामला आपसी सहमति का है।''

इसके बाद पीठ ने इस मामले को देखते हुए सहमति की परिभाषा को चिंहित किया या उस पर प्रकाश ड़ाला-

'' सहमति को कानून के रूप में समझा जाए तो यह एक कार्य है जो सूझ-बूझ, मन के विचार-विमर्श, संतुलन के रूप में, दोनों पक्षों के अच्छे और बुरे को समझते हुए की जाता है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति के दिमाग में एक सक्रिय इच्छा शक्ति है जो उसे कार्य या गतिविधि करने की अनुमति देती है। जैसा कि समझा जाता है कि यह एक स्वैच्छिक कार्य है।''

अंत में कोर्ट ने कहा कि-

''यह एक 31 वर्षीय शादीशुदा महिला का मामला है जिसने अपने सहकर्मी के साथ कई बार लॉज, होटल, कमरे में और याचिकाकर्ता के घर में शारीरिक संबंध बनाए। उसने इस बारे में न तो अपने पति को बताया और न ही पुलिस को, जबकि उसके पास ऐसे करने के कई मौके थे।

इसके विपरीत दोनों पक्षों के बीच आपस में भेजे गए लिखित मैसेज से जाहिर हो रहा है कि अंत में प्रतिवादी दो को यह संदेह हो गया कि उसका पति उसके मोबाइल पर नजर रखे हुए है, जिसके बाद 16 नवम्बर 2018 को उसने प्राथमिकी दर्ज करवा दी। उसके बाद मेडिकल जांच हुई, परंतु इस संबंध में मेडिकल रिपोर्ट नकारात्मक आई।''

ऐसे में शेलार द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार किया जाता है।



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