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मुविक्कल का बचाव करने पर वकील को मिल रही थी धमकियां, दिल्ली हाईकोर्ट दी पुलिस सुरक्षा

LiveLaw News Network
10 Nov 2019 6:53 AM GMT
मुविक्कल का बचाव करने पर वकील को मिल रही थी धमकियां, दिल्ली हाईकोर्ट दी पुलिस सुरक्षा
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दिल्ली हाईकोर्ट ने उस वकील की पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने की मांग को स्वीकार कर लिया है, जिसे सिर्फ इसलिए धमकाया गया और उस पर हमला किया गया था, क्योंकि वह अदालत में एक केस में अपने मुविक्कल का बचाव कर रहा था।

चूंकि इस मामले में ''बार की स्वतंत्रता''का बड़ा मुद्दा था और बार के एक युवा सदस्य के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पुलिस की निष्क्रियता को भी उजागर किया गया था, इसलिए 24 अक्टूबर को इस मामले को तुरंत मुख्य न्यायाधीश डी.एन पटेल के संज्ञान में लाया गया, जिसके बाद इस मामले को मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के लिए जस्टिस बृजेश सेठी की कोर्ट में भेज दिया था।

यह है मामला

दिल्ली के एक अधिवक्ता सौरभ कुमार सिंह ने इस मामले में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि उन्हें मिल रही आपराधिक धमकी के मामले में पुलिस को शिकायत की थी, परंतु पुलिस अधिकारियों ने गैर-जिम्मेदाराना रवैया दिखाया। कथित तौर पर सिंह पर एक अपराधिक किस्म के व्यक्ति राम निवास के लोगों ने हमला किया था, क्योंकि वह राम निवास की पत्नी रीता देवी की तरफ से दायर तलाक के केस में पेश हो रहा था।

सिंह की याचिका के अनुसार, उन्हें धमकी दी गई थी कि यदि उन्होंने राम निवास के खिलाफ दायर इस केस में पेश होना बंद नहीं किया तो वह अपने जीवन के दिनों को गिनना शुरू कर दे। इसके बाद 4 पुरुषों द्वारा वकील पर हमला किया गया। वकील के द्वारा बार-बार अनुरोध करने के बाद ही उसका बयान दर्ज किया गया। इसके अलावा, राम निवास और 4 अन्य के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर भी काफी कमजोर है या उसमें कई कमियां हैं।

एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, पुलिस ने याचिकाकर्ता-अधिवक्ता को तत्काल संरक्षण नहीं दिया। जिसके चलते उसे फिर से रोहिणी कोर्ट के परिसर के बाहर बंदूक की नोंक पर कुछ लोगों द्वारा रोका गया और उसे धमकी दी गई कि यदि उसने केस में पेश होना बंद नहीं किया या केस को नहीं छोड़ा तो ,इस बार उसके जीवन को बख्शा नहीं जाएगा।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि

''इन परिस्थितियों में जहां एक वकील पर हमला किया जाता है, अपने मुवक्किल का संक्षिप्त विवरण रखने के लिए या उसकी तरफ से पेश होने के चलते, और उसके जीवन को स्पष्ट रूप से खतरा है। उसके बावजूद भी पूर्व व बाद की घटनाओं के प्रति इंस्पेक्टर या निरीक्षक द्वारा दिखाया गया लापरवाह व्यवहार सिर्फ ''आधिकारिक कार्य या ड्यूटी के निर्वहन में ढिलाई या शिथिलता'' नहीं है बल्कि सार्वजनिक कार्यालय की निराशा और खराबी या दुराचार का गठन करता है।''

''जांच एजेंसी की ओर से अस्पष्ट अनुचितता' के संबंध में याचिकाकर्ता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति बृजेश सेठी ने पुलिस अधिकारी को निर्देश दिया है कि जब भी आवश्यकता हो, याचिकाकर्ता अधिवक्ता को सुरक्षा प्रदान की जाए।

"बीट कांस्टेबल, डिवीजन ऑफिसर के साथ-साथ एसएचओ का भी मोबाइल नंबर याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराया जाए, ताकि जरूरत के समय , याचिकाकर्ता संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सके।

कोर्ट ने कहा, संबंधित डीसीपी याचिकाकर्ता को पीएसओ उपलब्ध कराएं

दलीलों के अनुसार, उक्त राम निवास पहले भी मामले में रीता देवी और उसकी तरफ से पेश होने वाले वकील को धमकी दे चुका है, लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि, रीता देवी द्वारा की गई एक शिकायत पर, संबंधित इंस्पेक्टर ने उसे सलाह दी थी कि वह राम निवास के खिलाफ मामलों को आगे न बढ़ाए,क्योंकि इससे उसकी कोई भलाई नहीं होगी,बल्कि ''निश्चित रूप से वह अपनी मौत को आमंत्रित'' करेगी।

इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से याचिका अधिवक्ता अनुराग ओझा साथ में वकील शिवम मल्होत्रा, कनिष्क अरोड़ा और सृष्टि ठुकराल ने दायर की थी और दलीलें पेश की थी।



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