संपादकीय
"वकीलों के लिए 3 लाख रुपए तक के लोन की व्यवस्था करने के लिए केंद्र और राज्यों को निर्देश दिए जाएं" : बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में देशव्यापी लॉकडाउन के कारण वकीलों को पेश आ रही वित्तीय कठिनाइयों को उजागर करते हुए एक रिट याचिका दायर की है। यह कहते हुए कि बीसीआई के पास जरूरतमंद वकीलों की मदद करने के लिए धन नहीं है, इसने केंद्र सरकार और सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को नामांकित अधिवक्ताओं को प्रत्येक को रु .3 लाख तक के ब्याज मुक्त ऋण के माध्यम से वित्तीय सहायता की व्यवस्था करने के निर्देश देने की मांग की। उक्त ऋण बार काउंसिल के माध्यम से प्रत्येक राज्य के संबंधित बार...
विनोद दुआ मामला : अगर याचिकाकर्ता की दलीलों से संतुष्ट हुए तो सीधे FIR को रद्द कर देंगे, सुप्रीम कोर्ट ने कहा और हिमाचल पुलिस से सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि वह पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में चल रही जांच में एक सप्ताह के भीतर आवश्यक विवरण के साथ सीलबंद रिपोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे।न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अगुवाई वाली पीठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ दायर एफआईआर को रद्द करने की मांग की सुनवाई कर रही थी और पीठ ने उस प्रश्नावली पर ध्यान दिया, जिसका जवाब दुआ ने अधिकारियों को दिया था। पीठ ने कहा है कि दुआ को पुलिस द्वारा भेजी गई पूरक प्रश्नावली का जवाब देने की...
जानिए किस हद तक आरोपी को आपराधिक मामले की केस-डायरी के निरीक्षण/इस्तेमाल की होती है अनुमति?
यदि हम दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (सीआरपीसी) की धारा 172 (1) की बात करें तो हम यह पाएंगे कि हर अन्वेषण अधिकारी (Investigation Officer) को किसी मामले में किये जा रहे अन्वेषण (Investigation) की प्रति दिन की कार्यवाही को एक डायरी में लिखते रहना होता है (जब वह दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 12 के तहत अन्वेषण करता है)। गौरतलब है कि इस डायरी को बनाये रखने का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि इसके जरिये सबूतों से छेड़छाड़ को और अन्वेषण के कालक्रम/घटनाक्रम को मनचाहे ढंग से बदलने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।...
[ बाल गृहों में COVID-19] : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और त्रिपुरा को स्वत: संज्ञान मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और त्रिपुरा राज्यों को निर्देश दिया कि वे शुक्रवार तक बाल संरक्षण गृह, किशोर गृह या रिश्तेदारों के घरों में रखे गए बच्चों की कोरोनोवायरस प्रकोप से संबंध स्थिति पर अपने संबंधित शपथ-पत्र दायर दाखिल करें। जस्टिस एलएन राव, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य को निर्देश दिया कि वह कानपुर में शेल्टर होम में COVID मामलों की आशंकाओं से संबंधित एक अतिरिक्त जवाब दाखिल करे।इसके अलावा, कोर्ट ने वकील गौरव...
केंद्र सरकार का 59 एप्स को ब्लॉक करने का फैसला, श्रेया सिंघल जजमेंट और धारा 69 ए आईटी एक्ट
अशोक किनीइलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने हाल ही में 59 मोबाइल ऐप्स, जिनमें ज्यादातर चीनी एप्स हैं, जैसे टिक टोक, कैम स्कैनर, जेंडर आदि शामिल हैं, को ब्लॉक करने का फैसले किया है। फैसले को सार्वजनिक करते हुए मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 ए के तहत अपनी शक्तियों का उल्लेख किया है, साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना के अभिगम को अवरुद्ध करने के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 के प्रासंगिक प्रावधानों का उल्लेख किया है। इन ऐप्स को भारत की...
' वकील बुद्धिजीवी वर्ग हैं; हम कुलीन बिरादरी के सदस्यों से पहले खुद का सम्मान करने की उम्मीद करते हैं : सुप्रीम कोर्ट
हमें उम्मीद है कि कुलीन बिरादरी के सदस्य पहले खुद का सम्मान करेंगे, सुप्रीम कोर्ट ने वकील रीपक कंसल द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज करते हुए ये टिप्पणी की जिसमें रजिस्ट्री पर 'पिक एंड चूज' नीति पर आरोप लगाया गया था। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि "रजिस्ट्री, जो कि न्यायिक प्रणाली का हिस्सा और पार्सल है, को बिना किसी अच्छे कारणों के लिए अनावश्यक रूप से दोषी ठहराया जाता है।" पीठ में जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि जब महामारी चल रही है, तो...
जस्टिस ओका की युवा वकीलों को सलाह, "यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो शुरुआती वर्षों में ट्रायल कोर्ट में प्रैक्टिस करें"
कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनिवास ओका ने द रूट्स रिसोर्सेज और नलसार्स न्याय फोरम की ओर से आयोजित ई-सेमिनार में कानून और न्याय पने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में जस्टिस ओका ने उन छात्रों और युवा वकीलों के लाभ के लिए, जिन्हें मुकदमेबाजी में कैरियर बनाने की इच्छा है, अपने विचार और अनुभव साझा किए। ट्रायल कोर्ट स्तर का कार्य एक महान सीख ट्रायल कोर्ट में वकालत के महत्व पर जस्टिस ओका ने कहा कि, "यदि आप हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करना चाहते हैं और आप वास्तव...
निजी स्कूलों के ट्यूशन फीस मांगने पर रोक : SC ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया, राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश पर दखल देने से इनकार कर दिया जिसमें टिप्पणी की गई थी कि गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल लॉकडाउन के दौरान फीस की मांग नहीं कर सकते और निर्णय लेने के लिए इसे राज्य सरकार के लिए छोड़ दिया था। हाईकोर्ट ने ऑनलाइन कक्षाओं के लिए वैकल्पिक शुल्क का भुगतान करने का सुझाव भी दिया था।मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की पीठ ने सोमवार को याचिकाकर्ता स्कूलों को राज्य के आदेश को चुनौती देने के लिए कहा है।पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले को राज्य सरकार...
सुप्रीम कोर्ट ने केस लिस्ट करने में भेदभाव और प्रभावशाली वकीलों को प्राथमिकता देने के आरोपों वाली याचिका 100 रुपये जुर्माने के साथ खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा "पिक एंड चूज " नीति अपनाने और लिस्टिंग में प्रभावशाली वकीलों को वरीयता देने का आरोप लगाया गया था। " पिक एंड चूज" नीति अपनाए बिना सूचीबद्ध करने वाले मामलों में शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को निष्पक्षता और समान व्यवहार के निर्देश देने की मांग करने वाली इस याचिका पर जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता वकील रीपक कंसल पर 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने कहा, "हम आप पर...
' पुलिस IPC की धारा 172 से 188 के तहत अपराधों पर FIR दर्ज नहीं कर सकती' : मद्रास हाईकोर्ट ने CAA के खिलाफ धरना करने पर दर्ज FIR रद्द की
मद्रास उच्च न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरण से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना नागरिक संशोधन अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन के खिलाफ सार्वजनिक सड़क पर विरोध करने के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी को खारिज कर दिया है। दरअसल शम्सुल हुदा बकवी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 143 और 188 के तहत सार्वजनिक सड़क पर बिना अनुमति के विरोध करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने उच्च न्यायालय में इस आधार पर एफआईआर को रद्द करने की मांग की कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 (1) (ए) के अनुसार, कोई भी अदालत...
लॉकडाउन में स्कूल फीस जमा करने से छूटः अलग-अलग उच्च न्यायालयों का क्या है आदेश
अशोक किनी सुप्रीम कोर्ट पैरेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार कर रही है, जिसमें 1 अप्रैल से 1 जुलाई 2020 तक, तीन महीने की अवधि के लिए निजी स्कूल को फीस देने से छूट की मांग की गई है। 9 राज्यों, राजस्थान, ओडिशा, पंजाब, गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली और मध्य प्रदेश में पैरैट्स एसोसिएशनों की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि "एक माता-पिता की वित्तीय कठिनाइयों के कारण फीस भुगतान में अक्षमता की स्थति में, संविधान में प्रदान किए गए ..." शिक्षा के अधिकार के...
जानिए शांति भंग होने के संदेह में मजिस्ट्रेट (प्रशासन) कौन से लोगों से बांड (ज़मानत) मांग सकता है
कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं, जिनमें शांति बनाए रखे जाना नितांत आवश्यक हो जाता है। समाज में कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं, जिनके कार्यों से समाज के भीतर परिशांति भंग हो जाने का खतरा होता है। समय-समय पर राज्य प्रशासन ऐसे लोगों से प्रतिभूति सहित या रहित बंधपत्र लेता है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य राज्य में शांति की स्थापना करना होता है। इस शांति की स्थापना हेतु ही प्रतिभूति ली जाती है। समाज में ऐसे कई अभ्यस्त अपराधी होते हैं जो बार बार अपराध करते हैं तथा अपराध का दोहराव करते हैं। इनके अपराधों से...
सुप्रीम कोर्ट ने छुट्टियों के बाद वर्चुअल सुनवाई को प्रभावी बनाने के लिए ताज़ा SOP जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने 6 जुलाई से वर्चुअल (आभासी) अदालतों के माध्यम से सुनवाई को प्रभावी बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को बताने वाली अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह भारत सरकार के एनसीटी दिल्ली द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों से संबंधित सुझावों को ध्यान में रखा गया है और ई-फाइलिंग, उल्लेख, लिस्टिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग / टेली-कॉन्फ्रेंसिंग मोड और मामलों की सुनवाई के लिए इसके पहले के जारी एसओपी सर्कुलर के अधिक्रमण (supersession) में है। यह कहा गया है कि ताजा मामले...
धारा 37 एनडीपीएस एक्ट: वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित अपराधों के लिए जमानत के सिद्धांत
विश्वजीत आनंदकानून की एक सुलझी हुई स्थिति है यह है कि नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टंस एक्ट से संबंधित मामले में उदार दृष्टिकोण अनुचित है (केरल राज्य बनाम राजेश, 24 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट का निर्णय) और कई फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक मानदंड तय किए हैं, जिनका नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टंस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) के तहत अपराध में शामिल अभियुक्तों की जमानत याचिकाओं पर विचार करते हुए पालन करना चाहिए। "…यह ध्यान में रखना चाहिए कि हत्या के मामले में, अभियुक्त एक...
अत्याचार मात्र शारीरिक यातना नहीं है, किसी को मामूली कारणों से सलाखों के पीछे रखना भी अत्याचार है:जस्टिस दीपक गुप्ता
"अत्याचार सिर्फशारीरिक यातना नहीं है। यदि आप किसी व्यक्ति को मामूली कारणों से सलाखों के पीछे रखते हैं, तो यह भी अत्याचार है", सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दीपक गुप्ता ने लाइवलॉ की ओर से आयोजित एक वेबिनार में यह टिप्पणी की। वेबिनार का विषय था- हिरासत में मौतें: अत्याचार-रोधी कानून की आवश्यकता। वेबिनार में जस्टिस दीपक गुप्ता, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री डॉ अश्विनी कुमार और हिंदुस्तान टाइम्स के राष्ट्रीय राजनीतिक मामलों की संपादक सुनेत्रा चौधरी शामिल हुईं थीं। संचालन एडवोकेट अवनि बंसल ने...
अचल संपत्ति को लेकर होने वाले विवाद में क्या हैं कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां
किसी स्थावर संपत्ति जैसे भूमि या जल को लेकर विवाद उत्पन्न होते रहते हैं। इससे उत्पन्न विवादों से समाज के भीतर शांति भंग होने और लोक व्यवस्था भंग होने का खतरा होता है। ऐसे खतरे से निपटने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता में धारा 145, 146, 147 का प्रावधान किया गया है। इस धारा में स्थावर संपत्ति विषयक विवादों के संबंध में जिससे लोक शांति भंग होने की संभावना हो, निस्तारण की प्रक्रिया का उल्लेख है। धारा 145 की उपधारा (1) के अनुसार इस संबंध में रिपोर्ट पर या किसी अन्य प्रकार से प्राप्त इत्तिला के आधार...
वैवाहिक बलात्कारः क्या भारत में यह कानून पर्याप्त तरक्की कर चुका है?
वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे ने लंबे समय से, दुनिया भर में, कानूनविदों और समाज को प्रभावित किया है। अधिकांश देशों में वैवाहिक बलात्कार को अपराध का दर्जा दिया गया है, क्योंकि यह माना गया है कि विवाह के रिस्ते में संभोग को जीवनसाथी का अधिकार नहीं माना जा सकता है। इंडिया टुडे वेब डेस्क द्वारा 12 मार्च 2016 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 36 देशों में से एक है, जहां आज तक वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं माना जाता है। हम पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, अफगानिस्तान, म्यांमार, ईरान, मलेशिया,...
अंग्रेज़ी भाषा का ज्ञान बौद्धिक क्षमता का निर्धारण नहीं करता : बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने CLAT परीक्षा क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने के विचार का समर्थन किया
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने अंग्रेजी के अलावा, क्षेत्रीय भाषाओं में राष्ट्रीय विधि स्कूलों में प्रवेश के लिए कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) आयोजित करने की व्यवहार्यता पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। बीसीआई ने यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा प्रथम कौशिक, नवीन कौशिक और अरुण भारद्वाज द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट आयोजित करने की मांग पर विचार करने के निर्देश के बाद उठाया है। दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ताओं को संबोधित एक पत्र में, BCI ने क्षेत्रीय भाषाओं...
क्या अर्धसैनिक बलों में अस्थिर दिमाग़ वाले लोगों के लिए जगह है? दिल्ली हाईकोर्ट ने इस्तीफ़ा वापस लेने की अर्ज़ी देने वाले अधिकारी से पूछा
केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अधिकारी की अपना इस्तीफ़ा वापस लेने संबंधी याचिका पर नोटिस जारी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक सवाल पूछा कि क्या अर्ध सैनिक बलों में अस्थिर चित्त वाले लोगों की जगह है?न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलव और न्यायमूर्ति आशा मेनन ने कहा कि प्रथम दृष्टया अर्ध सैनिक बलों के अधिकारियों को इस तरह छुट्टी पर जाने की इजाज़त नहीं होनी चाहिए।पीठ ने नीरज कुमार उत्तम बनाम भारत संघ मामले में दायर रिट याचिका पर हुई सुनवाई में यह विचार व्यक्त किया। इस याचिका में सीआरपीएफ के एक...




![[ बाल गृहों में COVID-19] : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और त्रिपुरा को स्वत: संज्ञान मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा [ बाल गृहों में COVID-19] : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और त्रिपुरा को स्वत: संज्ञान मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/08/06/500x300_362910-supreme-court-of-india-1.jpg)















