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उत्तर प्रदेश सरकार का अध्यादेश अंतर-धार्मिक विवाह के अपराधीकरण के अलावा कुछ भी नहींः इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता का रिज्वाइंडर
उत्तर प्रदेश सरकार का अध्यादेश अंतर-धार्मिक विवाह के अपराधीकरण के अलावा कुछ भी नहींः इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता का रिज्वाइंडर

धर्मांतरण के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पारित विवादास्पद अध्यादेश की संवैधानिक वैधता ‌खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष दायर जनहित याचिका में कहा गया है, "यदि कोई व्यक्ति अपनी पसंद के किसी व्यक्ति से शादी करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त स्वतंत्रता का प्रयोग करता है, और उस प्रक्रिया में, एक साथी विवाह से तुरंत बाद अपना धर्म बदलना चाहता है, तो यह राज्य के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए।"उल्‍लेखनीय है कि पिछले हफ्ते, सरकार ने यह कहते हुए उक्त अध्यादेश का बचाव किया था...

व्हाट्सएप संदेशों का कोई स्पष्ट मूल्य नहीं, जब तक कि उन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 बी (4) के अनुसार प्रमाणित नहीं किया जाताः पंजाब और हरियाणा उच्‍च न्यायालय
व्हाट्सएप संदेशों का कोई स्पष्ट मूल्य नहीं, जब तक कि उन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 बी (4) के अनुसार प्रमाणित नहीं किया जाताः पंजाब और हरियाणा उच्‍च न्यायालय

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा है कि व्हाट्सएप संदेशों का कोई स्पष्ट मूल्य नहीं होगा, जब तक कि उन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 बी के अनुसार प्रमाणित नहीं किया जाता है। (राकेश कुमार सिंगला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया)जस्टिस जयश्री ठाकुर की एकल पीठ ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) के तहत एक मामले में जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए यह अवलोकन किया।जमानत अर्जी का विरोध करने के लिए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने आरोपियों के कुछ कथित व्हाट्सएप चैट पर...

प्रशासन चलाने के लिए कोई जिम्मेदारी या कर्तव्य नहीं;मोबाइल टावर को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए परमादेश जारी नहीं कर सकतेः उत्तराखंड हाईकोर्ट
प्रशासन चलाने के लिए कोई जिम्मेदारी या कर्तव्य नहीं;मोबाइल टावर को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए परमादेश जारी नहीं कर सकतेः उत्तराखंड हाईकोर्ट

मोबाइल टावर को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए प्रतिवादियों को परामदेश जारी करने से इनकार करते हुए, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार (15 जनवरी) को कहा कि प्रशासन के काम को देखना न तो कोर्ट की जिम्मेदारी है,न ही कोर्ट का कर्तव्य।मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह चैहान और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ एक समैय शर्मा की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता इस तथ्य से दुखी था कि इंडस टावर्स लिमिटेड (प्रतिवादी संख्या 5) को आंगनवाड़ी परिसर, शिवलोक कॉलोनी, रामनगर, रायपुर, देहरादून...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने विभिन्न कानूनी और तकनीकी मुद्दों को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई बंद की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने विभिन्न कानूनी और तकनीकी मुद्दों को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई बंद की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि "हमें उम्मीद है कि भविष्य में इस अदालत को इस तरह के मुकदमों की कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता नहीं होगी," शुक्रवार को विभिन्न कानूनी और तकनीकी मुद्दों को संबोधित करने के लिए शुरू की गई जनहित याचिका में कार्यवाही को बंद कर दिया। 1 जून 2020 से राज्य में ट्रायल कोर्ट शुरू होने से पहले वे जिला और ट्रायल कोर्ट के सामने पेश हुए। मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की खंडपीठ ने कहा,"28 मई, 2020 को पारित आदेश के उल्लंघन से मूल रूप से जनहित याचिका...

ग्राम पंचायत चुनावों के मध्यवर्ती चरण में नामांकन पत्रों की अस्वीकृति के खिलाफ याचिका के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाया नहीं जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
ग्राम पंचायत चुनावों के मध्यवर्ती चरण में नामांकन पत्रों की अस्वीकृति के खिलाफ याचिका के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाया नहीं जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी एक पूर्ण पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई रिट याचिका, जिसमें रिटर्निंग अधिकारी द्वारा नामांकन पत्रों की अस्वीकृति को चुनौती दी गई थी। यह चुनाव प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में एक कदम नहीं है। हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा याचिका को बरकरार रखने के संबंध में अलग-अलग कोर्ट के दो राय के चलते यह मामला हाईकोर्ट की एक बड़ी बेंच को सौंप दिया गया। पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि,"संविधान के...

कम से कम मरने के बाद वह सम्मान की हकदार हर व्यक्ति को संविधान ने यह सुविधा दी है; कलकत्ता हाईकोर्ट ने मृतक गर्भवती महिला का दूसरी बार पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया
''कम से कम मरने के बाद वह सम्मान की हकदार" हर व्यक्ति को संविधान ने यह सुविधा दी है''; कलकत्ता हाईकोर्ट ने मृतक गर्भवती महिला का दूसरी बार पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पिछले महीने एक गर्भवती महिला के शरीर पर दूसरा पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया (जो अप्रैल 2020 में मर गई थी) ताकि उसकी मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। न्यायमूर्ति संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति अरिजीत बैनर्जी की खंडपीठ ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की है कि मृतका को स्नेह, देखभाल और सम्मान का वह आनंद नहीं मिला,जो कि संविधान के अनुसार हर नागरिक को मिलना चाहिए,भले ही उसका स्टे्टस कुछ भी हो। कोर्ट ने विशेष रूप से कहा, ''(वह) भारत की एक नागरिक थी ... हो सकता है वह एंटाइटल्ड...

आपका उत्साह साफ क्यों दिखता है? : मुंबई पुलिस ने टीआरपी केस में ED के पेश होने पर ऐतराज जताया
"आपका उत्साह साफ क्यों दिखता है?" : मुंबई पुलिस ने टीआरपी केस में ED के पेश होने पर ऐतराज जताया

बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार को टीआरपी मामले की सुनवाई के दौरान मामले में प्रवर्तन निदेशालय की उपस्थिति पर सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे और कपिल सिब्बल की नाटकीय बहस देखने को मिली।अदालत निजी समाचार चैनलों द्वारा टीआरपी रेटिंग्स में धांधली से संबंधित मामले में मुंबई पुलिस की जांच को चुनौती देने वाली एआरजी आउटलेयर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (कंपनी जो रिपब्लिक टीवी चैनल चलाती है) द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता एआरजी आउटलेयर ने याचिका में एक अतिरिक्त प्रतिवादी के रूप में...

जस्टिस प्रतिभा सिंह ने व्हाट्सएप की नई  प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने वाली बेंच से खुद को अलग किया
जस्टिस प्रतिभा सिंह ने व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने वाली बेंच से खुद को अलग किया

दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह की एकल पीठ ने शुक्रवार को व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया। इस संबंध में अदालत के मास्टर को भेजे गए ईमेल पर कड़ी आपत्ति दर्ज की गई।ASG चेतन शर्मा ने कहा कि इस मामले को सुनने के लिए कोई बेहतर बेंच नहीं हैं।सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने व्हाट्सएप के लिए पेश होते हुए मामले को एकल न्यायाधीश पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए कहा।मामले को जनहित याचिका के रूप में मानने का निर्देश देते हुए...

शराब पीकर ड्राइविंग करने के मामले में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 (A) के तहत आरोपी का ब्रेथ एनालाइजर या ब्लड टेस्ट होना अनिर्वाय: केरल हाईकोर्ट
शराब पीकर ड्राइविंग करने के मामले में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 (A) के तहत आरोपी का ब्रेथ एनालाइजर या ब्लड टेस्ट होना अनिर्वाय: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि मोटर व्हीकल (एमवी) एक्ट की धारा 185 (A) के तहत शराब पीकर ड्राइविंग करने के आरोप के मामले में, आरोपी को ब्रेथ एनालाइजर या किसी अन्य उपकरण से परीक्षण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रयोगशाला परीक्षण किया जाना चाहिए और अपराध के लिए आरोपी के प्रति 100 मिलीलीटर रक्त में शराब की मात्रा 30 मिलीग्राम से अधिक होनी चाहिए। अभियोजन का मामला यह था कि अभियुक्त ने मानवीय जीवन को खतरे में डालते हुए लापरवाही से कार चलाया। इसके साथ ही उसने दूसरी कार को टक्कर मारी, जिससे उसमें बैठे...

महिंद्रा फाइनेंस अनुच्छेद 12 के तहत एक प्राधिकरण नहीं, इसके खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
महिंद्रा फाइनेंस अनुच्छेद 12 के तहत एक प्राधिकरण नहीं, इसके खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरिफ खान बनाम शाखा प्रबंधक महिंद्रा फाइनेंस सुल्तानपुर और एक अन्य मामले में कहा कि किसी निजी निकाय के खिलाफ़ रिट याचिका पर परमादेश (Mandamus) जारी नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 12 के दायरे में नहीं आता। न्यायालय एक निजी निकाय महिंद्रा फायनेंस को परमादेश जारी करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस मामले में याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने प्रार्थना की थी कि वह महिंद्रा फाइनेंस को मैंडेमस के तहत निर्देश जारी करे और संबंधित देय राशि के...

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को लागू करने की मांग करने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य से जवाब मांगा, सरकारी भवनों के निरीक्षण का आदेश दिया
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को लागू करने की मांग करने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य से जवाब मांगा, सरकारी भवनों के निरीक्षण का आदेश दिया

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग को लेकर 16 छात्रों द्वारा दायर रिट याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (13 जनवरी) को राज्य सरकार को याचिका का जवाब दाखिल करने की अनुमति दी और सोमवार (01 फरवरी) को मामले की अगली सुनवाई सूचीबद्ध की। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायाधीश सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने प्रयागराज कस्बे में स्थित सभी सरकारी भवनों (2016 के अधिनियम के आवेदन से संबंधित) का पूर्ण निरीक्षण करने के निर्देश दिए।कोर्ट के सामने दलीलविभिन्न कॉलेजों के 16...

दिल्ली हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालतों में एक दिन छोड़कर फिज़िकल सुनवाई आयोजित करने के आदेश जारी किए
दिल्ली हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालतों में एक दिन छोड़कर फिज़िकल सुनवाई आयोजित करने के आदेश जारी किए

दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने 14.01.2021 के आदेश जारी कर जिला एवं सत्र और प्रधान न्यायाधीश न्यायालयों को 18.01.2020 से एक दिन छोड़कर (अल्टरनेट डे) फिजिकल सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। हफ्ते के जिस दिन फिजिकल सुनवाई नहीं होगी उस दिन न्यायालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामलों की सुनवाई करेगा। इस आदेश यह निर्देश दिया गया है कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों और प्रधान न्यायाधीश, न्यायालय को निर्देश देता है कि वे अपने-अपने जिलों के अन्य सभी अधीनस्थ न्यायालयों का रोस्टर तैयार...

Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोहराया, विवाहित बेटियां अनुकंपा नियुक्ति की पात्र; कानून की किताब में कोई संशोधन आवश्यक नहीं

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यूपी रिक्रूटमेंट ऑफ डिपेंडेंट ऑफ गवर्नमेंट सर्वेंट्स डाइंग इन हॉर्नेस रूल्स, 1974 के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए बेटी का आवेदन खारिज करने का एकमात्र कारण विवाह की स्थिति नहीं हो सकती है।जस्टिस जेजे मुनीर की सिंगल बेंच ने कहा कि श्रीमती विमला श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्‍य, रिट सी नंबर 60881/2015 में हाईकोर्ट की डिविजन बेंच यह मान चुकी है कि 1974 के नियमों के नियम 2 (c) में द‌िए शब्द 'परिवार' के दायरे से विवाहित बेटियों को बाहर करना...

मामले की सुनवाई अन्य राज्य के न्यायाधीश से करवाने का मामला-अगर चीफ जस्टिस भी यह कहें कि वह कर्नाटक से हैं, तो आप कहां जाएंगे? मुख्य न्यायाधीश ओका ने याचिकाकर्ता से कहा
मामले की सुनवाई अन्य राज्य के न्यायाधीश से करवाने का मामला-'अगर चीफ जस्टिस भी यह कहें कि वह कर्नाटक से हैं, तो आप कहां जाएंगे?' मुख्य न्यायाधीश ओका ने याचिकाकर्ता से कहा

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक वी गुरुराज द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने मण्डामस की रिट जारी करने की मांग करते हुए कहा था कि एक याचिका जिसमें वह एक प्रतिवादी है और एकल न्यायाधीश पीठ के समक्ष लंबित है, को मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा सुना जाना चाहिए या किसी अन्य ऐसी पीठ द्वारा,जिसमें न्यायाधीश कर्नाटक के बजाय किसी अन्य राज्य से संबंध रखता हो। मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का...

 वास्तव में व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधि में लगभग 360-डिग्री प्रोफ़ाइल होती है : नई प्राइवेसी पॉलिसी को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती
" वास्तव में व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधि में लगभग 360-डिग्री प्रोफ़ाइल होती है" : नई प्राइवेसी पॉलिसी को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती

त्वरित संदेश सेवा ऐप, व्हाट्सएप द्वारा पेश की गई नई प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें इसे नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताया गया है।याचिका अधिवक्ता चैतन्य रोहिल्ला द्वारा दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि अपडेटेड नीति कंपनी को वास्तव में व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधि में लगभग 360-डिग्री प्रोफ़ाइल देती है।याचिका में कहा गया है,"किसी व्यक्ति की निजी और व्यक्तिगत गतिविधियों में अंतर्दृष्टि का...

समान लिंग यौन उत्पीड़न से संबंधी शिकायतें POSH अधिनियम के तहत सुनवाई योग्य : कलकत्ता हाईकोर्ट
समान लिंग यौन उत्पीड़न से संबंधी शिकायतें POSH अधिनियम के तहत सुनवाई योग्य : कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्तवपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 यानी POSH एक्ट के तहत समान-लिंग के यौन उत्पीड़न से संबंधी शिकायतें की जा सकती हैं। डॉ. मलबिका भट्टाचार्जी बनाम आंतरिक शिकायत समिति, विवेकानंद कॉलेज और अन्य मामले में न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने कहा कि,"अधिनियम-2013 की धारा 2 (M) से पता चलता है कि शब्द "प्रतिवादी" अपनी तह के भीतर ही "व्यक्ति" है यानी इसमें सभी लिंग के व्यक्ति...

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में अधीनस्थ न्यायालयों को 18 जनवरी से फिजिकल कामकाज फिर से शुरू करने का निर्देश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में अधीनस्थ न्यायालयों को 18 जनवरी से फिजिकल कामकाज फिर से शुरू करने का निर्देश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार (13 जनवरी) को राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों के फिजिकल कामकाज को फिर से शुरू करने के बारे में एक सर्कुलर जारी किया।अधीनस्थ न्यायालयों के फिजिकल कामकाज के संबंध में दिशा-निर्देश वाला सर्कुलर 18 जनवरी, 2021 से प्रभावी होगा।सर्कुलर के अनुसार, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट के जिला मुख्यालयों और माइक्रो कंटेनर जोन में न्यायालयों को छोड़कर सभी अधीनस्थ न्यायालयों में सुबह 10.45 से 06.10 बजे तक नियमित कोर्ट वर्किंग ऑवर्स के साथ काम करना शुरू हो जाएगा।गौरतलब है कि अहमदाबाद के...

राष्ट्रीय मुकदमेबाजी नीति में संशोधन की प्रक्रिया जारी है: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
राष्ट्रीय मुकदमेबाजी नीति में संशोधन की प्रक्रिया जारी है: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा

दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र ने बुधवार को बताया कि "नई और संशोधित" राष्ट्रीय मुकदमेबाजी नीति (एनएलपी) प्रक्रिया में हैं और आने वाले समय में लागू होगी। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष जून 2010 में शुरू की गई एनएलपी को लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया है।अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा, कानून मंत्रालय की ओर से पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि वर्तमान में एक कानूनी सूचना प्रबंधन और ब्रीफिंग...

हरियाणा राज्य यमुना नदी को प्रदूषित करने वाले कचरे पर नियंत्रण नहीं कर रहा है: दिल्ली जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
'हरियाणा राज्य यमुना नदी को प्रदूषित करने वाले कचरे पर नियंत्रण नहीं कर रहा है': दिल्ली जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा राज्य के सिंचाई और जल संसाधन विभाग, हरियाणा को यमुना नदी में प्रदूषकों के निर्वहन को रोकने के लिए तत्काल निर्देश देने की मांग वाली दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की याचिका पर नोटिस जारी किया। दिल्ली जल बोर्ड का कहना है हरियाणा सरकार द्वारा प्रदूषकों के निर्वहन पर तत्काल रोक न लगाने के कारण पानी के अमोनिया के स्तर में खतरनाक स्थिति पैदा हो रही है।भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम की पीठ ने डीजेबी के लिए...