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दंगा, यूएपीए, पीएमएलए आदि मामले के आरोपों वाले विचाराधीन कैदी एचपीसी के दिशानिर्देशों के तहत अंतरिम जमानत के हकदार नहीं : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि वैसे विचाराधीन कैदी, जो विशेष एजेंसियों द्वारा जांच किये जा रहे अपराधों, जैसे- दंगों, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, गैर-कानूनी गतिविधि निरोधक कानून (यूएपीए) आदि से संबंधित मामलों में ट्रायल का सामना कर रहे हैं, वे उच्चाधिकार समिति (एचपीसी) के दिशानिर्देशों के तहत रिहाई के हकदार नहीं हैं।दिशानिर्देशों के प्रासंगिक हिस्सों पर भरोसा जताते हुए न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार व्यास ने इस प्रकार कहा :"वैसे विचाराधीन कैदी, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम / धन शोधन निवारण अधिनियम,...
स्थायी लोक अदालत के सदस्य को निलंबित करने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं होने पर भी उनके खिलाफ गंभीर आरोपों की स्थिति में निलंबित किया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि केवल इसलिए कि स्थायी लोक अदालत के सदस्य को निलंबित करने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है, इसका मतलब यह नहीं है कि उसके खिलाफ इस तरह के गंभीर आरोप होने पर भी उसे निलंबित नहीं किया जा सकता है।न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति सौरभ लावानिया की खंडपीठ कमलेश कुमार दीक्षित की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने प्रारंभिक जांच के बाद स्थायी लोक अदालत, उन्नाव के सदस्यता से उनके निलंबन को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें प्रथम दृष्टया अवैध रूप से 5000 रुपये की...
'पैरवी के समय गंभीर नहीं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शोर-शराबे वाली जगह पर खड़े एडवोकेट को सुनने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते शिकायतकर्ता के लिए जमानत की सुनवाई में पेश होने वाले एक वकील को सुनने से इनकार किया, जो सुनवाई के समय शोर-शराबे वाली जगह पर खड़ा था और इस प्रकार अदालत को कुछ भी ठीक सुनाई नहीं दे रहा था कि वह क्या कह रहा है , क्या तर्क दे कर रहा है।न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की खंडपीठ ने एजीए की सहायता से मामले की सुनवाई की और बलात्कार के आरोपी को जमानत दी, यह देखते हुए कि पीड़िता ने खुद अभियोजन की कहानी को उसके मूल में उड़ा दिया।संक्षेप में मामलाबेंच आवेदक द्वारा भारतीय दंड...
स्पेशल बेंचः हैबियस कार्पस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रविवार को सुनवाई की
इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश के अनुसार एक लड़के की तरफ से दायर हैबियस कार्पस याचिका पर सुनवाई के लिए रविवार को एक विशेष पीठ का गठन किया गया। इस लड़के ने अपनी मां के माध्यम से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि उसका उसके घर से अपहरण कर लिया गया था और उसे थाने के यातना कक्ष में अवैध हिरासत में रखा गया है। न्यायमूर्ति प्रिटिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने सरकारी वकील की दलीलों को ध्यान में रखते हुए पाया कि प्रथम दृष्टया यह अवैध हिरासत का मामला नहीं था...
टू-चाइल्ड नॉर्मः यूपी जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के ड्राफ्ट में चुनाव लड़ने और सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने पर रोक का प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने उत्तर प्रदेश जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण) विधेयक, 2021 का एक मसौदा(ड्राफ्ट) तैयार किया है और इस पर बड़े पैमाने पर जनता से सुझाव मांगे हैं। इस ड्राफ्ट बिल(विधेयक) पर सुझाव ई-मेल -statelawcommission2018@gmail.com या डाक द्वारा 19 जुलाई, 2021 तक भेजे जा सकते हैं। ड्राफ्ट यह स्पष्ट करता है कि राज्य विधि आयोग, यू.पी. वर्तमान में राज्य की जनसंख्या के नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण पर काम कर रहा है और उसके अनुसरण में आयोग ने एक ड्राफ्ट बिल तैयार किया है। ...
COVID-19 वैक्सीन की पहली खुराक प्राप्त करने वाले लोग अंतराल अवधि समाप्त होने के बाद दूसरी खुराक के लिए अनिश्चित काल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकते: त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने कहा कि कोविशील्ड या कोवैक्सिन में से जिन लोगों को COVID-19 वैक्सीन की पहली खुराक मिली है, उन्हें अनिवार्य अंतराल समाप्त होने के बाद अपनी दूसरी खुराक प्राप्त करने के लिए अनिश्चित काल तक इंतज़ार नहीं करवाया जा सकता, इसलिए इसने राज्य प्रशासन से वैक्सीनेशन खुराक की संख्या बढ़ाने के लिए कहा।मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति एस तालापात्रा की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की,"... चिंता का कारण यह है कि जिन लोगों को पहले वैक्सीन मिल चुकी है, वे 12 सप्ताह या 4 सप्ताह पूरे होने पर...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को हवाई अड्डों के नाम की पॉलिसी को अंतिम रूप देने पर विचार करने को कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मौखिक रूप से नागरिक उड्डयन मंत्रालय को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के नाम के लिए एक अखिल भारतीय नीति तैयार करने पर विचार करने या नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए कहा।मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की पीठ अधिवक्ता फिल्जी फ्रेडरिक की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक समान पॉलिसी बनाने और महाराष्ट्र सरकार को आगामी नवी मुंबई हवाई अड्डे के नामकरण के लिए कोई प्रस्ताव करने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की गई...
दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों के अनुपालन में वीसी मोड के माध्यम से साक्ष्य की रिकॉर्डिंग की अनुमति दी
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में पक्षकारों की ओर से पेश किए गए एक पारस्परिक आवेदन पर वीडियो कांफ्रेंसिंग मोड के माध्यम से साक्ष्य की रिकॉर्डिंग की अनुमति दी है।मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट देवांशु सजलान ने यह कहते हुए कि उपरोक्त प्रैक्टिस दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए वीडियो कांफ्रेंसिंग नियमों के अनुसार किया जाएगा, आदेश दिया:"मौजूदा मामला '5 साल पुराना' मामला है। दोनों पक्षों ने वीसी के माध्यम से साक्ष्य दर्ज करने में आपसी इच्छा दिखाई है। तदनुसार, पार्टियों की ओर से पेश किए गए आपसी मौखिक आवेदन की...
"राष्ट्रगान के लिए खड़े नहीं होना या चुप रहना मौलिक कर्तव्यों का पालन करने में अनादर और विफलता के बराबर हो सकता है; लेकिन यह अपराध नहीं": जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय ने कहा है कि राष्ट्रगान के लिए खड़े नहीं होना या इसे नहीं गाना संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों का पालन नहीं करने या अनादर करने के बराबर हो सकता है, हालांकि, यह राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत अपराध नहीं हो सकता है।जस्टिस संजीव कुमार की सिंगल बेंच ने भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न मनाने के लिए 29 सितंबर 2018 को आयोजित समारोह में राष्ट्रगान का कथित रूप से अनादर करने के आरोप में एक कॉलेज व्याख्याता के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी...
''खेदजनक स्थिति है कि अधिकारी गैंग-चार्ट तैयार करने में उचित ध्यान नहीं दे रहे हैं, यह आर्टिकल 21 का उल्लंघन'' : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले महीने गैंग चार्ट तैयार करने में अधिकारियों के लापरवाह और सुस्त रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने पाया कि कुछ मामलों में अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से गैंग-चार्ट तैयार किया गया है और गैंग चार्ट आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ अपराध के मामलों की गलत जानकारी का संकेत दे रहा था। इसलिए अदालत के इस मामले में अधिकारियों के रवैये पर सवाल भी उठाया।न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने एक आरोपी/आवेदक की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अवलोकन किया, जिसने दलील दी थी कि वह कुछ...
न्यूज़ीलैंड के यूट्यूबर कार्ल रॉक को भारत में लौटने पर रोक लगाने के लिए केंद्र द्वारा ब्लैकलिस्ट करने के खिलाफ उनकी पत्नी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
न्यूज़ीलैंड के यूट्यूबर कार्ल एडवर्ड राइस (जिसे कार्ल रॉक के नाम से जाना जाता है) की पत्नी यूट्यूब व्लॉगर मनीषा मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। भारत सरकार ने यूट्यूबर कार्ल एडवर्ड राइस को भारत लौटने पर रोक लगाने के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। मनीषा मलिक ने ब्लैकलिस्टिंग के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।एडवोकेट फुजैल अहमद अय्यूबी के माध्यम से दायर याचिका याचिकाकर्ता के पति कार्ल एडवर्ड राइस की मनमानी और अनुचित ब्लैकलिस्टिंग को चुनौती देती है, जो 10.10.2020...
'लोक अभियोजकों की अनुपलब्धता का परिणाम अभियुक्तों के त्वरित ट्रायल के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है': कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य को रिक्तियों को भरने का निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को राज्य में लोक अभियोजकों के सभी रिक्त पदों को चाहे वह नियमित भर्ती से हो या अनुबंध के आधार पर (यदि कानून में अनुमति हो), भरने के लिए त्वरित कदम उठाने का निर्देश दिया।मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने कहा,"सरकारी अभियोजकों की अनुपलब्धता का राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन के साथ सीधा संबंध है। इस तथ्य के अलावा कि मुकदमे के संचालन में देरी से अभियुक्तों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। पर्याप्त संख्या में लोक...
'जमानत आदेश में प्राथमिकी के तथ्यों को प्रतिबिंबित करने के तरीके पर न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी किया जाए': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने न्यायिक अकादमी को आदेश दिए
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी के निदेशक को न्यायिक अधिकारियों को उचित निर्देश जारी करने का निर्देश दिया कि जमानत / अग्रिम जमानत प्रदान करते समय या इनकार करते समय जमानत आदेश में प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों को प्रतिबिंबित करने की आवश्यकता है।न्यायमूर्ति अरविंद कुमार सांगवान की खंडपीठ ने यह देखते हुए आदेश दिया कि एक कथित डकैती मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने प्राथमिकी के तथ्यों पर ध्यान दिए बिना फैसला सुनाया कि हिरासत में पूछताछ की जरूरत है, चूंकि याचिकाकर्ता...
मद्रास हाईकोर्ट ने जूनियर सिविल जज भर्ती 2003, 2009 और 2012 में रोस्टर सिस्टम के पालन की जांच करने के लिए समिति का गठन किया
मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पद के लिए भर्ती के लिए जारी वरिष्ठता सूची के संबंध में एक जांच समिति का गठन किया है। एक याचिका दायर कर सूची में दोष का आरोप लगाया गया था। याचिका उन न्यायिक अधिकारियों ने दायर की थी, जिन्हें 2009 में भर्ती किया गया था। चीफ जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने समिति को कथित दोषों में सुधार करने और वर्ष 2009 के साथ-साथ 2003 और 2012 के लिए संशोधित वरिष्ठता सूची तैयार करने का काम सौंपा है, जिसमें वही गलतियां की गई...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर रोक हटाई, प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्राथमिक विद्यालयों के लिए शिक्षकों की भर्ती की पश्चिम बंगाल सरकार की चल रही प्रक्रिया पर लगाए गए अंतरिम रोक आदेश को हटा लिया है।न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने 30 जून के आदेश में अंकन योजना और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े आरोपों के आलोक में भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी थी।न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल विद्यालय सेवा आयोग ने जारी निर्देशों का पालन किया है।पीठ ने कहा कि, "चूंकि 2 जुलाई, 2021 को पारित न्यायालय के आदेश...
दिल्ली बार काउंसिल ने वित्तीय सहायता हासिल करने के लिए कथित रूप से फर्ज़ी Covid-19 रिपोर्ट देने वाले वकील का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित किया
बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (Bar Council of Delhi) ने एक वकील का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। वकील पर आरोप है कि उसने बार काउंसिल से वित्तीय सहायता हासिल करने के लिए अपनी फर्ज़ी Covid-19 रिपोर्ट जमा की थी। बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने पाया कि यह कदाचार, जालसाजी और धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। यह कहते हुए कि प्रयोगशाला ने पुष्टि की है कि उनके द्वारा संबंधित वकील को ऐसी कोई Covid-19 रिपोर्ट जारी नहीं की गई है, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने वकील का लाइसेंस निलंबित कर दिया।दिल्ली बार काउंसिल के...
'संबंधित अधिकारी मूकदर्शक बन गए हैं': केरल उच्च न्यायालय में दहेज निषेध अधिनियम को लागू करने के लिए जनहित याचिका दायर
राज्य में दहेज हत्याओं की बढ़ती संख्या के बीच दहेज निषेध अधिनियम के सख्त और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केरल उच्च न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई है।यह याचिका एक शिक्षाविद डॉ. इंदिरा राजन ने दायर की है, जिन्होंने दहेज प्रथा और सरकार और अन्य अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण महिलाओं को हो रही परेशानियों पर चिंता जताई है।याचिका में कहा गया है, "दहेज एक सामाजिक कलंक है, जो महिलाओं के प्रति अकल्पनीय यातना और अपराध का कारण बनता है। इस बुराई ने समाज के सभी वर्गों की कई निर्दोष महिलाओं की...
"राज्य सरकार विधवा महिला द्वारा घर से दूर रहते हुए आजीविका कमाने की कल्पना कैसे कर सकती है?": गुजरात हाईकोर्ट ने निष्कासन आदेश पर रोक लगाई
गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को गुजरात सरकार द्वारा पारित निष्कासन आदेश पर रोक लगाई, जिसमें भरूच जिले से एक विधवा महिला को शराब की तस्करी के अपराध में छह महीने की अवधि के लिए निष्कासित कर दिया गया था।न्यायमूर्ति परेश उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले में शामिल तथ्य के आधार पर राज्य सरकार से पूछा कि राज्य सरकार विधवा महिला द्वारा छह महीन से घर से दूर रहते हुए आजीविका कमाने की कल्पना कैसे कर सकती है।यह ध्यान दिया जा सकता है कि उक्त निष्कासन आदेश गुजरात पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 56 (ए) के तहत शक्तियों के...
"बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में रिमांड आदेश की वैधता तय नहीं कर सकते": दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगे की आरोपी गुलफिशा फातिमा की रिहाई की याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली दंगे की आरोपी गुलफिशा फातिमा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। इसमें कहा गया था कि अदालत बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Plea) में रिमांड आदेश की वैधता तय नहीं कर सकती है।न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता जतिन भट्ट और अतिरिक्त सरकारी वकील अमित महाजन की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी।कथित बड़ी साजिश से संबंधित एक आरोप पर गुलफिशा के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत...
'अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो कोरोना की तीसरी लहर दूर नहीं': केरल हाईकोर्ट ने शराब की दुकानों के बाहर भीड़ पर टिप्पणी की
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि अगर COVID-19 प्रोटोकॉल का पालन और शराब की दुकानों के बाहर भीड़ को नियंत्रित नहीं किया गया तो COVID-19 की तीसरी लहर दूर नहीं है।न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन नागरिकों को बेवको आउटलेट्स से शराब खरीदने का उचित तरीका प्रदान करने के न्यायालय के आदेश को लागू न करने के संबंध में दूसरी अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।सिंगल बेंच ने पहले यह उचित ठहराया कि शराब की दुकानों के सामने इस तरह की अनियंत्रित और लंबी कतारें लगती हैं क्योंकि केएसबीसी उन दुकानों के...




















