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व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता को, इस तथ्य के बावजूद संरक्षित किया जाना चाहिए कि दो बालिगों के बीच संबंध को अनैतिक और असामाजिक कहा जा सकता हैः राजस्‍थान हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
7 Jun 2021 6:05 AM GMT
व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता को, इस तथ्य के बावजूद संरक्षित किया जाना चाहिए कि दो बालिगों के बीच संबंध को अनैतिक और असामाजिक कहा जा सकता हैः राजस्‍थान हाईकोर्ट
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राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया है कि अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता को, इस तथ्य के बावजूद संरक्षित किया जाना चाहिए कि दो बालिगों के बीच संबंध को अनैतिक और असामाजिक कहा जा सकता है।

ज‌स्ट‌िस सतीश कुमार शर्मा की सिंगल जज बेंच ने कहा कि राजस्थान पुलिस एक्ट, 2007 की धारा 29 के तहत राज्य के प्रत्येक पुलिस अधिकारी का कर्तव्य है कि वह नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे।

बेंच ने कहा, "... भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार, व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए, इस तथ्य के बावजूद कि दो बालिगों के बीच के संबंध को अनैतिक और असामाजिक कहा जा सकता है।"

राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 29 के अनुसार प्रत्येक पुलिस अधिकारी नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए बाध्य है।"

कोर्ट ने यह टिप्पणी अजय कुमार बेरवा और समरीन नामक दंपति की याचिका की सुनवाई के दरमियान किया, जो लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं और पुलिस सुरक्षा की मांग की है।

लता सिंह बनाम यूपी एआईआर 2006 एससी 2522 और एस खुशबू बनाम कन्नियाम्मल (2010) 5 एससीसी 600 सहित विषय पर ऐतिहासिक निर्णयों पर भरोसा करते हुए, पीठ ने कहा,

"इसलिए, उपरोक्त प्रस्तुतियों के संबंध में, लेकिन याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता या सत्यता पर कोई राय व्यक्त किए बिना, इस याचिका का निपटारा इस निर्देश के साथ किया जाता है कि याचिकाकर्ताओं के विद्वान वकील याचिका की एक प्रति, इसके अनुलग्नक के साथ ई-मेल के माध्यम से संबंधित पुलिस थाने के एसएचओ को भेजें और इसकी प्राप्ति पर, संबंधित एचएचओ इसे एक शिकायत के रूप में मानेंगे और उचित जांच के बाद, वह कानून के अनुसार याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निवारक उपाय और अन्य कदम उठाएंगे।"

हाल ही में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा कि लिव-इन रिलेशनश‌िप सभी को पसंद नहीं हो सकती है, हालांकि ऐसे संबंध गैर कानूनी नहीं हैं, या बिना विवाह के साथ रहना अपराध है।

एक अन्य फैसले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा, कि एक व्यक्ति को विवाह के माध्यम से अपने संबंध को औपचारिक रूप देने या लिव-इन रिलेशनशिप के रूप में गैर-औपचारिक दृष्टिकोण को अपनाने का अधिकार है।

टाइटिल: अजय कुमार बेरवा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य और अन्य।

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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