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दिल्ली हाईकोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विवाह के पंजीकरण की मांग करने वाली एनआरआई कपल की याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विवाह के पंजीकरण की मांग करने वाली एनआरआई कपल की याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विवाह के पंजीकरण की मांग करने वाली एनआरआई कपल की याचिका पर नोटिस जारी किया है।न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील (सिविल) को नोटिस जारी किया और मामले को 20 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया है। प्रतिवादी को एक सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रवीण गौड़ पेश हुए। शादी के पंजीकरण के लिए संबंधित सब- डिविजल मजिस्ट्रेट के समक्ष वर्चुअल मोड में पेश होने की अनुमति...

COVID-19: तेलंगाना हाईकोर्ट ने अपने, जिला और अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा पारित अंतरिम आदेशों की अवधि को 31 जुलाई तक बढ़ाया
COVID-19: तेलंगाना हाईकोर्ट ने अपने, जिला और अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा पारित अंतरिम आदेशों की अवधि को 31 जुलाई तक बढ़ाया

तेलंगाना हाईकोर्ट ने अपने, सभी जिला और अन्य अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा पारित अंतरिम आदेशों की अवधि 31 जुलाई, 2021 तक बढ़ा दी है।हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दिनांक 16 जुलाई 2021 को जारी अधिसूचना में कहा गया:"माननीय फुल बेंच ने अपने आदेश दिनांक 28.06.2021 में स्वत: संज्ञान डब्ल्यूपीअर्जेंट नंबर तीन में दिनांक 30.04.2021 को पारित अपने आदेश को 16.07.2021 तक बढ़ा दिया था। अब, यह सूचित किया जाता है कि माननीय फुल बेंच ने अपने आदेश दिनांक 15.07.2021 में स्वत: संज्ञान डब्ल्यूपीअर्जेंट नंबर तीन में ...

मध्य प्रदेश सभी अधीनस्थ न्यायालयों में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना
मध्य प्रदेश सभी अधीनस्थ न्यायालयों में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर और जिला न्यायालय में दोनों स्तरों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और अन्य ऑडियो-विजुअल इलेक्ट्रॉनिक्स लिंकेज शुरू करने वाला पहला राज्य बन गया है। इसे मामलों की सुनवाई और अदालत में उपस्थित होने में असमर्थ गवाहों के साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के लिए पेश किया गया है। इस प्रक्रिया को और अधिक उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने के लिए पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही में देरी से बचने के लिए पक्षकारों, वकीलों, गवाहों और अभियुक्तों की अदालत में फिजिकल रूप से उपस्थित...

कीमती दवा की आपराधिक बर्बादी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना इस्तेमाल हुए COVID 19 वैक्सीन को कचरे में फेंकने की आरोपी नर्स को जमानत देने से इनकार किया
"कीमती दवा की आपराधिक बर्बादी": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना इस्तेमाल हुए COVID 19 वैक्सीन को कचरे में फेंकने की आरोपी नर्स को जमानत देने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते COVID-19 वैक्सीन की 29 खुराकों को जरूरतमंदों को दिए बिना कचरे में फेंककर उनकी आपराधिक बर्बादी में शामिल आरोपी नर्स को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। जमानत से इनकार करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि जिस अपराध के लिए उसे आरोपी बनाया गया है, वह वास्तव में गंभीर प्रकृति का है। साथ ही यह बड़े पैमाने पर समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि,"न्यायालय उन 29 व्यक्तियों के बारे में अपनी गहरी चिंता दर्ज करता है, जो बिना...

पुलिस पीड़ित महिला की मदद करने के बजाय उसके निजी जीवन में झांक रही है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक क्रूरता मामले में कहा
'पुलिस पीड़ित महिला की मदद करने के बजाय उसके निजी जीवन में झांक रही है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक क्रूरता मामले में कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महिला को उसके पति द्वारा उसके ससुराल के घर से बाहर निकाल दिए जाने के मामले से निपटने के लिए पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न करने के मामले में कहा कि प्रथम दृष्टया पुलिस का आचरण एक असंवेदनशील दृष्टिकोण का प्रदर्शन करता है।न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि,"प्रथम दृष्टया परिस्थितियों से संकेत मिलता है कि पुलिस इस मामले में पहले याचिकाकर्ता के निजी जीवन में झांक रही है, बजाय इसके कि उसकी कुछ मदद करे।"कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अलीगढ़ और...

साधारण देशी बम मामलों को आतंकवादी अपराध मानने से एनआईए अधिनियम का उद्देश्य विफल हो जाएगा: मद्रास हाईकोर्ट
साधारण देशी बम मामलों को आतंकवादी अपराध मानने से एनआईए अधिनियम का उद्देश्य विफल हो जाएगा: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम के तहत अधिसूचित अपराधों से जुड़े सभी मामलों को एनआईए अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित 'विशेष न्यायालयों' में भेजने से होने वाली कठिनाइयों के बारे में चिंता व्यक्त की है।चूंकि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम भी एनआईए अधिनियम के तहत एक अधिसूचित अपराध है, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराधों से जुड़े हर मामले के लिए एनआईए अधिनियम के तहत विशेष अदालतों में जाना होगा। इस संदर्भ में, हाईकोर्ट ने कहा कि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम को तमिलनाडु में गैंगस्टर अपराधों में...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने POCSO मामलों से निपटने के लिए राज्य में जल्द-से-जल्द बाल हितैषी अदालतें शुरू करने के आदेश दिए
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने POCSO मामलों से निपटने के लिए राज्य में जल्द-से-जल्द बाल हितैषी अदालतें शुरू करने के आदेश दिए

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महाधिवक्ता को राज्य सरकार के साथ इस मुद्दे को उठाने के लिए कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) मामलों से निपटने के लिए राज्य में बाल हितैषी अदालतें (Child Friendly Court) जल्द से जल्द शुरू की जाएं। दरअसल, अरुणाचल प्रदेश राज्य में कोई बाल हितैषी अदालतें नहीं हैं।मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति मनश रंजन पाठक की खंडपीठ एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता की दुर्दशा से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जब एक कलुंग द्वारा लापता रिपोर्ट दर्ज कराई...

महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा निजता के अधिकार में गैरकानूनी घुसपैठ: तेलंगाना हाईकोर्ट ने पीछा और ताक-झांक करने के आरोपी को हिरासत में रखने के आदेश को उचित   ठहराया
'महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा निजता के अधिकार में गैरकानूनी घुसपैठ': तेलंगाना हाईकोर्ट ने पीछा और ताक-झांक करने के आरोपी को हिरासत में रखने के आदेश को उचित ठहराया

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा उनके निजता के अधिकार में एक गैरकानूनी घुसपैठ है। यह कहते हुए कोर्ट ने महिलाओं का पीछा करने, ताक-झांक करने और कथित तौर पर उन्हें न्यूड वीडियो चैट करने के लिए प्रेरित करने वाले 22 वर्षीय आरोपी को हिरासत में रखने के आदेश को बरकरार रखा। यह देखते हुए कि ऐसे जघन्य अपराधों में दया दिखाना न्याय का उपहास होगा, न्यायमूर्ति ए राजशेखर रेड्डी और न्यायमूर्ति शमीम अख्तर की खंडपीठ ने कहा कि, ''महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा, एक अमानवीय कृत्य होने के अलावा,...

शादी के बावजूद लिव-इन रिलेशनशिप रखने के आधार पर बर्खास्तगी आदेश पारित नहीं किया जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवा में बहाली का निर्देश दिया
शादी के बावजूद लिव-इन रिलेशनशिप रखने के आधार पर बर्खास्तगी आदेश पारित नहीं किया जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवा में बहाली का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को उसके खिलाफ पारित बर्खास्तगी आदेश को पूरी तरह से इस आधार पर खारिज कर दिया कि वह अपनी शादी के बावजूद लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा था।न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने 31 जनवरी, 2020 के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश पारित किया।उस आदेश के माध्यम से याचिकाकर्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।याचिकाकर्ता ने उक्त बर्खास्तगी आदेश की अपील और उसके पुनरीक्षण को खारिज करने के आदेश को भी चुनौती दी थी।याचिकाकर्ता का मामला इस प्रकार था कि...

कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने और अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेशों की अवधि 20 अगस्त तक बढ़ाया

कलकत्ता हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने पिछले साल दर्ज स्वत: संज्ञान मामले के अनुसरण में शुक्रवार को हाईकोर्ट और इसके अधीनस्थ अदालतों द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेशों की अवधि 20 अगस्त तक बढ़ा दी है। इसमें पश्चिम बंगाल में COVID-19 के संदर्भ में पारित ट्रिब्यूनल के आदेश भी शामिल है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति आई.पी. मुखर्जी, न्यायमूर्ति हरीश टंडन, न्यायमूर्ति सौमेन सेन और न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार ने पूर्ण पीठ ने यह आदेश पारित किया।यह आदेश पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लगाए गए...

दहेज का मामला : वैवाहिक घर महिलाओं के रहने के लिए सबसे खतरनाक जगह बन गए हैंः केरल हाईकोर्ट
दहेज का मामला : वैवाहिक घर महिलाओं के रहने के लिए सबसे खतरनाक जगह बन गए हैंः केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को एक डॉक्टर और उसके परिवार को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने दहेज के लिए शिकायतकर्ता/डाॅक्टर की पत्नी और उसके बुजुर्ग पिता को प्रताड़ित किया है। न्यायमूर्ति वी शिरसी ने गिरफ्तारी से पहले की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने अपनी दलीलों को साबित करने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड पेश किया है। इस प्रकार यह देखा गया है कि दहेज उत्पीड़न के बढ़ते मामलों के कारण वैवाहिक घर महिलाओं के रहने के लिए सबसे खतरनाक जगह बन गए हैं। कोर्ट ने...

एडवोकेट्स का ड्रेस कोड भारतीय जलवायु के अनुकूल नहीं है, बैंड ईसाई धर्म का प्रतीक है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया
"एडवोकेट्स का ड्रेस कोड भारतीय जलवायु के अनुकूल नहीं है, बैंड ईसाई धर्म का प्रतीक है": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को याचिका पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को नोटिस जारी किया। दरअसल, जनहित याचिका में वकीलों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड के रूप काला कोट और सफेद बैंड पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यह भारत के क्लाइमेटिक कंडीशन (जलवायु) के अनुकूल नहीं है।न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने केंद्र और उच्च न्यायालय प्रशासन को 18 अगस्त तक अपने-अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।अशोक पांडे ने याचिका दायर...

राजस्थान हाईकोर्ट ने अंतर-जातीय विवाहित कपल को कथित तौर पर अलग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित करने के आदेश दिए
राजस्थान हाईकोर्ट ने अंतर-जातीय विवाहित कपल को कथित तौर पर अलग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित करने के आदेश दिए

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक कॉन्स्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और अनंतिम निलंबन के आदेश दिए, जिस पर एक अंतर-जातीय जोड़े को अलग करने और अपनी पत्नी को पेश करने संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने वाले व्यक्ति को धमकी देने का आरोप लगाया गया है।अदालत ने पुलिस कांस्टेबल चंद्रपाल सिंह के आचरण पर भी गंभीर आपत्ति जताई जैसे कि उन्होंने तत्काल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के संबंध में कोर्ट ड्यूटी पर होने का दावा किया, लेकिन वह वर्दी में नहीं थे।न्यायमूर्ति मनोज कुमार गर्ग और न्यायमूर्ति...

विचाराधीन कैदियों को अपनी पसंद के अनुसार जेल चुनने का अधिकार नहीं है; प्राधिकरण ट्रायल कोर्ट की अनुमति लेने के लिए बाध्य नहींः जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
विचाराधीन कैदियों को अपनी पसंद के अनुसार जेल चुनने का अधिकार नहीं है; प्राधिकरण ट्रायल कोर्ट की अनुमति लेने के लिए बाध्य नहींः जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि एक विचाराधीन कैदी को मुकदमे के दौरान अपनी पसंद की जेल चुनने का अधिकार नहीं है और इसलिए, उसे इस संबंध में सुनवाई का अवसर प्रदान करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने यह भी माना कि चूंकि विचाराधीन कैदी को एक जेल से दूसरी जेल में स्थानांतरित करने से पहले न्यायालय की अनुमति अनिवार्य नहीं है, ऐसी स्थिति में न्यायालय कोई ऐसा न्यायिक या अर्ध-न्यायिक कार्य नहीं करता है, जिसमें अनुमति देने से पहले विचाराधीन कैदी का पक्ष सुनने की...

दिल्ली हाईकोर्ट ने निजामुद्दीन मरकज को फिर से खोलने की मांग वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने में विफल रहने पर केंद्र सरकार की खिंचाई की
दिल्ली हाईकोर्ट ने निजामुद्दीन मरकज को फिर से खोलने की मांग वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने में विफल रहने पर केंद्र सरकार की खिंचाई की

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र को दिल्ली वक्फ बोर्ड की एक याचिका पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। याचिका में निजामुद्दीन मरकज पर लगे प्रतिबंधों को कम करने की मांग की गई है।निजामुद्दीन मरकज़ पिछले साल 31 मार्च से बंद है।न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने "पहले दिन" से जवाब दाखिल करने में विफल रहने के लिए केंद्र की खिंचाई करते हुए कहा:"आप एक जवाब दाखिल करना चाहते हैं या आप नहीं करना चाहते हैं? पहले दिन, जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया था, लेकिन आज तक कुछ भी दायर नहीं किया...

God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
निजी जानकारी को इंटरनेट सर्च से हटाने का अधिकार – "मामले में बरी आरोपी अपनी निजता की रक्षा के लिए कोर्ट के आदेशों में अपना नाम संशोधित कराने का हकदार है": मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि एक आरोपी जिसे अंततः सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है, वह अपने निजता के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए उस अपराध के संबंध में सभी न्यायालय के आदेशों में अपना नाम संशोधित कराने का हकदार है।न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें एक व्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 417 (धोखाधड़ी) और 376 (बलात्कार) के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया था और बाद में सभी आरोपों से बरी होकर कोर्ट के फैसले में उसका नाम संशोधित कराने...