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मद्रास हाईकोर्ट
'जानकारी नहीं कि अतिक्रमण को रोकने के लिए विशेष कार्य बल का गठन किया गया या नहीं ': मद्रास हाईकोर्ट ने गलती करने वाले राज्य के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी

मद्रास हाईकोर्ट ने ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन की ओर से जारी लॉक एंड सील एंड डिमॉलिशन नोटिस के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर राज्य को याद दिलाया कि अदालत अतिक्रमण को रोकने के लिए एक स्थायी विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के गठन का आदेश पहले दे चुकी है।जस्टिस एस वैद्यनाथन और जस्टिस एए नक्‍कीरन की डिवीजन बेंच ने कहा कि 2016 की WP5076, 29 अप्रैल, 2019, में पारित आदेश में पहले ही सार्वजनिक भू‌मि के संरक्षण और रिकवरी के लिए गठित कर्नाटक टास्‍क फोर्स की तरह एसटीएफ के गठन का निर्देश सरकार को दिया गया है।अदालत के...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग पर नियमों की अधिसूचना जारी की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग पर नियमों की अधिसूचना जारी की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग, 2021 पर कर्नाटक हाईकोर्ट नियमों की अधिसूचना जारी की। उक्त नियम इसके पर्यवेक्षी अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट और उन अदालतों और न्यायाधिकरणों पर एक जनवरी, 2022 से लागू होंगे। कोर्ट कार्यवाही में अधिक पारदर्शिता, समावेशिता और न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए नियमों की अधिसूचना जारी की गई है।नियमों के अनुसार, "लाइव-स्ट्रीम या लाइव-स्ट्रीमिंग" का अर्थ इसमें एक लाइव टेलीविज़न लिंक, वेबकास्ट, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ऑडियो-वीडियो...

COVID-19 की तीसरी लहर: कलकत्ता हाईकोर्ट तीन जनवरी से वर्चुअल मोड से कार्य करेगा
COVID-19 की तीसरी लहर: कलकत्ता हाईकोर्ट तीन जनवरी से वर्चुअल मोड से कार्य करेगा

कलकत्ता हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी की आसन्न तीसरी लहर के खतरे और COVID-19 प्रभावित मामलों की संख्या में खतरनाक वृद्धि को देखते हुए तीन जनवरी से केवल वर्चुअल मोड से कार्य करने की अधिसूचना जारी की।कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव के एक आदेश के तहत इस आशय का एक नोटिस जारी किया गया।वर्चुअल मोड के साथ न्यायालय ने केवल जमानत से संबंधित मामलों में हाइब्रिड मोड से सुनवाई करने की अनुमति दी। जमानत मामलों में (पब्लिक प्रॉसीक्यूटर) सरकारी अभियोजकों को केस डायरी के साथ फिजिकल रूप से उपस्थित...

केरल हाईकोर्ट
एक और मील का पत्थर: केरल हाईकोर्ट ने ई-फाइलिंग, पेपरलेस कोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ वर्चुअल ऑफिस की शुरूआत की

केरल हाईकोर्ट ने 1 जनवरी, 2022 को ई-फाइलिंग, पेपरलेस कोर्ट और ई-ऑफिस की सुविधाओं के साथ वर्चुअल ऑफिस परियोजना शुरू की है। यानी अब हाईकोर्ट में केस फाइलिंग इलेक्ट्रॉनिक मोड से होगी। हालांकि, इस आशय के एक नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वकीलों को अभी भी ई-फाइल किए गए मामलों की फिजिकल प्रतियों के दो सेट जमा करने होंगे। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि वकालत के मामले में स्कैन की हुई प्रति अपलोड की जानी चाहिए। दीवानी मामलों में मूल्यांकन मौजूदा प्रथाओं के अनुसार दिखाया जाएगा। सिविल...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
COVID-19 की तीसरी लहर: इलाहाबाद हाईकोर्ट 3 जनवरी से मामलों की सुनवाई वर्चुअल मोड में करेगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य में COVID-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए मामलों की सुनवाई वर्चुअल मोड में करने का निर्णय लिया है।यह व्यवस्था कोर्ट के अगले आदेश तक लागू रहेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधा कांत ओझा और अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार चौधरी ने लाइव लॉ से बात करते हुए पुष्टि की कि अदालत 3 जनवरी से अगले आदेश तक मामलों की सुनवाई वर्चुअल मोड में करेगी।गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति की मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता में हुई...

पूर्वाग्रह के आरोप के अभाव में सीआरपीसी की धारा 407 के तहत स्थानांतरण के मामले में हाईकोर्ट की शक्ति लागू नहीं की जानी चाहिए: एमपी हाईकोर्ट
पूर्वाग्रह के आरोप के अभाव में सीआरपीसी की धारा 407 के तहत स्थानांतरण के मामले में हाईकोर्ट की शक्ति लागू नहीं की जानी चाहिए: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह कहा कि केवल मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर "पूर्वाग्रह" या "पूर्वाग्रह की संभावना" का अस्तित्व स्पष्ट होने जैसी असाधारण परिस्थितियों में ही हाईकोर्ट सीआरपीसी की धारा 407 के तहत अपनी विवेकाधीन शक्ति [मामलों और अपीलों को स्थानांतरित करने के लिए हाईकोर्ट की शक्ति] का प्रयोग कर सकता है।हाईकोर्ट ने इसके अलावा, जोर देकर कहा कि सीआरपीसी की धारा 407 निष्पक्ष सुनवाई का आश्वासन है।जस्टिस शील नागू और जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की खंडपीठ ने यह भी कहा कि एक वादी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ईयरली डाइजेस्ट 2021 पार्ट 3 : लिव इन रिलेशनशिप, तलाक, गैगस्टर मामलों पर महत्वपूर्ण निर्णय/आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ईयरली डाइजेस्ट 2021 पार्ट 3 : लिव इन रिलेशनशिप, तलाक, गैगस्टर मामलों पर महत्वपूर्ण निर्णय/आदेश

साल 2021 के बीतने के साथ लाइव लॉ आपके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण अपडेट का ईयरली राउंड-अप लेकर आया है। इस ईयरली डाइजेस्ट में 250 आदेश और निर्णय शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न विषय में विभाजित किया गया है। इसका पहला और दूसरा पार्ट प्रकाशित हो चुका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ईयरली राउंड-अप का तीसरा भाग यहां पेश है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ईयरली डाइजेस्ट 2021 : प्रमुख ऑर्डर/जजमेंट पार्ट- 1इलाहाबाद हाईकोर्ट ईयरली डाइजेस्ट 2021 : प्रमुख ऑर्डर/जजमेंट पार्ट- 2एनएसए डिटेंशन/गुंडा एक्ट/गैंगस्टर एक्ट...

सुधार गृह से आरोपी लापता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों की रिपोर्ट से असंतुष्टी जताते हुए लापता व्यक्ति का पता लगाने का निर्देश दिया
सुधार गृह से आरोपी लापता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों की रिपोर्ट से असंतुष्टी जताते हुए लापता व्यक्ति का पता लगाने का निर्देश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने विचाराधीन मामले में प्रेसीडेंसी सुधार गृह, पश्चिम बंगाल से लापता हुए आरोपी के संबंध में जेल अधीक्षक द्वारा दायर की गई प्रारंभिक रिपोर्ट से असंतुष्टी जाहिर की। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने गुरुवार को अधिकारियों को उस व्यक्ति का पता लगाने और मामले में एक और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।जस्टिस शंपा सरकार और जस्टिस बिभास रंजन डे की खंडपीठ बुद्धदेब भौमिक द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें आरोप लगाया गया कि उसके पिता (आपराधिक मामले में एक आरोपी)...

मुस्लिम पति को दूसरी महिला के साथ अपना कंसोर्टियम साझा करने के लिए पत्नी को मजबूर करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं : गुजरात हाईकोर्ट
मुस्लिम पति को दूसरी महिला के साथ अपना कंसोर्टियम साझा करने के लिए पत्नी को मजबूर करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में माना है कि मुस्लिम कानून के अनुसार, जैसा कि भारत में लागू है, एक पति को यह मौलिक अधिकार नहीं दिया गया है कि वह अपनी पत्नी को किसी अन्य महिला (पति की अन्य पत्नियों या अन्यथा) के साथ अपने कंसोर्टियम या संघ को सभी परिस्थितियों में साझा करने के लिए मजबूर कर सके। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस निराल मेहता की पीठ ने कहा कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए पति द्वारा दायर एक मुकदमे में, एक महिला को अदालत की डिक्री के माध्यम से भी अपने पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं...

कोर्ट के आदेश के बाद भी पत्नी को पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : गुजरात हाईकोर्ट
कोर्ट के आदेश के बाद भी पत्नी को पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : गुजरात हाईकोर्ट

एक महत्वपूर्ण फैसले में गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली (Restitution Of Conjugal Rights) के लिए पति द्वारा दायर मुकदमे में एक महिला को अदालत की डिक्री (आदेश) के माध्यम से भी अपने पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस निराल मेहता की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए एक फैमिली कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है, जिसके तहत एक मुस्लिम महिला को अपने ससुराल वापस जाने और अपने पति के साथ वैवाहिक दायित्व निभाने का निर्देश दिया गया था। संक्षेप...

गुजरात हाईकोर्ट ने अधिवक्ता यतिन ओझा का सीनियर एडवोकेट डेसिग्नेशन दो साल के लिए बहाल किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अधिवक्ता यतिन ओझा का सीनियर एडवोकेट डेसिग्नेशन दो साल के लिए बहाल किया

गुजरात हाईकोर्ट ने अपनी फुल कोर्ट बैठक में एक जनवरी, 2022 से दो साल की अवधि के लिए यतिन ओझा के सीनियर एडवोकेट डेसिग्नेशन (वरिष्ठ वकील पदनाम) बहाल करने का प्रस्ताव पारित किया।यह निर्णय यतिन नरेंद्र ओझा बनाम गुजरात हाईकोर्ट एलएल, 2021 एससी 603 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पृष्ठभूमि के तहत आया, जिसमें यह माना गया कि न्याय के अंत को अस्थायी रूप से उनके सीनियर एडवोकेट डेसिग्नेशन को एक जनवरी, 2022 से दो वर्षों की अवधि के लिए बहाल किया जाएगा।यह ध्यान दिया जा सकता है कि पिछले साल, जुलाई 2020 में...

महिला के सम्मान से कोई समझौता नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने समझौते के आधार पर बलात्कार की सजा खारिज करने से इनकार किया
"महिला के सम्मान से कोई समझौता नहीं": आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने समझौते के आधार पर बलात्कार की सजा खारिज करने से इनकार किया

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते बलात्कार के एक मामले में दोषसिद्धि के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि बलात्कार समाज के खिलाफ एक अपराध है और यह पक्षकारों के लिए समझौता करने के लिए छोड़ दिया जाने वाला मामला नहीं है।कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी परिस्थिति में समझौता करने की अवधारणा के बारे में नहीं सोचा जा सकता है, क्योंकि एक महिला के सम्मान के खिलाफ समझौता नहीं हो सकता।न्यायमूर्ति रवि नाथ तिलहरी की खंडपीठ ने कहा कि दोषी और पीड़ित के बीच समझौते/निपटान के आधार पर...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
निष्पादन से पहले राज्य सरकार का पूर्व अनुमोदन नहीं होने से बिक्री विलेख अमान्य और निष्प्रभावी ‌हो जाता है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा था कि बिक्री विलेख के निष्पादन से पहले कर्नाटक हाउसिंग बोर्ड (केएचबी) द्वारा राज्य सरकार से पिछला/ पूर्व अनुमोदन प्राप्त नहीं करने से उक्त दस्तावेज अमान्य और निष्प्रभावी हो जाता है।जस्टिस एसआर कृष्ण कुमार की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता कडाइस‌िद्देश्वरा पुत्र गुरुनाथ बायकोडी द्वारा बोर्ड के साथ 23 अगस्त 2006 को निष्पादित को बिक्री विलेख को खारिज कर दिया।मामलायाचिकाकर्ता के पिता ने दावा किया था कि केएचबी द्वारा रियल एस्टेट ब्रोकर्स के साथ मिलीभगत कर धोखाधड़ी और गलत...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
सेल डीड निष्पादित करने से पहले राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त नहीं करने पर दस्तावेज़ अमान्य माना जाएगा: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सेल डीड के निष्पादन से पहले कर्नाटक हाउसिंग बोर्ड (केएचबी) द्वारा राज्य सरकार से पूर्व अनुमोदन प्राप्त नहीं करने से उक्त दस्तावेज अमान्य हो जाएगा।न्यायमूर्ति एसआर कृष्ण कुमार की एकल न्यायाधीश पीठ ने 23 अगस्त, 2006 को बोर्ड के साथ याचिकाकर्ता कदसिद्धेश्वर पुत्र गुरुनाथ ब्याकोडी के पिता द्वारा निष्पादित सेल डीड को रद्द कर दिया।अदालत ने कहा कि आक्षेपित सेल डीड दिनांक 23.08.2006 को क्रियान्वित करने से उक्त दस्तावेज अमान्य हो जाएगा और केवल दिनांक 10.04.2013...