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राष्ट्रपति ने चार न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया
भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए चार नए न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किया।राष्ट्रपति ने निम्नलिखित नियुक्तियां की हैं:1. नीना बंसल कृष्णा2. दिनेश कुमार शर्मा3. अनूप कुमार मेंदीरत्ता4. सुधीर कुमार जैन25 फरवरी, 2022 को जारी अधिसूचना में कहा गया:"भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) में प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने न्यायिक अधिकारी (1) नीना बंसल कृष्णा (2) दिनेश कुमार...
"निवास के आधार पर सरकारी अस्पताल इलाज से इनकार नहीं कर सकते": पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि एक सरकारी अस्पताल किसी को इस आधार पर इलाज से इनकार नहीं कर सकता कि वह उस क्षेत्र का निवासी नहीं है जहां अस्पताल है।जस्टिस राजबीर सहरावत की खंडपीठ ने उक्त टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कही जिसमें गर्भवती महिला को चंडीगढ़ के एख सरकारी अस्पताल द्वारा इस आधार पर मेडिकल ट्रीटमेंट से वंचित कर दिया कि वह यूटी चंडीगढ़ की नहीं पंजाब की निवासी है।याचिकाकर्ता (पांच महीने की गर्भवती) ने चंडीगढ़ के एक सरकारी अस्पताल से संपर्क किया। वह इलाज के लिए...
आरोपियों को लाभ देने के लिए उचित धाराओं में मामला दर्ज नहीं किया गया, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में शहडोल जिले के पुलिस अधीक्षक को एक आरोपी के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज नहीं करने के मामले में 'अपराधी' पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को कथित रूप से फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कृत्य किया।जस्टिस विशाल मिश्रा दरअसल आईपीसी धारा 409, 420 और 34 के तहत दायर आरोपी की दूसरी जमानत याचिका पर विचार कर रहे थे।अभियोजन पक्ष के अनुसार, आवेदक ने गलत बयानी कर शिकायतकर्ता को धोखा दिया था। शिकायतकर्ता...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 'केजीएफ-2' फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर बेंच ने केजीएफ-2 फिल्म और उसके टीज़र के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।फिल्म 14 अप्रैल, 2022 को रिलीज होने वाली है।याचिकाकर्ता तसलीम अहमद खान ने एकल न्यायाधीश द्वारा पारित एक आदेश दिनांक 31.01.2021 के खिलाफ अपील दायर की थी। इसमें फिल्म के खिलाफ रिट याचिका में नोटिस जारी करते हुए अंतरिम रोक से इनकार कर दिया था।अपीलकर्ता मुख्य रूप से कुछ दृश्यों से व्यथित है। इसमें अभिनेताओं को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है। तर्क...
सेंसर सर्टिफिकेट को चुनौती दिए बिना यह तय नहीं किया जा सकता कि फिल्म के कॉन्टेंट समुदाय को बदनाम करते हैं या नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) के खिलाफ याचिकाओं के एक समूह में किसी भी राहत से इनकार कर दिया है।कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा जारी सेंसर प्रमाण पत्र को चुनौती के अभाव में किसी फिल्म की रिलीज पर कोई रोक नहीं हो सकती है। बता दें, आज यानी शुक्रवार को यह फिल्म रिलीज हो गई। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की खंडपीठ ने दो जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा,"एक प्रभावी वैकल्पिक उपाय...
अनीस खान मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट ने मृतक की लाश का दोबारा पोस्टमार्टम का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को आलिया यूनिवर्सिटी के छात्र अनीस खान की हत्या के मामले में दूसरे पोस्टमार्टम का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि दूसरे पोस्टमॉर्टम और राज्य द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही जांच की निगरानी एक जिला न्यायाधीश द्वारा की जाएगी।अदालत ने इससे पहले घटना को 'गंभीर और चौंकाने वाला' करार देते हुए मामले का स्वत: संज्ञान लिया था।जस्टिस राजशेखर मंथा ने यह कहते हुए जांच को एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी को हस्तांतरित करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा...
'वन टाइम सेटलमेंट स्कीम' के तहत देय राशि को बैंक द्वारा एकतरफा बदल देना, वैध अपेक्षा के सिद्धांत के खिलाफ: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा था कि एक बैंक एकमुश्त निस्तारण राशि (वन टाइम सेटलमेंट, ओटीएस) को एकतरफा होकर नहीं बदल सकता। ऐसा करना प्राकृतिक न्याय और वैध अपेक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस डीडी बंसल की खंडपीठ दरअसल एक रिट याचिका का निस्तारण कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता प्रतिवादी बैंक के आदेश से व्यथित था, जिसने एकतरफा होकर ओटीएस राशि को 36,50,000 रुपये से बढ़ाकार 50,50,000 रुपये कर दिया था।पक्षकारों के बीच स्वीकृत तथ्य यह थे कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी से ऋण...
"हत्या सोच-समझकर या पूर्व नियोजित नहीं थी": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 27 साल पुराने मामले में चार लोगों की मौत की सजा को बदला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को 27 साल पुराने हत्या के एक मामले में यह देखते हुए कि मामला 'दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में नहीं आता है, चार लोगों को दी गई मौत की सजा को बदल दिया।जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विवेक वर्मा की खंडपीठ निचली अदालत की इस राय से सहमत नहीं थी कि हत्या सोच-समझकर और पूर्व नियोजित थी। ट्रायल कोर्ट का निष्कर्ष था कि मौत की सजा से कम पर्याप्त और उचित नहीं होगी।पृष्ठभूमि10-11 नवंबर, 1994 की दरमियानी रात को चार अपीलार्थियों कृष्णा मुरारी, राघव राम वर्मा, काशीराम वर्मा...
हिजाब केस- सबरीमाला जजमेंट प्रो-चॉइस, संवैधानिक नैतिकता राज्य की शक्ति पर एक प्रतिबंध : वरिष्ठ अधिवक्ता कामत ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा
कर्नाटक हाईकोर्ट में गुरुवार को हिजाब पर प्रतिबंध लगाने के मामले वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने याचिकाकर्ता मुस्लिम छात्राओं की ओर से जवाबी तर्क पेश किए। कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनकर एक सरकारी पीयू कॉलेज के प्रवेश से इनकार करने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली मुस्लिम छात्राओं की याचिका पर सुनवाई कर रही है। फुल बेंच के समक्ष सुनवाई का आज 10वां दिन था।मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित और न्यायमूर्ति जेएम खाजी की खंडपीठ ने कहा कि वह शुक्रवार...
बिना यह पता लगाए कि हथियार का दुरुपयोग हुआ है, उसका लाइसेंस रद्द करना तर्कसंगत नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना यह पता लगाए कि हथियार का दुरुपयोग हुआ है, उसका लाइसेंस रद्द करना तर्कसंगत नहीं है।जस्टिस गौतम चौधरी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सुधाकर मिश्रा के बन्दूक लाइसेंस को रद्द करने के कलेक्टर द्वारा पारित मई 1989 के एक आदेश के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त टिप्पणी की। अक्टूबर 1995 में आयुक्त, वाराणसी मंडल, वाराणसी द्वारा पारित उनकी अपील को भी खारिज कर दिया गया था।याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि अधिकारियों ने इस आधार पर आक्षेपित आदेश पारित किए कि...
'गृहणी की भूमिका कुशल कर्मचारी से बढ़कर': गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मोटर एक्सिडेंट मुआवजा बढ़ाया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक गृहिणी की भूमिका बहुआयामी है और उसे एक कुशल श्रमिक के रूप में चिन्हित करना घर को मैनेज करने में उसकी भूमिका के साथ पूर्ण न्याय नहीं है। इसलिए, एक मोटर दुर्घटना में उसकी मृत्यु के संबंध में मुआवजे की गणना निर्भरता की हानि को शामिल कर की जानी चाहिए।कोर्ट ने कहा, " मेरी सुविचारित राय में एक गृहिणी को 'कुशल कर्मचारी' के रूप में चिन्हित करना गृह प्रबंधक के रूप में उसकी बहुआयामी भूमिका के साथ पूर्ण न्याय नहीं है। लता वाधवा (इन्फ्रा) मामले में दुर्घटना और...
कर्मचारी को रियायत के रूप में 'वर्क फ्रॉम होम' की अनुमति से क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार में परिवर्तन का दावा नहीं किया जा सकता : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि केवल घर से काम करने की अनुमति (वर्क फ्रॉम होम) उस न्यायालय को अधिकार क्षेत्र प्रदान करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसके अधिकार क्षेत्र में कर्मचारी काम कर रहा है।जस्टिस सुनील थॉमस ने दूरस्थ कर्मचारियों के कानूनी दावों के क्षेत्राधिकार को स्पष्ट किया दिया और फैसला सुनाया कि केवल इसलिए कि उन्हें घर से काम करने की अनुमति है और नियोक्ता को पता था कि कर्मचारी एक अलग अधिकार क्षेत्र में है, अधिकार क्षेत्र प्रदान करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।बेंच ने कहा,"कानूनी...
"10 मई तक इंट्रोगेशन रूम्स सहित सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाएं": हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ को निर्देश दिया
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को 10 मई, 2022 तक 18 महीने की स्टोरेज वाले सीसीटीवी कैमरे इंट्रोगेशन रूम्स सभी पुलिस स्टेशनों में लगाने का निर्देश दिया।जस्टिस अमोल रतन सिंह की खंडपीठ ने परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह और अन्य (2021) 1 एससीसी 184 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश द्वारा जारी निर्देशों के मद्देनजर यह आदेश जारी किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें यह सुनिश्चित करना का निर्देश दिया कि उनके अधीन...
परिस्थितिजन्य सबूत न केवल आरोपी के अपराध के अनुरूप होना चाहिए, बल्कि उसकी बेगुनाही से भी असंगत होना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में कहा कि परिस्थितिजन्य सबूत न केवल आरोपी के अपराध के अनुरूप होना चाहिए बल्कि उसकी बेगुनाही के साथ असंगत होना चाहिए।न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने प्रतिवादी को आईपीसी की धारा 302, 34 के तहत आरोपों से बरी करने के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बदायूं के आदेश के खिलाफ पीड़िता द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।यह देखते हुए कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है और अभियोजन द्वारा स्थापित की...
दिल्ली दंगे: कथित हेट स्पीच पर राजनेताओं की जांच के लिए याचिका की स्थिरता को चुनौती देने वाले आवेदन पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को 2020 के दिल्ली दंगों को भड़काने के लिए कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण (हेट स्पीच) देने के लिए विभिन्न राजनेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका की स्थिरता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।शेख मुजतबा द्वारा दायर उस याचिका में अभियोग आवेदन दायर किया गया, जिसमें भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग की गई।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भंभानी की...
पति दूसरी पत्नी को भरण-पोषण देने से इनकार नहीं कर सकता जब उसने पहले विवाह की सच्चाई को छुपाया हो: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने माना कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत एक व्यक्ति अपनी दूसरी पत्नी के भरण-पोषण के दायित्व से बच नहीं सकता है, जब उसने उससे अपने पहले विवाह की सत्यता को छिपा लिया था।निचली अदालत द्वारा पारित भरण-पोषण के आदेश को रद्द करने के लिए पति (याचिकाकर्ता) द्वारा किए गए आवेदन को खारिज करते हुए, जस्टिस रॉबिन फुकन की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा, "धारा 125 सीआरपीसी सामाजिक न्याय का एक उपाय है, जो महिलाओं, बच्चों और कमजोर माता-पिता जैसे समाज के कमजोर वर्ग की रक्षा के लिए अधिनियमित है और यह...
न्यायालयों को देरी में माफी देने के आवेदनों पर निर्णय करते समय पक्षकारों के आचरण की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए: मणिपुर हाईकोर्ट
मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों को पक्षकारों के आचरण की "पूरी तरह से" जांच करनी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी गैर-माजूदगी (पेश होने में विफलता) एक विलक्षण घटना है या ऐसा पहले भी होता रहा है।चीफ जस्टिस संजय कुमार की एकल न्यायाधीश पीठ ने याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार करते हुए कहा,"इस न्यायालय को यह सुनिश्चित करने के लिए पक्षकार के आचरण की उचित जांच करनी होगी कि क्या 'पेश होने में विफलता कोई विलक्ष घटना है या यह किसी पुरानी आदत की तरह पहले भी होता रहा है। जैसा...
[साइबर क्राइम] अगर एफआईआर दर्ज करने से इनकार करते हैं तो बिहार पुलिस को अदालती कार्यवाही की अवमानना का सामना करना पड़ेगा: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने सोमवार को बिहार पुलिस के अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि वे साइबर अपराध के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार करते हैं, तो उन्हें अदालत की अवमानना की कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।न्यायमूर्ति संदीप कुमार की खंडपीठ ने अदालत के समक्ष दूरसंचार कंपनियों द्वारा किए गए सबमिशन पर ध्यान देने के बाद कहा कि कुछ थानों में साइबर अपराध से संबंधित एफ.आई.आर. के पंजीकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन थानों के प्रभारी अधिकारी एफ.आई.आर. दर्ज करने से इनकार कर...
'हर छात्र को 100% अंक देना परीक्षा के उद्देश्य को खत्म कर देगा': केरल हाईकोर्ट ने बोर्ड एग्जाम पैटर्न बदलने के लिए राज्य के प्रस्ताव को बरकरार रखा
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार के राज्य बोर्ड एग्जाम के छात्रों के लिए एग्जाम पैटर्न को पिछले आदेश के विपरीत इस शैक्षणिक वर्ष में बदलने के प्रस्ताव में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।प्रस्तावित एग्जाम पैटर्न में 70% प्रश्न फोकस क्षेत्र से और शेष 30% गैर-फोकस क्षेत्र से होंगे। इसके अलावा, फोकस क्षेत्र और गैर-फोकस क्षेत्र के लिए 50% विकल्प प्रश्न होंगे।जस्टिस अमित रावल ने कहा कि इस तरह के प्रश्न पैटर्न और मूल्यांकन से बाकी लोगों में से सबसे योग्य की पहचान की जा सकती है।उन्होंने...
व्हाट्सएप ग्रुप का एडमिन ग्रुप मेंबर द्वारा की गई आपत्तिजनक पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को एक उल्लेखनीय फैसले में कहा कि यदि व्हाट्सएप ग्रुप का कोई सदस्य ग्रुप में आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करता है तो ग्रुप के एडमिन को परोक्ष रूप से (vicariously) उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है।जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि आपराधिक कानून में परोक्ष दायित्व (Vicarious liabilty) केवल तभी तय किया जा सकता है, जब कोई कानून ऐसा निर्धारित करे।"एक परोक्ष आपराधिक दायित्व केवल कानून के प्रावधान के तहत ही तय किया जा सकता है, अन्यथा नहीं। किसी विशेष दंडात्मक कानून...
















