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मद्रास हाईकोर्ट
धारा 188 आईपीसी के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए लोक सेवक की ओर से लिखित शिकायत अनिवार्य: मद्रास हाईकोर्ट ने TASMAC दुकान को स्थानांतरित करने के लिए आंदोलन पर एफआईआर को खारिज कर दिया

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै खंडपीठ ने 2017 में TASMAC की दुकान के सामने इकट्ठे हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर को रद्द कर दिया और मांग की कि इसे युवा पीढ़ी की खातिर शिफ्ट किया जाना चाहिए। ग्राम प्रशासनिक अधिकारी की शिकायत के आधार और न्यायिक मजिस्ट्रेट की फाइल पर ली गई एफआईआर को रद्द करते हुए जस्टिस के मुरली शंकर ने कहा कि अभियोजन यह स्थापित करने में विफल रहा है कि जिन अपराधों के तहत उन पर मामला दर्ज किया गया था, उनकी सामग्री बनाई गई है।याचिकाकर्ताओं ने धारा 143 [गैरकानूनी सभा], 188 [लोक...

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाई आई किल्ड गांधी मूवी स्ट्रीमिंग पर प्रतिबंध लगाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने "व्हाई आई किल्ड गांधी" मूवी स्ट्रीमिंग पर प्रतिबंध लगाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर 30 जनवरी को ओटीटी प्लेटफॉर्म 'लाइमलाइट' पर रिलीज होने वाली फिल्म "व्हाई आई किल्ड गांधी" की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की मांग वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच ने याचिकाकर्ता को अपने आदेश में हाईकोर्ट जाने की छूट देते हुए कहा,"अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका केवल तभी दायर की जा सकती है जब मौलिक अधिकार के उल्लंघन का सवाल हो। याचिकाकर्ता के किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
"शिकायतकर्ता की गरिमा पर गंभीर हमला": दिल्ली हाईकोर्ट ने पक्षकारों के बीच समझौते के बावजूद आरोपी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की प्राथमिकी रद्द करने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने पक्षकारों के बीच समझौते के बावजूद एक स्नातक लड़की का पीछा करने, यौन उत्पीड़न करने (Sexual Harassment) और उसके साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया है।लड़की के खिलाफ किए गए अपराधों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने कहा कि प्राथमिकी को केवल इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता है कि व्यक्ति ने अपराधों के लिए बाद में पश्चाताप किया है। यह शिकायतकर्ता की गरिमा पर गंभीर हमला...

यौन उत्पीड़न का मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व भारती विश्वविद्यालय पर प्रोफेसर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के संबंधित मामले में जवाब दाखिल नहीं करने में विफल रहने पर 10 हजार रूपए का जुर्माना लगाया
यौन उत्पीड़न का मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व भारती विश्वविद्यालय पर प्रोफेसर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के संबंधित मामले में जवाब दाखिल नहीं करने में विफल रहने पर 10 हजार रूपए का जुर्माना लगाया

कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने शुक्रवार को विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोपों के आधार पर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने से संबंधित मामले में जवाब दाखिल करने में विफल रहने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया।न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा करने के लिए तीन पूर्व अवसर दिए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय अपना हलफनामा दाखिल करने में विफल रहा है।कोर्ट ने आदेश में दर्ज किया, "विश्वविद्यालय को 25...

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के सात एडवोकेट को जज के रूप में पदोन्नति करने की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के सात एडवोकेट को जज के रूप में पदोन्नति करने की सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 29 जनवरी, 2022 को हुई अपनी बैठक में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के निम्नलिखित सात एडवोकेट को न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी:1. एडवोकेट कोणाकांति श्रीनिवास रेड्डी @श्रीनिवास रेड्डी,2. एडवोकेट गन्नामनेनी रामकृष्ण प्रसाद,3. एडवोकेट वेंकटेश्वरलु निम्मगड्डा,4. एडवोकेट तरलदा राजशेखर राव,5. एडवोकेट सत्ती सुब्बा रेड्डी,6. एडवोकेट रवि चीमलपति, और7. एडवोकेट वद्दीबोयाना सुजाताकॉलेजियम स्टेटमेंट डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस एमएन भंडारी को मद्रास हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस एमएन भंडारी को मद्रास हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 14 दिसंबर, 2021 और 29 जनवरी, 2022 को हुई अपनी बैठक में मद्रास हाईकोर्ट के जज मुनीश्वर नाथ भंडारी को मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की।नवंबर, 2021 में जस्टिस भंडारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। 22 नवंबर, 2021 को उन्होंने पूर्व चीफ जस्टिस संजीव बनर्जी के मेघालय हाईकोर्ट में स्थानांतरण के बाद मद्रास हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली थी।स्टेटमेंट डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

किसी कैदी को 14 दिनों से अधिक एकांत कारावास में नहीं रखा जा सकता - बॉम्बे हाईकोर्ट ने दो साल चार माह बाद अंडा सेल से निकाला
किसी कैदी को 14 दिनों से अधिक एकांत कारावास में नहीं रखा जा सकता - बॉम्बे हाईकोर्ट ने दो साल चार माह बाद अंडा सेल से निकाला

एकांत कारावास में दो साल चार महीने की सजा काट चुके इमरान शेख ने केंद्रीय कारागार, औरंगाबाद के अधीक्षक को लिखा था, "मैं भूल गया हूं कि इंसानों के साथ संवाद कैसे किया जाता है, हर मानवीय भावनाएं खत्म हो चुकी हैं, यहां तक कि जानवरों को भी इस तरह नहीं रखा जाता है।" हालांकि उसे राहत नहीं मिली थी।पिछले हफ्ते, बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने शेख की पत्नी के पत्र का संज्ञान लिया और जेल अधिकारी को उसे तत्काल प्रभाव से एक साधारण जेल सेल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया, और डॉक्टरों की एक टीम को जेल...

केरल हाईकोर्ट
अभियोजन पक्ष को आरोपी से मोबाइल फोन सरेंडर करने के लिए कहने का अधिकार, यह अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने शनिवार को कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79ए के तहत आरोपी को फोरेंसिक जांच के लिए मोबाइल फोन सरेंडर करने की मांग करने का अभियोजन पक्ष को पूरा अधिकार है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि मोबाइल फोन के सरेंडर से संविधान के अनुच्छेद 20 (3) के तहत आत्म-अभिशंसन (Self-Incrimination) के खिलाफ मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।कोर्ट ने अभिनेता दिलीप और अन्य आरोपियों को 2017 के सनसनीखेज यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को मारने की कथित आपराधिक साजिश में सोमवार...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
एनआई एक्ट की धारा 138: अगर मामला मजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर है तो सीआरपीसी की धारा 202 के तहत आरोपी के खिलाफ कार्यवाही करने से पहले जांच की जानी चाहिए: बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत दर्ज किए गए मामलों में त्वरित सुनवाई के संबंध में पिछले साल जारी किए गए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों के अनुसार निम्नलिखित दिशानिर्देशों को निर्धारित करते हुए एक परिपत्र जारी किया है;1. एनआई अधिनियम के तहत अपराधों की कोशिश करने वाले मजिस्ट्रेट एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत एक शिकायत को संक्षिप्त और पर्याप्त कारणों को दर्ज करने के बाद ही समरी ट्रायल से समन...

Unfortunate That The Properties Of Religious And Charitable Institutions Are Being Usurped By Criminals
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में 6800 अतिरिक्त सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए यूपी सरकार के फैसले पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले से नियुक्त 69000 अभ्यर्थियों के अलावा प्रदेश में प्राथमिक सहायक शिक्षक के रूप में 6800 अतिरिक्त अभ्यर्थियों की नियुक्ति के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी।जस्टिस राजन राय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार बिना विज्ञापन जारी किए 69000 से अधिक उम्मीदवारों को नियुक्त नहीं कर सकती है, क्योंकि राज्य द्वारा जारी मूल विज्ञापन में केवल 69000 पदों को भरने का इरादा था।संक्षेप में मामलामूल रूप से दिसंबर, 2018 में जारी विज्ञापन (सहायक शिक्षकों के पद के लिए) में 69000...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
"पेशकार सुपाठ्य आदेश लिखने के लिए बाध्य हैं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सुपाठ्य आदेश लिखने में विफल होने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।कोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालयों में कुछ आदेश, बयान और कार्यालय रिपोर्ट खराब लिखावट में लिखे गए हैं कि उन्हें ठीक से नहीं पढ़ा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2021 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि पेशकारों/न्यायालय के पाठकों का कर्तव्य है कि वे न्यायालय के आदेश को सुपाठ्य तरीके से लिखें, ऐसा न करने पर इसे कदाचार माना जा सकता है।इसे देखते हुए...

ऐसी सहमति का कोई महत्व नहीं : कलकत्ता हाईकोर्ट ने 16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार करने वाले व्यक्ति की सजा बरकरार रखी
'ऐसी सहमति का कोई महत्व नहीं ': कलकत्ता हाईकोर्ट ने 16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार करने वाले व्यक्ति की सजा बरकरार रखी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बलात्कार के अपराध के लिए एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि नाबालिग पीड़िता की सहमति महत्वहीन है क्योंकि वह कथित घटना के समय 16 वर्ष से कम उम्र की थी। इस मामले में यह कहा गया था कि आरोपी और पीड़िता के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था और कथित संभोग सहमति से किया गया। उल्लेखनीय है कि 2013 के आपराधिक कानून संशोधन के अनुसार, भारत में सहमति की आयु 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दी गई है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस बिभास रंजन डे की बेंच ने कहा...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका दायर करने के लिए आरोपी अपने पावर ऑफ अटॉर्नी धारक का उपयोग नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी आपराधिक कार्यवाही में उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी तीसरे पक्ष, जैसे पावर ऑफ अटॉर्नी धारक (एसपीए) का सहारा नहीं ले सकता।दंड प्रक्रिया संहिता ( सीआरपीसी) में अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति की अनिवार्य आवश्यकता का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में तीसरे पक्ष की उपस्थिति आपराधिक न्याय प्रणाली के उद्देश्य को विफल कर देगी।न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 227 सहपठित दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 धारा 482, के तहत दायर एक याचिका खारिज कर दी। इसमें...

पत्नी का कथित सहज चरित्र उसके पति को आत्महत्या के लिए उकसाने का संकेत नहीं, उकसावे के लिए आपराधिक मनःस्थिति आवश्यक तत्व  पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पत्नी का कथित सहज चरित्र उसके पति को आत्महत्या के लिए उकसाने का संकेत नहीं, उकसावे के लिए आपराधिक मनःस्थिति आवश्यक तत्व पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी के खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है और कोई मृत्युपूर्व बयान या सुसाइड नोट नहीं है, तो केवल यह तथ्य कि वह कथित रूप से सहज चरित्र की महिला है, पत्नी द्वारा अपने पति को आत्महत्या के लिए उकसाने और सहयोग देने का संकेत नहीं हैै।वर्तमान मामले में एक पति ने आत्महत्या कर ली थी और अपने बेटे का जीवन भी खत्म कर दिया था। उसने मरने से पहले अपनी पत्नी के अवैध संबंधों के बारे में एक नोट भी लिखा था। इसी मामले पर विचार करते हुए जस्टिस विकास बहल ने कहा...

सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत जांच के लिए लोक सेवकों के खिलाफ शिकायत का उल्लेख करने के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक: कलकत्ता हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत जांच के लिए लोक सेवकों के खिलाफ शिकायत का उल्लेख करने के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में गुरुवार को कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 156 (3) के तहत जांच प्रक्रिया को गति देने से पहले लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होती है।कोर्ट पूर्व आईपीएस अधिकारी नजरूल इस्लाम द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के अन्य शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग करने वाली एक अपील पर फैसला सुना रही थी। इस्लाम ने उन्हें पदोन्नति से वंचित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी...