मुख्य सुर्खियां

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम- यदि कोई प्रथम दृष्टया अपराध नहीं बनता है तो अग्रिम जमानत दी जा सकती है: गुजरात हाईकोर्ट
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम- यदि कोई प्रथम दृष्टया अपराध नहीं बनता है तो अग्रिम जमानत दी जा सकती है: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 323, 332, 504, 506(2), 114 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(5-ए) के तहत अपराधों के लिए जमानत आवेदन को रद्द करने के खिलाफ दायर एक आपराधिक अपील स्वीकार कर लिया है।जस्टिस बीएन करिया की खंडपीठ ने कहा है कि अपीलकर्ता ने यहां शिकायतकर्ता की जाति के बारे में किसी भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया था और शिकायतकर्ता की जाति से भी अवगत नहीं था।मामले यह था कि शिकायतकर्ता और एक अन्य व्यक्ति रात के समय जीईबी के सब-स्टेशन...

एओ अधिक कर वसूलने के लिए निर्धारिती की अज्ञानता का फायदा नहीं उठा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट ने संशोधित आईटीआर दाखिल में 6 साल की देरी को माफ किया
एओ अधिक कर वसूलने के लिए निर्धारिती की अज्ञानता का फायदा नहीं उठा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट ने संशोधित आईटीआर दाखिल में 6 साल की देरी को माफ किया

कर्नाटक हाईकोर्ट की एक पीठ ने संशोधित आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने में 6 साल की देरी को माफ कर दिया है।जस्टिस सुनील एस यादव की एकल पीठ ने कहा है कि परिपत्र संख्या 014 (एक्सएल -35), 11.04.1955 का इरादा ऐसा नहीं था कि देय कर नहीं लगाया जाना चाहिए या निर्धारण के मामले में किसी पर कोई एहसान किया जाना चाहिए, या जहां जांच के लिए बुलाया जाता है, उन्हें नहीं किया जाना चाहिए।जो भी वैध कर है उसका आकलन किया जाना चाहिए और उसे एकत्र किया जाना चाहिए। सर्कुलर का उद्देश्य केवल इस बात पर जोर देना है कि कर...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
माता-पिता से अपेक्षित है कि उन प्राइवेट स्कूलों को किश्तों का भुगतान करें, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद फीस स्ट्रक्चर का सेटलमेंट किया हैः राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर ने पाया कि माता-पिता से यह अपेक्षित था कि वे आवश्यक शुल्क या कम से कम कुछ किश्तों का भुगतान करें, यदि उनके बच्चे उन निजी स्कूलों में नामांकित हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फीस स्ट्रक्चर का सेटलमेंट किया है।इस मामले में याचिकाकर्ता प्रतिवादी संख्या एक-कैम्ब्रिज कोर्ट हाईस्कूल के छात्र हैं। प्रतिवादी स्कूल ने कथित तौर पर याचिकाकर्ताओं को 03.03.2022 से शुरू होने वाली प‌रीक्षाओं में शामिल होने से वंचित कर दिया है। उनके माता-पिता ने अधिकारियों को कई अभ्यावेदन...

गौरी लंकेश हत्याकांड: कर्नाटक हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक को निजी अस्पताल में आरोपी का इलाज कराने का निर्देश दिया
गौरी लंकेश हत्याकांड: कर्नाटक हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक को निजी अस्पताल में आरोपी का इलाज कराने का निर्देश दिया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक को पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी के टी नवीन कुमार को एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने और इलाज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।जस्टिस के नटराजन की एकल पीठ ने याचिका की अनुमति देते हुए 31 दिसंबर, 2021 के विशेष न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया।उन्होंने कहा,"जेल अधीक्षक को कोलंबिया एशिया अस्पताल एचएसआर रोड, बेंगलुरु में याचिकाकर्ता को उपचार प्रदान करने का निर्देश दिया गया। उक्त अस्पताल परप्पना अग्रहारा जेल से 7.7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। याचिकाकर्ता को...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
जुलाई से दिसंबर, 2021 के दौरान किशोर के साथ वयस्क के रूप में व्यवहार करने के लिए किसी भी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई: दिल्ली हाईकोर्ट को बताया गया

दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया गया है कि एक जुलाई से 31 दिसंबर, 2021 की अवधि में एक किशोर के साथ वयस्क के रूप में व्यवहार किए जाने के संबंध में शहर के किसी भी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है।अदालत ने पिछले महीने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) के सचिव को निर्देश दिया था कि वह 2012 के दिशानिर्देशों और निर्देशों के अनुपालन और कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों और बच्चों के संबंध में, जिन्हें वयस्‍क जेलों में बंद किया गया है, एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।कोर्ट ऑन इट्स...

धारा 377 आईपीसी तब भी आकर्षित होती है, जब योनि के अलावा शरीर के किसी भी हिस्से में यौन इरादे से पेनेट्रेशन होता है: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
धारा 377 आईपीसी तब भी आकर्षित होती है, जब योनि के अलावा शरीर के किसी भी हिस्से में यौन इरादे से पेनेट्रेशन होता है: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ‌हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 के दायरे को‌ विस्तृत करते हुए माना है कि यह अपराध उस स्थिति में भी आकर्षित होता है, जहां यौन इरादे से किसी व्यक्ति के शरीर के किसी अन्य भाग में भी पेनेट्रेशन किया जाता है।जस्टिस विनोद एस भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि धारा 375 आईपीसी (बलात्कार/ लिंग-योनि प्रवेश) के तहत जो विचार किया गया है, उसके अलावा यौन इरादे से शरीर के किसी हिस्‍से में प्रवेश की स्थिति में धारा 377 आकर्षित होती है।उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के इस फैसले से यह भी स्पष्ट...

प्रशासनिक पक्ष पर विचार: दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई को आदर्श के रूप में अपनाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
"प्रशासनिक पक्ष पर विचार": दिल्ली हाईकोर्ट ने 'वर्चुअल सुनवाई' को आदर्श के रूप में अपनाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इसमें राष्ट्रीय राजधानी में सभी न्यायालयों में वर्चुअल कोर्ट की सुनवाई को एक आदर्श के रूप में अपनाने की मांग की गई।याचिकाकर्ता मुजीब उर रहमान ने कहा कि वर्चुअल कोर्ट की सुनवाई बेहद सुविधाजनक और समय बचाने वाली है। इसलिए, अदालत को इसे सभी जिला अदालतों के साथ-साथ हाईकोर्ट में एक आदर्श के रूप में अपनाने पर विचार करना चाहिए।चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर...

जनहित याचिका क्षेत्राधिकार को लागू करने के लिए उचित तथ्य और साक्ष्य कोर्ट के समक्ष रखे जाने चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट
जनहित याचिका क्षेत्राधिकार को लागू करने के लिए उचित तथ्य और साक्ष्य कोर्ट के समक्ष रखे जाने चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने कहा कि एक जनहित क्षेत्राधिकार में अदालत का दरवाजा खटखटाने वाला नागरिक को आगे की जांच के लिए अदालत के समक्ष पूर्ण शोध और आवश्यक तथ्य पेश करना चाहिए।वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रतिवादी क्रमांक 2, अर्थ क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के कुप्रबंधन के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए थे।मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति रेखा बोराना की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा,"एक जनहित क्षेत्राधिकार में न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाला नागरिक को...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किया कि पीड़ित को पॉक्सो मामलों से संबंधित सभी जमानत कार्यवाही की सूचना दी जाए
कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किया कि पीड़ित को पॉक्सो मामलों से संबंधित सभी जमानत कार्यवाही की सूचना दी जाए

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012, और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण नियम, 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी किए। निर्देश विशेष रूप से उन मामलों के लिए जारी किया गया है, जिनमें जहां अभियुक्तों को जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने एक पीड़िता की मां की ओर से दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता है कि पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध...

जनहित याचिका क्षेत्राधिकार को लागू करने के लिए उचित तथ्य और साक्ष्य न्यायालय के समक्ष रखे जाने चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट
जनहित याचिका क्षेत्राधिकार को लागू करने के लिए उचित तथ्य और साक्ष्य न्यायालय के समक्ष रखे जाने चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जनहित क्षेत्राधिकार में अदालत का दरवाजा खटखटाने वाला नागरिक आगे की जांच के लिए अदालत के समक्ष पूर्ण शोध करने और आवश्यक तथ्य पेश करने के लिए अधिक कर्तव्य है।वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रतिवादी नंबर दो अर्थ क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के कुप्रबंधन के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए।चीफ जस्टिस अकील कुरैशी और जस्टिस रेखा बोराना की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा,"एक जनहित क्षेत्राधिकार में न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाला नागरिक आगे की जांच के लिए न्यायालय...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूनतम आयु मानदंड को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम राहत देते हुए डीएचजेएस एग्जाम, 2022 टाला

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हायर ज्यूडिशल सर्विस एग्जाम (डीएचजेएस), 2022 में उपस्थित होने के लिए 35 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतरिम राहत देते उक्त परीक्षा को चार सप्ताह के लिए टाल दिया।जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सात अप्रैल की तारीख तय करते हुए हाईकोर्ट रजिस्ट्रार और दिल्ली सरकार के कानून एवं न्याय विभाग के माध्यम से जवाब मांगा।परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 12 मार्च निर्धारित की गई, जबकि...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
भ्रष्टाचार ही गरीबी, असमानता, निरक्षरता, सामाजिक अशांति जैसी सभी समस्याओं का मूल कारण; यह एक दीमक की तरह है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में समाज में भ्रष्टाचार के बढ़ते खतरे पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार हर सिस्टम में एक दीमक की तरह है। एक बार सिस्टम में प्रवेश करने के बाद यह और बड़ा होता जाता है। अदालत ने टिप्पणी की, "भ्रष्टाचार हर व्यवस्था में एक दीमक है। एक बार यह व्यवस्था में प्रवेश कर जाता है तो यह बढ़ता ही जाता है। आज यह बड़े पैमाने पर है और एक दिनचर्या बन गया है। भ्रष्टाचार गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, प्रदूषण, बाहरी खतरे, अविकसितता, असमानता,...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छुपाते हुए बार बार याचिका दायर करने वाली दहेज हत्या की आरोपी पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दहेज हत्या की एक आरोपी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा है कि उसने महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों को छुपाते हुए अदालत के समक्ष लगातार आवेदन दायर करके कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और कोर्ट को गुमराह किया है।जस्टिस संजय कुमार सिंह की खंडपीठ ने आगे जोर देकर कहा कि अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए उच्चतम स्तर की ईमानदारी, निष्पक्षता, मन की पवित्रता होनी चाहिए और ऐसा न करने पर वादी को जल्द से जल्द कोर्ट से बाहर जाने का रास्ता दिखा देना चाहिए।संक्षेप में...

शिक्षक की ओर से दायर रिकवरी सूट पर सुनवाई सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में : कर्नाटक हाईकोर्ट
शिक्षक की ओर से दायर रिकवरी सूट पर सुनवाई सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि ‌‌सिविल कोर्ट के पास वेतन बकाया का दावा कर रही एक शिक्षक के मुकदमे पर सुनवाई और फैसला लेने का अधिकार है, यदि श‌िक्षक को स्कूल बंद होने के कारण कार्यमुक्त कर दिया गया और स्कूल प्रबंधन ने उसके बकाया वेतन के दावों पर कोई आदेश पारित नहीं किया है।जस्टिस डॉ एचबी प्रभाकर शास्त्री और जस्टिस एस रछैया की खंडपीठ ने हाल ही में सिविल कोर्ट द्वारा पारित 9 नवंबर, 2020 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उसने एक उर्दू शिक्षक की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उसे इस पर सुनवाई का...

मद्रास हाईकोर्ट
नाबा‌लिग ड्राइविंगः 'मासूमों की जान चली गई है, ऐसे मामलों पर अपनी सहमति नहीं दे सकते', मद्रास हाईकोर्ट ने नाबालिग के मोटर दुर्घटना के दावे को खारिज किया

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मोटर दुर्घटना के दावे पर विचार करने से इनकार कर दिया है, जिसमें दावेदार, जो एक नाबालिग था, दुर्घटना में शामिल मोटरसाइकिल चला रहा था। फैसले में कड़े शब्दों में जस्टिस एस कन्नमल ने कहा कि दावेदार जो दुर्घटना के समय एक नाबालिग लड़का था, वह बीमा कंपनी से मुआवजे की मांग नहीं कर सकता, जब वह खुद गलत काम करने वाला हो।हालांकि पीठ ने दावेदार की इस दलील से सहमति जताई कि मोटर वाहन अधिनियम एक 'परोपकारी कानून' है, लेकिन उसने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं होगा कि सभी मामलों...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
अदालतों को स्टांप शुल्क की कमी पर प्री-अप्वाइंटमेंट स्टेज में मध्यस्थता को रोकने की आवश्यकता नहीं है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को सिंगल जज एके मेनन के माध्यम से विचार किया कि क्या ऑर्ब‌िट्रेशन को प्री-अप्वाइंटमेंट स्टेज और प्री-रिफरेंस स्टेज में आयोजित किया जाना चाहिए या क्या पार्टी को रिफरेंस के बाद प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए और अपनी चुनौतियों को आगे बढ़ाने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए।आवेदक विवेक मेहता और अन्य ने 29 अगस्त, 2009 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत पैदा हुए विवादों के समाधान के लिए एकमात्र आर्बिट्रेटर की नियुक्ति के लिए ऑर्बिट्रेशन एंड कंसाइलेशन एक्ट,...

एडवोकेट्स एसोसिएशन ने महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष पर न्यायिक कदाचार का आरोप लगाया, खुद के खिलाफ एक मामले का फैसला करने के लिए कार्रवाई की मांग
एडवोकेट्स एसोसिएशन ने महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष पर 'न्यायिक कदाचार' का आरोप लगाया, खुद के खिलाफ एक मामले का फैसला करने के लिए कार्रवाई की मांग

कंज्यूमर कोर्ट्स एडवोकेट्स एसोसिएशन महाराष्ट्र और गोवा ने राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (महाराष्ट्र) के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ संतोष काकड़े पर "न्यायिक कदाचार" का आरोप लगाया है। उन्होंने खुद के खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के एक मामले को खारिज करने कर दिया था। पिछले महीने मामले को बहाल कर दिया गया था।।एसोसिएशन ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) और बॉम्बे हाईकोर्ट को पत्र लिखकर एसोसिएशन के प्रस्ताव के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।जनरल बॉडी मीटिंग की बैठक के मिनट्स...

मैं इसे आज़ादी का प्रमाण पत्र मानता हूं: जस्टिस अकील कुरैशी ने अपने न्यायिक आदेशों पर केंद्र की नकारात्मक धारणा पर कहा
'मैं इसे आज़ादी का प्रमाण पत्र मानता हूं': जस्टिस अकील कुरैशी ने अपने न्यायिक आदेशों पर केंद्र की "नकारात्मक धारणा" पर कहा

राजस्थान हाईकोर्ट के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अकील कुरैशी ने शनिवार को अपने विदाई भाषण में कुछ महत्वपूर्ण बयान दिए। देश में सबसे वरिष्ठ मुख्य न्यायाधीश होने के बावजूद, जस्टिस कुरैशी को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त नहीं करने के विषय में कानूनी बिरादरी में बहुत चर्चाएं हो रही हैं। यह व्यापक धारणा है कि गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सत्तारूढ़ दल के खिलाफ जस्टिस अकील द्वारा कुछ आदेशों के पारित होने के कारण केंद्र सरकार उनके पक्ष में नहीं है।अपने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप पर दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप पर दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न का आरोप पर दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए संबंधित डीसीपी के हस्ताक्षर के तहत पुलिस से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी।जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने उचित जांच के बाद मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी।अदालत महिला की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (ए), 354 (डी), 506 और 509 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली एक याचिका पर विचार कर रही थी।एफआईआर में कहा गया कि शिकायतकर्ता एक सरकारी कार्यालय में कार्यरत है और...