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[सीएए विरोधी प्रदर्शन] इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी
[सीएए विरोधी प्रदर्शन] इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को मोहम्मद कैफ नाम के व्यक्ति को अग्रिम जमानत दे दी। कैफ पर सीएए विरोध प्रदर्शनों के दौरान देश विरोधी नारे लगाकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश करने का आरोप है।जस्टिस राजबीर सिंह की खंडपीठ ने पक्षकारों के वकील की प्रस्तुतियां, आरोप की प्रकृति, आवेदक की भूमिका और मामले के सभी उपस्थित तथ्यों और परिस्थितियों के साथ-साथ अग्रिम जमानत के संबंध में कानून के स्थापित सिद्धांत पर विचार करते हुए कहा कि उक्त मामले में अग्रिम जमानत दी जा सकती है।कैफ ने भारतीय दंड संहिता...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
"मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई है": बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखने के लिए अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्ति का हवाला दिया, 23 वर्षीय दोषी लड़के की मौत की सजा को कम किया

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने कहा कि खतरे या प्रलोभन से मुक्त स्वेच्छा से किए गए अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्ति में सच्चाई का अनुमान होता है। मामले के तथ्यों के आधार पर स्वीकारोक्ति को कमजोर सबूत के रूप में मानने की आवश्यकता नहीं है।अदालत ने 23 वर्षीय अपीलकर्ता के न्यायेतर स्वीकारोक्ति को एक युवा लड़की की हत्या के लिए दोषी ठहराने और उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण सबूत के रूप में उद्धृत किया। अदालत ने कहा कि स्वीकारोक्ति ने पश्चाताप का प्रदर्शन किया। ...

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की सभी अदालतें 14 फरवरी से फिजिकल मोड़ से सुनवाई करेंगी
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की सभी अदालतें 14 फरवरी से फिजिकल मोड़ से सुनवाई करेंगी

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने COVID-19 से उत्पन्न स्थितियों में सुधार को देखते हुए सोमवार यानी 14 फरवरी, 2022 से फिजिकल सुनवाई फिर से शुरू करने का निर्णय लिया।हाईकोर्ट रजिस्ट्रार ऑफिस से जारी आदेश में यह भी बताया गया कि केंद्र शासित प्रदेशों की सभी अधीनस्थ अदालतें उक्त तिथि से फिजिकल सुनवाई के लिए फिर से खुलेंगी।इसके लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए गए:1. हाईकोर्ट में एक बेंच के समक्ष सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई फिजिकल मोड के साथ-साथ इस प्रतिबंध के साथ की अनुमति है कि किसी भी अदालत में एक...

आरोपी को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में आरोपी को जमानत दी
आरोपी को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में आरोपी को जमानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी आरोपी को अनिश्चित काल के लिए हिरासत में नहीं रखा जा सकता। इस संबंध में हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी मामले की जल्द सुनवाई का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने दो करोड़ रूपये की धोखाधड़ी मामले में आरोपी को जमानत दे दी।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा:"जब जल्द सुनवाई का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित है तो यह माना जा सकता है कि एक पहलू यह भी होगा कि आरोपी को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।"अदालत...

हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तारी के सात दिन बाद भाजपा विधायक नितेश राणे को जमानत मिली
हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तारी के सात दिन बाद भाजपा विधायक नितेश राणे को जमानत मिली

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले की एक सत्र अदालत ने हत्या के प्रयास के मामले में कंकावली से भाजपा विधायक और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे नितेश राणे को जमानत दे दी है। कोर्ट पिछले हफ्ते 2 फरवरी को मामले में आत्मसमर्पण कर दिया था, जब सत्र न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। राणे को शुरू में दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था, जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने जमानत पर रिहा होने की मांग की थी।विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं कराया...

सीनियर एडवोकेट आदित्य सोंधी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति के लिए सहमति वापस ली
सीनियर एडवोकेट आदित्य सोंधी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति के लिए सहमति वापस ली

कर्नाटक हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट आदित्य सोंधी ने न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति के लिए दी गई अपनी सहमति वापस ले ली।सींधो को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी।सोंधी ने लाइव लॉ से सहमति वापस लेने की पुष्टि करते हुए कहा,"मैंने चार फरवरी को कॉलेजियम को इस बारे में लिखा है कि मेरी सिफारिश को एक साल हो गया है और इसे दोहराए हुए पांच महीने हो गए हैं।"सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार फरवरी, 2021 को हुई एक बैठक के बाद सोंधी के साथ-साथ राजेंद्र बादामीकर और जेएम खाज़ी को...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
'6 चश्मदीद गवाहों की तोते जैसी गवाही, मानवीय रूप से असंभव': बॉम्बे हाईकोर्ट ने मर्डर केस में 20 लोगों को बरी किया

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court), नागपुर बेंच ने सभी अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही एक समान और तोते जैसी होने का हवाला देते हुए, इसे "मानवीय रूप से असंभव" बताते हुए मर्डर केस में 20 लोगों को बरी कर दिया है।जस्टिस सुनील शुक्रे और जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला की खंडपीठ ने जजमेंट में कहा,"यह विश्वास करना मुश्किल है कि छह चश्मदीद गवाहों ने प्रत्येक मिनट के विवरण के साथ एक समान तरीके से बयान दिया। हमारी राय में, यह मानवीय रूप से असंभव है। एक भी स्वतंत्र गवाह (पुलिस और चिकित्सा गवाह को छोड़कर) की जांच...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'हजरत आदम' को हिंदुओं का पिता बताने वाले वीडियो के प्रसार पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने मंगलवार को फेसबुक पर एक वीडियो के प्रसार पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें एक गुमनाम मौलाना को यह कहते हुए देखा गया कि हजरत आदम हिंदुओं का पिता है।प्राथमिकी की सामग्री का अध्ययन करने के बाद न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अजय त्यागी की खंडपीठ ने पाया कि प्रथम दृष्टया एक संज्ञेय अपराध का खुलासा किया गया है। कानून को देखते हुए प्राथमिकी को रद्द करने की प्रार्थना की अनुमति नहीं दी जा सकती है।मामले के तथ्यअनिवार्य रूप...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
"पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया गया मरने से पहले दिया गया बयान स्वीकार्य": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक हत्या के मामले में एक दोषी की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। यह मामला वर्ष 2002 से पहले का है। कोर्ट ने कहा कि इस बात पर कोई रोक नहीं कि पुलिसकर्मी मृत्युकालिक बयान (मरने से पहले दिया गया बयान) दर्ज नहीं कर सकते और इस तरह दिया गया मृत्युकालिक बयान (Dying declaration) साक्ष्य में भी स्वीकार्य है।जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विकास बुधवार की खंडपीठ ने आगे कहा कि जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच में कुछ खामियां हो सकती हैं, लेकिन यह मानने का आधार नहीं हो सकता कि...

हिजाब प्रतिबंध: कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामला सुनवाई के लिए बड़ी पीठ को भेजा, कोई अंतरिम राहत नहीं
हिजाब प्रतिबंध: कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामला सुनवाई के लिए बड़ी पीठ को भेजा, कोई अंतरिम राहत नहीं

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुस्लिम छात्राओं द्वारा हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनने पर प्रवेश से इनकार करने के एक सरकारी कॉलेज की कार्रवाई को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजा है।जस्टिस कृष्णा एस. दीक्षित ने कहा कि मामला व्यक्तिगत कानून में मौलिक महत्व के कुछ संवैधानिक प्रश्नों को जन्म देता है, जिन्हें एक बड़ी पीठ द्वारा तय किया जाना चाहिए। पीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि याचिकाओं में तात्कालिकता पर विचार करते हुए, कागजात को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष तुरंत विचार के लिए रखा जाए।जस्टिस...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
सीडब्ल्यूसी बाल कस्टडी मामलों में फैमिली कोर्ट के रूप में कार्य नहीं कर सकताः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एनजीओ पर दस हजार जुर्माना लगाते हुए पॉवर ट्रांसफर की मांग वाली याचिका खारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें एक बच्चे की कस्टडी तय करने के संबंध में एक फैमिली कोर्ट की शक्ति(पॉवर) को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को हस्तांतरित करने की मांग की गई थी। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस राजेंद्र कुमार (वर्मा) की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा कि यह याचिका ''कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा कुछ नहीं'' है। याचिकाकर्ता मुख्य रूप से प्रिया यादव बनाम म.प्र. राज्य व अन्य के मामले...

गुवाहाटी हाईकोर्ट
लोक अदालत के अवार्ड को केवल अनुच्छेद 226 और 227 के तहत दायर याचिका में चुनौती दी जा सकती है: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट (Gauhati High Court) ने सिविल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की सुनवाई करते हुए कहा है कि लोक अदालत में निपटारे का समझौता सिविल कोर्ट का डिक्री माना जाता है और इस तरह यह पक्षकारों के लिए बाध्यकारी है।कोर्ट ने आगे कहा कि इसके खिलाफ किसी भी अदालत में कोई अपील नहीं की जा सकती है और यदि कोई पक्ष समझौते के आधार पर इस तरह के अवार्ड को चुनौती देना चाहता है, तो यह केवल संविधान के अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 227 के तहत याचिका दायर करके किया जा सकता है।पूरा मामलापीठ दीवानी अदालत के आदेश को...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल जज से देरी पर स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा, नाबालिग की गवाही जल्दी पूरी हो
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल जज से देरी पर स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा, नाबालिग की गवाही जल्दी पूरी हो

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) के तहत मामलों में ट्रायल कोर्ट को पीड़िता नाबालिग के बयान को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए।जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने दो फरवरी, 2022 को पारित एक आदेश में कहा,"ऐसे मामलों में जहां पीड़ित नाबालिग हैं, पोक्सो कोर्ट को कम से कम पीड़िता/अभियोजन पक्ष की जांच जितनी जल्दी हो सके पूरी करनी चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि नाबालिग पीड़ित समय बीतने के कारण घटना को भूल जाएं। इससे आरोपी को फायदा पहुंचाता हैं।"अदालत ने मामले में संबंधित ट्रायल...

दिल्ली हाईकोर्ट
नाबालिग बच्चा पालन-पोषण के लिए अपने पिता से भरण-पोषण मांगने का हकदार, वह तलाक के समझौते से बंधा नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि एक नाबालिग बच्चा पिता द्वारा अपने पालन-पोषण के लिए भरण-पोषण का दावा करने का हकदार है और ऐसा बच्चा अपने माता-पिता के बीच भरण-पोषण के संबंध में तलाक के समझौते से बाध्य नहीं है।जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह एक नाबालिग बच्चे द्वारा दायर एक अपील पर विचार कर रहे थे, जिसने फैमिली कोर्ट द्वारा 15,000 प्रति माह भरणपोषण दिए जाने से व्यथित होकर याचिका दायर की थी।उच्च न्यायालय ने 22 अप्रैल, 2021 के आदेश के जरिए उक्त भरण-पोषण राशि में वृद्धि की थी और पिता को नाबालिग को...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
[वैवाहिक विवाद] इस आधार पर एफआईआर रद्द नहीं कर सकते कि जांच अधिकारी ने प्रारंभिक जांच नहीं की: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक जांच करना या न करना जांच अधिकारी का अधिकार क्षेत्र है। इसके आधार पर एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती।जस्टिस अनिल कुमार ओझा की खंडपीठ ने पीड़िता के पति, ससुर और सास द्वारा दायर दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की 482 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई की।याचिका में शिकायतकर्ता सीमा की ओर दर्ज एफआईआर से पैदा हुई पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई। सीमा ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए, 323, 506 और डी.पी. की धारा 3/4 के तहत...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धारा 14A के तहत अपील को प्राथमिकता दी जानी चाहिए: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में रजिस्ट्री द्वारा उठाई गई आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि आरोप तय करने का आदेश, जो अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (इसके बाद 'एससी' के रूप में संदर्भित) के प्रावधानों को भी आकर्षित करता है, एक अंतर्वर्ती आदेश नहीं है, और इसलिए एससी/एसटी एक्ट की धारा 14A के तहत अपील को चुनौती देने के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए।न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन विशेष न्यायाधीश न्यायालय द्वारा पारित आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ अपीलकर्ता द्वारा दायर...

मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने 2010 से लंबित 445 दूसरी अपीलों पर 58 दिनों में निर्णय लेने का संकल्प लिया

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने वर्ष 2010 से लंबित 445 द्वितीय अपीलों को 58 दिनों के भीतर निपटाने का संकल्प व्यक्त किया है।बार के सदस्यों को संबोधित एक पत्र में, उन्होंने स्पष्ट किया है कि लंबित मामलों के शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करने के लिए स्थगन नहीं दिया जाएगा। 2010-2014 की अवधि की दूसरी अपीलों को संभालने की जिम्‍मेदारी उन्हीीं के पास है। उन्होंने सभी लंबित अपीलों को अप्रैल, 2022 के अंत तक निपटाने का प्रस्ताव रखा है और बार के सदस्यों से अपना पूरा सहयोग देने का आग्रह किया है।...

कोई भेदभाव नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के कर्मचारियों के भत्ते में कटौती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
"कोई भेदभाव नहीं": दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के कर्मचारियों के भत्ते में कटौती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कार्यालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिसके द्वारा एयर इंडिया के कर्मचारियों के भत्ते कम कर दिए गए थे।कोर्ट ने देखा कि कोई भेदभाव नहीं है बल्कि पायलटों और इंजीनियरों के भत्ते को कम करने का एक उचित आधार है। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने कहा कि यह केंद्र और एयर इंडिया को संबंधित विचारों को ध्यान में रखते हुए तय करना है कि भत्तों में उचित कटौती क्या होनी चाहिए।अदालत ने कहा,"जब तक कटौती स्पष्ट रूप से मनमाना नहीं है, न्यायिक...

वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के बावजूद भी रिट याचिका पर सुनवाई हो सकती है : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के बावजूद भी रिट याचिका पर सुनवाई हो सकती है : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया कि प्राकृतिक न्याय के नियमों का पालन नहीं करने पर भले ही कोई वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो, तो पीड़ित व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने उसके द्वारा खरीदी गई जमीन पर अपना नाम बदलने के लिए आवेदन किया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उक्त आवेदन भूमि और पट्टादार पासबुक अधिनियम, 1971 में एपी राइट्स, विशेष रूप से अधिनियम की धारा पांच के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना खारिज...

निचली अदालत के निष्कर्ष को उलटने के लिए निष्पादन कार्यवाही के दौरान एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
निचली अदालत के निष्कर्ष को उलटने के लिए निष्पादन कार्यवाही के दौरान एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि जब निचली अदालत संपत्ति के कब्जे के सवाल का फैसला कर चुकी हो, उसके बाद निष्पादन न्यायालय निष्पादन कार्यवाही में एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति नहीं कर सकता है।जस्टिस आर रघुनंदन राव ने कहा, "मौजूदा मामले में, सक्षम क्षेत्राधिकार के ट्रायल कोर्ट ने पहले ही याचिकाकर्ता के पक्ष में संपत्ति के कब्जे के सवाल का फैसला कर लिया है। निष्पादन याचिका में आदेश पारित करते समय इस निष्कर्ष को निष्पादन न्यायालय उलट नहीं सकता है। निष्पादन न्यायालय को ऐसी स्थिति...