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[सीएए विरोधी प्रदर्शन] इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी

LiveLaw News Network
10 Feb 2022 9:00 AM GMT
[सीएए विरोधी प्रदर्शन] इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को मोहम्मद कैफ नाम के व्यक्ति को अग्रिम जमानत दे दी। कैफ पर सीएए विरोध प्रदर्शनों के दौरान देश विरोधी नारे लगाकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश करने का आरोप है।

जस्टिस राजबीर सिंह की खंडपीठ ने पक्षकारों के वकील की प्रस्तुतियां, आरोप की प्रकृति, आवेदक की भूमिका और मामले के सभी उपस्थित तथ्यों और परिस्थितियों के साथ-साथ अग्रिम जमानत के संबंध में कानून के स्थापित सिद्धांत पर विचार करते हुए कहा कि उक्त मामले में अग्रिम जमानत दी जा सकती है।

कैफ ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148, 149, 188, 153A, 298, 304, 332 और धारा 353 और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा सात के तहत एक मामले में अग्रिम जमानत की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था।

आवेदक के वकील नबी उल्लाह ने तर्क दिया कि आवेदक निर्दोष है और उसे आशंका है कि उसे उपरोक्त मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है, जबकि उसके खिलाफ कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है।

आगे यह प्रस्तुत किया गया कि आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। आवेदक के खिलाफ अब तक कोई प्रक्रिया जारी नहीं की गई। यह भी प्रस्तुत किया गया कि एफआईआर में आवेदक का नाम नहीं है। 16 नामजद और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उक्त एफआईआर में आरोप लगाया गया कि सीआरपीसी की धारा 144 के तहत उद्घोषणा के बावजूद, आरोपी व्यक्तियों ने राष्ट्र विरोधी नारे लगाकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश की।

यह भी प्रस्तुत किया गया कि आवेदक को इस मामले में केवल संदेह के आधार पर जांच के दौरान झूठा फंसाया गया और आवेदक को कोई विशिष्ट भूमिका नहीं सौंपी गई।

यह भी प्रस्तुत किया गया कि इसी तरह के सह-आरोपी अशरफ और अशरफ अली खान को पहले ही अदालत द्वारा अग्रिम जमानत दी जा चुकी है। अंत में आवेदक ने जांच और ट्रायल के दौरान सहयोग करने और जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा आवश्यक होने पर पेश होने का आश्वासन दिया।

कैफ को जमानत देते समय कोर्ट ने सिद्धराम सतलिंगप्पा म्हेत्रे बनाम महाराष्ट्र राज्य, (2011) 1 SCC 694 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया। इसमें यह माना गया कि अग्रिम जमानत का फैसला करते समय न्यायालय को प्रकृति, आरोप, अभियुक्त का पूर्ववृत्त, अभियुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। न्यायालय को अभियुक्त के विरुद्ध संपूर्ण उपलब्ध सामग्री का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए और अभियुक्त की सही भूमिका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अदालत ने पचास हजार रूपये के निजी मुचलके और थाना प्रभारी की संतुष्टि के अनुसार समान राशि के दो जमानतदारों प्रस्तुत करने पर आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली।

केस का शीर्षक - मोहम्मद कैफ बनाम यूपी राज्य और अन्य

केस उद्धरण: 2022 लाइव लॉ (एबी) 41

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