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लंबे समय से चला आ रहा घरेलू विवाद अपने आप में जीवनसाथी के लिए 'मानसिक क्रूरता' है जो शांति से रहने का इरादा रखता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में अपनी पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए पति द्वारा दायर अपील पर विवाह भंग करते हुए कहा कि लंबे समय से चला आ रहा विवाद अपने आप में एक पक्ष के लिए मानसिक क्रूरता है जो घरेलू रिश्ते में शांति से रहने का इरादा रखता है।जस्टिस शील नागू और जस्टिस आनंद पाठक की खंडपीठ ने फैमली कोर्ट, ग्वालियर के फैसले के खिलाफ अपीलकर्ता-पति द्वारा दायर अपील को अनुमति दी जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 (1) (आईए) के तहत तलाक की मांग वाले आवेदन को...
सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण के लिए दावा उन जगहों पर होता हैं,जहां पक्षकार रहते हैं, ''कभी-कभार'' जाने वाली जगहों पर नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, ग्वालियर पीठ ने हाल ही में कहा है कि सीआरपीसी की धारा 126 के तहत ''निवास'' शब्द की तुलना उस स्थान से नहीं की जा सकती है जहां कोई 'आकस्मिक प्रवास करता है या कभी-कभार जाता है'। प्रावधान में बताया गया है कि धारा 125 के तहत किसी भी व्यक्ति के खिलाफ किसी भी जिले में भरण-पोषण की कार्यवाही की जा सकती हैः (ए) जहां वह रहता है, या (बी) जहां वह या उसकी पत्नी रहती है, या (सी) जहां वह अंतिम बार अपनी पत्नी के साथ रहता था , या जैसा भी मामला हो, नाजायज बच्चे की माँ के साथ रहता था। जस्टिस...
मोटर दुर्घटना का दावा : बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन मदों को दोहराया जिनके तहत ''व्यक्तिगत चोट'' के मामलों में मुआवजा दिया जा सकता है
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही के एक फैसले में एक मोटर दुर्घटना पीड़ित को दिए गए मुआवजे की मात्रा की निष्पक्षता पर विचार किया है। पीड़ित को 24 साल की उम्र में गंभीर शारीरिक चोटें और कई फ्रैक्चर हुए थे और उसे नियमित रूप से कई तरह का उपचार करवाना पड़ा था। जस्टिस भारती डांगरे की एकल पीठ ने उन विभिन्न मदों पर विचार किया,जिनके तहत मुआवजा दिया जा सकता है। पीठ ने राजकुमार बनाम अजय कुमार 2011 (1) एससीसी 343 के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें न्यायालय ने मोटर दुर्घटना के...
यदि किसी आरोपी के खिलाफ कोई अतिरिक्त अपराध पाया जाता है तो सीआरपीसी 167 के तहत हिरासत की अवधि की गणना नए सिरे से की जाएगी : राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि डिफ़ॉल्ट/ वैधानिक जमानत लेने का अधिकार एक अपरिहार्य अधिकार की प्रकृति में अभियुक्त को केवल तभी प्राप्त होता है, जब एक उपयुक्त आवेदन को प्राथमिकता देकर इस तरह के उपाय को आरोप पत्र दाखिल होने तक धारा 167 (2) सीआरपीसी के तहत आरोपी व्यक्ति (व्यक्तियों) की हिरासत की कुल अवधि की समाप्ति की तारीख से निर्धारित खिड़की के भीतर प्राप्त किया गया हो।कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी आरोपी के खिलाफ जांच अधिकारी द्वारा कोई अतिरिक्त या नया अपराध पाया जाता है, तो अवधि की...
अदालत मोटर दुर्घटना के दावे में मुआवजे की राशि बढ़ा सकती है, चाहे कोई भी अपील दायर करेः बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत एक दुर्घटना पीड़ित को दिए गए मुआवजे की राशि के खिलाफ एक बीमा कंपनी द्वारा एक अपील पर विचार किया। दावेदार ने इस अपील के दौरान, उसको दिए गए मुआवजे की अपर्याप्तता का मुद्दा भी उठाया।जस्टिस भारती डांगरे की एकल पीठ ने कहा कि हालांकि दावेदार ने मुआवजे में वृद्धि के लिए अपील दायर नहीं की थी, ''मोटर वाहन अधिनियम कानून का एक हितकारी पीस है और उस पीड़ित को कुछ सांत्वना प्रदान करता है, जो दुर्घटना का शिकार होता है या पीड़ित के परिवार को, जब रोटी...
"बच्चे के पिता को मिलने का अधिकार": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां के साथ रह रहे बच्चे से पिता को मिलने की अनुमति देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्तमान में अपनी मां के साथ रह रहे अपने बेटे से मिलने के अधिकार की मांग कर रहे पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि पिता अपने बच्चे से मिलने के लिए मुलाक़ात के अधिकार का हकदार है।बच्चा वर्तमान में आपसी सहमति के आधार पर तय किए गए तलाक के मुकदमे में पति और पत्नी के बीच हुए आपसी समझौते के अनुसार अपनी मां के साथ रह रहा है। समझौते में यह सहमति हुई कि कॉर्पस/बच्चा अपनी मां के साथ रहेगा। हालांकि, पिता/पुरुष ने यह आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया कि...
अपर्याप्त सजा सिर्फ इसलिए नहीं दी जा सकती क्योंकि आपराधिक अपील पर फैसला होने में लंबी अवधि बीत चुकी है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि अपील पर फैसला होने तक एक लंबी अवधि बीत चुकी है, ,ऐसी सजा देने का आधार नहीं हो सकता है, जो अनुपातहीन और अपर्याप्त है। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि उसने विभिन्न हाईकोर्टों के कई निर्णय का अवलोकन किया, जिनमें आपराधिक अपीलों को सरसरी तौर पर और काट-छांट कर निपटाया गया है।अदालत ने कहा कि हम शॉर्टकट अपनाकर आपराधिक अपीलों के निपटारे की इस तरह की प्रथा की निंदा करते हैं।इस मामले में, राजस्थान हाईकोर्ट ने धारा 307 आईपीसी के तहत अपराध के लिए...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (चार अप्रैल, 2022 से आठ अप्रैल, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।नीति दिशानिर्देशों की व्याख्या से जुड़े विवाद को मध्यस्थता के लिए संदर्भित किया जा सकता है: गुजरात हाईकोर्टगुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने फैसला सुनाया है कि मामले को मध्यस्थता के लिए संदर्भित करने की याचिका को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि विवाद में नीतिगत दिशानिर्देशों की...
आरोपी के खुलासे पर हथियार की खोज अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या-दोषी की उम्रकैद की सजा रद्द की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के प्रयोजनों के लिए अभियुक्त के प्रकटीकरण पर भौतिक वस्तु/अपराध हथियार की खोज महत्वपूर्ण है, हालांकि केवल इसी तरह के प्रकटीकरण से यह निष्कर्ष नहीं निकलेगा कि आरोपी ने अपराध किया है।इस प्रकार, हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक मामले में एक हत्या-दोषी की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया। सजा वर्ष 2014 से पहले की थी। कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि केवल अपराध हथियार की बरामदगी को अपीलकर्ता-अभियुक्त दोषसिद्धि का आधार नहीं बना सकता।जस्टिस सुनीत...
गुजरात हाईकोर्ट ने 100 हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन करने के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने 37 हिंदू परिवारों और 100 हिंदुओं का बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। मामले में यह भी आरोप था कि आवेदक ने हिंदू परिवारों को वित्तीय सहायता का लालच दिया और सरकारी पैसे से बने एक मकान को इबादतगाह में बदल दिया।जस्टिस बीएन करिया ने कहा,"अभियोजन की ओर से पेश रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मौजूदा अपीलकर्ता ने बल प्रयोग या प्रलोभन या किसी कपटपूर्ण तरीके से किसी भी व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का...
बलात्कार के मामलों को छोड़कर ट्रायल कोर्ट मौत तक या बिना छूट आजीवन कारावास की सजा नहीं दे सकतेः कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट एक महत्वपूर्ण फैसले में ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की निचली अदालतों को एक निर्देश जारी किया, जिसमें कहा गया है कि मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा, बिना किसी छूट की गुंजाइश के, केवल बलात्कार के मामलों में ही दी जा सकती है।जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस बिवास पटनायक की खंडपीठ ने कहा कि किसी की मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा केवल उच्च न्यायपालिका ही लगाई सकती है, जो कि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट है।यूनियन ऑफ इंडिया बनाम वी श्रीहरन उर्फ मुरुगन और अन्य और गौरी शंकर बनाम पंजाब राज्य...
'आप सीमा सुरक्षा बल की ड्यूटी पर नशे में नहीं हो सकते': सुप्रीम कोर्ट ने बीएसएफ अधिकारी की बर्खास्तगी को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सीमा सुरक्षा बल के एक पूर्व जवान की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। उसे ड्यूटी पर नशे में होने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने स्पष्ट किया कि अधिकारी के आचरण के मद्देनजर कोर्ट उसे बर्खास्त करने के समरी सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगा, जिसकी पुष्टि महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल, एकल न्यायाधीश और ने और मेघालय हाईकोर्ट की खंडपीठ ने की है।मामले को सुनवाई की शुरुआत में ही जस्टिस...
"एक युवा लड़की का पूरा जीवन बर्बाद हो गया": ठाणे कोर्ट ने समलैंगिकता छुपाने के आरोपी पति को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
ठाणे के एक सत्र न्यायालय ने अग्रिम जमानत की एक याचिका को खारिज़ कर दिया है। मामले में आरोप था कि पति ने कथित तौर पर अपनी नौकरी की स्थिति और अपनी कामुकता को पत्नी ने छुपाया था, जिसके बाद उस पर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया था।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश गुप्ता ने 5 अप्रैल को अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि शादी से पहले पति का अपने जीवन के भौतिक तथ्यों को छिपाने और "इस प्रकार एक युवा लड़की के भविष्य को खराब करने का कपटपूर्ण इरादा था।"जज ने कहा, "उल्लेखनीय...
यह आवश्यक नहीं है कि हर आरोपी मौके पर मौजूद हो, परिस्थितियों की श्रृंखला पर विचार किया जा सकता है : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में विचार किया कि क्या उस याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर रद्द की जा सकती है जिसे एफआईआर में आरोपी के रूप में संदर्भित नहीं किया गया और जो घटनास्थल पर मौके पर मौजूद नहीं था।जस्टिस प्रसन्ना बी. वरले और जस्टिस एस.एम. मोदक की पीठ ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 (एमसीओसी) के तहत सामान्य आपराधिक कानून और अपराधों के बीच के अंतर को दोहराया और कहा,"यह हमेशा आवश्यक नहीं कि प्रत्येक आरोपी मौके पर मौजूद हो। परिस्थितियों की श्रृंखला में विभिन्न परिस्थितियां होती हैं।...
मप्र हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल से वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने का अनुरोध किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह द्वारा पीठासीन न्यायाधीश (जस्टिस अतुल श्रीधरन) पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हुए मामले की सुनवाई से हटने की अपील पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई कि उन्हें न्यायाधीश के खिलाफ स्पष्ट पूर्वाग्रह का आरोप लगाने से बचना चाहिए।वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा किए गए आह्वान के जवाब में बेंच ने कहा कि किसी भी अधिवक्ता को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित करना उसके विशाल ज्ञान, विद्वता, अभिव्यक्ति और कानूनी कौशल के सम्मान का प्रतीक है।हालांकि, कोर्ट ने कहा,...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला न्यायाधीश को धमकी देने वाले वकील को माफी मांगने का निर्देश दिया, पांच हजार रूपये का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में महिला न्यायाधीश को धमकी देने वाले एक वकील को लिखित माफी मांगने का निर्देश दिया। साथ ही यह वचन देने का भी निर्देश दिया कि वह भविष्य में इस तरह के आचरण को नहीं दोहराएगा। उसके मुवक्किल के लिए भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए।अधिवक्ता (रमाकांत वर्मा) ने सीपीसी की धारा 80 के तहत बस्ती जजशिप में पीठासीन अधिकारी/महिला न्यायाधीश को इस धमकी के साथ मुआवजे की मांग करते हुए नोटिस जारी करने के लिए कहा कि अगर मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता है तो उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया...
'संतान के मकसद से वैवाहिक सहवास से किसी कैदी को वंचित करना उसकी पत्नी के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है', राजस्थान हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा पाए कैदी को 15 दिन की पैरोल दी
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि दोषी-कैदी को पत्नी के साथ वैवाहिक संबंधों वंचित करने से, विशेष रूप से संतान प्राप्ति के मकसद से, पत्नी के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस संबंध में अदालत ने आजीवन कारावास के दोषी को 15 दिन की पैरोल दी।जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस फरजंद अली ने याचिका की अनुमति देते हुए कहा,"हमारा विचार है कि हालांकि राजस्थान प्रीजनर्स रीलीज़ ऑन पैरोल रूल्स, 2021 में कैदी को पत्नी के संतान होने के आधार पर पैरोल पर रिहा करने के लिए कोई...
स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए केंद्र के निर्देश बाध्यकारी नहीं, केवल अनुशंसात्मक: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (7 अप्रैल) को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी एक निर्देश स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए बाध्यकारी नहीं है और यह केवल अनुशंसात्मक है। ऐसा मानते हुए कोर्ट ने कहा कि एक स्टेट यूनिवर्सिटी का रजिस्ट्रार केंद्र सरकार द्वारा जारी एक परिपत्र के आधार पर उच्च वेतनमान के लिए दावा नहीं कर सकता है।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एक अपील की अनुमति दी, जिसने स्टेट यूनिवर्सिटी के एक रजिस्ट्रार द्वारा सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अपने...
आय से अधिक संपत्ति का मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने विधायक बंधु तिर्की को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनवाई गई सजा के खिलाफ दायर अपील याचिका वापस लेने की अनुमति दी
झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने आय से अधिक संपत्ति मामले में झारखंड के पूर्व मंत्री व मांडर विधायक बंधु तिर्की को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनवाई गई सजा के खिलाफ दायर अपील याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी (Justice Sanjay Kumar Dwivedi) की एकलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट नीलेश कुमार ने याचिका वापस लेने का आग्रह किया।प्रतिवादी-सीबीआई की ओर से पेश वकील ने कोई विरोध नहीं जताया। इसके साथ ही कोर्ट अपील याचिका वापस लेने की...
पुलिस अधिकारी अपराध के 'होने की संभावना' की सूचना पर एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि जब भी किसी पुलिस अधिकारी को फोन पर या किसी अन्य तरीके से किसी अपराध के बारे में सूचना मिलती है तो एफआईआर दर्ज करना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने के लिए धारा 154 के तहत जनादेश तब होगा, जब संज्ञेय अपराध "किया गया है"।जस्टिस श्रीनिवास हरीश कुमार ने कहा,"जब भी किसी पुलिस अधिकारी को फोन पर या किसी अन्य तरीके से किसी अपराध के बारे में जानकारी मिलती है, जिसके होने की आशंका है तो एफआईआर दर्ज करना आवश्यक नहीं है। बल्कि यह पुलिस अधिकारी का कर्तव्य है कि वह...


















