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मध्यस्थ कार्यवाही से किसी पक्ष का नाम हटाने से इनकार करना रिट क्षेत्राधिकार को लागू करने के लिए दुर्लभ मामला नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि मध्यस्थ न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ रिट याचिका को बनाए रखने योग्य नहीं है, जो मध्यस्थता से पक्षकार का नाम हटाने से इनकार करती है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा की एकल पीठ ने माना कि मध्यस्थता मामले में रिट क्षेत्राधिकार का आह्वान करने के लिए पीड़ित पक्ष को यह दिखाना होगा कि यह 'दुर्लभतम मामलों में से दुर्लभ' है और न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है। ट्रिब्यूनल आदेश में, जिसमें उसने किसी पक्ष का नाम हटाने से इनकार कर दिया, दुर्लभतम मामलों में से दुर्लभ मामलों के रूब्रिक के साथ...
लोन के लिए सह आवेदक के कम CIBIL स्कोर के आधार पर एजुकेशन लोन देने से इनकार नहीं किया जा सकता : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को दोहराया कि लोन के लिए सह-आवेदक के सीआईबीआईएल (The Credit Information Bureau (India) Limited (CIBIL)) स्कोर एजुकेशन लोन के लिए आवेदन तय करने में भूमिका नहीं निभाते हैं, क्योंकि ऐसे प्राथमिकता वाले क्षेत्र के लोन को मंजूरी देने के लिए पात्रता शर्तों का इन लोन द्वारा प्राप्त की जाने वाली वस्तु के साथ संबंध होना चाहिए।जस्टिस एन. नागरेश ने यह भी देखा कि ऐसी शर्तें लगाने से ऐसे लोन देने का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा, जिससे बैंकों को ऐसा करने से हतोत्साहित किया जाएगा।कोर्ट ने...
किसी दोषी कैदी को समय से पहले रिहा होने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने दोहराया है कि एक दोषी कैदी को समय से पहले रिहा होने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं है।अदालत आजीवन दोषी हरिहरन की मां द्वारा दायर एक याचिका पर विचार कर रही थी। इसमें सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें उसकी समय से पहले रिहाई को खारिज कर दिया गया था।जस्टिस पी.एन. प्रकाश और जस्टिस ए.ए. नक्किरन की पीठ ने कहा कि एक बार सामग्री मौजूद होने के बाद, राज्यपाल तथ्यों की पर्याप्तता का एकमात्र न्यायाधीश होता है और तथ्यों की इतनी पर्याप्तता अनुच्छेद 226 के...
ई-वे बिल बनाते समय ओडीसी वाहन प्रकार के चयन में वास्तविक गलती: गुजरात हाईकोर्ट ने डिटेंशन आदेश रद्द किया
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने डिटेंशन आदेश को रद्द कर दिया है क्योंकि ई-वे बिल बनाते समय ओडीसी वाहन प्रकार के चयन में एक वास्तविक गलती थी।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस निशा एम ठाकोर की खंडपीठ ने कहा कि माल जीएसटी पोर्टल से उत्पन्न ई-वे बिल सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ ट्रांजिट में था। माल को एक ट्रक से ले जाया गया जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर भी सही था। इस मामले में एकमात्र गलती ई-वे बिल बनाते समय गलत ओडीसी वाहन प्रकार का चयन था।रिट आवेदक/निर्धारिती ने राज्य कर अधिकारी - 2, मोबाइल...
"न्याय का मज़ाक़": साढ़े नौ साल जेल में रहने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने महिला को ज़मानत दी
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में नौ साल से अधिक समय से जेल में बंद एक महिला को इस आधार पर जमानत दी कि मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट केवल सात साल की सजा का आदेश दे सकता है, जिसे वह पहले ही जेल में बिता चुकी है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमानी मल्होत्रा ने यह टिप्पणी की,"निश्चित रूप से आवेदक ने सात साल से अधिक जेल में बिताया है जो कि अधिकतम सजा है जो उसे मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) द्वारा दी जा सकती है। कहने की जरूरत नहीं है कि कैद की अवधि ने न केवल न्याय का मजाक उड़ाया है बल्कि हमारी...
[औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7B] सरकार राष्ट्रीय महत्व के मामलों को नेशनल ट्रिब्यूनल को सौंपने के लिए बाध्य नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने कहा कि केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वह राष्ट्रीय महत्व के मामले को निर्णय के लिए राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण के पास भेजे, भले ही वह औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 7-बी के तहत उल्लिखित जुड़वां शर्तों को पूरा करता हो।चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ ने कहा,"केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि विवादों को निर्णय के लिए राष्ट्रीय न्यायाधिकरण के पास भेजे।"क्या है पूरा मामला?वर्तमान विवाद की उत्पत्ति 14...
डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा एडवांस सब्सक्रिप्शन मनी टैक्स दायरे में नहीं आती: चेन्नई आईटीएटी
आईटीएटी की चेन्नई बेंच ने फैसला सुनाया कि डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा एडवांस सब्सक्रिप्शन मनी कर (Tax) योग्य नहीं है।वी दुर्गा राव (न्यायिक सदस्य) और मनोज कुमार अग्रवाल (लेखाकार सदस्य) की खंडपीठ ने माना कि डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा एडवांस सब्सक्रिप्शन मनी केवल तभी कर योग्य होती है जब उक्त मनी उनके द्वारा अर्जित की जाती है। डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा क्लाइंट्स को प्रदान किया जाता है।निर्धारिती (Assessee) मेसर्स सन डायरेक्ट टीवी प्राइवेट लिमिटेड एक 'डायरेक्ट टू होम' (डीटीएच) सैटेलाइट प्लेटफॉर्म ऑपरेटर है और...
राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद News18 न्यूज चैनल के पत्रकार अमन चोपड़ा को आईपीसी की धारा 124A मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिली
राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर बेंच) ने राज्य पुलिस को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 124-ए के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए न्यूज 18 के पत्रकार अमन चोपड़ा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच नहीं करने का निर्देश दिया।चोपड़ा के लिए यह राहत उनके खिलाफ "देश झुकने नहीं देंगे" नाम के शो को प्रसारित करने और बाद में इसे अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट करने के लिए दर्ज एफआईआर में आई है, जिसके परिणामस्वरूप कथित तौर पर अलवर में 22.04.2022 को सांप्रदायिक विद्वेष और सांप्रदायिक दंगे हुए थे।जस्टिस दिनेश मेहता की...
रेरा अधिनियम | धारा 71(1) के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकारी अकेले मुआवजे का फैसला कर सकता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 71(1) के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकारी अकेले मुआवजे का फैसला कर सकता है।जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 71(1) को पढ़ने से पता चलता है कि न्यायनिर्णयन अधिकारियों की शक्ति मुआवजे का फैसला करना है। मुआवजे की मात्रा तय करने के लिए एक आवश्यक परिणाम के रूप में न्यायनिर्णायक अधिकारी संबंधित व्यक्ति को विकास की डिग्री का पता लगाने के लिए सुनवाई...
न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता सर्वोपरि है, अन्यथा लोकतंत्र की इमारत टूट जाएगी और अराजकता का राज होगा: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता कानून द्वारा शासित समाज के लिए सर्वोपरि है। अन्यथा, लोकतंत्र की इमारत ही टूट जाएगी, और अराजकता का राज होगा।जस्टिस पी नवीन राव और जस्टिस एमजी प्रियदर्शनी ने कहा, "किसी व्यक्ति को सविनय अवमानना 'जानबूझकर अवज्ञा' का दोषी ठहराना परम आवश्यकता है। क्या अवमानना का आचरण सोचासमझा और जानबूझकर किया गया है, इस पर रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और और परिस्थितियों आकलन करके विचार किया जा सकता है।"अनिल रातक सरकार बनाम हीरक घोष और अन्य मामलों...
शिकायत दर्ज करने में देरी होने पर सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत पुलिस को केस संदर्भित करते समय मजिस्ट्रेट को अपना दिमाग लगाना चाहिए: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने हाल ही में कहा कि क्रिमिनल लॉ सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत बिना दिमाग लगाए और शिकायत दर्ज करने में अस्पष्टीकृत देरी के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत रद्द करने के लिए उत्तरदायी है।क्या है पूरा मामला?याचिकाकर्ताओं के खिलाफ शिकायत को रद्द करने के लिए आपराधिक याचिका दायर की गई थी क्योंकि शिकायत में लगाए गए आरोप असंभव थे।दूसरा प्रतिवादी, जो वास्तविक शिकायतकर्ता है, ने सीआरपीसी की धारा 190 और 200 के तहत शिकायत दर्ज कराई। जिससे मजिस्ट्रेट को...
मैरिटल रेप: दिल्ली हाईकोर्ट का विभाजित फैसला; एक जज ने आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 को असंवैधानिक माना, दूसरे ने कहा- मैं सहमत नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद के खिलाफ दायर याचिकाओं पर बंटा हुआ फैसला दिया है। उल्लेखनीय है कि यह अपवाद पत्नी के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाने पर पति को बलात्कार के अपराध से छूट देता है।जस्टिस राजीव शकधर ने अपने फैसले में माना कि वैवाहिक बलात्कार के अपराध से पति को छूट असंवैधानिक है। इसलिए उन्होंनं 375 के अपवाद 2, 376 बी आईपीसी को अनुच्छेद 14 के उल्लंघन में माना और रद्द कर दिया गया।जस्टिस शकधर ने कहा, "जहां तक पति का सहमति के बिना पत्नी के साथ संभोग का...
गुजरात हाईकोर्ट ने उप-जातियों में अंतर के कारण पति को छोड़ने वाली पत्नी को पति को 10 हज़ार रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला को अपने पति को 10 हज़ार रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया, जिसने अपने पति को अपने परिवार के प्रभाव में इस आधार पर छोड़ दिया कि वह एक अलग उप जाति से संबंधित है। जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस की खंडपीठ ने कहा, " हमें यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण लगता है कि शिक्षित जोड़े को इस तरह से रिश्ते को खत्म करना पड़ा क्योंकि माता-पिता ने इसका मज़बूती से विरोध किया और महिला इस तरह के प्रभाव में है।"पति ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर करते हुए हाईकोर्ट का...
कोर्ट अपने पुनर्विचार क्षेत्राधिकार का प्रयोग मध्यवर्ती आदेश पर कर सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट मध्यवर्ती आदेश के संबंध में अपने पुनर्विचार क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है, क्योंकि यह एक अंतर्वर्ती आदेश नहीं है।जस्टिस अंजलू पालो ने गिरीश कुमार सुनेजा बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो के मामले का उल्लेख किया, जहां यह देखा गया कि अदालत के आदेशों की तीन श्रेणियां हैं- अंतिम, मध्यवर्ती और अंतःविषय (final, intermediate and interlocutory)।कोर्ट ने कहा,"इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक अंतिम आदेश के संबंध में अदालत अपने पुनर्विचार क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकती है,...
"पाकिस्तानी नंबर से बातचीत के लिए इस्तेमाल किए गए फोन और सिम कार्ड की बरामदगी साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है": दिल्ली कोर्ट ने UAPA के आरोप में 5 लोगों को बरी किया
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध रखने के आरोपी पांच लोगों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल मोबाइल फोन और पाकिस्तानी नंबर के साथ सिम कार्ड की बरामदगी आतंकवादी साजिश को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद राशिद, अशबुद्दीन, अब्दुल सुभान और अरशद खान को बरी कर दिया, जिन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 120B और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18, 18बी और 20 के तहत आरोपी...
यदि महिला को अपने पति से कुछ संपत्ति विरासत में मिली है तो वह अपने ससुर पर भरण-पोषण का दावा कर सकती है : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि बहू अपने ससुर पर भरण-पोषण का दावा कर सकती है बशर्ते उसे अपने पति से कुछ संपत्ति विरासत में मिली हो।जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने एक विधवा बहू और पोती द्वारा फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 19 के तहत दायर एक याचिका खारिज कर दी है,जिसमें निचली अदालत के 3 मई, 2019 के आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 19 के तहत एक याचिका दायर कर अंतरिम भरण-पोषण मांगने के उनके दावे को खारिज कर दिया था। ...
अस्थायी कर्मचारी की बर्खास्तगी के लिए भी विभागीय कार्यवाही जरूरी : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि नियोक्ता को अस्थायी कर्मचारियों की बर्खास्तगी के मामलों में भी विभागीय कार्यवाही की प्रक्रियाओं का पालन करना होगा, जिसमें आरोप तय करना, कर्मचारी को अवसर देना, अनुशासनात्मक जांच करना और उसके बाद मुद्दों को तय करना शामिल होगा।जस्टिस डी भरत चक्रवर्ती की पीठ आर कार्तिकेयन नामक व्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता को विशेष अधिकारी, सेनकुरची कृषि सहकारी बैंक ने गंभीर कदाचार में लिप्त होने के आरोप में सेवा से हटा दिया था। बर्खास्तगी के आदेश से...
दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश का मामला: हाईकोर्ट ने गुलफिशा फातिमा की याचिका पर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को गुलफिशा फातिमा द्वारा दायर अपील पर नोटिस जारी किया। इस अपील में ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और यूएपीए के तहत आरोपों को शामिल करते हुए 2020 के दिल्ली दंगों में बड़ी साजिश का आरोप लगाते हुए एक मामले के संबंध में फातिमा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 14 जुलाई को सूचीबद्ध किया।गुलफिशा को 11 अप्रैल, 2020 को गिरफ्तार...
सीनियर एडवोकेट अजय मिश्रा उत्तर प्रदेश के नए एडवोकेट जनरल होंगे
सीनियर एडवोकेट अजय मिश्रा उत्तर प्रदेश राज्य के नए एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) होंगे। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि अजय कुमार मिश्रा को यूपी का नया महाधिवक्ता नियुक्त किया गया है। यह विकास इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को 16 मई, 2022 तक एडवोकेट जनरल की नियुक्ति पर निर्णय लेने का निर्देश देने के कुछ दिनों बाद आया है।जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने 6 मई को आगे जोर देकर कहा था कि एडवोकेट...
सार्वजनिक नैतिकता संवैधानिक नैतिकता पर हावी नहीं हो सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए कहा कि सुरक्षा के संवैधानिक अधिकार को कानून द्वारा स्थापित तरीके के अलावा कम नहीं किया जा सकता है।कानून द्वारा अनुमत तरीके को छोड़कर, सुरक्षा के संवैधानिक अधिकार को कम नहीं किया जा सकता है।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर यह देखा है कि किसी व्यक्ति के विवाह/रिश्ते की पसंद या उपयुक्तता के मामलों में हस्तक्षेप...






![[औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7B] सरकार राष्ट्रीय महत्व के मामलों को नेशनल ट्रिब्यूनल को सौंपने के लिए बाध्य नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट [औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7B] सरकार राष्ट्रीय महत्व के मामलों को नेशनल ट्रिब्यूनल को सौंपने के लिए बाध्य नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2021/07/15/500x300_396705-orissahighcourt.jpg)












