मुख्य सुर्खियां
लाभ कमाने के लिए प्रेरित: कलकत्ता हाईकोर्ट ने किराया निर्धारित करने के अधिकार की मांग वाली बस ऑपरेटरों की याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने हाल ही में बस और मिनीबस ऑपरेटरों के एसोसिएशन की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें ईंधन के बाजार मूल्य में वृद्धि के अनुपात में किराए के निर्धारण के मामले में ऑपरेटरों के अधिकार की मांग की गई थी, इस आधार पर कि किराए का ऐसा निर्धारण पूरी तरह से कार्यपालिका के अधिकार के भीतर उचित नहीं है।दायर की गई याचिका में कहा गया है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (अधिनियम) की धारा 67 के प्रावधानों को पढ़ा जाना चाहिए ताकि बस ऑपरेटरों को किराया निर्धारण में अपनी राय दी जा...
सिंगल जज की प्रतिकूल टिप्पणी के खिलाफ यूपी की पूर्व एएजी ज्योति सिक्का की अपील: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें उसी जज से संपर्क करने के लिए कहा
पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल, उत्तर प्रदेश ज्योति सिक्का द्वारा उनके खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणी वाले सिंगल जज के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने उन्हें "उसी जज" से संपर्क करने के लिए कहा, जिन्होंने शिकायत के निवारण के लिए आदेश पारित किया था।जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने आगे सिंगल जज से अनुरोध किया कि यदि आवेदन दायर किया जाता है, तो वह शीघ्रता से निर्णय करें।क्या है पूरा मामला?उल्लेखनीय है कि 2 मार्च...
किसी की नफरत ने गांधी के शरीर को समाप्त कर दिया लेकिन मानवता के लिए उनका प्रेम खत्म नहीं हुआ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'गंगा-जमुनी तहजीब' का समर्थन किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच एक विवाद पर एक आपराधिक मामले के संबंध में एक आरोपी को जमानत देते कहा कि किसी की नफरत ने महात्मा गांधी के शरीर को समाप्त कर दिया लेकिन मानवता के लिए उनका प्रेम खत्म नहीं हुआ। अदालत ने कहा," विभिन्न पथों के साधकों को राष्ट्रपिता को याद करना अच्छा होगा। महात्मा अपने जीवन के उदाहरण और उनकी मृत्यु के तथ्य से हमें याद दिलाते हैं कि चार सभी धर्मों की खोज और एक भारतीय धर्म का सार अपने साथियों के प्रति प्रेम है।किसी की नफरत ने उनके शरीर...
यौन उत्पीड़न, बाल शोषण के सर्वाइवर के लिए इमरजेंसी सप्लाई सपोर्ट सिस्टम के रूप में टोल-फ्री नंबर 112 का प्रचार करें: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य के लिए बाल शोषण या यौन हिंसा के सर्वाइवर की सहायता करने के लिए सुझावों का सेट जारी किया। इसके साथ ही कोर्ट ने विशेष रूप से टोल-फ्री नंबर '112' को इमरजेंसी सप्लाई सपोर्ट सिस्टम के रूप में प्रचारित करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।जस्टिस देवन रामचंद्रन ने दोहराया कि असहाय पीड़ितों को निराशा में चले जाने के मामलों की बढ़ती संख्या इस संदेह की गवाही देती है कि वर्तमान में लागू उपायों को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है।कोर्ट ने कहा,"केंद्रीय मुद्दे पर वापस...
भविष्य में माता-पिता या किसी अन्य द्वारा धमकाए जाने पर पुलिस आयुक्त से संपर्क करेंः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुरक्षा की मांग कर रहे विवाहित जोड़े को निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में पुलिस सुरक्षा की मांग करने वाले एक विवाहित जोड़े को निर्देश दिया है कि अगर उन्हें भविष्य में अपने माता-पिता या किसी अन्य से कोई धमकी मिलती है या उनके जीवन को कोई खतरा है तो वे सीधे पुलिस आयुक्त, इंदौर से संपर्क कर सकते हैं। जस्टिस विवेक रूसिया ने आगे निर्देश दिया है कि यदि आयुक्त को लगता है कि वास्तव में कपल के जीवन के लिए खतरा है, तो वे शक्ति वाहिनी बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई...
रेप केस:पटना हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव की जमानत याचिका खारिज की
पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने नाबालिग के साथ रेप मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी।जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह तथा जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने आदेश दिया,"अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी राजबल्लभ यादव को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता है।"आरोपी राजबल्लभ यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम की धारा 4 और 8 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है और दंडनीय अपराध के लिए आजीवन...
अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदनों पर 6 महीने में फैसला किया जाए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदनों पर समयबद्ध तरीके से फैसला किया जाना चाहिए, न कि आवेदन जमा करने की तारीख से छह महीने की अवधि के बाद ।सुप्रीम कोर्ट को आशंका थी कि यदि आवेदनों पर शीघ्रता से निर्णय नहीं लिया गया तो ऐसी नियुक्तियों का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।"... अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के उद्देश्य और लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यानी, मृत कर्मचारी के परिवार को सेवा में रहते हुए कर्मचारी की असामयिक मृत्यु पर वित्तीय कठिनाई की स्थिति में रहने...
'कोमल उम्र के बच्चे को उकसाने और पढ़ाए जाने की संभावना': कलकत्ता हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के दोषी व्यक्ति को बरी किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला की हत्या के अपराध में पति को दोषी ठहराने के आदेश को रद्द कर दिया।कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने के आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि घटना की प्रत्यक्षदर्शी बच्ची की उम्र बहुत ही कम थी, जिस कारण उसे परिस्थितियां समझ में नहीं आई थी और उसके पढ़ाया भी जा सकता था।इस मामले में, मृतका अपने ससुराल में जल गई थी और बाद में जिस अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया, वहां उसकी मृत्यु हो गई।जस्टिस बिवास पटनायक और जस्टिस जॉयमाल्या...
'न्याय की पवित्र धारा' दूषित नहीं होनी चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोपी वकील को जमानत देने से इनकार किया
गुजरात हाईकोर्ट ने एक आरोपी वकील को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि एक वकील के लिए धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक धमकी के गंभीर अपराधों में शामिल होना शर्म की बात है।दरअसल, वकील पर 3 साल पहले सेल डीड के निष्पादन के दौरान एक बड़ी धन राशि लेने का आरोप है।जस्टिस निराल आर मेहता की खंडपीठ ने कहा,"आवेदक पेशे से वकील होने के कारण अक्सर गंभीर प्रकृति के अपराध में शामिल होता है जो अपने आप में शर्म की बात है। एक वकील द्वारा इस तरह के अपराध में एक बार नहीं, बल्कि अतीत में कई बार लिप्त होना...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल बाल अधिकार आयोग द्वारा चुनाव के दौरान COVID-19 के कारण अनाथ होने वाले बच्चों के लिए चुनाव आयोग से मुआवजे की मांग वाली याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग (WBCPCR) के अध्यक्ष द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में भारत के चुनाव आयोग (ECI) को 26 फरवरी, 2021 को राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद COVID-19 के कारण जान गंवाने वाले बच्चों के प्रत्येक परिवार को मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की गई थी।याचिका में कहा गया कि राज्य में COVID-19 से प्रभावित बच्चों की दुर्दशा चुनाव आयोग के आठ चरणों में विधानसभा चुनाव कराने के असंवेदनशील निर्णय का प्रत्यक्ष...
यदि पर्याप्त स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया हो तो मोटर दुर्घटना दावों में एफआईआर दर्ज करने में देरी घातक नहीं है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण को एक मोटर दुर्घटना पीड़ित द्वारा दायर दावा याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया, भले ही पुलिस को मामले की रिपोर्ट करने में लगभग एक महीने की देरी हुई हो।दावा याचिका को खारिज करने को चुनौती देते हुए मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 173 के तहत दायर पहली अपील में निर्देश पारित किया गया था। इस तथ्य पर ध्यान आकर्षित किया गया था कि यहां पीड़ित अपने कृषि कार्य से 1,50,000 रुपये कमा रहा था और इसलिए दावेदार 11,00,000 रुपये का मुआवजा पाने के हकदार...
गुजरात हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र की जांच लंबित होने के बावजूद अनुसूचित जनजाति कोटा का दावा करने वाले व्यक्ति की अनंतिम नियुक्ति की अनुमति दी
गुजरात हाईकोर्ट ने अनुसूचित जनजाति समुदाय से होने का दावा करने वाले व्यक्ति को बिक्री कर निरीक्षक वर्ग III के पद पर अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति दी है, जबकि उसके जाति प्रमाण पत्र की जांच लंबित है।जस्टिस बीरेन वैष्णव ने निर्देश दिया कि इस तरह की नियुक्ति जांच समिति के परिणाम के अधीन होगी। यदि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र फर्जी साबित होता है, तो याचिकाकर्ता अनंतिम सेवा में रहने के लाभ का हकदार नहीं होगा। इसके विपरीत, यदि याचिकाकर्ता का प्रमाण पत्र वास्तविक पाया जाता है तो...
ज्ञानवापी मस्जिद मामला : वाराणसी कोर्ट में मस्जिद कमेटी के आदेश 7 नियम 11 सीपीसी आवेदन पर सुनवाई 26 मई को होगी
वाराणसी की एक अदालत ने मंग्लवार को पांच हिंदू महिलाओं (वादी) द्वारा दायर मुकदमे की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए प्रतिवादियों ( अंजुमन इस्लामिया समिति सहित) द्वारा दायर आदेश 7 नियम 11 के आवेदन पर 26 मई को सुनवाई करने का फैसला किया। कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट पर दोनों पक्षों से आपत्तियां भी आमंत्रित की हैं। सात दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज करनी होंगी। यह आदेश 20 मई को जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है जिसमें कहा गया था कि अंजुमन इस्लामिया समिति द्वारा दायर आदेश 7 नियम 11 सीपीसी आवेदन पर...
गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की संपत्ति पर मदरसे के निर्माण को अवैध घोषित करने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में सूरत नगर निगम के कार्यकारी अभियंता द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इस आदेश में कथित "मदरसा" को हटाने का निर्देश दिया गया था, जिसे सरकारी भूमि पर बनाया गया है। कार्यकारी अभियंता ने मदरसा को हटाने का आदेश इस आधार पर दिया कि निर्माण सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना किया है।जस्टिस ए वाई कोगजे ने कहा,"न्यायालय की राय में शैक्षणिक संस्थान के वास्तविक संचालन के संबंध में रिकॉर्ड पर किसी भी सबूत के अभाव में और शैक्षणिक संस्थान चलाने की अनुमति...
आर्बिट्रेटर केवल इसलिए समझौते की शर्तों को फिर से नहीं लिख सकता क्योंकि यह बिजनेस कॉमन सेंस का उल्लंघन करता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि मध्यस्थ पार्टियों के बीच समझौते की शर्तों को केवल इसलिए दोबारा नहीं लिख सकता, क्योंकि समझौते में शामिल पार्टियों ने व्यापार की सामान्य समझ का उपहास किया है।जस्टिस विभु बाखरू की सिंगल बेंच ने माना कि एक अवॉर्ड, जिसमें मध्यस्थ पार्टियों के बीच समझौते में बदलाव करता है, क्योंकि यह एक पक्ष के लिए व्यावसायिक रूप से मुश्किल है, वह भारतीय कानून की मौलिक नीति के खिलाफ होगा और पेटेंट अवैधता से प्रभावित होगा।कोर्ट ने कहा कि जब समझौता एक पक्ष को अनुबंध की अवधि के दरमियान समान...
विस्माया दहेज हत्या: केरल कोर्ट ने पति किरण कुमार को 10 साल जेल की सजा सुनाई, 12.5 लाख रुपए जुर्माना लगाया
केरल की एक निचली अदालत ने मंगलवार को एक सनसनीखेज दहेज हत्या मामले (Dowry Death Case) में दोषी को 10 साल जेल की सजा सुनाई है। इस मामले में 22 वर्षीय विस्मया वी नायर जून, 2021 में दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के कारण कथित तौर पर आत्महत्या के कारण अपने ससुराल में मृत पाई गई थी। कोल्लम के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजीत केएन ने मृतक (पीड़िता) के पति किरण कुमार को 10 साल कैद और 12.5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। सोमवार को, सत्र न्यायाधीश सुजीत केएन ने कुमार को भारतीय दंड...
कुतुब मीनार- '800 साल पुरानी चीज़ के लिए आप बहाली के कानूनी अधिकार का दावा कैसे कर सकते हैं?' कोर्ट ने पूछा, फैसला सुरक्षित
दिल्ली में साकेत जिला न्यायालय ने उस मुकदमे को खारिज करने वाले सिविल जज के आदेश के खिलाफ अपील पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है , जिसमें दावा किया गया था कि कुतुब मीनार परिसर के भीतर स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद एक मंदिर परिसर के स्थान पर बनाई गई है और इसकी बहाली की मांग की गई थी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने मामले को 9 जून को सुनवाई के लिए पोस्ट किया है।न्यायाधीश ने आदेश में दर्ज किया," तर्क समाप्त हो गए। पार्टियों को एक सप्ताह के भीतर विरोधी पक्ष को एडवांस कॉपी देते हुए...
पक्षकार अदालत में अपने वकील द्वारा दिए गए बयानों से बंधे हैं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया कि पक्षकार अपने वकील द्वारा अदालत में दिए गए बयानों से बंधे हैं। 'त्रुटि स्पष्टीकरण' के आधार पर आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार आवेदन को अस्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी की।जस्टिस एच.एस. मदान ने माना कि आवेदक के वकील रिकॉर्ड में स्पष्ट किसी भी त्रुटि को इंगित करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए आवेदक पहले के वकील द्वारा दिए गए बयान से पीछे हटने और योग्यता के आधार पर मामले पर फिर से बहस करने की कोशिश की कानून में अनुमति नहीं है।यह नोट किया गया कि वर्तमान...
कुतुब मीनार पूजास्थल नहीं, मौजूदा स्थिति को बदला नहीं जा सकता: एएसआई ने कथित मंदिरों की बहाली के लिए दायर याचिका का विरोध किया
दिल्ली की एक जिला आदलत के समक्ष कुतुब मीनार परिसर के निर्माण के लिए कथित रूप से नष्ट किए गए 27 मंदिरों की बहाली के लिए दायर याचिका के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने कहा है कि स्मारक की मौजूदा स्थिति को बदला नहीं जा सकता।यह स्वीकार करते हुए कि कुतुब मीनार परिसर के भीतर कई मूर्तियां मौजूद हैं, एएसआई ने कहा है कि 1914 से कुतुब मीनार स्मारक प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 की धारा 3 (3) के तहत एक संरक्षित स्मारक है और इसे 'इन-सीटू' की स्थिति में ही रखा जाता है।इसके अलावा,...
पहले ई-बिल के वैध होने पर दूसरे बिल के अभाव में वाहन को रोका नहीं जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस टी.एस. शिवज्ञानम और जस्टिस हिरणमय भट्टाचार्य ने माना कि जीएसटी विभाग दूसरे ई-वे बिल के अभाव में वाहनों को रोक नहीं सकता, क्योंकि पहला ई-वे बिल इंटरसेप्शन अवधि में वैध था।प्रतिवादी/निर्धारिती(Assessee) ने प्रस्तुत किया कि माल के साथ वाहन को रोकना और टैक्स और जुर्माने की मांग उचित नहीं है। माल ढोने वाले वाहन में ले जाने वाला ई-वे बिल 8 सितंबर 2019 की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया और 9 सितंबर 2019 को माल की ढुलाई की गई। वहीं, दोपहर 1.30 बजे वाहन को रोका गया....
















