मुख्य सुर्खियां

केरल हाईकोर्ट
ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम| शिक्षक धारा 2(e) के तहत 'कर्मचारी' के दायरे में आते हैं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि शिक्षक ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम के तहत परिभाषित 'कर्मचारी' के दायरे में आते हैं। जस्टिस मुरली पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया कि सीयूएसएटी, एक शैक्षणिक संस्थान होने के नाते, अधिनियम की धारा 1 (3) (सी) के तहत एक प्रतिष्ठान है।चूंकि अधिनियम की धारा 1 की उप-धारा 3 के खंड (सी) के तहत प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अधिनियम के प्रावधानों को शैक्षणिक संस्थानों पर लागू किया गया है, कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ...

नॉन कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट के लिए राज्य के नाम का उपयोग प्रतिबंधित: केरल हाईकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश को रद्द किया
नॉन कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट के लिए राज्य के नाम का उपयोग प्रतिबंधित: केरल हाईकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश को रद्द किया

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन अपने टाइटल में किसी राज्य के नाम का उपयोग नहीं कर सकता, भले ही वह लाभ या उद्देश्य के लिए गठित किया गया हो, भले ही वह नॉन कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट हो, पर वह प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950 से संबंधित नियम के तहत उनका अनुचित प्रयोग नहीं कर सकता।चीफ जस्टिस एस. मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी. शैली की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष राज्य के नाम का उपयोग न केवल व्यापार या व्यवसाय के लिए बल्कि कॉलिंग या पेशे के लिए भी...

मद्रास हाईकोर्ट
यदि किसी अन्य धर्म के व्यक्ति की किसी हिंदू देवता में आस्था है तो उसे मंदिर में प्रवेश से रोका नहीं जा सकताः मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में मांग की गई ‌थी कि थिरुवट्टर में अरुल्मिघू आदिकेशव पेरुमल थिरुकोविल के कुंभाभ‌िषेघम उत्सव में गैर-हिंदुओं को भाग लेने की अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया जाए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि किसी भी धर्म से संबंधित व्यक्ति को न तो रोका जाना चाहिए और न ही मंदिर में प्रवेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।याचिका सी सोमन नामक व्यक्ति ने कुंभबीशेगम उत्सव के आयोजन के लिए प्रसारित एक निमंत्रण पत्र के मद्देनजर दायर की थी। कार्ड पर एक मंत्री के नाम का...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक पार्क में मोहल्ला क्लिनिक बनाने की मंजूरी दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक पार्क में मोहल्ला क्लिनिक बनाने की मंजूरी दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में शहर के कालकाजी क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक पार्क में मोहल्ला क्लिनिक बनाने की मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट ने उक्त मंजूरी यह देखते हुए दी कि यह परियोजना इलाके के निवासियों के लिए फायदेमंद होगी।जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा कि परियोजना को जनहित में प्रस्तावित योजना के अनुसार लागू किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों (दिल्ली सरकार और पीडब्ल्यूडी) को यह सुनिश्चित करने के लिए आकस्मिक और एक साथ कदम उठाने का निर्देश दिया कि क्लिनिक से सटे हरित क्षेत्र को भी विकसित किया...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के मुस्लिम बहुल शहर में बकर-ईद पर कुर्बानी करने की अनुमति दी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के मुस्लिम बहुल शहर में बकर-ईद पर कुर्बानी करने की अनुमति दी

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को 10 जुलाई मनाई जाने वाली बकर-ईद के अवसर पर हरिद्वार से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित मुस्लिम बहुल शहर मैंगलोर में जानवरों की कुर्बानी की अनुमति देने के राज्य सरकार के आदेश के संचालन पर रोक लगा दी।अदालत ने कहा कि सरकारी आदेश का उद्देश्य हिंदू समुदाय की भावना को शांत करना प्रतीत होता है, क्योंकि हरिद्वार को प्राचीन काल से पवित्र शहर माना जाता है।खंडपीठ ने कहा,"हालांकि, हमारे विचार में उक्त आदेश अस्थायी रूप से मैंगलोर शहर (हरिद्वार शहर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर...

राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर हत्याकांड के बाद भड़काऊ व्हाट्सएप मैसेज फॉरवर्ड करने वाले वकील के क्लर्क को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने वकील के उस क्लर्क को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की, जिसने उदयपुर हत्याकांड पर व्हाट्सएप में "उदयपुर में धार्मिक युद्ध शुरू हो गया है, ब्रावो सूअरों को खत्म करो।" मैसेज फॉरवर्ड किया था।याचिकाकर्ता ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए और धारा 153ए के तहत दंडनीय अपराध के लिए प्रतिवादी नदीम कादिर की सूचना पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की है। उसने याचिका में आगे जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा की भी मांग की।याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि उपरोक्त मैसेज "फॉरवर्ड"...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ब्रेन ट्यूमर सर्जरी बताकर आंखों के ऑपरेशन लिए पैरोल अवधि बढ़ाने की मांग करने वाले कैदी की याचिका खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ब्रेन ट्यूमर सर्जरी बताकर आंखों के ऑपरेशन लिए पैरोल अवधि बढ़ाने की मांग करने वाले कैदी की याचिका खारिज की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कैदी की रिट याचिका खारिज कर दी। जिसने याचिका में ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के लिए पैरोल की अवधि बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन वास्तव में उसे आंखों की सर्जरी करवानी थी।याचिकाकर्ता ने पैरोल अवधि इस आधार पर बढ़ाने की मांग की थी कि उसे ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी करवानी है, लेकिन जांच एजेंसी द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की आंखों की सर्जरी होनी है न कि ब्रेन ट्यूमर की।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने अवलोकन किया,"जाहिर है कि जांच...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) याचिका खारिज कर दी, जिसमें राज्य सरकार को यूपी राज्य के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।यह कहते हुए कि सर्विस मामलों में, कोई जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस रजनीश कुमार की पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि याचिकाकर्ता पूरी तरह से अजनबी है और राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवा की शर्तों में बदलाव की...

[मोटर दुर्घटना] वास्तविक नुकसान के मुआवजे में रिपेयर के लिए स्पेयर पार्ट्स का मूल्य शामिल है: केरल हाईकोर्ट
[मोटर दुर्घटना] वास्तविक नुकसान के मुआवजे में रिपेयर के लिए स्पेयर पार्ट्स का मूल्य शामिल है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने गुरुवार को मोटर दुर्घटना (Motor Accident) दावों की अपील की अनुमति देते हुए कहा कि मोटर दुर्घटना के दावों में दावेदार 'वास्तविक नुकसान' के लिए मुआवजे का हकदार है, जिसमें स्पेयर पार्ट्स का मूल्य भी शामिल है।जस्टिस बधारुद्दीन ने कहा कि दावेदार वाहन की रिपेयरिंग के लिए खर्च किए गए स्पेयर पार्ट्स के मूल्य के मुआवजे का हकदार है जो मोटर दुर्घटना के परिणामस्वरूप क्षतिग्रस्त हो गया है।पीठ ने कहा कि ऐसे मामले में दावेदार वास्तविक नुकसान के लिए मुआवजे का हकदार है जिसमें...

ट्रायल कोर्ट पार्टियों के बीच विवादों के आधार पर अतिरिक्त मुद्दे तय कर सकता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
ट्रायल कोर्ट पार्टियों के बीच विवादों के आधार पर "अतिरिक्त मुद्दे" तय कर सकता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने ट्रायल कोर्ट (Trail Court) के आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका पर विचार करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट पक्षकारों के बीच विवादों के आधार पर "अतिरिक्त मुद्दे" तय कर सकता है।ट्रायल कोर्ट ने प्रतिवादियों के प्रतिकूल कब्जे की याचिका के संबंध में एक अतिरिक्त मुद्दा तैयार करने के लिए आवेदन की अनुमति दी गई थी।यदि प्रतिवादियों ने एक विशेष याचिका ली है जो वादी द्वारा विवादित थी और ट्रायल कोर्ट ने महसूस किया कि इस संबंध में पक्षकारों के मुद्दे पर इस...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्ट अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने चीफ इंजीनियर के रूप में नियुक्ति की मांग वाली 71 वर्षीय व्यक्ति की याचिका खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने केंद्र सरकार के 71 वर्षीय सेवानिवृत्त इंजीनियर इन चीफ द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्हें मानदेय के आधार पर श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र (Sri Ram Janma Bhumi Trust) में चीफ इंजीनियर के रूप में नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग की गई है।श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र भारत सरकार द्वारा फरवरी 2020 में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए स्थापित एक ट्रस्ट है।जस्टिस एसजी पंडित की एकल पीठ ने डॉ. एस.पी. रघुनाथ द्वारा...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जर‌िए साक्ष्य की रिकॉर्डिंग किसी भी पक्ष का अधिकार नहीं, अनुमति कोर्ट का विवेकाधिकार: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि दीवानी मुकदमों में, जहां जटिल मुद्दे शामिल हो, अदालत को एक पक्ष को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जर‌िए साक्ष्य पेश करने की अनुमति देने में सतर्क रहना चाहिए और यह कि केवल विलंब, खर्च या असुविधा एक वादी को महत्वपूर्ण ऑक्यूलर साक्ष्यों को पेश करने की अनुमति देने का एक वैकल्पिक तरीका नहीं हो सकता है। ज‌स्टिस सचिन शंकर मखादुम की सिंगल जज बेंच ने टीजी वीरप्रसाद और अन्य द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में 28 मार्च के ट्रायल कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। उस...

सेक्स संबंध के बाद शादी से इनकार करना बलात्कार के अपराध के लिए पर्याप्त नहीं: केरल हाईकोर्ट
सेक्स संबंध के बाद शादी से इनकार करना बलात्कार के अपराध के लिए पर्याप्त नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामले में केंद्र सरकार के वकील को जमानत देते हुए माना कि सेक्स संबंध के बाद शादी से इनकार करना बलात्कार के अपराध का गठन करने के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्सिट बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि दो इच्छुक वयस्क सहमति से बनने वाले यौन संबंध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के दायरे में आने वाले बलात्कार की श्रेणी में नहीं आएंगे, जब तक कि यौन संबंध के लिए ली गई सहमति, धोखे से या गलत बयानी द्वारा से न ली गई हो।कोर्ट ने कहा,"भले ही दो इच्छुक भागीदारों के बीच यौन संबंध...

केरल हाईकोर्ट
बाद में रिश्तों में खटास आने से रेप का मामला नहीं बनेगा: केरल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील की जमानत याचिका पर कहा

केरल हाईकोर्ट ने केरल हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामले में केंद्र सरकार के वकील को जमानत देते हुए माना कि एक पुरुष के खिलाफ बलात्कार के आरोप केवल इसलिए नहीं लगाया जा सकता है कि क्योंकि उसके और एक महिला के बीच संबंध समय के साथ खराब हो गए थे।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि रिश्ते समय के साथ विकसित हुए हैं और आजकल युवाओं का रोमांटिक रिश्तों पर एक अलग दृष्टिकोण है, लेकिन यह तथ्य कि यह रिश्ता नहीं चल रहा है, बलात्कार के अपराध को आकर्षित नहीं करेगा।"बाद में रिश्ते में खटास आने को बलात्कार नहीं माना...

P&H High Court Dismisses Protection Plea Of Married Woman Residing With Another Man
'जघन्य अपराध नहीं': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आईपीसी धारा 498-ए के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की अनुमति दी

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में पक्षकारों के बीच आपसी सहमति के आधार पर वैवाहिक विवाद में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498-ए और धारा 406 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका की अनुमति दी।जस्टिस दीपक सिब्बल की पीठ ने कहा कि तय राशि का भुगतान पत्नी को पूरी तरह से कर दिया गया है और पक्षकारों को उक्त समझौते के आधार पर आपसी सहमति से तलाक दे दिया गया है।वर्तमान याचिका जब इस न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आई तो याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता द्वारा पूरी...

आरोपी की मेडिकल जांच नहीं होने से ऐसे चश्मदीद गवाहों पर संदेह नहीं किया जा सकता, जिनका समर्थन मेडिकल साक्ष्य से होता है : इलाहाबाद हाईकोर्ट
आरोपी की मेडिकल जांच नहीं होने से ऐसे चश्मदीद गवाहों पर संदेह नहीं किया जा सकता, जिनका समर्थन मेडिकल साक्ष्य से होता है : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि घटना के बाद आरोपी का मेडिकल परीक्षण न करने के एक मात्र आधार पर मेडिकल साक्ष्य द्वारा समर्थित चश्मदीद गवाहों के साक्ष्य पर संदेह नहीं किया जा सकता। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव की खंडपीठ ने बलात्कार के आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखी, जिसे निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बेंच ने साथ ही पीड़ित को मुआवजे के रूप में 25,000 / - रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।संक्षेप में मामलाएक श्रवण कुमार मौर्य को आईपीसी की धारा 376 के तहत दंडनीय अपराध का...

दिल्ली हाईकोर्ट
[POCSO Act] दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट्स से पीड़ित बच्चों के आवेदन का इंतजार किए बिना उन्हें अंतरिम मुआवजा देने को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि स्पेशल कोर्ट्स को बाल पीड़ितों को जल्द से जल्द अंतरिम मुआवजा देने के लिए कार्रवाई शुरू करनी चाहिए और इसके लिए आवेदन दायर करने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।जस्टिस जसमीत सिंह कई याचिकाओं पर विचार कर रहे थे, जिसमें पूर्ववर्ती पीठ ने पीड़ितों को अंतरिम मुआवजा देने के उद्देश्य से डीएसएलएसए को यौन अपराधों से संबंधित प्राथमिकी की आपूर्ति की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की मांग की थी।अदालत को अवगत कराया गया कि जब अंतरिम मुआवजे के लिए विशेष अदालत के...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम बनाम सीपीसी | वाणिज्यिक सूट में लिखित बयान दाखिल करने में देरी को माफ करने की शक्ति काफी अलग: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया है कि वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम लिखित बयान दाखिल करने की अवधि से संबंधित प्रावधानों में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाता है और जहां तक ​​वाणिज्यिक वादों का संबंध है, लिखित विवरण दाखिल करने में हुई देरी को माफ करने की न्यायालय की शक्ति में बदलाव लाता है।सीपीसी के आदेश VIII नियम 1 में कहा गया है कि लिखित बयान सम्मन की तामील की तारीख से तीस दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाना है, ऐसा न करने पर न्यायालय द्वारा 90 दिनों से अधिक की देरी (समन की तामील की तारीख से) को माफ नहीं किया जा सकता...