मुख्य सुर्खियां
राजमार्ग निर्माण के लिए कौन सी भूमि उपयुक्त होगी, यह तय करने के लिए NHAI सबसे अच्छा जज है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) यह तय करने के लिए सबसे अच्छा जज है कि राजमार्गों के निर्माण के लिए कौन सी भूमि उपयुक्त होगी। कोई भी परियोजना किसी व्यक्ति के ऐसे इशारे पर नहीं रोकी जा सकती, जो यह सोचता है कि उसकी जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए महत्वपूर्ण नहीं है।जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस ज्योत्सना शर्मा की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं [श्याम सिंह और अन्य] द्वारा दायर रिट याचिका पर विचार करते हुए प्रार्थना की गई कि राष्ट्रीय...
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की आत्महत्या का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी आनंद गिरी को जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और श्री मठ बाघंबरी गद्दी अल्लाहपुर, प्रयागराज और श्री बड़े/लेटे हनुमान जी मंदिर, प्रयागराज के महंत नरेंद्र गिरी की कथित आत्महत्या के मामले में मुख्य आरोपी आनंद गिरी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।जस्टिस संजय कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि सीबीआई की ओर से जांच के दरमियान एकत्र सामग्री यह संकेत देती है कि आनंद गिरी (आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी) और सह-अभियुक्त के कृत्यों ने मृतक पर आत्महत्या का दबाव डाला था।कोर्ट ने कहा, "आवेदक और...
एमपी हाईकोर्ट ने सामान्य श्रेणी के उस उम्मीदवार की याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जो अनुसूचित जाति वर्ग की एक खाली रहने के बावजूद एससी उम्मीदवार से सीट पाने में पीछे रह गया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, ग्वालियर बेंच ने हाल ही में उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता यूनिवर्सिटी की चयन प्रक्रिया से व्यथित था, जिसके कारण वह एससी श्रेणी की सीट के खली रहने के बावजूद मेधावी एससी उम्मीदवार के मुकाबले उसे सीट से वंचित रहना पड़ा।जस्टिस जीएस अहलूवालिया की खंडपीठ ने इस बात के गुण-दोष पर ध्यान नहीं दिया कि आरक्षित वर्ग के पद को न भरना उचित था या नहीं।उन्होंने कहा,यदि वर्तमान मामले के तथ्यों पर विचार किया जाए तो प्रतिवादी द्वारा दाखिल परिणाम के साथ विवरणी से यह स्पष्ट है कि...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसटी लिस्ट में राजभर समुदाय को शामिल करने की मांग करने वाले अभ्यावेदन पर फैसला करने के लिए यूपी सरकार को 4 सप्ताह का समय दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश (दिनांक 11 मार्च, 2022) का पालन करने के लिए यूपी सरकार को 4 सप्ताह का समय दिया, जिसमें केंद्र द्वारा राज्य की अनुसूचित जनजाति की सूची में राजभर समुदाय को शामिल करने की मांग करने वाले अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने जागो राजभर जागो समिति द्वारा दायर अवमानना याचिका पर यह निर्देश जारी किया, जिसमें कहा गया कि यूपी सरकार के समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव राजभर जाति को न्यायालय के आदेश के अनुसार, अनुसूचित...
ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के 10 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार के आरोपी को दोषी ठहराया, 10 साल के कठोर कारावास की सजा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक व्यक्ति को वर्ष 2010 में 11 वर्षीय नाबालिग पीड़िता से बलात्कार के लिए दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, जबकि 10 साल पहले अक्टूबर 2011 में एक निचली अदालत ने उसे बरी कर दिया था।जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस मिनी पुष्कर्ण की खंडपीठ ने 20 अक्टूबर, 2011 के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ वर्ष 2014 में अभियोजन द्वारा दायर अपील की अनुमति दी, जिसमें राहुल नामक आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 377 के तहत दर्ज एफआईआर में बरी कर दिया गया था।ट्रायल...
अदालत मुद्दों को तय करने के लिए की गई याचनाओं से आगे नहीं बढ़ सकती: सिक्किम हाईकोर्ट
सिक्किम हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालतें केवल उन याचनाओं के संबंध में मुद्दों को तय कर सकती हैं, जो पक्षकार द्वारा दावा किया जाता है और दूसरे द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है। जस्टिस भास्कर राज प्रधान ने कहा कि मुकदमे की कार्यवाही पक्षकारों द्वारा रिकॉर्ड में रखी गई याचनाओं से आगे नहीं बढ़ सकती।उक्त अवलोकन ऐसे मामले में आया, जिसमें निचली अदालत ने संपत्ति विवाद में मुद्दा तय किया था, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि वादी के संयुक्त परिवार की कानूनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए वाद की संपत्ति बेची...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अश्लील वीडियो के जरिए महिला को ब्लैकमेल कर आत्महत्या के लिए उकसाने वाले आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttrakhand High Court) ने हाल ही में विवाहित महिला को व्हाट्सएप के माध्यम से उसके अश्लील वीडियो साझा करके ब्लैकमेल करने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 के तहत दंडनीय आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया।जस्टिस रवींद्र मैथानी की पीठ ने पाया कि पीड़िता आवेदक-आरोपी से उसे छोड़ने, संबंध खत्म करने, अश्लील वीडियो हटाने के लिए भीख मांगती रही, लेकिन आवेदक ऐसा करने को तैयार नहीं हुआ।कोर्ट ने कहा,"यह निश्चित रूप से...
मजिस्ट्रेट, हाईकोर्ट द्वारा गठित एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने के बाद पुलिस को जांच का निर्देश नहीं दे सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि एक मजिस्ट्रेट अदालत हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त जांच एजेंसी द्वारा दायर बी रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) को खारिज करने के बाद किसी अन्य जांच एजेंसी द्वारा आगे की जांच का निर्देश नहीं दे सकती है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने एक मृतक के परिवार के सदस्यों द्वारा दायर एक याचिका की अनुमति दी और मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया, क्योंकि उन्होंने विशेष जांच दल की बी रिपोर्ट को खारिज करने के बाद एचएएल पुलिस स्टेशन को आगे की जांच करने का निर्देश दिया था।इसके...
राज्य के पास असीमित संसाधन नहीं हैं, अनुदान प्राप्त करने के लिए बकाया राशि छोड़ने वाली संस्थाओं को यू-टर्न लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में पुरानी पेंशन योजना के अनुसार देहरादून ऋषिकुल विद्यापीठ ब्रह्मचर्य संस्कृत कॉलेज में कर्मचारियों की पेंशन और पारिवारिक पेंशन जारी करने की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए कहा:"राज्य के पास असीमित संसाधन नहीं हैं। राज्य ने उक्त संचार के खंड 3 में निहित स्पष्ट समझ के आधार पर संस्थान को सहायता अनुदान को मंजूरी देने का सचेत निर्णय लिया। याचिकाकर्ता अब 16 वर्षों के बाद उपयुक्त भाग को परेशान करना चाहते हैं। इस स्तर पर याचिकाकर्ताओं को राहत देने से राज्य के संसाधनों...
मद्रास हाईकोर्ट ने गेहूं का आटा मानकर 1.5 किलोग्राम हेरोइन रखने वाले व्यक्ति को बरी किया
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में उस व्यक्ति को रिहा करने का निर्देश दिया, जिसे कुवैत ले जाने के लिए जानबूझकर 1.5 किलोग्राम हेरोइन रखने के लिए दस साल के कठोर कारावास और 1,00,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।जस्टिस जी इलांथिरैयन की पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता ने यह मानकर सामग्री ली थी कि यह गेहूं का आटा और इमली है और प्रतिबंधित पदार्थ नहीं है।हालांकि सभी मामलों में वाहक दोष की अनुपस्थिति की दलील नहीं दे सकता, लेकिन जैसा कि इस मामले में ऊपर बताया गया है कि प्रतिबंधित पदार्थ रखने के आरोपी के ज्ञान...
पासपोर्ट अधिकारी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने या आवेदक की जन्म तिथि की स्वतंत्र जांच करने की शक्ति का उपयोग नहीं कर सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने कहा कि पासपोर्ट अधिकारियों से यह अपेक्षा नहीं की जाती है कि पासपोर्ट धारक द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड के आधार पर वे अपनी स्वतंत्र जांच करेंगे, यदि जन्म तिथि या पासपोर्ट में दर्ज नाम के संबंध में कोई विवाद या मतभेद है, खासकर जब ऐसी प्रविष्टियां की जाती हैं।जस्टिस अशोक कुमार गौड़ ने कहा कि पासपोर्ट प्राधिकरण हमेशा पार्टियों को निर्देश देने के लिए सक्षम होते हैं कि वे या तो जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत काम कर रहे अधिकारियों से या न्यायिक मजिस्ट्रेट...
[MPSC Exam] प्रक्रिया के अंतरिम चरण में रिजल्ट में न्यायिक हस्तक्षेप सभी उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों को परीक्षाओं के रिजल्ट में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए क्योंकि न्यायिक हस्तक्षेप सभी उम्मीदवारों को प्रभावित करता है, न कि केवल राहत चाहने वाले पक्षों को।अदालत ने कहा,"वास्तव में, हम यह सुझाव देने का साहस करेंगे कि सबसे असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर, एक साधारण कारण के लिए न्यायालय द्वारा केवल पक्षकारों के लाभ के लिए अंतरिम हस्तक्षेप नहीं होने चाहिए क्योंकि हस्तक्षेप से सभी उम्मीदवार प्रभावित होंगे।"जस्टिस जीएस पटेल और जस्टिस गौरी गोडसे ने महाराष्ट्र प्रशासनिक...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस्लामिक धार्मिक सभाओं में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने गुरुवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) के इस्लामिक धार्मिक सभाओं में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया।चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की पीठ ने कहा कि भाजपा नेता और वकील नाजिया इलाही खान (याचिकाकर्ता) ने याचिका में उठाई गई अपनी याचिका को प्रमाणित करने के लिए अदालत के समक्ष कोई प्रामाणिक सामग्री नहीं रखी।नाजिया ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था कि 2011 से, सीएम...
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएन सिंह का निधन
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस केएन सिंह का 8 सितंबर को निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार इलाहाबाद में राजकीय सम्मान के साथ किया गया।जस्टिस सिंह 25 नवंबर, 1991 से 12 दिसंबर, 1991 तक सीजेआई के पद पर रहे। उनका जन्म 1926 में हुआ था।उन्होंने 4 सितंबर, 1957 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक वकील के रूप में नामांकन किया और इलाहाबाद में नागरिक, संवैधानिक और कराधान मामलों में प्रैक्टिस की। उन्हें साल 1963 में यूपी सरकार की ओर से जूनियर स्टैंडिंग काउंसल के रूप में नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें सरकारी...
धारा 141 एनआई एक्ट| धारा 138 के तहत अपराध के लिए एकमात्र मालिक पर मुकदमा नहीं किया जा सकता है, बल्कि एकमात्र स्वामित्व वाले प्रतिष्ठान को भी आरोपी के रूप में पेश किया जाना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब एकल स्वामित्व वाली इकाई द्वारा जारी किया गया चेक अनादरित हो जाता है, तो एकमात्र मालिक के साथ-साथ एक आरोपी के रूप में मालिकाना प्रतिष्ठान को प्रस्तुत करना आवश्यक है।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर की पीठ ने आगे कहा कि इसके अलावा यह स्पष्ट किया जाता है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 141 के मद्देनजर केवल एकमात्र मालिक पर मुकदमा करना पर्याप्त नहीं होगा।यह प्रावधान कंपनियों द्वारा किए गए अपराधों के मामले में प्रक्रिया प्रदान करता है। पीठ ने कहा कि इस...
नियोक्ता को पदोन्नति नीति बदलने की शक्ति, जब तक कि यह दुर्भावनापूर्ण/मनमानी न हो: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि नियोक्ताओं के पास अपने कर्मचारियों को पदोन्नति देने में अपनी नीति बदलने की शक्ति है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की नीति में न्यायालय द्वारा केवल इसलिए हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है क्योंकि उसे लगता है कि कोई अन्य नीति निष्पक्ष या समझदार या अधिक वैज्ञानिक या तार्किक होती।छत्तीसगढ़ सचिवालय सेवा भर्ती नियम, 2012 में राज्य सरकार द्वारा लाए गए कुछ बदलावों के संबंध में जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी की खंडपीठ ने कहा,"यह भी अच्छी तरह से तय है...
कानूनी उत्तराधिकारी शिकायत के मामलों में शिकायतकर्ता को प्रतिस्थापित कर सकते हैं और उसकी मृत्यु के बाद मुकदमा जारी रख सकते हैं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि एक शिकायतकर्ता के कानूनी उत्तराधिकारी, जहां शिकायत पर एक आपराधिक मामला स्थापित किया जाता है, उसकी मृत्यु पर उसकी जगह ले सकता है और उसकी ओर से मामले को आगे बढ़ा सकता है।जस्टिस शशिकांत मिश्रा की सिंगल जज बेंच ने कहा,"... एक विशिष्ट प्रावधान की अनुपस्थिति के बावजूद, संहिता के प्रावधानों का वैधानिक उद्देश्य शिकायतकर्ता की मृत्यु पर अभियोजन जारी रखने के किसी व्यक्ति के अधिकार को रोकना नहीं है। दूसरे शब्दों में, यह निहित रूप से स्वीकार किया जाता है कि...
"बहुत गंभीर स्थिति": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में हाल की आग की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने लखनऊ में हाल ही में हुई आग की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने देखा कि लखनऊ में कई होटल, कोचिंग सेंटर, अस्पताल और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान वैध रूप से स्वीकृत नक्शे और अग्नि सुरक्षा उपायों के बिना हैं।जस्टिस राकेश श्रीवास्तव और जस्टिस बृज राज सिंह की पीठ ने मुख्य रूप से शहर में हुई हाल की दो घटनाओं को ध्यान में रखा, एक एक प्रसिद्ध होटल (लेवाना सूट) में और दूसरी एक कोचिंग सेंटर (ग्रेविटी क्लासेस) में।उल्लेखनीय है कि 09 सितंबर, 2022 को लखनऊ शहर के एक...
जहां विशेष विवाह अधिनियम की धारा 28 के तहत सहमति से तलाक की डिक्री पारित की गई हो, वहांअभिभावक और वार्ड अधिनियम की धारा 25 के तहत कस्टडी लेने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि विशेष विवाह अधिनियम की धारा 38 के तहत पिता फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है, जिसे विशेष विवाह अधिनियम की धारा 28 के तहत आपसी सहमति के आधार पर तलाक की डिक्री मिली। इसमें कहा गया कि इस तरह के डिक्री पारित होने के बाद संरक्षकता और वार्ड अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थानांतरित करने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है।कोर्ट ने कहा,"विशेष विवाह अधिनियम की धारा 38 के संदर्भ में प्रतिवादी-पति के पास उक्त न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का उपाय है, जिसने किसी भी...
एक व्यक्ति को कई आपराधिक मामलों में बरी कर दिया जाना, उसे संत की उपाधि नहीं देता या सार्वजनिक रूप से उसकी छवि का महिमामंडन नहीं करता हैः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में कहा कि एक व्यक्ति को कई आपराधिक मामलों में बरी कर दिया जाना, उसे संत की उपाधि नहीं देता या सार्वजनिक रूप से उसकी छवि का महिमामंडन नहीं करता है। इसके विपरीत, यह उसे कानून के साथ बेहयाई से पेश आने का हेकड़ी और ऐंठन देता है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ याचिकाकर्ता के खिलाफ पारित जिलाबदर के आदेश (Order of Externment) के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।कोर्ट ने कहा,जहां तक याचिकाकर्ता के इस तर्क का संबंध है कि उसे अधिकांश मामलों में बरी कर...



















