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प्रिवेंटिव डिटेंशन आदेश को पूर्व निष्पादन स्टेज में चुनौती दी जा सकती है, बशर्ते बंदी साबित करे कि डिटेंशन आदेश अवैध है: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि प्रिवेंटिव डिटेंशन आदेश को पूर्व निष्पादन स्टेज में चुनौती दी जा सकती है, बशर्ते याचिकाकर्ता / बंदी अदालत को संतुष्ट करें कि डिटेंशन आदेश स्पष्ट रूप से अवैध है।जस्टिस राजेश ओसवाल और जस्टिस पुनीत गुप्ता की पीठ ने प्रिवेंटिव डिटेंशन को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज करने के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए कहा,"अगर यह पाया जाता है कि यह स्पष्ट रूप से अवैध है, तो निश्चित रूप से उसे जेल जाने और फिर डिटेंशन आदेश को चुनौती देने के लिए...
इस 'ज्ञान' के साथ कि दुर्घटना मृत्यु का कारण बनेगी, तेज गति से वाहन चला रहे व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (II) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को एक मोटर दुर्घटना मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 भाग II के तहत कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि मामला अभी भी जांच के स्तर पर है और यह संभावना है कि याचिकाकर्ता को "जानकारी" थी कि उसकी लापरवाह ड्राइविंग एक घातक दुर्घटना का कारण बनेगी।जस्टिस बिबेक चौधरी ने कहा कि प्रारंभिक पुलिस रिपोर्ट से यह पाया गया कि याचिकाकर्ता यह जानते हुए भी अत्यधिक तेज गति से वाहन चला रहा था कि इस तरह की लापरवाह ड्राइविंग से किसी भी राहगीर, खुद और...
बेंगलुरु की सड़कों में गड्ढे- 'खराब सड़कों के कारण मौत की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने में संकोच न करें': हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने गुरुवार को पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि खराब सड़कों के कारण चोट या मौत की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने में संकोच न करें।चीफ जस्टिस प्रसन्ना बी वरले और जस्टिस अशोक एस किनागी की खंडपीठ ने प्रकाशित न्यूज रिपोर्टों की पृष्ठभूमि में यह निर्देश दिया, जिसमें यह बताया गया था कि भले ही नागरिकों ने सड़कों और गड्ढों की खराब स्थिति के कारण गंभीर चोट लगने या मृत्यु को लेकर एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया हो, पुलिस अधिकारियों ने...
समान मामलों पर भरोसा करके एक व्यक्ति को निर्वासन की कठोरता के अधीन करना संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने कहा कि समान मामलों पर भरोसा करके एक व्यक्ति को निर्वासन की कठोरता के अधीन करना संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है।पुलिस डिप्टी कमिश्नर, नासिक द्वारा पारित निष्कासन के तीसरे आदेश को रद्द करते हुए जस्टिस प्रकाश नाइक ने कहा कि बाहरी प्राधिकारी उन्हीं मामलों पर निर्भर थे जो पहले अपीलकर्ता को निर्वासित करने के लिए इस्तेमाल किए गए थे। अदालत ने कहा कि निर्वासन की शक्तियों का प्रयोग मनमाने तरीके से किया जाता है।कोर्ट ने कहा,"बाहरी व्यक्ति को एक ही सामग्री के...
डीसीपीसीआर ने 6 साल की बच्ची के कथित यौन उत्पीड़न की सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया, दिल्ली पुलिस पर 'पक्षपातपूर्ण' जांच करने का आरोप लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने 2018 में एक 6 साल की बच्ची के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा फिर से जांच की मांग को लेकर याचिका दायर की। इस बच्ची की बाद में इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी।एडवोकेट आरएचए सिकंदर के माध्यम से याचिका दायर की गई। सिकंदर का तर्क है कि दिल्ली पुलिस ने कथित अपराध में शामिल "अपराधियों को बचाने" के लिए "घटिया, लापरवाह और पक्षपातपूर्ण जांच" की। पुलिस ने मामले में अक्टूबर 2018 में ट्रायल कोर्ट के...
लोन एग्रीमेंट में ब्याज दर में बदलाव करने का तथ्य होता है, यह "अनुचित व्यापार व्यवहार" नहीं: एनसीडीआरसी
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) की दिनेश सिंह पीठासीन सदस्य और जस्टिस करुणा नंद बाजपेयी सदस्य की पीठ ने आईसीआईसीआई बैंक (अपीलकर्ता) पर आरोप लगाते हुए व्यक्ति (शिकायतकर्ता/प्रतिवादी) द्वारा अनुचित व्यापार व्यवहार के खिलाफ दायर उपभोक्ता शिकायत का निस्तारण किया।यह शिकायत शुरू में जिला आयोग के समक्ष दायर की गई थी, लेकिन आर्थिक अधिकार क्षेत्र की कमी के कारण इसे फोरम द्वारा वापस कर दिया गया। इसके बाद इसे राज्य आयोग में ले जाया गया, जिसने शिकायत स्वीकार कर ली और शिकायतकर्ता के पक्ष...
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत आरोपी अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकता, पहले विशेष अदालतों में जाना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत आरोपी को पहले अग्रिम जमानत के लिए विशेष अदालत से संपर्क करने की आवश्यकता है, क्योंकि सीआरपीसी की धारा 438 के तहत हाईकोर्ट का मूल अधिकार क्षेत्र ऐसे मामलों मेंं शामिल नहीं है।जस्टिस अशोक कुमार वर्मा ने सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले अभियुक्त की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के प्रावधानों के तहत अग्रिम जमानत देने या खारिज करने...
कोयना बांध परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए गेरियन भूमि का उपयोग संभव नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि गैरां की भूमि को निजी उद्देश्यों के लिए आवंटित नहीं किया जा सकता है और सतारा जिले में कोयना बांध के परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए उनका उपयोग करना संभव नहीं हो सकता।एक्टिंग चीफ जस्टिस एस. वी. गंगापुरवाला और जस्टिस संतोष चपलगांवकर की खंडपीठ स्वत: संज्ञान जनहित याचिका में एमिक्स क्यूरी के सुझावों का जवाब दे रही थी।जनहित याचिका के अनुसार, सतारा के खिरखंडी गांव की लड़कियों को कोयना बांध के एक छोर से दूसरे छोर तक नाव चलाने के लिए मजबूर किया जाता...
पीलीभीत 'फर्जी' एनकाउंटर 1991- पुलिस आरोपी को केवल इसलिए नहीं मार सकती क्योंकि वह खूंखार अपराधी है : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1991 के पीलीभीत मुठभेड़ मामले में आईपीसी की धारा 304 भाग I के तहत 43 उत्तर प्रदेश पुलिस कर्मियों को दोषी ठहराते हुए गुरुवार को सख्त टिप्पणी की कि पुलिस अधिकारी किसी अभियुक्त को केवल इसलिए नहीं मार सकते हैं क्योंकि वह एक खूंखार अपराधी है। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव की खंडपीठ ने कहा," पुलिस अधिकारियों का यह कर्तव्य नहीं है कि वे आरोपी को सिर्फ इसलिए मार दें क्योंकि वह एक खूंखार अपराधी है। निस्संदेह, पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करना होगा और उसे मुकदमे के लिए पेश...
मजिस्ट्रेट के पास धारा 125 सीआरपीसी के तहत भरणपोषण का अंतरिम आदेश देने की अंतर्निहित शक्ति: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि किसी भी स्पष्ट रोक या निषेध के अभाव में धारा 125 सीआरपीसी की व्याख्या भरणपोषण का अंतरिम आदेश देने की शक्ति प्रदान करने के रूप में की जा सकती है, हालांकि यह अंतिम परिणाम के अधीन होगा।जस्टिस अनिल के नरेंद्रन और जस्टिस पीजी अजितकुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शैला कुमारी देवी बनाम कृष्णन भगवान पाठक (2008) में कहा है,"... जहां तक 'अंतरिम' भरणपोषण का संबंध है, यह सच है कि मूल रूप से अधिनियमित संहिता की धारा 125 ने मजिस्ट्रेट को स्पष्ट रूप से अंतरिम भरण-पोषण के...
व्यभिचार साबित करने के लिए पति अपनी पत्नी के कथित प्रेमी की मोबाइल टावर लोकेशन नहीं मांग सकता,यह निजता का उल्लंघन हैः कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक मामले में किसी तीसरे पक्ष के मोबाइल टावर लोकेशन का खुलासा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है क्योंकि यह उस व्यक्ति के निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा, जो कार्यवाही में पक्षकार नहीं है। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा कि एक नागरिक को अपने परिवार, विवाह और अन्य आकस्मिक संबंधों की निजता की रक्षा करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि सूचनात्मक निजता भी निजता के अधिकार का एक अभिन्न अंग है। ''तीसरे पक्ष की निजता का पति की इस कथित दलील के आधार पर उल्लंघन करने की अनुमति...
'अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों की भर्ती में प्रतिमान बदलाव कर रही है': केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा, फैसला सुरक्षित
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली और रक्षा सेवाओं में पिछली भर्ती योजना के अनुसार बहाली और इनरोलमेंट की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की खंडपीठ को केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि यह योजना सशस्त्र बलों की भर्ती में "प्रतिमान बदलाव" कर रही है।भाटी ने अदालत से कहा, "यह ऐसी योजना नहीं है जो केवल गुणात्मक अंतर या मात्रात्मक अंतर कर रही...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अलग-अलग पुरुषों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप में नौ एफआईआर दर्ज करवाने वाली महिला को जमानत देने से इनकार किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुड़गांव की उस महिला को जमानत देने से इनकार कर दिया है, जिसने लगभग 14 महीने के भीतर 9 एफआईआर दर्ज करवाई थी। इन सभी एफआईआर में महिला ने कथित तौर पर पैसे ऐंठने के लिए अलग-अलग लड़कों पर उसके साथ यौन अपराध करने का आरोप लगाया था। जस्टिस अशोक कुमार वर्मा की एकल पीठ को सूचित किया गया कि 3 मामलों में महिला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के तहत कार्यवाही शुरू की गई है। उस पर आरोप है कि उसने इस इरादे से झूठी सूचना दी थी ताकि लोक सेवक द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को क्षति...
"गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु": गुजरात हाईकोर्ट ने संस्कृत के श्लोक का जिक्र किया; पॉक्सो केस में आरोपी शिक्षक की जमानत याचिका खारिज
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने 12 साल की अपनी छात्रा का सेक्सुअल असॉल्ट के आरोपी शिक्षक को जमानत देने से इनकार करते हुए संस्कृत के एक श्लोक का हवाला दिया और अपने 'शिष्य' के जीवन में एक 'गुरु' की भूमिका और प्रभाव पर प्रकाश डाला।जस्टिस समीर जे दवे ने कहा,"आरोपी एक आम आदमी नहीं है, बल्कि एक शिक्षक है। अन्य व्यवसायों को प्रभावित करने वाला एकमात्र करियर शिक्षा है। इसमें आने वाली पीढ़ियों के लाभ के लिए युवा लोगों के भविष्य को प्रभावित करने की शक्ति है। शिक्षक से रक्षक के रूप में कार्य करने की...
यदि यह क्लॉज नहीं है कि अंतरिती पर भरणपोषण का दायित्व होगा, संपत्ति हस्तांतरण को वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 23 के तहत शून्य नहीं माना जा सकताः मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम के तहत कुछ संपत्ति हस्तांतरण को शून्य घोषित करने का प्रावधान है, लेकिन संपत्ति का समझौता तब तक रद्द नहीं किया जा सकता जब तक कि यह अधिनियम की शर्तों को पूरा नहीं करता है।माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम की धारा 23(1) में कहा गया है,"जहां कोई वरिष्ठ नागरिक, जिसने इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद उपहार के जरिए या अन्यथा, अपनी संपत्ति स्थानांतरित कर दी है, इस शर्त के अधीन कि...
मोरबी ब्रिज हादसा: गुजरात हाईकोर्ट ने 7 आरोपियों की जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने मोरबी ब्रिज हादसे में 7 आरोपियों की ज़मानत याचिकाओं को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। राज्य सरकार को 2 जनवरी, 2023 तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। हादसे में 135 लोगों की जान चली गई थी।इस मामले में गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 7 ने पिछले महीने एक सत्र न्यायालय द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के बाद अब हाईकोर्ट का रुख किया है।आरोपियों के नाम देवांग परमार, दिनेश दवे और दीपक पारेख (ओरेवा समूह के प्रबंधक), प्रकाश परमार (उपठेकेदार),...
बीरभूम नरसंहार के आरोपी की हिरासत में मौत: कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीआईडी को सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से रोका
कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बुधवार को पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को बीरभूम नरसंहार के मामले में आरोपी की हिरासत में मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया।12 दिसंबर को, बीरभूम नरसंहार मामले के मुख्य आरोपी ललन शेख को राज्य के बीरभूम जिले में सीबीआई हिरासत में मृत पाया गया। सीआईडी ने बाद में सीबीआई के सात अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।मार्च में वापस पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले...
जेकेएल हाईकोर्ट ने बिजली के झटके के कारण स्थायी रूप से डिसेबेल 5-वर्षीय बच्चे के लिए राज्य को 'कठोर दायित्व' का जिम्मेदार ठहराया, 30 लाख मुआवजे देने का आदेश दिया
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में बिजली विकास विभाग (पीडीडी) द्वारा बिछाई गई 33,000 केवी एचटी लाइन के लिए जीवन भर के लिए विकलांग पांच वर्षीय लड़के को 30.2 लाख रुपये का मुआवजा दिया। अदालत ने दोहराया कि लापरवाही के लिए राज्य के पदाधिकारियों पर डाली गई जिम्मेदारी टॉर्ट्स के कानून के तहत "कठोर दायित्व" के मापदंडों के भीतर होगी।नाबालिग अपने आवासीय घर के बगल से गुजर रही लाइव 33000 केवी एचटी लाइन के सीधे संपर्क में आ गया। कहा जाता है कि नाबालिग के पिता सहित गांव के निवासियों द्वारा...
दिल्ली हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्टी के चुनाव चिह्न के खिलाफ चुनाव आयोग के आदेश पर उद्धव ठाकरे की अपील पर आदेश सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की उस अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी। एकल न्यायाधीश की पीठ ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के उस फैसले के खिलाफ उद्धव की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें शिवसेना के पार्टी चिन्ह 'धनुष और तीर' को फ्रीज कर दिया था।ईसीआई ने 8 अक्टूबर को ठाकरे और एकनाथ शिंदे के गुट दोनों को "शिवसेना" नाम या चुनाव चिह्न "धनुष और तीर" का उपयोग नहीं करने का निर्देश दिया, जब तक कि आधिकारिक मान्यता के...
भरण-पोषण याचिकाओं के लंबित रहने से नाबालिग बच्चों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं, अदालतों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि गुजारा भत्ता याचिकाओं के निपटान में देरी से नाबालिग बच्चों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है, कहा कि वैवाहिक मामलों से निपटने वाली फैमिली कोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नाबालिग बच्चों के हितों का ध्यान रखा जाए और हर संभव तरीके से उनकी आजीविका की रक्षा की जाए।अदालत ने कहा,"इस तथ्य के मद्देनजर कि तमिलनाडु राज्य भर के न्यायालयों द्वारा बड़ी संख्या में रखरखाव याचिकाओं को लंबित रखा जाता है और कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाता है। इस न्यायालय की सुविचारित राय...



















