मुख्य सुर्खियां
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने बीमा दावे का गलत तरीके से खंडन किया, एनसीडीआरसी ने सेवा में कमी की पुष्टि की
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) की जस्टिस आर.के. अग्रवाल (अध्यक्ष) की पीठ ने कहा कि मुआवजे को कई मदों के तहत नहीं दिया जा सकता। पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली राज्य आयोग के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए की।दिल्ली राज्य आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दावे के खंडन की तारीख से 6% प्रति वर्ष के ब्याज के साथ रु. 75,00,000/- का भुगतान करने का निर्देश दिया।दिल्ली राज्य आयोग ने आगे निर्देश दिया कि मानसिक पीड़ा...
गवाहों का पक्षद्रोही हो जाना आरोपी को जमानत देने का नया आधार नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जमानत के मामले में अदालत का यह अधिकार नहीं कि वह पक्षद्रोही गवाहों (Hostile Witnesses) द्वारा दिए गए सबूतों के आधार पर कोई राय बनाए, क्योंकि यह सबूतों का मूल्यांकन करने जैसा होगा।जस्टिस शेखर कुमार यादव की पीठ ने हत्या के आरोपी (कृष्णकांत) द्वारा दायर की गई दूसरी जमानत याचिका को इस नए आधार पर खारिज कर दिया कि चूंकि अंतिम देखे गए साक्ष्यों में से 2 गवाहों ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया और पक्षद्रोही घोषित किया गया, इसलिए उसे जमानत दी जानी...
आईपीसी की धारा 307- घायल पीड़ित का एग्जामिनेशन न कराने से आरोपी को क्रॉस एग्जामिनेशन का अधिकार नहीं मिलता; अभियोजन पक्ष के लिए घातक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने हाल ही में कहा कि आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) से जुड़े एक मामले में घायलों का एग्जामिनेशन न करना अभियोजन पक्ष के लिए घातक है क्योंकि यह अभियुक्तों को क्रॉस एग्जामिनेशन के अधिकार से वंचित करता है।जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राकेश मोहन पांडे की खंडपीठ ने कहा कि घायल का एग्जामिनेशन यह साबित करने के लिए आवश्यक है कि क्या आरोपी ने उस पर हमला किया था और क्या उसकी चोट इतनी गंभीर थी कि उसकी मौत हो सकती है।कोर्ट ने कहा,"उक्त घायल की अभियोजन...
मप्र हाईकोर्ट ने 'भावनाओं को ठेस पहुंचाने' के लिए फार्मा फर्म के प्रमुख के खिलाफ मामला खारिज किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फार्मा फर्म के प्रमुख के खिलाफ कंडोम एड प्रकाशित करने के लिए शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही खारिज कर दी। इस एड की पृष्ठभूमि में युगल गरबा खेल रहे है। इस एड पर कथित रूप से धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने के आरोप लगाए गए।जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह की पीठ ने एड की सामग्री पर गौर करने के बाद पाया कि आरोपी का इरादा सिर्फ अपनी कंपनी के प्रोडक्ट को बढ़ावा देना है और किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।नतीजतन, यह माना जा सकता है कि भारतीय दंड...
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने जयपुर स्थित विश्वविद्यालय की प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना के तहत प्रतिपूर्ति की मांग वाली याचिका खारिज की
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने प्रधान मंत्री विशेष छात्रवृत्ति के तहत जम्मू और कश्मीर के छात्रों को एडमिशन देने के बाद ट्यूशन फीस, छात्रावास शुल्क और किताबों के संबंध में किए गए खर्चों की प्रतिपूर्ति की मांग वाली जयपुर स्थित एक विश्वविद्यालय की याचिका खारिज कर दी है।जस्टिस एमए चौधरी ने कहा कि केवल इसलिए कि छात्र जम्मू-कश्मीर से हैं, हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर करने के लिए कोई कारण नहीं देंगे।पीठ ने आगे कहा कि अदालत संविधान के भाग III द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों में से किसी के...
निर्वाचित प्रतिनिधियों को शिकायत बताए बिना जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गांव में पक्की सड़क बनाने की मांग वाली याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें गांव में पक्की सड़क के निर्माण के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि यह दिखाने के लिए रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है कि याचिकाकर्ता ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी शिकायतों का प्रपत्र भेजा।खंडपीठ ने कहा,"मात्र सड़क निर्माण के लिए प्रतिवादी अधिकारियों को प्रतिनिधित्व दाखिल करने से याचिकाकर्ता को कोई मदद नहीं मिलती। याचिकाकर्ता ने खुद को सामाजिक...
मद्रास हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य को टास्क फोर्स गठित करने को कहा
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को छात्रवृत्ति राशि का देरी से वितरण संवैधानिक उद्देश्य को विफल करता है जिसके लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना तैयार की गई है।जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस सत्य नारायण प्रसाद की पीठ हर शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में तमिलनाडु के सभी कॉलेजों के एससी / एसटी / एससीए छात्रों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के वितरण के लिए निर्देश देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।कोर्ट ने कहा,"हमारा विचार है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा...
मद्रास हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य को टास्क फोर्स गठित करने के लिए कहा
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में तैयार की गई पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम पर कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को स्कॉलरशिप राशि का देर से वितरण संवैधानिक उद्देश्य को विफल करता है।जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस सत्य नारायण प्रसाद की खंडपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हर शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में तमिलनाडु के सभी कॉलेजों के एससी/एसटी/एससीए छात्रों को पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के वितरण के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।अदालत ने कहा,"हमारा विचार है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बनाई...
जब तक डॉक्टर चिकित्सा पेशे के लिए स्वीकार्य प्रैक्टिस का पालन करता है, तब तक वह लापरवाही के लिए उत्तरदायी नहीं हो सकता: एनसीडीआरसी
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के पीठासीन सदस्य डॉ. एस.एम. कांतिकर और सदस्य बिनॉय कुमार की पीठ ने चिकित्सकीय लापरवाही और सेवा में कमी की शिकायत का निस्तारण करते हुए कहा कि एक चिकित्सक को केवल इसलिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि दुस्साहस या या निर्णय की त्रुटि के कारण उपचार के एक उचित पाठ्यक्रम को चुनने में गलती हो गई।1998 में रोगी सीढ़ी से गिर गया और उसके अग्रभाग में मामूली चोटें आईं और उसे स्कीन डिफेक्ट को दूर करने के लिए सूक्ष्मवाहिकीय मरम्मत और प्लास्टिक सर्जरी कराने के लिए...
पीएमएलए- कोर्ट समन के जवाब में पेश होने वाले व्यक्ति की जमानत में तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता जब तक कि निगरानी की परिस्थितियों को रिकॉर्ड पर नहीं लाया जाता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि अभियुक्तों के संबंध में विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा जारी जमानत का आदेश, जो समन के अनुसार उसके सामने पेश हुआ था, तब तक हस्तक्षेप के लिए खुला नहीं है जब तक कि निगरानी की परिस्थितियों को रिकॉर्ड पर नहीं लाया जाता है।जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कहा कि पीएमएलए के तहत जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तारी के बाद किसी व्यक्ति को जमानत पर रिहा करने और अदालत से समन के जवाब में पेश होने के संबंध में अंतर है।अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 10 अभियुक्तों के जमानत को बरकरार...
दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीएमडब्ल्यू इंडिया को सेवा में कमी के लिए भारी मुआवजा देने का निर्देश दिया
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की पीठ, जिसमें सुश्री पिंकी और सुश्री बिमला कुमारी शामिल थीं, उन्होंने बीएमडब्ल्यू इंडिया प्रा लिमिटेड (विपक्षी पार्टी नंबर 2) को कार की पूरी खरीद राशि 26,26,462/- का शिकायतकर्ता को भुगतान करने का आदेश दिया। साथ में सेवा में कमी के मुआवजे के रूप में भुगतान की तिथि से निर्णय की तिथि तक 6% ब्याज के भुगतान का आदेश दिया।23.01.2023 तक ऐसा करने में विफल रहने पर, 9% की ब्याज दर की गणना उस तारीख से की जाएगी, जिस दिन कार खरीदी गई थी।आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया...
निदेशकों ने लापरवाह नहीं की; धारा 179 आईटी अधिनियम का गलत प्रयोग किया गया: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि निर्धारिती कंपनी के निदेशकों को केवल इसलिए लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि वे मूल्यांकन अधिकारी के समक्ष उठाई गई मांग का 20% जमा करने में विफल रहे, ताकि सीआईटी(ए) के समक्ष अपील की लंबितता के दरमियान मांग पर रोक लगाने की मांग की जा सके।इस प्रकार, न्यायालय ने कहा कि आयकर अधिकारियों द्वारा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 179 के तहत क्षेत्राधिकार, निर्धारिती कंपनी के निदेशकों को कंपनी के बकाया कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराते हुए, लागू नहीं किया...
जेईई मेन्स के लिए 75% अंकों की पात्रता मानदंड को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका, परीक्षा को अप्रैल 2023 तक टालने की मांग
बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर आगामी जेईई मेन्स परीक्षा टालने की मांग की गई है। याचिका में बारहवीं कक्षा में 75 प्रतिशत अंकों की पात्रता मानदंड को भी चुनौती दी गई है।अनुभा श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है,"प्रतिवादी संख्या 1 (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) इस तथ्य की सराहना करने में विफल रही कि आगामी परीक्षाओं में शामिल होने वाले कई छात्र महामारी के दौर के बैच के छात्र हैं। उन छात्रों का मूल्यांकन विभिन्न पैमानों/मानदंडों पर किया गया था, जो आवश्यक रूप से उम्मीदवारों की वास्तविक...
पासपोर्ट मैनुअल परिस्थितियों के जवाब के लिए एक मार्गदर्शक, लेकिन ये कानून के विपरीत नहीं हो सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि सुचारू कामकाज के लिए जारी किया गया पासपोर्ट नियमावली आने वाली परिस्थितियों का जवाब देने के लिए केवल दिशानिर्देश या समाधान है, लेकिन यह नियमों सहित क़ानून के खिलाफ नहीं चल सकता है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश की पीठ ने कहा, "नियम (पासपोर्ट) अधिनियम की धारा 24 के संदर्भ में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए हैं। इसलिए, वे क़ानून का हिस्सा हैं और वैधानिक हैं। पासपोर्ट मैनुअल जारी करने के लिए दिशानिर्देश हैं। पासपोर्ट उन परिस्थितियों का उत्तर देने का एक समाधान है जो...
आईटी एक्ट | धारा 226 के तहत नोटिस को चुनौती, धारा 200ए के तहत मांग को चुनौती के बिना सुनवाई योग्य नहीं: जम्मू एंड कश्मीर एंड लदाख हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक फैसले में कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 200ए के तहत निर्धारण प्राधिकारी द्वारा की गई मांग की सूचना को चुनौती दिए बिना, धारा 226 (3) के तहत निर्धारण प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए नोटिसों को चुनौती सुनवाई योग्य नहीं है।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस मोक्ष खजूरिया काजमी ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता, जो कि एक साझेदारी फर्म है, प्रतिवादी आईटी विभाग द्वारा प्रतिवादी संख्या 4 से 9 को जारी किए गए नोटिस...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने विदेशों में भारतीय गाय के मांस की मांग के बारे में पशु चिकित्सा अधिकारी के बयान पर कहा, 'अदालत को यह आपत्तिजनक नहीं लगता'
उड़ीसा हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें यह माना गया कि तत्कालीन मुख्य जिला पशु चिकित्सा अधिकारी, कोरापुट ने भारतीय गायों और सांडों के मांस की बाहरी मांग के बारे में बोलकर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 505 (2) के तहत कोई अपराध नहीं किया।दिसंबर 2013 में सत्र न्यायालय ने एसडीजेएम, कोरापुट का आदेश रद्द कर दिया और मामले को नए फैसले के लिए निचली अदालत को वापस भेज दिया। शांतनु कुमार टाकरी ने हाईकोर्ट के समक्ष सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती दी, जिस पर जानवरों के प्रति क्रूरता...
'हर 6 महीने में हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के समक्ष बच्चों के यौन शोषण के मामलों की स्टेटस रिपोर्ट फ़ाइल करें': गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य, बाल अधिकार निकाय से कहा
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण से संबंधित मामलों में उचित जांच के लिए कई निर्देश जारी किए हैं।चीफ जस्टिस रश्मिन मनहरभाई छाया और जस्टिस सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने न्यूज आर्टिकल के आधार पर 2019 में पंजीकृत जनहित याचिका (पीआईएल) में आदेश पारित किया, जिसमें एक बालिका गृह की नाबालिग बालिकाओं के यौन और शारीरिक शोषण की सूचना दी गई थी।पूरा मामला20.12.2018 को, एक अंग्रेजी दैनिक 'द असम ट्रिब्यून' ने रिपोर्ट किया था कि शिवसागर स्थित स्वप्नालय चिल्ड्रन होम की तीन लड़कियों का उक्त बाल गृह के...
धारा 482 सीआरपीसी को एक शिकायत में आरोपों की शुद्धता की जांच करने के लिए लागू नहीं किया जा सकता: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने दोहराया की सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अदालत की शक्तियों का प्रयोग सावधानी के साथ किया जाना चाहिए।कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उक्त प्रावधान के तहत न्यायालय असाधारण दुर्लभ मामलों को छोड़कर शिकायत में आरोपों की शुद्धता की जांच नहीं कर सकता है, जहां यह स्पष्ट है कि आरोप तुच्छ हैं या किसी अपराध का खुलासा नहीं करते हैं।जस्टिस एमए चौधरी ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता एक आपराधिक शिकायत में...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ और एमडी चंदा कोचर और उनके पति दीपक ने वेणुगोपाल धूत के वीडियोकॉन ग्रुप को दिए गए लोन के संबंध में कथित अनियमितताओं के मामले में सीबीआई द्वारा अवैध गिरफ्तारी का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की।कोचर ने गिरफ्तारी के खिलाफ दायर इस याचिका में अंतरिम राहत की मांग करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की।जस्टिस माधव जे जामदार और जस्टिस एस जी चपलगांवकर की अवकाश पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है और याचिकाकर्ता 2 जनवरी को...
निर्धारित कानूनी स्थिति है कि मेडिकल लापरवाही केवल फील्ड एक्सपर्ट द्वारा देखी जा सकती है: जम्मू एंड कश्मीर एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने सोमवार को सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पेशेवर डॉक्टर की लापरवाही को कैसे मापा जाए, यह केवल एक्सपर्ट ही डॉक्टर की ओर से लापरवाही को प्रमाणित कर सकते हैं।जस्टिस वसीम सादिक नरगल ने यह टिप्पणी उस याचिका को खारिज करते हुए की जिसमें प्रतिवादियों को उसके पति की मृत्यु के लिए 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिसकी मृत्यु डॉक्टरों की लापरवाही के कारण हुई थी। इसलिए आपराधिक लापरवाही के लिए मामला दर्ज किया गया था।उपलब्ध रिकॉर्ड का सहारा...



















