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धारा 138 एनआई एक्ट | प्रारंभिक चरण में शिकायतकर्ता की सहमति के बिना अपराध को कंपाउंड किया जा सकता है, बशर्ते उसे उचित मुआवजा दिया गया होः बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने हाल ही में कहा कि अदालत चेक बाउंस मामलों में शिकायतकर्ता की सहमति के बिना अपराध को कंपाउंड कर सकती है, बशर्ते कि आरोपी ने मामले के शुरुआती चरणों में समझौते के लिए आवेदन किया हो और शिकायतकर्ता को पर्याप्त मुआवजा दिया गया हो। जस्टिस अनिल पानसरे ने बारह में से छह आरोपियों के खिलाफ चेक बाउंस मामले को रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि शर्त यह है कि आरोपी ब्याज के साथ चेक राशि और शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में मुकदमे की लागत जमा करे। अदालत ने नागपुर स्थित अतिरिक्त मुख्य...
बीओसीए एक्ट| धारा 15 ट्रिब्यूनल के आदेशों को अंतिम रूप देती है, असाधारण क्षेत्राधिकार का उपयोग उसके साथ प्रत्यक्ष टकरावः जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें असाधाबोका अधिनियम | धारा 15 न्यायाधिकरण के आदेशों को अंतिम रूप देती है, असाधारण क्षेत्राधिकार का आह्वान सीधे उसी के साथ टकराव करती है: जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालयहाईकोर्ट ने कहा कि बिल्डिंग ऑपरेशंस कंट्रोलिंग अथॉरिटी (बीओसीए) एक्ट, 1988 की धारा 15 के तहत आदेशों की अंतिम स्थिति का कोर्ट की ओर से असाधारण क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल के साथ टकराव होगा।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने कहा कि चूंकि अधिनियम, 1988 की...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अदालत परिसर के पास जलभराव के मामले में अधिकारियों की विफलता पर स्वत: संज्ञान लिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में यह देखते हुए कि अदालत परिसर के पास जलभराव के कारण वकील अदालत में पेश नहीं हो पाए और मामलों के शीघ्र निस्तारण में बाधा पैदा हुई, संबंधित अधिकारियों की प्रथम दृष्टया लापरवाही पर स्वत: संज्ञान लिया।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने कहा, “प्रशासन ने अब तक कोई निवारक कदम नहीं उठाया है...इसलिए, जाहिर तौर पर प्रथम दृष्टया नगर निगम, चंडीगढ़/ या संबंधित प्रशासन की ओर से लापरवाही हुई है।''पीठ ने यह निर्णय तब लिया गया जब हाईकोर्ट बार...
सर्वेक्षण का परिणाम स्वामित्व विलेख के तहत संपत्ति पर अर्जित अधिकार को प्रभावित नहीं करते, यह केवल सीमा निर्धारण का निर्णायक सबूत: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक नियमित दूसरी अपील को खारिज कर दिया, जिसमें पाया गया कि केरल सर्वेक्षण और सीमा अधिनियम, केरल सर्वेक्षण और सीमा नियमों के तहत सर्वेक्षण अधिकारियों के फैसले उस संपत्ति के अधिकार और स्वामित्व को प्रभावित नहीं करेंगे, जिसे पार्टी ने एक वैध टाइटल डीड के जरिए हासिल किया है। जस्टिस के बाबू ने कहा कि संपत्ति पर स्वामित्व का दावा मुख्य रूप से वैध टाइटल डीडी के आधार पर किया जा सकता है, न कि सर्वेक्षण अधिकारियों की ओर से किए गए सर्वेक्षण सीमांकन के संदर्भ में। अदालत ने कहा...
मजिस्ट्रेट मैकेनिकली तरीके से जांच का निर्देश नहीं दे सकते, विवेक का इस्तेमाल जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 156(3) के तहत जांच का निर्देश किसी मजिस्ट्रेट द्वारा यांत्रिक रूप से जारी नहीं किया जा सकता। इसे केवल विवेक का इस्तेमाल करने के बाद ही दिया जाना चाहिए।जस्टिस रजनीश भटनागर ने कहा कि मजिस्ट्रेट पुलिस को जांच का निर्देश देने के लिए बाध्य नहीं है, भले ही शिकायत में लगाए गए सभी आरोप संज्ञेय अपराध की सामग्री का खुलासा करते हों।इस बात पर जोर देते हुए कि प्रत्येक मामले को तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर देखा जाना चाहिए, अदालत ने...
हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में पशु बलि की वैधता पर बड़े प्रश्न पर निर्णय लेने के लिए 'बोल्ला काली पूजा' पर बकरी की बलि रोकने के लिए अंतरिम आदेश देने से इनकार किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'बोल्ला काली पूजा 2023' के अवसर पर उत्तरी दिनाजपुर के 'बोल्ला काली माता मंदिर' में बकरियों की बलि पर रोक लगाने के लिए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ के समक्ष जनहित याचिका का उल्लेख किया गया, जिसमें पश्चिम बंगाल में भगवान के नाम पर पशु बलि की प्रथा को चुनौती दी गई थी और विशेष रूप से बोल्ला में काली मंदिर में 10,000 बकरियों के प्रस्तावित बलि के खिलाफ अंतरिम आदेश देने की मांग की गई।वर्तमान अवसर पर यह...
वादियों को एक फोरम चुनना चाहिए, उन्हें इलाहाबाद और लखनऊ बेंच के बीच कंगारू की तरह कूदने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में माना कि यद्यपि याचिकाकर्ता को रिट याचिका दायर करने के लिए फोरम चुनने का अधिकार है, लेकिन उसे ठोस कारणों के बिना दो न्यायालयों के बीच जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।न्यायालय ने आगे कहा कि संयुक्त प्रांत हाईकोर्ट (एकीकरण) आदेश, 1948 के क्लॉज-14 के तहत लखनऊ में याचिकाओं को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा लखनऊ में रहते हुए इलाहाबाद में ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि, इसका विपरीत नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद में दायर याचिका को लखनऊ...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस पूजा बेदी और उनकी चाची के पक्ष में 20 साल पुराना वसीयतनामा मुकदमा खारिज किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस पूजा बेदी के चाचा बिपिन गुप्ता की संपत्ति के संबंध में 20 साल पुराने वसीयतनामा के मुकदमे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह फैसला तब दिया जब बेदी और उनकी चाची ने साबित कर दिया कि विवादित 'वसीयत' 'दिखावा और फर्जी' है, क्योंकि इसमें सब कुछ एक ट्रस्ट के नाम कर दिया गया है।"जस्टिस मिलिंद ने गुप्ता की कथित वसीयत दिनांक 4 सितंबर, 2003 को निष्पादित करने की मांग करने वाली वसंत सरदाल द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। सरदाल वसीयत के दो निष्पादकों में से एक हैं और उस संगठन के सह-न्यासी...
[Service Jurisprudence] जब सजा या दंड के संबंध में दो दृष्टिकोण संभव हों तो कर्मचारी के पक्ष में दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सेवा न्यायशास्त्र में जब दंड और सजा से संबंधित नियमों की दो व्याख्याएं दी जा सकती हैं तो कर्मचारी के अनुकूल व्याख्या को प्रभावी बनाया जाना चाहिए।जस्टिस आरएन मंजुला ने याचिकाकर्ता के सेवानिवृत्ति लाभों में वृद्धि का निर्देश देकर याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि चूंकि सेवा न्यायशास्त्र दंड लगाने के कारण दंडात्मक न्यायशास्त्र के समान है, इसलिए ऐसा दृष्टिकोण अभियुक्त को संदेह का लाभ देते समय दंडात्मक न्यायशास्त्र में लिए गए दृष्टिकोण के समान है। सेवा न्यायशास्त्र...
दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़कियों के अपहरण के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई, कहा- शादी की आड़ में यौन उत्पीड़न किया गया, उसे पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर किया गया
दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़कियों के अपहरण की बढ़ती घटनाओं को चिह्नित किया, जिनके साथ शादी की आड़ में यौन उत्पीड़न किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप उन्हें पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है और करियर बनाने के अवसर से वंचित किया जाता है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि जब ऐसी घटनाओं के कारण लड़की को अपनी शिक्षा छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है तो यह न केवल व्यक्ति के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए गहरा झटका होता है।अदालत ने कहा,“महिलाओं के सशक्तिकरण से संबंधित चर्चाओं में शिक्षा को मौलिक...
केरल हाईकोर्ट ने महिला डॉक्टर और अन्य हेल्थकेयर स्टाफ पर हमला करने के आरोपी व्यक्ति को अंतरिम सुरक्षा दी
केरल हाईकोर्ट ने अस्पताल में उसकी जांच और इलाज करने वाली महिला डॉक्टर और स्टाफ नर्सों पर हमला करने के आरोपी 37 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी।जस्टिस गोपीनाथ पी ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता-अभियुक्त को 10 दिनों की अवधि तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।याचिकाकर्ता पर सेंट जेम्स अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ नर्सों को अनुचित तरीके से छूने और हमला करने की सूचना है। उस पर केरल हेल्थकेयर सर्विस पर्सन्स एंड हेल्थकेयर सर्वि इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और संपत्ति को नुकसान की रोकथाम) अधिनियम, 2012 की धारा...
धार्मिक तरीकों से इलाज के बहाने 15 वर्षीय लड़की से बलात्कार करने के आरोपी 'ओझा' को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते धार्मिक तरीकों से इलाज कराने के बहाने 15 वर्षीय लड़की से कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में ओझा को जमानत देने से इनकार किया।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने कहा कि आरोपी जमानत पर रिहा होने का हकदार नहीं है, क्योंकि उस पर 15 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया गया, जब वह उसके साथ कमरे में अकेली थी।आरोपी के खिलाफ आरोप इस आशय के हैं कि पीड़िता के खराब स्वास्थ्य के कारण उसके पिता (सूचक) ने आवेदक (हनुमान राम), जो 'ओझा' है, को उसका इलाज करने के लिए आमंत्रित...
उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 | उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने की याचिका को खारिज करने के सिविल जज के आदेश के खिलाफ अपील जिला न्यायाधीश के पास होगी न कि हाईकोर्ट के समक्ष : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने की याचिका को खारिज करने वाले सिविल जज के आदेश के खिलाफ अपील भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 388 (2) के तहत जिला न्यायाधीश के समक्ष की जाएगी, न कि अधिनियम की धारा 384 के तहत हाईकोर्ट के समक्ष।न्यायालय ने माना कि विधायी मंशा जिला न्यायाधीश के समक्ष एक अपीलीय तंत्र प्रदान करना है, न कि 'हाईकोर्ट के लिए।'जस्टिस डॉ योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कहा:“धारा 388 इस प्रकार शक्ति के निवेश के माध्यम से जिला न्यायाधीश के...
कार्यवाही करने वाले लगभग 85% को नागरिक घोषित किया गया : गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बिना कारण बताए आदेश जारी करने पर विदेशी ट्रिब्यूनलों की निंदा की, राज्य को जांच के आदेश
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को उन मामलों में विभागीय समीक्षा करने और उचित उपाय करने का निर्देश दिया है, जहां विदेशी ट्रिब्यूनल ने रिकॉर्ड पर सामग्री के किसी भी विश्लेषण या ऐसी घोषणा के लिए किसी उचित दलील के बिना कार्यवाही करने वालों/आवेदकों को भारत के नागरिक या विदेशी घोषित कर दिया था।विदेशी ट्रिब्यूनलों द्वारा आदेशों में केवल विश्लेषण के बिना सामग्री दर्ज करना या उनकी घोषणाओं के लिए कोई कारण बताने में असफल होने की प्रवृत्ति को देखने पर डिवीजन बेंच ने कहा:अपनाई गई ऐसी प्रक्रिया की निंदा की...
धारा 307 आईपीसी | 'साधारण चोटें, बार-बार या गंभीर आघात नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के प्रयास के लिए दोषसिद्धि को पलट दिया
सुप्रीम कोर्ट ने 28 नवंबर को हत्या के प्रयास के तहत दोषसिद्धि को रद्द करते हुए दो कारकों को महत्व दिया। सबसे पहले, न्यायालय ने कहा कि कोई बार-बार या गंभीर आघात नहीं हुआ। दूसरे, पीड़ितों की चोटें सामान्य प्रकृति की थीं।कोर्ट ने कहा, “बेशक, बार-बार या गंभीर चोट पहुंचाने का कोई आरोप नहीं है। यहां तक कि पीडब्लू1 और पीडब्लू2 की चोटें भी सामान्य प्रकृति की पाई गई हैं, जो अपीलकर्ताओं के पक्ष में एक अतिरिक्त बिंदु है... ऐसे में, आईपीसी की धारा 307 के तहत दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं है।"ऐसा करते समय, न्यायालय...
जीएसटी | अविवादित तथ्यों के मामलों को वैकल्पिक समाधान के फोरम में स्थानांतरित करने का कोई वास्तविक लाभ नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि कर मामले, जहां तथ्य निर्विवाद हैं और इसमें अधिकार क्षेत्र के मुद्दे और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन शामिल है, उन्हें प्राधिकरणों को नहीं सौंपा जा सकता है। जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस शिव शंकर प्रसाद की पीठ ने माना कि जिन मामलों में न्यूनतम वैधानिक अनुपालन किया गया है, उन्हें आम तौर पर वैकल्पिक उपचार के मंचों पर भेज दिया जाता है।मामले में जीएसटी प्राधिकरण ने कारण बताओ नोटिस की तारीख से पूर्वव्यापी प्रभाव से याचिकाकर्ता का पंजीकरण रद्द कर दिया था।...
मुकदमों के बैकलॉग| इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों से एक ही बिंदु पर कई केस लॉ का हवाला देते हुए स्थगन की मांग से बचने का आग्रह किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि हाईकोर्ट के जज न्याय वितरण में तेजी लाकर लंबित मामलों के मुद्दे को हल करने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि, बैकलॉग को कम करने के लिए अधिवक्ताओं के सहयोग की भी आवश्यक है।कोर्ट ने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे स्थगन अनुरोधों को कम करके और उनकी अनुपस्थिति में कार्यवाही पर आपत्ति जताने से परहेज करके, खासकर जब कोई अन्य वकील नोट लेने के लिए उपलब्ध हो, न्यायालय के समय के अनुत्पादक उपयोग को कम करके त्वरित न्याय प्रदान करने में योगदान...
जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 | सामाजिक जाति प्रमाणपत्र केवल उप या संभागीय आयुक्त ही रद्द कर सकते हैं: हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में याचिकाकर्ता के अन्य सामाजिक जाति (ओएससी) प्रमाणपत्र को रद्द करने के आदेश को रद्द कर दिया है और कहा कि अतिरिक्त उपायुक्त के पास ऐसे प्रमाणपत्रों को रद्द करने का अधिकार नहीं है।जस्टिस वसीम सादिक नरगल की पीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति आरक्षण अधिनियम की धारा 16 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा ओएससी प्रमाणपत्र जारी करने से व्यथित है, तो केवल उपायुक्त या मंडल आयुक्त ही अपील पर विचार कर सकते हैं और उसे रद्द कर सकते हैं अगर उसे नियमों का...
प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास अधिनियम | अदालत के बाहर समझौता वादकारियों का मौलिक अधिकार नहीं, केवल कानून के अनुसार ही यह प्राप्त किया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास अधिनियम, 2020 के तहत अस्वीकृति आदेश से निपटते समय माना कि एक वादी के पास अदालत के बाहर विवाद के निपटान का दावा करने का मौलिक या अंतर्निहित अधिकार नहीं है। क़ानून द्वारा बनाए गए अधिकार का उपयोग उसके अनुसार किया जाना चाहिए। जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जिस्टस शिव शंकर प्रसाद की पीठ ने कहा,“सबसे पहले, अदालतों/न्यायिक प्रक्रिया के बाहर विवादों का निपटारा किसी भी वादी का मौलिक या अंतर्निहित अधिकार नहीं है। वह अधिकार क़ानून यानी अधिनियम द्वारा बनाया...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'पुष्पा इम्पॉसिबल' शो में धोबी समुदाय पर अपमानजनक टिप्पणी को लेकर सोनी सब टीवी के मालिक के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुष्पा इम्पॉसिबल शो के एपिसोड में धोबी समुदाय पर "जातिवादी और अपमानजनक" टिप्पणी के कथित उपयोग के लिए एफआईआर में सोनी सब टीवी चैनल का स्वामित्व और प्रबंधन करने वाले प्रोडक्शन हाउस कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी।जस्टिस रजनीश भटनागर ने प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ कार्यवाही पर 15 जनवरी तक रोक लगा दी, जब सह-अभियुक्तों द्वारा दायर दो अन्य संबंधित मामले सुनवाई के लिए आ रहे हैं।शो में "दो कोड़ी का धोबी" टिप्पणी के खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद मार्च में अदालत के...









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