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मद्रास हाईकोर्ट ने अन्नाद्रमुक महासचिव पद से हटाने के खिलाफ वीके शशिकला की याचिका खारिज की
मद्रास हाईकोर्ट ने अन्नाद्रमुक महासचिव पद से हटाने के खिलाफ वीके शशिकला की याचिका खारिज की

मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को अन्नाद्रमुक महासचिव के पद से हटाए जाने को बरकरार रखने वाले आदेश के खिलाफ वीके शशिकला की अपील को खारिज कर दिया। जस्टिस आर सुब्रमण्यम और जस्टिस एन सेंथिलकुमार ने पार्टी के अंतरिम महासचिव के रूप में मान्यता देने की शशिकला की अपील को खारिज कर दिया।पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी की तत्कालीन महासचिव जे जयललिता की मृत्यु के बाद दिसंबर 2016 में शशिकला को पार्टी का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया था। हालांकि, फरवरी 2017 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनकी सजा और कारावास के...

जब तक विश्वसनीय साक्ष्य न दिखाए जाएं, केवल बाहरी इमारत पर नोटिस चिपका देना तामील का पर्याप्त अनुपालन नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जब तक विश्वसनीय साक्ष्य न दिखाए जाएं, केवल बाहरी इमारत पर नोटिस चिपका देना तामील का पर्याप्त अनुपालन नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि किसी भवन संरचना के बाहरी हिस्से पर केवल एक नोटिस चिपका देना, जम्मू-कश्मीर नियंत्रण भवन संचालन अधिनियम, 1988 की धारा 7(2) के तहत वास्तविक तामील का पर्याप्त अनुपालन नहीं होगा।धारा 7(2) अनधिकृत इमारतों के बाहरी दरवाजों पर चिपकाकर उल्लंघनकर्ताओं को नोटिस देने की प्रक्रिया का विवरण देती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे नोटिसों के संचार को कानून में तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक कि इस बात का विश्वसनीय सबूत न हो कि नोटिस साइट पर चिपकाया गया था।याचिका...

घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 31 के तहत भरण-पोषण आदेश का पालन न करने पर व्यक्ति को समन नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 31 के तहत भरण-पोषण आदेश का पालन न करने पर व्यक्ति को समन नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि कि भरण-पोषण के भुगतान के आदेश का पालन न करने पर किसी व्यक्ति को घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 की धारा 31 के तहत तलब नहीं किया जा सकता है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि अधिनियम का ध्यान भरण-पोषण या अंतरिम भरण-पोषण आदेशों के माध्यम से घरेलू हिंसा के पीड़ितों को तत्काल और प्रभावी राहत प्रदान करने पर है और भरण-पोषण का भुगतान न करने पर हमलावर के खिलाफ तुरंत आपराधिक कार्यवाही शुरू करने और ऐसे व्यक्ति को जेल भेजने का विचार नहीं...

ऋण मुक्त कंपनी होने के नाते निर्धारिती को बकाया प्राप्तियों पर काल्पनिक ब्याज लगाने की कोई आवश्यकता नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
ऋण मुक्त कंपनी होने के नाते निर्धारिती को बकाया प्राप्तियों पर काल्पनिक ब्याज लगाने की कोई आवश्यकता नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली ‌हाईकोर्ट ने माना कि निर्धारिती एक ऋण-मुक्त कंपनी थी और बकाया प्राप्तियों पर काल्पनिक ब्याज लगाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा है कि समय-समय पर आंकड़ों का विश्लेषण करके एक पैटर्न को समझने के लिए स्थानांतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी द्वारा उचित जांच की जानी चाहिए जो किसी संबद्ध उद्यम को की गई आपूर्ति के लि, प्राप्य की तुलना में संकेत दे, यह व्यवस्था एक अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को दर्शाती है] जिसका उद्देश्य संबंधित उद्यम को किसी तरह से लाभ...

ए एंड सी एक्ट की धारा 27 के तहत शक्तियों का प्रयोग करने वाला न्यायालय साक्ष्य की स्वीकार्यता या प्रासंगिकता की जांच नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
ए एंड सी एक्ट की धारा 27 के तहत शक्तियों का प्रयोग करने वाला न्यायालय साक्ष्य की स्वीकार्यता या प्रासंगिकता की जांच नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि ए एंड सी अधिनियम की धारा 27 के तहत शक्तियों का प्रयोग करने वाला न्यायालय उन साक्ष्यों की प्रासंगिकता या स्वीकार्यता पर कोई राय नहीं बना सकता है, जिसके लिए न्यायालय की सहायता मांगी गई है।जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने कहा कि ए एंड सी एक्ट की धारा 27 के तहत न्यायालय की भूमिका न्यायिक नहीं है, इसलिए न्यायालय साक्ष्य की प्रासंगिकता या स्वीकार्यता के पहलुओं की जांच नहीं करेगा, बल्कि यह न्यायाधिकरण का कर्तव्य है कि किसी पक्ष को सहायता के लिए अदालत जाने की अनुमति देने से पहले...

मूल्यांकन की शुद्धता और कोर्ट फीस पर विवाद को गुण-दोष के आधार पर ट्रायल शुरू होने से पहले सुना जाएगा : केरल हाईकोर्ट
मूल्यांकन की शुद्धता और कोर्ट फीस पर विवाद को गुण-दोष के आधार पर ट्रायल शुरू होने से पहले सुना जाएगा : केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यवस्था दी है कि जब मूल्यांकन की शुद्धता और भुगतान की जाने वाली कोर्ट फीस पर कोई विवाद उठता है, तो इसे तथ्य और कानून के प्रश्न के मिश्रित होने के कारण, गुण-दोष के आधार पर ट्रायल शुरू होने से पहले, उस पर साक्ष्य की अनुमति देने के बाद निर्धारित किया जाना चाहिए।वर्तमान मामले में, मूल्यांकन और भुगतान की गई कोर्ट फीस की शुद्धता के संबंध में एक चुनौती दाखिल की गई थी। उप-न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि इस मुद्दे में कानून और तथ्य का मिश्रित प्रश्न शामिल है, इसलिए इसे...

धारा 167 सीआरपीसी - डिफ़ॉल्ट जमानत में मनमानी या कड़ी शर्तें अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : केरल हाईकोर्ट
धारा 167 सीआरपीसी - डिफ़ॉल्ट जमानत में मनमानी या कड़ी शर्तें अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने माना है कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167 के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत पर रिहा होने पर किसी आरोपी पर लगाई गई मनमानी या कड़ी शर्तें भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।दरअसल 60 दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद भी जांच पूरी नहीं होने पर सत्र न्यायालय ने आरोपी की जमानत अर्जी मंज़ूर कर ली। सत्र न्यायालय ने सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत जमानत आवेदन की अनुमति देते हुए कड़ी शर्तें लगाईं, जिन्हें हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।जस्टिस पीवी...

नीट पीजी | विशेष स्ट्रे वैकेंसी राउंड अपग्रेडेशन के लिए नहीं, यह केवल उन अभ्यर्थियों के लिए, जिन्हें कोई सीट आवंटित नहीं की गई: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
नीट पीजी | विशेष 'स्ट्रे वैकेंसी' राउंड अपग्रेडेशन के लिए नहीं, यह केवल उन अभ्यर्थियों के लिए, जिन्हें कोई सीट आवंटित नहीं की गई: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्‍मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एनईईटी पीजी काउंसलिंग में स्ट्रे राउंड ‍‍‍के मैंडेट को स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि स्पेशल स्ट्रे वेकेंसी राउंड अपग्रेडेशन राउंड के रूप में कार्य नहीं करता है, जिन व्यक्तियों ने पहले ही राउंड में सीटें सुरक्षित कर ली हैं, वे अपग्रेडेशन के किसी भी मौके के लिए अयोग्य हैं।पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए, जस्टिस संजय धर की पीठ ने कहा कि काउंसलिंग का स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड तभी लागू होता है जब सभी पूर्ववर्ती काउंसलिंग राउंड की समाप्ति के बाद...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने साइबर सुरक्षा के कारण लाइव स्ट्रीमिंग और वीसी सुनवाई निलंबित की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने साइबर सुरक्षा के कारण लाइव स्ट्रीमिंग और वीसी सुनवाई निलंबित की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने साइबर सुरक्षा मुद्दों के कारण सभी अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंस सुविधा बंद कर दी। साइबर सुरक्षा कारणों को देखते हुए बेंगलुरु, धारवाड़ और कालाबुरागी में कर्नाटक हाईकोर्ट के सभी न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंस सुविधाएं फिलहाल निलंबित कर दी गई।चीफ जस्टिस प्रसन्ना बी वराले ने मौखिक रूप से कहा,“दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है। हम लाइव स्ट्रीमिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर रोक लगा रहे हैं। हम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा, लाइव स्ट्रीमिंग सुविधा की अनुमति नहीं दे रहे हैं।...

कथित तौर पर अश्लील गाना गाने के लिए यो यो हनी सिंह के खिलाफ 2013 की एफआईआर में रद्दीकरण रिपोर्ट मंजूरी के लिए लंबित: हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने कहा
कथित तौर पर अश्लील गाना गाने के लिए यो यो हनी सिंह के खिलाफ 2013 की एफआईआर में रद्दीकरण रिपोर्ट मंजूरी के लिए लंबित: हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने कहा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने प्रस्तुत किया कि कथित तौर पर अश्लील गाने के लिए गायक हनी सिंह के खिलाफ 2013 में दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका में रद्दीकरण रिपोर्ट (Cancellation Report) तैयार की गई है और उच्च अधिकारियों की मंजूरी के लिए लंबित है।जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने इस सबमिशन पर ध्यान देते हुए कहा,"वर्तमान याचिका निरर्थक हो गई है। हालांकि, बाद के चरण में यदि याचिकाकर्ता को दोषी ठहराते हुए सीआरपीसी की धारा 173 (2) के तहत रिपोर्ट दायर की जानी है तो उसे कानून के अनुसार...

संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता पर निर्णय लेने की स्पीकर की शक्ति को हटा दें, इसके बजाय हाईकोर्ट को निर्णय लेने दें: अरविंद दातार
संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता पर निर्णय लेने की स्पीकर की शक्ति को हटा दें, इसके बजाय हाईकोर्ट को निर्णय लेने दें: अरविंद दातार

सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने सोमवार को केटी देसाई मेमोरियल लेक्चर में दलील देते हुए कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अपने मूल राजनीतिक दल से अलग होने वाले निर्वाचित सदस्यों की अयोग्यता पर निर्णय लेने की स्पीकर की शक्ति को हटा दिया जाना चाहिए। इसके बजाय इसे चुनाव याचिकाओं के रूप में हाईकोर्ट को दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा,“पहली चीज़ जो हमें करनी है, वह स्पीकर से अयोग्यता के निर्णय की शक्ति को हटाना... स्पीकर से निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ होने की उम्मीद की जाती है। लेकिन स्वभाव से स्पीकर एक...

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर मेयर के निलंबन का आदेश रद्द किया, कहा- जांच अधिकारी और प्रभारी अधिकारी एक ही व्यक्ति नहीं हो सकते
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर मेयर के निलंबन का आदेश रद्द किया, कहा- जांच अधिकारी और प्रभारी अधिकारी एक ही व्यक्ति नहीं हो सकते

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में जयपुर नगर निगम (विरासत) के मेयर के खिलाफ राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 39(6) के तहत दिए गए निलंबन आदेश रद्द करते हुए कहा है कि 'कोई भी अपने मामले का न्यायाधीश नहीं हो सकता'।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने मेयर की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच और जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में अंतर्निहित खामियां हैं। यह पाया गया कि प्रारंभिक निलंबन आदेश को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ता द्वारा दायर पिछली रिट याचिका में जांच अधिकारी को...

गुजरात हाईकोर्ट ने वन अधिकारियों को धमकाने के लिए हवा में फायरिंग करने के आरोपी आप विधायक को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
गुजरात हाईकोर्ट ने वन अधिकारियों को धमकाने के लिए हवा में फायरिंग करने के आरोपी आप विधायक को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया

गुजरात हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी विधायक चैत्र वसावा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। वासवा पर हवा में गोलीबारी करके वन अधिकारियों को धमकी देने का आरोप है। जमानत याचिका खारिज करते हुए जस्टिस जेसी दोशी की पीठ ने कहा कि विधायक के पास वन विभाग के दो अधिकारियों को अपने घर बुलाने और भूमि अतिक्रमण मुद्दे को सुलझाने के लिए "समानांतर अदालत" चलाने का कोई अधिकार नहीं था। मामले की सुनवाई के दरमियान हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर लोगों को वन विभाग के अधिकारियों के कार्यों के बारे में कोई...

तमिलनाडु थर्ड जेंडर व्यक्तियों के लिए कल्याण उपायों को लागू करने में अग्रणी: राज्य ने एनएएलएसए के फैसले को लागू करने की याचिका में हाईकोर्ट को बताया
तमिलनाडु थर्ड जेंडर व्यक्तियों के लिए कल्याण उपायों को लागू करने में अग्रणी: राज्य ने एनएएलएसए के फैसले को लागू करने की याचिका में हाईकोर्ट को बताया

तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में राज्य में लागू की गई विभिन्न योजनाओं के बारे में मद्रास हाईकोर्ट को सूचित किया। अधिकारियों से एनएएलएसए के फैसले को लागू करने की मांग करने वाली याचिका के जवाब में चीफ जस्टिस एसवी गंगापुरवाला और जस्टिस केके रामकृष्णन की पीठ के समक्ष ये दलीलें दी गईं। अपने जवाबी हलफनामे में, राज्य ने अदालत को सूचित किया कि सरकार ने थर्ड जेंडर के कल्याण के लिए कई नए कदम उठाए...

राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 | कार्यवाही शुरू होने पर निगम के निर्वाचित सदस्य को धारा 39(6) के तहत निलंबित किया जा सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 | कार्यवाही शुरू होने पर निगम के निर्वाचित सदस्य को धारा 39(6) के तहत निलंबित किया जा सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्‍थान हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 39(6) के तहत, नगर पालिका के एक निर्वाचित सदस्य को उसके खिलाफ कार्यवाही शुरू होने के बाद निलंबित किया जा सकता है। अदालत अजमेर नगर निगम के एक निर्वाचित सदस्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें स्थायी निषेधाज्ञा के मुकदमे में निगम के खिलाफ वकालतनामा दाखिल करने पर उसके निलंबन को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता का मामला यह था कि उसने निगम के खिलाफ अपमानजनक तरीके से कार्रवाई किए बिना, मुकदमे में वादी की ओर...

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की उपलब्धियों को हाइलाइट करने के लिए रक्षा अधिकारियों और सिविल सेवकों के इस्तेमाल के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर केंद्र से उसका पक्ष पूछा
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की उपलब्धियों को हाइलाइट करने के लिए रक्षा अधिकारियों और सिविल सेवकों के इस्तेमाल के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर केंद्र से उसका पक्ष पूछा

दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले 9 वर्षों की सत्तारूढ़ सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को हाइलाइट करने के लिए रक्षा अधिकारियों और सिविल सेवकों के इस्तेमाल के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा। याचिका पर आरोप लगाया कि यह एक "राजनीतिक प्रोपेगंडा" है।कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मिनी पुष्करणा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा को मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया और अगली सुनवाई के लिए इसे पांच जनवरी, 2024 को...

ए एंड सी एक्ट की धारा 11 के तहत कोर्ट ऐसे हिस्से को, जिसमें मध्यस्थता खंड का उल्लंघन हो रहा हो, रद्द कर सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
ए एंड सी एक्ट की धारा 11 के तहत कोर्ट ऐसे हिस्से को, जिसमें मध्यस्थता खंड का उल्लंघन हो रहा हो, रद्द कर सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि एएंडसी एक्ट की धारा 11 के तहत शक्तियों का प्रयोग कर रहा न्यायालय मध्यस्थता खंड के अवैध/आपत्तिजनक हिस्से को पृथक कर सकता है।जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने कहा कि मध्यस्थता खंड में प्रदान की गई नियुक्ति प्रक्रिया की अवैधता के कारण उक्त मध्यस्‍थता खंड अवैध नहीं हो जाता, इसलिए, धारा 11 के तहत कोर्ट अवार्ड के अवैध हिस्से को पृथक कर सकता है और विवाद को मध्यस्थता के लिए संदर्भित कर सकता है।तथ्यमामले में पार्टियों के बीच विवाद निस्तारण के लिए एकमात्र मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए...

यूएपीए | पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सीमा पार से हथियार, विस्फोटक प्राप्त करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दी
यूएपीए | पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सीमा पार से हथियार, विस्फोटक प्राप्त करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दी

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने "राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों" के लिए सीमा पार से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक पदार्थ प्राप्त करने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दे दी है। आरोपी पर 2022 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए अधिनियम) के तहत मामला दर्ज किया गया था।जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस कीर्ति सिंह की खंडपीठ ने कहा, "यूएपीए अधिनियम के प्रावधान कड़े हैं और इसलिए अदालत के लिए यह आवश्यक है कि वह आरोपी के खिलाफ आरोप के संदर्भ में सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच करे।" कोर्ट...

नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत मंत्र नहीं बल्कि प्रक्रिया की निष्पक्षता से संबंधित मूलभूत उपदेश : दिल्ली हाई कोर्ट
नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत 'मंत्र' नहीं बल्कि प्रक्रिया की निष्पक्षता से संबंधित मूलभूत उपदेश : दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत 'मंत्र' नहीं हैं, बल्कि प्रक्रिया की निष्पक्षता और लगाए गए आरोपों का जवाब देने के लिए किसी व्यक्ति के अधिकार से संबंधित मूलभूत उपदेश हैं। जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस शैलेंद्र कौर की खंडपीठ ने कहा, 'अंतत: नेचुरल जस्टिस के किसी पहलू के उल्लंघन ने प्रतिवादी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को प्रभावित किया है या नहीं, यह तथ्य का मुद्दा है और यह अंतत: अदालतों को यह विचार करने के लिए निर्देशित करेगा कि क्या हस्तक्षेप की आवश्यकता है। 'न्यायालय...

बिना स्थापित अपराध के आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग: झारखंड हाईकोर्ट
बिना स्थापित अपराध के आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल के फैसले में फैसला सुनाया कि यदि आपराधिकता स्थापित नहीं हुई तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने कहा,“संपत्ति के सह-हिस्सेदार में से एक द्वारा दायर दो विभाजन मुकदमों की लंबितता को देखते हुए, जिसमें याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता भी उन विभाजन मुकदमों में पक्षकार हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि नागरिक गलती के लिए याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है।”जस्टिस द्विवेदी ने कहा,“इसमें कोई संदेह...