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हरियाणा में परिवार के सात सदस्यों की हत्या की सजायाफ्ता महिला की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, 16 अक्तूबर को होनी थी फांसी

LiveLaw News Network
13 Oct 2018 4:48 PM GMT
हरियाणा में परिवार के सात सदस्यों की हत्या की सजायाफ्ता महिला की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, 16 अक्तूबर को होनी थी फांसी
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सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में 2009 में अपने ही परिवार के सात सदस्यों की हत्या में सजायाफ्ता महिला सोनम को 16 अक्तूबर को दी जाने वाली मौत की सजा पर रोक लगा दी। सात सदस्यों में चार बच्चे भी शामिल थे।

इससे पहले महिला के प्रेमी नवीन कुमार की मौत की सजा पर भी सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने इस अपील को भी नवीन की याचिका के साथ टैग कर दिया है।

इस वर्ष जून में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 27 वर्षीय महिला और उसके 28 वर्षीय प्रेमी को 2014 में रोहतक की अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था।

रोहतक सत्र न्यायालय ने सितंबर 2009 में  अपने 16 वर्षीय भाई, दादी, ताऊ- ताई और तीन चचेरे भाई- बहनों की हत्या के लिए सोनम और उसके प्रेमी नवीन कुमार की मौत की सजा सुनाई थी। पीड़ितों को रोहतक के काबुलपुर गांव में अपने घर पर ही नींद की गोलियां दी गई और इसके बाद उनका गला घोंट दिया गया।

अदालत ने कानून के अनुसार पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को मौत की सजा का संदर्भ भेजा था। पुलिस जांच से पता चला था कि सोनम ने नवीन को कहा था कि  उन्हें "अपने परिवार के सदस्यों को खत्म कर देना” चाहिए क्योंकि उनके रिश्ते के कारण घर  से  बाहर निकलना प्रतिबंधित कर दिया गया है।

सोनम ने नींद की गोलियों को खाने और दूध में मिलाकर परिवार को दिया और इसके बाद दोनों ने रस्सियों और कपड़ों का उपयोग करके उन्हें बांध दिया और गले घोंट दिए। घर से नकदी और आभूषण चोरी भी किए गए ताकि इसे चोरी के मामले की तरह पेश किया जा सके।

सोनम के लिए उपस्थित वरिष्ठ वकील सिराजुद्दीन ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि सोनम की सजा 16 अक्तूबर को तय की गई है इस पर रोक लगाई जाए। कहा गया कि दूसरे दोषी की सजा पर भी रोक लगाई गई है।

अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि जांच अधिकारी के दिए सबूत इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सही नहीं हैं कि उसने नवीन के साथ ये हत्याएं की हैं।

आरोपी को मृतक के परिवार के सदस्यों के बयान पर गिरफ्तार किया गया था लेकिन जांच अधिकारी को गिरफ्तारी के लिए उनके खिलाफ कोई परिस्थितियां नहीं मिली। उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले रद्द करने और सजा पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की।

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