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आपत्ति या क्रॉस अपील के अभाव में हाईकोर्ट निचली अदालत के फ़ैसले के दायरे के बाहर जाकर अपील पर आदेश नहीं दे सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
आपत्ति या क्रॉस अपील के अभाव में हाईकोर्ट निचली अदालत के फ़ैसले के दायरे के बाहर जाकर अपील पर आदेश नहीं दे सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी प्रतिवादी ने अगर कोई अपील दाख़िल की है और अगर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई है या कोई क्रॉस अपील नहीं है तो हाईकोर्ट इस अपील को ख़ारिज करते हुए निचली अदालत के फ़ैसले के दायरे के आगे नहीं जा सकता।मूल प्रतिवादी की अपील में ज़्यादा से ज़्यादा हाईकोर्ट इस अपील को ख़ारिज कर सकता है और फ़ैसले को सही ठहरा सकता है। यह बात न्यायमूर्ति एके सीकरी, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने अखिल भारतवर्षीय मरवारी अग्रवाल जातीय कोष बनाम बृजलाल टिबरेवाल मामले में...

बेदख़ली की याचिका पर सुनवाई के लंबित रहने के दौरान अगर मकान मालिक कोई और व्यवसाय करता है तो उसकी ‘वास्तविक ज़रूरत’ पर संदेह नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
बेदख़ली की याचिका पर सुनवाई के लंबित रहने के दौरान अगर मकान मालिक कोई और व्यवसाय करता है तो उसकी ‘वास्तविक ज़रूरत’ पर संदेह नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मकान मालिक और उसके बेटे (जिसके लिए मकान चाहिए) मामले का फ़ैसला होने तक यह साबित करने के लिए कि उन्हें मकान की वास्तव में ज़रूरत है, बेकार बैठे रहेंगे और कोई काम नहीं करेंगे इसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिए।हुकुम चंद्र बनाम नेमी चंद जैन मामले में मकान मालिक ने मध्य प्रदेश एकोमोडेशन कंट्रोल ऐक्ट, 1961 की धारा  12(1)(f) के तहत मामला दायर कर अपने किरायेदार को मकान ख़ाली करने के लिए कोर्ट के आदेश की मांग की थी ताकि वह अपने बेटे को यह रहने के लिए दे सके। निचली अदालत ने इस मामले...

नियोक्ता को गर्भवती कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
नियोक्ता को गर्भवती कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

महिलाओं का आदर होना चाहिए और कार्यस्थल पर उनके साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार होना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए ज़ोर देकर कहा कि गर्भवती कर्मचारियों के साथ सहानुभूतिपूर्ण रवैया रखी जानी चाहिए।न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा, “महिलाएँ हमारे समाज की आधी जनसंख्या हैं और अपनी रोज़ी रोटी कमाने के लिए जहाँ वह रोज़गार करती हैं उस कार्यस्थल पर उनके साथ मर्यादापूर्ण और समानता का व्यवहार होना चाहिए।“माँ बनना किसी महिला के जीवन की सबसे स्वाभाविक घटना है। एक कर्मचारी के रूप...

मौत की सज़ा पाए क़ैदियों को अपने सगे संबंधियों, वकीलों और चिकित्सकों से मिलने की अनुमति होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
मौत की सज़ा पाए क़ैदियों को अपने सगे संबंधियों, वकीलों और चिकित्सकों से मिलने की अनुमति होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मौत की सज़ा पाए क़ैदियों को उनके सगे संबंधियों, अपने वकीलों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मिलने की अनुमति होनी चाहिए।न्यायमूर्ति एमबी लोकुर, एस अब्दुल नज़ीर और दीपक गुप्ता की पीठ 1382 जेलों में अमानवीय स्थितियों से संबंधित मामले पर ग़ौर कर रहे थे।आवेदन में माँग की गई कि किसी भी अदालत द्वारा मौत की सज़ा पाए किसी भी क़ैदी से उसी तरह से व्यवहार होना चाहिए जैसे किसी अन्य क़ैदी से और उन्हें भी वही सारी सुविधाएँ मिलनी चाहिए जैसी किसी अन्य क़ैदियों को मिल रही हैं। आवेदन में यह...

अगर बलात्कार के मामले में डीएनए प्रोफ़ायलिंग नहीं किया जाता या उसे रोका जाता है तो अभियोजन पर इसके विपरीत परिणाम होंगे : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर बलात्कार के मामले में डीएनए प्रोफ़ायलिंग नहीं किया जाता या उसे रोका जाता है तो अभियोजन पर इसके विपरीत परिणाम होंगे : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर बलात्कार के किसी मामले में डीएनए प्रोफ़ायलिंग नहीं की गई है या निचली अदालत में उसे रोका गया है तो अभियोजन पर उसका प्रतिकूल असर होगा।“हम यह नहीं कह रहे हैं कि अगर डीएनए प्रोफ़ायलिंग नहीं की गई तो अभियोजन के मामले को साबित नहीं किया जा सकता लेकिन हमारी राय में अगर किसी मामले में डीएनए प्रोफ़ायलिंग नहीं की गई है या निचली अदालत में उसे रोका है तो अभियोजन पर इसका विपरीत प्रभाव होगा”, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर,न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर...

सुप्रीम कोर्ट का एलजी/दिल्ली सरकार को निर्देश, शादियों में खाने की वस्तुओं और पानी की बर्बादी रोकने के लिए व्यापक नीति बनाएँ [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट का एलजी/दिल्ली सरकार को निर्देश, शादियों में खाने की वस्तुओं और पानी की बर्बादी रोकने के लिए व्यापक नीति बनाएँ [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और उसके लेफ़्टिनेंट गवर्नर को एक पूर्ण और व्यापक नीति बनाने को कहा है ताकि मोटलों, फ़ार्म हाउसों के शादी समारोहों में खाने पीने की वस्तुओं की बर्बादी रोकी जा सके।न्यायमूर्ति एमबी लोकुर,न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने यह भी कहा कि सम्भावित नीति में मेहमानों की संख्या पर नियंत्रण लगाने की संभावना की भी तलाश की जाए। कोर्ट ने यह बाई कहा है कि नीति में इस बात का भी उल्लेख हो कि शादी के कारण शहर में ट्रैफ़िक की समस्या पैदा...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मध्यस्थता का क्लौज होने से उपभोक्ता मंच का अधिकार क्षेत्र 2015 के संशोधन से सीमित नहीं हो जाता है [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मध्यस्थता का क्लौज होने से उपभोक्ता मंच का अधिकार क्षेत्र 2015 के संशोधन से सीमित नहीं हो जाता है [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के उस आदेश को सही बताया है जिसमें उसने  उस अपील को ख़ारिज कर दिया था जो उपभोक्ता शिकायत के तहत मध्यस्थ को एक रेफ़रेंस जारी करने को लेकर था। यह अपील एक ख़रीददार और भवन निर्माता के बीच हुए समझौते में मध्यस्थता के प्रावधान होने के बाद भी किया गया है।मंगलवार को न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने एम्मार एमजीएफ लैंड लिमिटेड की पुनर्विचार याचिका रद्द कर दी।मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने भवन निर्माता कम्पनी की याचिका...

विश्वास है कि मोदी सरकार भारत को एक और इस्लामिक देश नहीं बनने देगी : मेघालय हाईकोर्ट
विश्वास है कि मोदी सरकार भारत को एक और इस्लामिक देश नहीं बनने देगी : मेघालय हाईकोर्ट

“मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि किसी को भी भारत को एक और इस्लामिक देश में तब्दील करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि अगर ऐसा किया जाता है तो यह भारत और पूरी दुनिया के लिए एक क़यामत का दिन होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि सिर्फ़ श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार इस मुद्दे की गम्भीरता को समझेगी और आवश्यक क़दम उठाएगी जैसा कि इस अदालत ने …सुझाव दिया है और हमारी मुख्यमंत्री ममताजी हर तरह से राष्ट्रीय हितों का सम्मान करेंगीं।”उपरोक्त बयान को पढ़ने के बाद यह विश्वास करना मुश्किल है...

यौन हमले के मामले में दर्ज प्राथमिकी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता [दिशानिर्देश पढ़ें]
यौन हमले के मामले में दर्ज प्राथमिकी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता [दिशानिर्देश पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बलात्कार के पीड़ितों की पहचान को सुरक्षित करने के लिए महत्त्वपूर्ण निर्देश जारी किए।न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस बारे में  9 दिशा निर्देश जारी किए हैं जो इस तरह से हैं - कोई भी व्यक्ति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया आदि में पीड़ित के नाम को उजागर नहीं करेगा या घुमा फिराकर भी इस तरह से कुछ नहीं कहेगा जिससे पीड़ित की पहचान के बारे में पता चले और लोगों को इनके बारे में पता चल जाए। ऐसी स्थिति में जब पीड़ित की मौत हो गई है या उसकी...

यहां तक कि मृत रेप पीड़ित की भी पहचान छिपाई जाए, सुप्रीम कोर्ट ने रेप व यौन हमले के पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर प्रतिबंध लगाया [निर्णय पढ़ें]
यहां तक कि मृत रेप पीड़ित की भी पहचान छिपाई जाए, सुप्रीम कोर्ट ने रेप व यौन हमले के पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर प्रतिबंध लगाया [निर्णय पढ़ें]

रेप व यौन हमले के पीड़ितों  की पहचान सार्वजनिक करने और उनके साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए गाइडलाइन जारी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी पीड़ित की मौत भी हो चुकी है तो भी उसकी गरिमा बनी रहती है और उसकी पहचान उजागर नहीं की जा सकती।जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने मंगलवार को ये फैसला सुनाया। जस्टिस गुप्ता ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि पीडितों की पहचान किसी कीमत पर उजागर ना हो। मीडिया ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग कर सकता है।ये उसका...

मामले की जाँच अगर ठीक से नहीं की गई है तो संदेह का लाभ अवश्य ही आरोपी को मिलना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
मामले की जाँच अगर ठीक से नहीं की गई है तो संदेह का लाभ अवश्य ही आरोपी को मिलना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में आरोपी को बरी किए जाने को सही ठहराते हुए कहा कि अगर मामले की जाँच ठीक से नहीं हुई है तो इसकी वजह से संदेह का लाभ अवश्य ही आरोपी को मिलना चाहिए।एक साम्प्रदायिक दंगे में एक व्यक्ति की हत्या के लिए निचली अदालत ने चार लोगों को सज़ा सुनाई। इन लोगों की अपील पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का पक्ष मामले की कमज़ोर जाँच के कारण कई सारी ख़ामियों से भरी है। इसमें कहा गया है कि आरोपियों की जो पहचान की गई है वह काफ़ी संदेहास्पद है और टीआईपी इतनी...

सिम कार्ड के स्थान बदलने का मतलब यह नहीं है कि सिम कार्ड के साथ-साथ आरोपी भी इधर उधर घूम रहा है : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
सिम कार्ड के स्थान बदलने का मतलब यह नहीं है कि सिम कार्ड के साथ-साथ आरोपी भी इधर उधर घूम रहा है : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

जाँच एजेंसियों को धक्का पहुँचाने वाले इस फ़ैसले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि सिम कार्ड के स्थान बदलने का मतलब यह नहीं है कि इसके आठ आरोपी भी अपना स्थान बदल रहा है इस आधार पर यह निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं होगा।न्यायमूर्ति एबी चौधरी और न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह की पीठ ने कहा, “अभियोजन पक्ष यह दावा नहीं कर सकता कि सिम कार्ड अगर एक जगह से दूसरी जगह चला जाता है तो इसका अर्थ यह हुआ कि इस सिम कार्ड का प्रयोग करने वाला कथित व्यक्ति भी अपना स्थान बदल रहा है और इस बारे में कॉल डिटेल पेश...

ट्रेन के समय/कनेक्टिविटी के बारे में जनहित याचिका पर फ़ैसला नहीं दिया जा सकता; सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले को निरस्त किया [आर्डर पढ़े]
ट्रेन के समय/कनेक्टिविटी के बारे में जनहित याचिका पर फ़ैसला नहीं दिया जा सकता; सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले को निरस्त किया [आर्डर पढ़े]

उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले को निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा की ट्रेन के समय और इसकी कनेक्टिविटी के बारे में जनहित याचिका पर कोई फ़ैसला नहीं दिया जा सकता।केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अपील की थी। हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में हाईकोर्ट बार असोसीएशन की एक याचिका को बंद कर दिया था। इसमें हाईकोर्ट  के समक्ष रेलवे की ओर से दायर एक हलफ़नामे में कहा गया था कि संबंधित ट्रेन के समय के बारे में आवश्यक आदेश पास किए जाएँगे और नई सेवाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।इस...

अगर क़ानून में प्रावधान हो तो सरकारी अथॉरिटी निजी एककों से सूचना प्राप्त करने और उसे आरटीआई आवेदनकर्ता के साथ साझा करने के लिए दायित्वों से बँधे हैं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर क़ानून में प्रावधान हो तो सरकारी अथॉरिटी निजी एककों से सूचना प्राप्त करने और उसे आरटीआई आवेदनकर्ता के साथ साझा करने के लिए दायित्वों से बँधे हैं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी सरकारी अथॉरिटी को अधिकार है और अगर वह किसी क़ानून के तहत किसी निजी एकक से क़ानूनन सूचना प्राप्त कर सकता है तो उसे आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (f) के तहत सूचना माना जाएगा और वह इसे आरटीआई आवेदनकर्ता के साथ इसको साझा कर सकता है।न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत के सामने प्रश्न यह था कि अगर कोई सेवा प्रदाता यह कहते हुए सूचना देने से इंकार कर दे कि वह सार्वजनिक अथॉरिटी नहीं है और इसलिए वह सूचना का अधिकार अधिनिय, 2005 के तहत नहीं आता तो क्या उस स्थिति में टीआरएआई (ट्राई -...

संवैधानिक अदालत होने के कारण हाइकोर्टों को अपने ही आदेश को वापस लेने का अधिकार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
संवैधानिक अदालत होने के कारण हाइकोर्टों को अपने ही आदेश को वापस लेने का अधिकार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट के  ‘court of record’ होने के कारण उसे अपने ही आदेश को वापस लेने का अधिकार ख़ुद ब ख़ुद मिला हुआ है।म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ ग्रेटर मुंबई बनाम प्रतिभा इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश को वापस लेने के हाइकोर्ट के अधिकार पर विचार किया।बॉम्बे हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शुरू में एक मध्यस्थ की नियुक्ति का आदेश दिया था। बाद में जज को इस बात का भान हुआ कि समझौते में मध्यस्थता का प्रावधान नहीं है और उसने इस आदेश को वापस ले लिया। अन्य पक्ष ने इस...

व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, शुरू से अंत तक एनक्रिप्शन के कारण कंटेंट हटाना सम्भव नहीं
व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, शुरू से अंत तक एनक्रिप्शन के कारण कंटेंट हटाना सम्भव नहीं

व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसके लिए कंटेंट को हटाना सम्भव नहीं है क्योंकि इसमें शुरू से अंत तक एनक्रिप्शन की तकनीक का पालन होता है।वरिष्ठ वक़ील कपिल सिबल ने यह दलील उस समय दी जब अश्लील बाल साहित्य, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार से संबंधित विडीओ पर प्रतिबंध लगाने पर भारत सरकार के सुझाव पर चर्चा हो रही थी।केंद्र ने गूगल, व्हाट्सएप और फ़ेसबुक को कार्रवाई के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए थे - artificial intelligence पर आधारित टूलस के द्वारा ऑडीओ को ग़ैरक़ानूनी कंटेंट को हटाने और इनकी निगरानी...

अदालत में फ़र्ज़ी ऑडीओ क्लिप चलाकर जज को बदनाम करने वाले वक़ील को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लताड़ [आर्डर पढ़े]
अदालत में फ़र्ज़ी ऑडीओ क्लिप चलाकर जज को बदनाम करने वाले वक़ील को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लताड़ [आर्डर पढ़े]

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक वक़ील रंजना अग्निहोत्री को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि वक़ील मामले की सुनवाई कर रही पीठ के जजों का मज़ाक़ उड़ा रही हैं और उनका अपमान कर रही हैं।वक़ील ने उस समय एक ऑडीओ क्लिप चलाया जब पीठ ने इस वक़ील के पिता द्वारा दायर याचिका को निरस्त कर दिया। इस ऑडीओ क्लिप में पीठ के एक जज विक्रम नाथ पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया गया था।न्यायमूर्ति नाथ और न्यायमूर्ति  राजेश सिंह चौहान की पीठ ने कहा, “वह एक वक़ील हैं और इस वजह से न्यायिक प्रणाली का हिस्सा भी। इसके बावजूद वह...

मध्याह्न भोजन को गम्भीरता से नहीं लेने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पाँच राज्यों पर ₹1-1 लाख और दिल्ली सरकार पर ₹2 लाख का दंड लगाया [आर्डर पढ़े]
मध्याह्न भोजन को गम्भीरता से नहीं लेने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पाँच राज्यों पर ₹1-1 लाख और दिल्ली सरकार पर ₹2 लाख का दंड लगाया [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्कूलों में मध्याह्न भोजन से संबंधित मामलों को लागू नहीं करने के लिए पाँच राज्यों - आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और जम्मू-कश्मीर पर ₹1-1 और दिल्ली सरकार पर ₹2 लाख का दंड लगाया।इन राज्यों ने सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के बारे में एक ऑनलाइन लिंक स्थापित करने और मध्याहन भोजन योजना में स्वच्छता की निगरानी के लिए चार्ट बनाने के कार्यक्रम को लागू नहीं किया।दंड लगाने का यह निर्णय न्यायमूर्ति एमबी लोकुर,न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता...