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Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: कोर्ट परिसर में बैनर और पोस्टर लगाने पर रोक

कोर्ट परिसर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनावों में कोर्ट परिसर में बैनर और पोस्टर लगाने पर रोक लगा दी है। उत्तर प्रदेश के सभी अदालती परिसरों की सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित सूओ मोटो कार्यवाही में रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) ने अदालत के ध्यान में यह मुद्दा लाया था। इस संबंध में दायर रिपोर्ट में बताया गया है कि चुनाव के दौरान लगाए गए बैनर, चाहे वह अधिवक्ताओं के हों या हाईकोर्ट के कर्मचारियों के, सीसीटीवी कैमरों को बाधित करते हैं, विजुअल...

राजद्रोह केस : शरजील के समर्थन में नारे लगाने वाली छात्रा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत
राजद्रोह केस : शरजील के समर्थन में नारे लगाने वाली छात्रा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की मास्टर्स की एक 22 वर्षीय छात्रा उर्वशी चुडावाला को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी है। उर्वशी चुडावाला के खिलाफ शरजील इमाम के समर्थन में एक रैली के दौरान कथित रूप से नारे लगाने के लिए राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था। दक्षिण मुंबई में एलजीबीटीक्यू समुदाय के लिए इस रैेली का आयोजन किया गया था। यह आदेश न्यायमूर्ति एस.के. शिंदे की एकल पीठ ने पारित किया था। गिरफ्तारी की स्थिति में अदालत ने आदेश दिया है कि उक्त...

Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए जारी नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को उत्तर प्रदेश राज्य के जिला प्रशासन द्वारा CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति के कथित नुकसान के लिए हर्जाना वसूलने के लिए जारी नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने कहा कि बेंच उस मामले को सुनने की इच्छुक नहीं है, जो मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है। याचिकाकर्ताओं ने CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति के कथित नुकसान के...

पटना हाईकोर्ट ने सज़ा देने के मामलों, विशेषकर मौत की सज़ा से संबंधित मामलों में न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया
पटना हाईकोर्ट ने सज़ा देने के मामलों, विशेषकर मौत की सज़ा से संबंधित मामलों में न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया ताकि वे सज़ा देने के मामले में अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर सकें। विशेष रूप से सत्र न्यायालयों के ट्रायल (विचारण) में, जहां न्यायिक अधिकारियों को वैकल्पिक सज़ा के रूप में मौत की सज़ा और आजीवन कारावास की सज़ा में से किसी एक का चुनाव करना होता है। "अगर जजों को उपहासात्मक रूप से अपने विशेषाधिकार के प्रयोग की अनुमति दी जाए तो यह न्याय का उपहास होगा। क़ानून के नियम को जो संवैधानिक ताक़त मिली हुई है, वह निर्णय की...

अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले में दिल्‍ली कोर्ट ने क्राइम ब्रांच को एटीआर दाख‌िल करने के ‌लिए दिया और समय
अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले में दिल्‍ली कोर्ट ने क्राइम ब्रांच को एटीआर दाख‌िल करने के ‌लिए दिया और समय

दिल्ली की एक अदालत ने एक याचिका की सुनवाई में अपराध शाखा के विशेष पुलिस आयुक्त को अनुराग ठाकुर और प्रवीण वर्मा के खिलाफ, कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में, एफआईआर दर्ज करने के लिए 15 दिनों की अवधि में एक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मंगलवार ‌की सुनवाई में, कोर्ट में जानकारी दी गई कि यह मामला अपराध शाखा की विशेष जांच इकाई के पास है। पुलिस आयुक्त, अपराध शाखा इसकी निगरानी कर रहे हैं। क्राइम ब्रांच ने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट में मौजूदा शिकायत की जांच पूरी...

गवाह की विश्वसनीयता आरोपी द्वारा उसके क्रॉस एक्ज़ामिनेशन से ही स्थापित हो सकती है : इलाहाबाद हाईकोर्ट
गवाह की विश्वसनीयता आरोपी द्वारा उसके क्रॉस एक्ज़ामिनेशन से ही स्थापित हो सकती है : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी गवाह की विश्वसनीयता लगाए गए आरोपों के पर आरोपी द्वारा किए गए उसके प्रति परीक्षण (क्रॉस इग्ज़ामिनेशन) से ही स्थापित हो सकती है। न्यायमूर्ति अजित सिंह ने कहा कि आवेदनकर्ता सह आरोपी के ख़िलाफ़ तय आरोप को बदलने के बाद उसे अभियोजन पक्ष के गवाहों के प्रति परीक्षण का मौक़ा नहीं देकर निचली अदालत ने ग़लती की है। अदालत ने कहा, "प्राकृतिक क़ानून का यह सिद्धांत है कि किसी को भी बिना उसकी सुने उसे दोषी क़रार नहीं दिया जा सकता और उसे आरोपी को पूरा मौक़ा देना...

दिल्ली हाईकोर्ट ने तम्बाकू विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने व तम्बाकू कंपनियों के श्रमिकों की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने तम्बाकू विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने व तम्बाकू कंपनियों के श्रमिकों की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने तंबाकू उत्पाद 'चैनी खैनी' के सरोगेट या नायब विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर स्वास्थ्य मंत्रालय व अन्य को नोटिस जारी किया है।चीफ जस्टिस डी.एन पटेल और जस्टिस हरि शंकर की डिवीजन बेंच ने उक्त मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर अपना जवाब दाखिल करे, अन्यथा जुर्माना लगाया जाएगा। वर्तमान याचिका श्रमिकों व साथ में बच्चों के मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए दायर की गई है। यह बच्चे तम्बाकू उत्पाद 'चैनी खैनी' के निर्माण, पैकिंग, बिक्री और...

दूसरी FIR यदि पहली जैसी ही है तो उसके आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
दूसरी FIR यदि पहली जैसी ही है तो उसके आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दूसरी प्राथमिकी के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा जारी रखने योग्य नहीं है, यदि उसकी बुनियाद भी पहली प्राथमिकी के समान हो।इस मामले में, शिकायतकर्ता ने पहली प्राथमिकी यह कहते हुए दर्ज करायी थी कि उसने आरोपी के पक्ष में कभी भी जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं किया था और आरोपी ने फर्जी जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर उसकी भूमि गैर कानूनी तरीके से बेच दी थी। इस मामले में आरोपी के खिलाफ अंतत: मुकदमा चलाया गया था और उसे बाद में बरी कर दिया गया।उसके बाद उसने दंड प्रक्रिया संहिता की...

गैर-पंजीकृत पार्टरनरशिप कंपनी चेक बाउंस करने के मामले में एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत जारी रख सकती है : बॉम्बे हाईकोर्ट
गैर-पंजीकृत पार्टरनरशिप कंपनी चेक बाउंस करने के मामले में एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत जारी रख सकती है : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने शुक्रवार को व्यवस्था दी कि गैर-पंजीकृत पार्टनरिशप कंपनी नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत जारी रख सकती है।न्यायमूर्ति पी एन देशमुख और न्यायमूर्ति पुष्पा वी गणेदीवाला की खंडपीठ एकल पीठ के उस आदेश से उत्पन्न संदर्भ की समीक्षा कर रही थी, जिसमें उसने 'साई एक्यूमुलेटर इंडस्ट्रीज, संगमनेर बनाम वी सेठी ब्रदर्स, औरंगाबाद, 2016(5) एमएच. एलजे 936' के मामले में हाईकोर्ट के पूर्व के आदेश पर सवाल उठाये थे। उक्त मामले में कहा गया था कि गैर-पंजीकृत...

मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस से फ़र्ज़ी प्रेस पहचान पत्र रखने वाले पत्रकारों की पहचान करने को कहा
मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस से फ़र्ज़ी प्रेस पहचान पत्र रखने वाले पत्रकारों की पहचान करने को कहा

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को लोक अभियोजक को निर्देश दिया कि वह पुलिस से ऐसे लोगों की पहचान करने को कहे जिनके पास फ़र्ज़ी प्रेस पहचानपत्र है और अगर वे भारत सरकार के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं तो उनके ख़िलाफ़ संबंधित क़ानून के तहत आपराधिक कार्रवाई करें। न्यायमूर्ति एन किर्बुकरन और न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन ने इस बात पर ग़ौर किया कि 'ऑल इंडिया एंटी करप्शन प्रेस, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार' के नाम पर फ़र्ज़ी प्रेस पहचान पत्र जारी किए गए हैं। अदालत ने पाया कि लगभग 100 ऐसे पहचानपत्र...

जज की पत्नी और बेटे की हत्या : गुरुग्राम की अदालत ने निजी सुरक्षा कर्मी को सुनाई मौत की सजा, कहा रक्षक ही भक्षक बने तो राहत नहीं 
जज की पत्नी और बेटे की हत्या : गुरुग्राम की अदालत ने निजी सुरक्षा कर्मी को सुनाई मौत की सजा, कहा रक्षक ही भक्षक बने तो राहत नहीं 

गुरुग्राम की एक अदालत ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णकांत की पत्नी और बेटे की हत्या के दोषी पूर्व निजी सुरक्षा कर्मी( PSO) महिपाल को मौत की सजा सुनाई है।अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर परमार ने शुक्रवार को ये फैसला सुनाते हुए इस केस को " दुर्लभतम से भी दुर्लभ" श्रेणी का अपराध माना और दोषी के साथ कोई नरमी नहीं बरती।न्यायाधीश ने सजा का ऐलान करते हुए कहा, " एक सरकारी कर्मचारी के रूप में, वह उनकी रक्षा करने के लिए जिम्मेदार था। इसके बजाय, उसने उनके विश्वास को भंग किया और उनकी हत्या...

न्यायिक नियुक्तियां : हलफनामे में गलत जानकारी देने पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायिक सचिव को तलब किया
न्यायिक नियुक्तियां : हलफनामे में गलत जानकारी देने पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायिक सचिव को तलब किया

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक पीठ ने बुधवार को अदालत में दाखिल हलफनामे में गलत तथ्यों देने पर कड़ा रुख अपनाया है। पीठ ने पश्चिम बंगाल राज्य के न्यायिक सचिव को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।न्यायमूर्ति जोमाल्य बागची और न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की पीठ ने कहा, " यह "दुर्भाग्यपूर्ण" है कि एक अनुभवी न्यायिक अधिकारी इस तरह के " लापरवाही तरीके" से कार्य करेगा। "पीठ ने कहा,"मामलों की यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति हमें प्रथम दृष्टया एक दृष्टिकोण की ओर ले जाती है कि एक...

(दावों का त्याग) सीपीसी के आदेश 2 नियम 2 से संबंधित प्रतिबंध रिट याचिकाओं पर लागू नहीं हो सकता:  सुप्रीम कोर्ट
(दावों का त्याग) सीपीसी के आदेश 2 नियम 2 से संबंधित प्रतिबंध रिट याचिकाओं पर लागू नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश- 2 नियम-2 से संबंधित प्रतिबंध रिट याचिकाओं पर लागू नहीं हो सकता।कोर्ट उस रिट याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें यह मुद्दा उठाया गया था कि क्या पेंशन के निर्धारण के लिए क्वालिफाइंग सर्विस की गणना करते वक्त सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विस कमिटी रूल्स 2000 लागू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट विधिक सहयोग समिति और सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति में सेवा दे चुके याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को शामिल किया जा सकता है?इस मामले के...

निर्भया केस : दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी करने की मांग पटियाला हाउस ने  ठुकराई
निर्भया केस : दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी करने की मांग पटियाला हाउस ने ठुकराई

निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले में पटियाला हाउस अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी करने का अनुरोध किया गया था।एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने शुक्रवार को सभी पक्षों को सुनने के बाद ये फैसला सुनाया और कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषियों को उपाय लेने के लिए सात दिन का समय दिया है। लिहाजा फिलहाल डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि 11 फरवरी के बाद ही ऐसी अर्जी पर सुनवाई हो सकती है।सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल की...

सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि बदलने का कर्मचारी का अनुरोध नौकरी के अंतिम समय में नहीं माना जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि बदलने का कर्मचारी का अनुरोध नौकरी के अंतिम समय में नहीं माना जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि किसी कर्मचारी के सर्विस रजिस्टर में जो जन्मतिथि दर्ज हो जाती है उसमें नौकरी के अंतिम समय में बदलाव की मांग नहीं मानी जा सकती। न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि भले ही यह साबित करने के लिए अच्छे सबूत हों कि रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि गलत है तो भी सुधार का दावा अधिकार के तौर पर नहीं किया जा सकता। इस मामले में, कर्मचारी ने नौकरी शुरू करने की तारीख से 30 साल से अधिक समय के बाद, अपने सेवा रिकॉर्ड में जन्मतिथि सही करने का...