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वैवाहिक विवाद में निजता के नाम पर जेंडर पहचान की जांच को रोका नहीं जा सकता : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
वैवाहिक विवाद में निजता के नाम पर जेंडर पहचान की जांच को रोका नहीं जा सकता : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक फ़ैसले में कहा कि वैवाहिक विवाद में अगर एक पक्ष दूसरे पक्ष के जेंडर के बारे में कोई सवाल उठाता है तो उस स्थिति में अदालत उस पक्ष को मेडिकल जाँच का आदेश दे सकती है और इस संबंध में निजता के उल्लंघन की गुहार कोई मायने नहीं रखती। यह आदेश न्यायमूर्ति सुबोध अभयंकर ने पास किया। इस बारे में सुरभि त्रिवेदी ने अपने वक़ील सम्पूर्ण तिवारी के माध्यम से एक याचिका दायर की थी जो पारिवारिक अदालत के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। पारिवारिक अदालत के प्रधान न्यायाधीश ने उसके जेंडर की जाँच...

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सवाल, वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश के बाद भी क्या पत्नी को गुजारा भत्ता देने को बाध्य है पति?
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सवाल, वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश के बाद भी क्या पत्नी को गुजारा भत्ता देने को बाध्य है पति?

उच्चतम न्यायालय यह तय करेगा कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली का आदेश पक्ष में होने के बावजूद क्या पति अपनी पत्नी को दंड संहिता प्रक्रिया (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता देने को बाध्य है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में पति द्वारा यह दलील दी गयी थी कि हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा नौ के तहत मुकदमे में यह पाया गया है कि उसकी पत्नी बगैर किसी कारण के उससे अलग रह रही है। दंड विधान संहित (सीआरपीसी) की धारा 125 की उपधारा-4 का उल्लेख करते हुए यह दलील...

व्यापक आम हितों के कारण सरकारी नीति में परिवर्तन को वैध उम्मीदों पर ग़ौर करने के दौरान उचित महत्व दिया जाना ज़रूरी है : सुप्रीम कोर्ट
व्यापक आम हितों के कारण सरकारी नीति में परिवर्तन को वैध उम्मीदों पर ग़ौर करने के दौरान उचित महत्व दिया जाना ज़रूरी है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी चीज़ में व्यापक आम दिलचस्पी सरकार की नीति में परिवर्तन का कारण हो सकती है और जायज़ उम्मीदों के दावे पर ग़ौर करने के दौरान इस पर पर्याप्त ध्यान देने की ज़रूरत होती है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और हेमंत गुप्ता की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के एक फ़ैसले को निरस्त कर दिया। इस फ़ैसले में विस्थापित अर्क कामगारों के लिए दैनिक मज़दूरी को आरक्षित करने संबंधी नियम को लागू करने का निर्देश सरकार को दिया गया था। निगम ने 1995 में अर्क कामगारों के लिए...

जिस विवाह को कायम रखना मुश्किल हो रहा हो, उसके विच्छेद के लिए अनुच्छेद 142 की शक्तियों का प्रयोग किया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट
जिस विवाह को कायम रखना मुश्किल हो रहा हो, उसके विच्छेद के लिए अनुच्छेद 142 की शक्तियों का प्रयोग किया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह उन मामलों में विवाह विच्छेद के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत निहित अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है, जहां यह पाया जाता है कि विवाह आगे निभाना मुश्किल है, वह भावनात्मक रूप से मृत हो चुका है, जो बचाव से परे है और जो पूरी तरह से टूट चुका हो। भले ही मामले के तथ्यों से कानून की नजर में कोई ऐसा आधार उपलब्ध न हो, जिसके आधार पर तलाक की अनुमति दी जा सकती है। इस मामले में (''आर.श्रीनिवास कुमार बनाम आर.शमेथा'') हाईकोर्ट ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया...

पिता ऐसी बेटी को गुज़ारे की मासिक राशि देने के लिए बाध्य नहीं जो ख़ुद कमा रही है : कर्नाटक हाईकोर्ट
पिता ऐसी बेटी को गुज़ारे की मासिक राशि देने के लिए बाध्य नहीं जो ख़ुद कमा रही है : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि पिता अपनी उस बेटी को गुज़ारे की मासिक राशि देने के लिए बाध्य नहीं है जो नौकरी से पैसे कमा रही है। न्यायमूर्ति एसएन सत्यनारायण और पीजीएम पाटिल ने इस बारे में सदाशिवानंद की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार कर ली। पीठ ने कहा, "शुरुआत में अदालत ने कुछ राशि के भुगतान के बारे में आदेश देकर ठीक किया था पर जब उस समय के बाद के लिए नहीं जब उसे किसी प्रतिष्ठित कंपनी में 20-25 हज़ार प्रति माह की नौकरी मिल गई। उसको 10 हज़ार की अतिरिक्त राशि दिलाकर उसकी आदत नहीं बिगाड़ी जा...

पीड़ित नहीं दायर कर सकता बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला
पीड़ित नहीं दायर कर सकता बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दोहराया कि उन मामलों में पुनरीक्षण याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता, जिनमें अपील दायर की जा सकती है। साथ ही यह भी माना है कि बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ पीड़ित द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित एक फैसले के खिलाफ कई सारी पुनरीक्षण याचिकाएं दायर की गई थी। इस फैसले में सेशन कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें आरोपी को दोषी करार दिया गया था। साथ ही सेशन...

डॉक्ट्राइन ऑफ प्रुडेंस : पत्नी, चार बच्चों के हत्यारे की मौत की सजा आजीवन कारावास में तब्दील
डॉक्ट्राइन ऑफ प्रुडेंस : पत्नी, चार बच्चों के हत्यारे की मौत की सजा आजीवन कारावास में तब्दील

उच्चतम न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका को आंशिक तौर पर मंजूर करते हुए पत्नी और चार बच्चों की हत्या के दोषी व्यक्ति सुदम उर्फ राहुल कनीराम जाधव की फांसी की सजा आजीवन कारावास में तब्दील कर दी है। सुदम अपनी पत्नी और चार बच्चों की गला दबाकर मारने का अभियुक्त था। निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड का आदेश सुनाया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी 2012 में अपनी मोहर लगायी थी। उसकी पुनरीक्षण याचिका भी 'सर्कुलेशन' प्रक्रिया के तहत खारिज कर दी गयी थी। (पुनर्विचार याचिका को अदालत कक्ष में सुने...

प्रिंसिपल से क्रॉस एक्जामिन वाले मामले में पॉवर ऑफ अटॉर्नी गवाही नहीं दे सकता,  सुप्रीम कोर्ट का फैसला
'प्रिंसिपल' से क्रॉस एक्जामिन वाले मामले में पॉवर ऑफ अटॉर्नी गवाही नहीं दे सकता, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुख्तारी अधिकार (पॉवर ऑफ अटॉर्नी) वाला व्यक्ति वैसे मामलों में मूल मालिक (प्रिंसिपल) की ओर से गवाही नहीं दे सकता, जिनके बारे में केवल मालिक को ही जानकारी हो और जिनमें उसे क्रॉस-एक्जामिन (प्रतिपृच्छा) की जा सकती हो। इकरारनामे की शर्तों की नाफर्मानी के कारण जारी किये गये आदेश (स्पेशल परफॉर्मेंस) से संबंधित मुकदमे से जुड़ी इस अपील में यह दलील दी गयी थी कि बिक्री के समझौते की शर्तों को पूरा करने के संबंध में अपनी तत्परता और इच्छा जाहिर करने के लिए मुद्दई (वादी) कटघरे...

बाल श्रम : अपराध स्वीकार कर ले तो भी आरोपी पर नरमी दिखाने का कोई कारण नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
बाल श्रम : अपराध स्वीकार कर ले तो भी आरोपी पर नरमी दिखाने का कोई कारण नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

बॉम्बे हाइकोर्ट ने कहा है कि अगर कोई आरोपी अपना गुनाह क़बूल कर लेता है तो भी अदालतों को यह अधिकार नहीं है कि वह उसे न्यूनतम से कम सज़ा सुनाए जो क़ानून के माध्यम से निर्धारित किया गया है। अदालत ने राज्य सरकार की इस बारे में याचिका स्वीकार कर ली है जिसमें यलप्पा खोट नामक एक व्यक्ति पर ₹1200 के जुर्माने को बढ़ाने का आग्रह किया गया है, क्योंकि उसने 12 साल के एक बच्चे को बुनाई कारख़ाने में नौकरी पर रखा था। न्यायमूर्ति एसएस जाधव ने जून में इस बारे में फ़ैसला दिया था, जिसको अब उपलब्ध कराया गया है।...

टेलीग्राम एप पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप, केरल हाईकोर्ट में बैन की मांग पर याचिका
टेलीग्राम एप पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप, केरल हाईकोर्ट में बैन की मांग पर याचिका

केरल हाईकोर्ट में यह कहते हुए कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'टेलीग्राम'अनियंत्रित है और चाइल्ड पोर्नोग्राफी और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, इसे प्रतिबंधित करने की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई है। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु की एल.एल.एम की छात्रा एथेना सोलोमन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि टेलीग्राम गुमनाम संदेशों की पोस्टिंग की अनुमति देता है। याचिका में कहा गया है कि इस सुविधा का व्यापक रूप से दुरुपयोग महिलाओं और बच्चों पर बनाई गई अश्लील और अशिष्ट सामग्री को...

दुष्कर्म पीड़िता अगर सुनवाई के दौरान मुकर गई है तो वह मुआवज़े की हकदार नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला
दुष्कर्म पीड़िता अगर सुनवाई के दौरान मुकर गई है तो वह मुआवज़े की हकदार नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म पीड़िता की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मुआवजा दिलाए जाने की मांग की थी, क्योंकि वह मुकदमे के दौरान अपने बयान से मुकर गई थी और अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया था। न्यायमूर्ति आलोक अराधे ने कर्नाटक राज्य कानूनी सहायता सेवा प्राधिकरण से 7 लाख रुपये मुआवजा दिलाए जाने की मांग वाली इस याचिका को खारिज करते हुए कहा- ''कर्नाटक पीड़ित मुआवजा योजना 2007 के प्रासंगिक खंडों को देखने से, यह स्पष्ट है कि पीड़िता को जांच और मुकदमे के दौरान...

चेक बाउंस के अपराध में दोषी पाए गए मृत व्यक्ति के वारिसों को दोष सिद्धि को चुनौती देने का अधिकार
चेक बाउंस के अपराध में दोषी पाए गए मृत व्यक्ति के वारिसों को दोष सिद्धि को चुनौती देने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराए जा चुके मृतक व्यक्ति के कानूनी उत्तराधिकारी को यह साबित करने के लिए अपराध सिद्धि को चुनौती देने का अधिकार है कि संबंधित व्यक्ति निर्दोष था। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने एम अब्बास हाजी बनाम टी एन चैनाकेशव मामले में मृतक की ओर से दायर मुकदमे को जारी रखने को लेकर कानूनी उत्तराधिकारी का अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा, " ऐसे मामलों में कानूनी उत्तराधिकारी न जुर्माना देने के...

अवैध विक्रय समझौते को वादी के पक्ष में लागू नहीं किया जा सकता,  पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अवैध विक्रय समझौते को वादी के पक्ष में लागू नहीं किया जा सकता, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून के विरुद्ध किये गये किसी भी इकरारनामे पर वादी को हक नहीं दिया जा सकता, यह जानते हुए भी कि कानून-विरोधी करार में प्रतिवादी भी शामिल था और इससे उसे लाभ हुआ है। इकरारनामे की शर्तों पर अमल करने (स्पिसिफिक परफॉर्मेंस) से संबंधित इस मुकदमे में यह सवाल उठाया गया था कि वादी के पक्ष में 'बाले वेंकटरमनप्पा' द्वारा 15 मई 1990 को किया गया विक्रय समझौता (एग्रीमेंट टू सेल) लागू होगा या नहीं? यह पाया गया था कि यह विक्रय समझौता रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 61 के विरुद्ध था। इसी...

हथियारों से लैस आरोपी पक्ष इस बात का लाभ नहीं उठा सकता कि झगड़ा अचानक हुआ था,  पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
हथियारों से लैस आरोपी पक्ष इस बात का लाभ नहीं उठा सकता कि झगड़ा अचानक हुआ था, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने ग़ौर करते हुए कहा कि जब आरोपी पक्ष अपराध स्थल पर हथियारों से लैस होकर आया तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि अपराध झगड़े के दौरान उत्तेजना के क्षण में नहीं हुआ और इसलिए आईपीसी के धारा 300 के अपवाद 4 के तहत राहत का दावा नहीं किया जा सकता है। गुरु @ गुरूबरन बनाम राज्य मामले में अपील में हत्या के आरोपी की दलील यह थी कि यह अपराध हत्या का नहीं बल्कि हत्या के प्रयास जिसे कि हत्या नहीं कहा जा सकता, का है और यह मामला आईपीसी की धारा 300 के अपवाद 4 के तहत आएगा। आईपीसी की धारा 300 के...

वसीयत या उपहार में दी गयी पिता की स्वयंअर्जित सम्पत्ति, पुत्र के लिए भी स्वयंअर्जित सम्पत्ति, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
वसीयत या उपहार में दी गयी पिता की स्वयंअर्जित सम्पत्ति, पुत्र के लिए भी स्वयंअर्जित सम्पत्ति, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि मिताक्षरा उत्तराधिकार कानून के अनुसार, पिता की स्वयं अर्जित सम्पदा यदि वसीयत/उपहार के तौर पर पुत्र को दी जाती है तो वह स्वयं अर्जित सम्पदा की श्रेणी में ही रहेगी और यह पैतृक सम्पत्ति तब तक नहीं कहलाएगी, जब तक वसीयतनामा में इस बारे में अलग से जिक्र न किया गया हो। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ गोविंदभाई छोटाभाई पटेल एवं अन्य बनाम पटेल रमणभाई माथुरभाई मामले में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की सुनवाई कर रही थी। ...