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निजी अस्पतालों में मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के एकसमान उपचार के लिए पर्याप्त दिशा-निर्देश : दिल्ली हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
26 Oct 2019 5:36 AM GMT
निजी अस्पतालों में मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के एकसमान उपचार के लिए पर्याप्त दिशा-निर्देश : दिल्ली हाईकोर्ट
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि निजी अस्पतालों में मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को एक समान (बिना भेदभाव) उपचार सुनिश्चित कराने के लिए दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के पास पर्याप्त दिशा-निर्देश और गाइड लाइन हैं।

दिल्ली सरकार द्वारा एक याचिका के संबंध में दायर जवाबी हलफनामे को देखते हुए, न्यायमूर्ति डी.एन पटेल और न्यायमूर्ति हरि शंकर की खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे से निपटने के लिए पहले से ही दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। ऐसे में अदालत द्वारा इस मामले में और नए निर्देश जारी करने की आवश्यकता नहीं है।

जनहित याचिका की थी दायर

इस जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि दिल्ली सरकार या स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को परमादेश जारी किया जाए ताकि वह निजी अस्पतालों में मानसिक रूप से अक्षम/विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों के उपचार के लिए नए दिशानिर्देश, नियम और विनियमन जारी कर सके।

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि निजी अस्पतालों को कहा जाए कि वह मानसिक बीमारी और विशेष जरूरतों वाले व्यक्तियों के इलाज के लिए एक अलग विभाग की सुविधा उपलब्ध कराएं या एक अलग विभाग बनाएं।

अदालत का निर्णय

मौजूदा नियमों या विनियमनों के पर्याप्त कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर ध्यान देते हुए, अदालत ने कहा कि-

'यदि प्रतिवादियों के ध्यान में कोई ऐसा मामला लाया जाता है, जिसमें उनके द्वारा बनाए गए किसी कानून, नियमों, विनियमों या नीतियों का उल्लंघन किया गया है तो प्रतिवादी ऐसा करने वाले अस्पताल या उनके प्रबंधन या उनके डॉक्टर के खिलाफ उन कानून, नियमों, विनियमों और सरकारी नीतियों के तहत कार्यवाही कर सकते हैं जो उस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर लागू होते हैं, बशर्तें इसके लिए पहले उनको अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए।'



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