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Supreme Court Tractor Rally Of Farmers
किसानों का विरोध प्रदर्शन : सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों के 43 नेताओं को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किसान संगठनों के 43 नेताओं को नोटिस जारी किया, जो पिछले साल संसद द्वारा पारित तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।हरियाणा राज्य ने विरोध के हिस्से के रूप में दिल्ली-एनसीआर सीमा पर सड़क नाकेबंदी के खिलाफ नोएडा निवासी द्वारा दायर एक रिट याचिका में अतिरिक्त प्रतिवादी के रूप में 43 किसान नेताओं को पार्टी बनाने के लिए आवेदन दायर किया था।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने प्रस्तावित नए प्रतिवादियों को हरियाणा के आवेदन पर नोटिस...

लखीमपुर खीरी हादसा- जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता: सुप्रीम कोर्ट
लखीमपुर खीरी हादसा- "जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता": सुप्रीम कोर्ट

भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लखीमपुर खीरी की हालिया घटना का उल्लेख करते हुए इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' बताया।न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि जब इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता।न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा,"जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता है। संपत्ति को नुकसान और शारीरिक क्षति हुई है और कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता।"जस्टिस सीटी रविकुमार ने कहा,"और मौतें...

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज किया, जिसमें कदाचार के आरोप में NEET-UG 2021 को रद्द करने की मांग की गई थी; कहा- लाखों छात्रों को पीड़ित नहीं बनाया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज किया, जिसमें कदाचार के आरोप में NEET-UG 2021 को रद्द करने की मांग की गई थी; कहा- "लाखों छात्रों को पीड़ित नहीं बनाया जा सकता"

सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक कदाचार और पेपर लीक के आरोपों के मद्देनजर 12 सितंबर, 2021 को आयोजित NEET-UG, 2021 परीक्षा को रद्द करने और NEET-UG परीक्षा नए स‌िरे आयोजित करने की मांग वाली याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, "छद्मरूपण और पेपर लीक के उदाहरण परीक्षा में बैठने वाले लाखों छात्रों के लिए हानिकारक नहीं हो सकते हैं।"पीठ ने याचिकाकर्ता की एडवेंचरस होने के कारण आलोचना की और चेतावनी दी कि मामले जुर्माना लगाया जाएगा।जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर...

राज्य COVID से मरने वाले व्यक्तियों के परिजनों को मुआवजे से इस आधार पर इनकार नहीं करेंगे कि मृत्यु प्रमाण पत्र में COVID कारण नहीं लिखा है: सुप्रीम कोर्ट
राज्य COVID से मरने वाले व्यक्तियों के परिजनों को मुआवजे से इस आधार पर इनकार नहीं करेंगे कि मृत्यु प्रमाण पत्र में COVID कारण नहीं लिखा है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि कोई भी राज्य COVID से मरने वाले व्यक्तियों के परिजनों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि से केवल इस आधार पर इनकार नहीं करेगा कि मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु के कारण के रूप में COVID का उल्लेख नहीं है।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने COVID मौत के मामलों में मुआवजा देने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को मंजूरी देते हुए आदेश पारित किया।पीठ ने आदेश में कहा, "कोई भी राज्य इस आधार पर अनुग्रह राशि से इनकार नहीं...

किसान महापंचायत ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, हम राजमार्ग अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों का हिस्सा नहीं
किसान महापंचायत ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, "हम राजमार्ग अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों का हिस्सा नहीं"

किसान संगठन 'किसान महापंचायत' ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा है कि वह दिल्ली-एनसीआर सीमा पर राजमार्गों को अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों का हिस्सा नहीं है।'किसान महापंचायत' ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया है कि यह उन प्रदर्शनकारियों के समूह का हिस्सा नहीं है जिन्होंने पुलिस या सुरक्षाकर्मियों को रोका है।हलफनामे में कहा गया है कि,"...याचिकाकर्ता किसान महापंचायत न तो उन प्रदर्शनकारियों का हिस्सा है, जिन्हें किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस/सुरक्षा कर्मियों द्वारा रोका गया है और न...

केवल आपराधिक अपील के लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
केवल आपराधिक अपील के लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक अपील लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता है। मामले में आवेदक को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 468, 471, 477 ए सहपठित धारा 13 (2) सहपठित और 13(1) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दोषी ठहराया गया था। इसके खिलाफ उसने अपील दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। हालांकि मामले में सजा को घटाकर एक साल कर दिया गया। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील विचाराधीन है।अपीलकर्ता ने पासपोर्ट के...

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग तभी की जा सकती है जब अधिकारी पात्रता मानदंड को पूरा करता हो; इस्तीफा कभी भी हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट
'स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति' की मांग तभी की जा सकती है जब अधिकारी पात्रता मानदंड को पूरा करता हो; इस्तीफा कभी भी हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक व्यक्ति अपनी सेवा के दौरान किसी भी समय इस्तीफा दे सकता है, लेकिन वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए तभी मांग कर सकता है, जब वह पात्रता मानदंडों को पूरा करता हो।न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने 'भारत सरकार एवं अन्य बनाम अभिराम वर्मा' मामले में फैसले सुनाते हुए कहा, "एक व्यक्ति अपनी सेवा के दौरान किसी भी समय इस्तीफा दे सकता है, हालांकि, एक अधिकारी समय से पहले / स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए नहीं कह सकता है जब तक कि वह पात्रता मानदंडों को पूरा...

हमारे सामने बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से जेल में बंद कैदियों से जुड़े हैं, कानूनी सहायता तक और अधिक पहुंच के लिए एक प्रणाली क्यों नहीं बनाई जा सकती? : जस्टिस एस के कौल
'हमारे सामने बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से जेल में बंद कैदियों से जुड़े हैं, कानूनी सहायता तक और अधिक पहुंच के लिए एक प्रणाली क्यों नहीं बनाई जा सकती?' : जस्टिस एस के कौल

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने शनिवार को कहा, "जब हम उपलब्ध कानूनी सहायता के साथ देश में नामांकित वकीलों की संख्या की तुलना करते हैं, विशेष रूप से समाज के सामाजिक-आर्थिक स्तर के संदर्भ में, जहां बड़ी संख्या में वादी मुकदमेबाजी का खर्च नहीं उठा सकते हैं, तो यह चिंता का विषय है।"साथ ही जस्टिस कौल ने जोर देकर कहा, ''कानूनी सहायता देने वाले को अपने काम के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए। नहीं तो आप जो करते हैं उसमें आपका दिल नहीं लगेगा। इसीलिए जस्टिस चंद्रचूड़ ने केवल पैनल में शामिल वकीलों के बजाय देश के...

मोटर दुर्घटना दावा - न्यूनतम वेतन अधिसूचना वेतन प्रमाण पत्र के अभाव में मृतक की आय तय करने का एक पूर्ण पैमाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
मोटर दुर्घटना दावा - न्यूनतम वेतन अधिसूचना वेतन प्रमाण पत्र के अभाव में मृतक की आय तय करने का एक पूर्ण पैमाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना मामले में मुआवजे की गणना पर कहा है कि केवल इसलिए कि दावेदार ने मृतक की मासिक आय का दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया है, मृतक की आय की गणना के लिए न्यूनतम मजदूरी का निम्नतम स्तर अपनाने का कोई औचित्य नहीं है।कोर्ट ने चंद्रा@ चंदा बनाम मुकेश कुमार यादव और अन्य के मामले में कहा, "वेतन प्रमाण पत्र के अभाव में न्यूनतम वेतन अधिसूचना एक पैमाना हो सकती है लेकिन साथ ही मृतक की आय तय करने के लिए एक पूर्ण तरीका नहीं हो सकता है। रिकॉर्ड पर दस्तावेजी साक्ष्य के अभाव में कुछ...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
कंपनी के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत के मामले में चेयरमैन, निदेशकों और अधिकारियों को उनकी व्यक्तिगत भूमिका पर लगाए गए विशिष्ट आरोपों के बिना समन नहीं किया जा सकताः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि किसी कंपनी के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक/कार्यकारी निदेशक आदि को आपराधिक मामले में समन जारी नहीं किया जा सकता है(यदि शिकायत में उनकी भूमिका के बारे में विशिष्ट आरोप नहीं लगाए गए हैं), क्योंकि उन्हें कंपनी के अपराधिक कृत्यों के लिए वैकल्पिक रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है।सर्वाेच्च न्यायालय ने रवींद्रनाथ बाजपे बनाम मैंगलोर स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड व अन्य के मामले में कहा कि, ''केवल इसलिए कि वे ए1 और ए6 के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक/कार्यकारी निदेशक और/या उप...

हमारे सामने बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से जेल में बंद कैदियों से जुड़े हैं, कानूनी सहायता तक और अधिक पहुंच के लिए एक प्रणाली क्यों नहीं बनाई जा सकती? : जस्टिस एस के कौल
हमारे सामने बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से जेल में बंद कैदियों से जुड़े हैं, कानूनी सहायता तक और अधिक पहुंच के लिए एक प्रणाली क्यों नहीं बनाई जा सकती? : जस्टिस एस के कौल

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने शनिवार को कहा कि जब हम उपलब्ध कानूनी सहायता के साथ देश में नामांकित वकीलों की संख्या की तुलना करते हैं, विशेष रूप से समाज के सामाजिक-आर्थिक स्तर के संदर्भ में, जहां बड़ी संख्या में वादी मुकदमेबाजी का खर्च नहीं उठा सकते हैं, तो यह चिंता का विषय है।जस्टिस कौल ने जोर देकर कहा, ''कानूनी सहायता देने वाले को अपने काम के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए। नहीं तो आप जो करते हैं उसमें आपका दिल नहीं लगेगा। इसीलिए जस्टिस चंद्रचूड़ ने केवल पैनल में शामिल वकीलों के बजाय देश के सभी...

सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (27 सितंबर 2021 से एक अक्टूबर 2021) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं, सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप।पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।देश में नौकरशाही और पुलिस अधिकारी जैसे व्यवहार कर रहे हैं, उस पर मुझे बहुत आपत्त‌ियां है: सीजेआई रमानाचीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमाना ने शुक्रवार को देश में नौकरशाही विशेषकर पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर आपत्ति व्यक्त की। उन्होंने कहा, "मुझे इस बात पर बहुत आपत्ति है कि नौकरशाही कैसे विशेष रूप से इस...

जस्टिस यू.यू. ललित ने सीनियर वकीलों से हर साल स्वेच्छा से कम से कम तीन प्रो-बोनो मामले उठाने का आग्रह किया
जस्टिस यू.यू. ललित ने सीनियर वकीलों से हर साल स्वेच्छा से कम से कम तीन प्रो-बोनो मामले उठाने का आग्रह किया

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस यू. यू. ललित ने माना कि पिछले 25 सालों में कई बड़े और बहुत मजबूत कदम उठाने के बावजूद कानूनी सहायता और कानूनी जागरूकता देश के हर नुक्कड़ और कोने तक नहीं पहुंच पाई है।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित दो अक्टूबर, 2021 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली से अखिल भारतीय जागरूकता और आउटरीच अभियान के शुभारंभ के अवसर पर बोल रहे थे। भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मुख्य अतिथि थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमाना भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कार्यक्रम...

विलय का सिद्धांत एसएलपी खारिज करने के आदेश पर लागू नहीं; लेकिन अगर आदेश कानून का सिद्धांत बताता है, तो यह बाध्यकारी है: सुप्रीम कोर्ट
विलय का सिद्धांत एसएलपी खारिज करने के आदेश पर लागू नहीं; लेकिन अगर आदेश कानून का सिद्धांत बताता है, तो यह बाध्यकारी है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि भले ही विलय का सिद्धांत विशेष अनुमति याचिका खारिज करने के आदेश पर लागू नहीं होता है, लेकिन यदि अगर ऐसा आदेश कानून के सिद्धांत की बात करता है, तो यह देश की सभी अदालतों और न्यायाधिकरणों पर बाध्यकारी होगा।कोर्ट ने कहा, "कानून के बिंदुओं के अलावा आदेश में निहित बयान पार्टियों और उस अदालत या न्यायाधिकरण पर बाध्यकारी होगा, जिसके आदेश को न्यायिक अनुशासन के सिद्धांत पर चुनौती दी गई थी, क्योंकि यह न्यायालय देश का सर्वोच्च न्यायालय है। किसी अदालत या ट्रिब्यूनल को या...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान के बाद के चरण में शिकायत मामलों में जमानत देने पर दिशा-निर्देश मांगने वाले वकीलों के समूह की जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने एक संगठन 'दुर्भावनापूर्ण अभियोजन के खिलाफ वकील' की रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। याच‌िका में दिशानिर्देश तैयार करने की मांग गई है, ताकि जांच के दरमियान गिरफ्तार नहीं किए गए आरोपी व्यक्तियों को शिकायतों का संज्ञान लेने पर मजिस्ट्रेट/विशेष न्यायालयों द्वारा हिरासत में भेजे जाने से रोकें। कोर्ट ने कहा कि सतिंदर कुमार अंतिल बनाम सीबीआई मामले में चार्जशीट पर संज्ञान लेने के संदर्भ में वह इसी तरह के मुद्दे पर विचार कर रही है। इसलिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता-संगठन के वकील...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
फैमिली सैटलमेंट डॉक्यूमेंट, जिनमें केवल पिछला लेनदेन दर्ज हो, उन्हें र‌जिस्टर करने की जरूरत नहींः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है परिवार समझौता दस्तावेज (फैमिली सैटलमेंट डॉक्यूमेंट), जिनमें केवल मौजूदा व्यवस्था और पिछले लेनदेन का निर्धारण किया गया हो, वह पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 (1) (बी) के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकरण योग्य नहीं होगा, यदि यह स्वयं अचल संपत्तियों में अधिकारों का निर्माण, घोषणा, सीमा या समाप्ति नहीं करता है। इसलिए, पंजीकरण अधिनियम की धारा 49 के तहत इस प्रकार के दस्तावेज को प्रतिबंध के जरिए समाप्त नहीं किया जाएगा।जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस एसआर भट की पीठ ने कोरुकोंडा चलपति राव...

सभी के लिए समान न्याय सुनिश्चित किए बिना संवैधानिक गारंटी निरर्थक: सीजेआई एनवी रमाना
सभी के लिए समान न्याय सुनिश्चित किए बिना संवैधानिक गारंटी निरर्थक: सीजेआई एनवी रमाना

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने शनिवार को कहा कि समानता की संवैधानिक गारंटी की सुरक्षा के लिए सभी के लिए समान न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है।सीजेआई और संरक्षक-इन-चीफ, NALSA दो अक्टूबर, 2021 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली से अखिल भारतीय जागरूकता और आउटरीच अभियान के शुभारंभ पर बोल रहे थे।इस कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू, न्यायमूर्ति यू यू ललित, कार्यकारी अध्यक्ष, नालसा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर,...

कानून मंत्री ने आश्वासन दिया है कि हाईकोर्ट जजों के लिए की गई 106 सिफारिशों को जल्द ही मंजूरी दी जाएगी: सीजेआई एनवी रमाना
कानून मंत्री ने आश्वासन दिया है कि हाईकोर्ट जजों के लिए की गई 106 सिफारिशों को जल्द ही मंजूरी दी जाएगी: सीजेआई एनवी रमाना

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार ने मई से अब तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए कॉलेजियम द्वारा की गई 106 सिफारिशों में से कुछ को मंजूरी दे दी है और केंद्रीय कानून मंत्री ने उन्हें सूचित किया है कि बाकी सिफारिशों को एक या दो दिन के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा।सीजेआई रमाना ने कहा, "लोकतंत्र की गुणवत्ता न्याय की गुणवत्ता पर टिकी हुई है; एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए एक जीवंत न्यायपालिका आवश्यक है। COVID-19 महामारी ने न्यायपालिका सहित कई संस्थानों के लिए कई...

साक्ष्य अधिनियम की धारा 92 : मौखिक साक्ष्य सिर्फ जाली दस्तावेज दर्शाने के लिए स्वीकार्य: सुप्रीम कोर्ट
साक्ष्य अधिनियम की धारा 92 : मौखिक साक्ष्य सिर्फ जाली दस्तावेज दर्शाने के लिए स्वीकार्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 92 एक लिखित दस्तावेज पर मौखिक साक्ष्य देने पर रोक लगाती है, सिवाय यह साबित करने के कि दस्तावेज एक जाली लेनदेन को दर्शाता है।न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने एलआर और अन्य द्वारा प्लासीडो फ्रांसिस्को पिंटो (डी) बनाम जोस फ्रांसिस्को पिंटो और अन्य मामले में कहा, "... एक लिखित समझौते के मौखिक साक्ष्य को बाहर रखा गया है, सिवाय इसके कि जब दस्तावेज़ को एक जाली लेनदेन का आरोप लगाने की मांग की जाती है।"कोर्ट ने...

मोटर दुर्घटना दावा - परस्पर विरोधी तथ्यों के मामले में ट्रिब्यूनल के समक्ष दर्ज साक्ष्य को एफआईआर की सामग्री पर अधिक महत्व दिया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
मोटर दुर्घटना दावा - परस्पर विरोधी तथ्यों के मामले में ट्रिब्यूनल के समक्ष दर्ज साक्ष्य को एफआईआर की सामग्री पर अधिक महत्व दिया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना के दावे में लापरवाही के मुद्दे का फैसला करते हुए कहा है कि यदि ट्रिब्यूनल के समक्ष कोई सबूत एफआईआर में दी गई सामग्री के विपरीत है तो ट्रिब्यूनल के समक्ष दर्ज किए गए साक्ष्य को एफआईआर की सामग्री पर अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय बीमा कंपनी लिमिटेड बनाम चामुंडेश्वरी और अन्य के मामले में की।जस्टिस सुभाष रेड्डी और जस्टिस हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से दायर अपील पर अपना फैसला...