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अभियुक्त का आचरण, अपराध की गंभीरता, सामाजिक प्रभाव आदि जमानत रद्द करने के आधार हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को दी गई जमानत को सुपीरियर कोर्ट ही रद्द कर सकता है, यदि अदालत ने अप्रासंगिक कारकों पर विचार किया है, या रिकॉर्ड पर उपलब्ध प्रासंगिक सामग्री की अनदेखी की है, जो जमानत देने के आदेश को कानूनी रूप से अस्थिर बनाता है।सीजेआई एनवी रमाना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ ने एक फैसले में कहा, "अपराध की गंभीरता, आरोपी का आचरण और जब जांच सीमा पर हो तो न्यायालय द्वारा अनुचित क्षमा का सामाजिक प्रभाव भी कुछ स्थितियों में से हैं, जहां एक सुपीरियर कोर्ट...
पोंजी स्कीम में कई राज्यों में कई FIR:' क्या किसी केंद्रीय जांच एजेंसी की अलग शाखा द्वारा जांच कराई जा सकती है?' सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को हल खोजने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (एक अक्टूबर 2021) को एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र को उन मामलों से निपटने के लिए समाधान के साथ आने के लिए कहा है जिसमें कई राज्यों में किसी पोंजी घोटाले में एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। ये कदम उस याचिका पर उठाया गया है जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज 29 एफआईआर को एक साथ जोड़ने और किसी भी उचित जांच एजेंसी या हरियाणा राज्य में ट्रांसफर करने की मांग की है, जो लोगों से झूठा वादा कर करोड़ों हड़पने के मामले में हिरासत में है।न्यायमूर्ति एलएन...
अगर अनुबंध में ब्याज के भुगतान पर प्रतिबंध को लेकर स्पष्ट उपबंध है, तो मध्यस्थ वादकालीन ब्याज मंजूर नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक मध्यस्थ वादकालीन ब्याज मंजूर नहीं कर सकता है, यदि अनुबंध में एक विशिष्ट उपबंध होता है जो स्पष्ट रूप से ब्याज के भुगतान को रोकता है।न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि ऐसा संविदात्मक उपबंध भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 28 का उल्लंघन नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996, स्पष्ट रूप से एक मध्यस्थ की शक्ति को पूर्व-संदर्भ और वादकालीन ब्याज देने से प्रतिबंधित करता है, जब दोनों पक्ष स्वयं इसके विपरीत सहमत...
कोविड से मौत- मृतकों के परिजनों को जरूरत पड़ने पर अस्पताल तमाम दस्तावेज मुहैया कराएंगे: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन सभी अस्पतालों, जो कोविड रोगियों को इलाज प्रदान करते हैं, उन्हें निर्देश दिया की मांग किए जाने पर महामारी से मरने वालों के परिवार के सदस्यों को इलाज आदि के सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।कोविड पीड़ितों के परिवारों को प्रदान की जा रही अनुग्रह राशि प्राप्त करने में परिजनों को सक्षम करने के लिए मृत्यु के कारण के रूप में कोविड को स्थापित करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में ये अवलोकन किए गए हैं।न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने...
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में रिक्त पदों को जल्द ही भरा जाए: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अजेश लूथरा, अध्यक्ष केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ("कैट") बार एसोसिएशन द्वारा 4 जनवरी, 2021 के आदेश का पालन न करने के संबंध में एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ट्रिब्यूनल, अपीलीय न्यायाधिकरण और अन्य प्राधिकरण (सदस्यों की योग्यता, अनुभव और सेवा की अन्य शर्तें) नियम, 2020 के अनुसार कैट में 4 पदों पर नियुक्ति करे।कोर्ट ने आगे कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में रिक्तियों को भरा जाना चाहिए, भले ही इसके बारे में कोई विवाद हो। पीठ के...
'हॉट सीट पर रहे बिना सरकार और अदालत की आलोचना करना बहुत आसान है': सुप्रीम कोर्ट ने महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के संबंध में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महामारी की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता की कमी के संबंध में सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित करने की भी मांग की गई थी।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने यह कहते हुए कि याचिका उस धारणा के साथ शुरू होती है जो अपने आप में संदिग्ध है, कहा कि शीर्ष न्यायालय...
प्रथम अपीलीय न्यायालय सभी मुद्दों और साक्ष्यों से निपटे, सीपीसी की प्रक्रिया का पालन करे: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम अपीलीय न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अपने निष्कर्षों को दर्ज करने से पहले सभी मुद्दों और पक्षकारों द्वारा दिए गए साक्ष्यों से निपटे।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का पालन करने के बाद पहली अपील पर फैसला किया जाना चाहिए।इस मामले में, ट्रायल कोर्ट ने वादी द्वारा दायर एक विशिष्ट प्रदर्शन सूट को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उसने किरायेदारों के साथ ही संपत्ति खरीदने की इच्छा नहीं दिखाई थी और...
"प्रॉक्सी बैटल न लड़ें" : सुप्रीम कोर्ट ने वालयार मामले में पुलिस उपाधीक्षक के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को "जस्टिस फॉर वालयार किड्स फोरम" नामक एक एनजीओ द्वारा दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में केरल हाईकोर्ट द्वारा पुलिस उपाधीक्षक (Deputy Superintend of Police) के खिलाफ की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी, जो केरल के वालयार मामले में दो नाबालिग बच्चियों के बलात्कार और हत्या के केस में जांच अधिकारी थे।न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि एनजीओ एक "छद्म लड़ाई" (Proxy Battle)नहीं लड़ सकता और कहा कि...
सुपरटेक कंपनी मामला : सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में दो 40 मंजिला इमारतों को ध्वस्त करने के अपने आदेश को संशोधित करने की मांग वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुपरटेक के एक विविध आवेदन को खारिज कर दिया। इस आवेदन में अदालत के 31 अगस्त के फैसले में संशोधन की मांग की गई थी।सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित एक आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें एमराल्ड कोर्ट परियोजना में सुपरटेक लिमिटेड नोएडा में भवन मानदंडों के उल्लंघन के लिए ट्विन 40 मंजिला टावरों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था।संशोधन आवेदन ने ध्वस्त करने के लिए निर्देशित ट्विन टावरों में से एक को बनाए रखने की मांग की।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़...
किसानों का विरोध प्रदर्शन : सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों के 43 नेताओं को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किसान संगठनों के 43 नेताओं को नोटिस जारी किया, जो पिछले साल संसद द्वारा पारित तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।हरियाणा राज्य ने विरोध के हिस्से के रूप में दिल्ली-एनसीआर सीमा पर सड़क नाकेबंदी के खिलाफ नोएडा निवासी द्वारा दायर एक रिट याचिका में अतिरिक्त प्रतिवादी के रूप में 43 किसान नेताओं को पार्टी बनाने के लिए आवेदन दायर किया था।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने प्रस्तावित नए प्रतिवादियों को हरियाणा के आवेदन पर नोटिस...
लखीमपुर खीरी हादसा- "जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता": सुप्रीम कोर्ट
भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लखीमपुर खीरी की हालिया घटना का उल्लेख करते हुए इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' बताया।न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि जब इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता।न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा,"जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता है। संपत्ति को नुकसान और शारीरिक क्षति हुई है और कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता।"जस्टिस सीटी रविकुमार ने कहा,"और मौतें...
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज किया, जिसमें कदाचार के आरोप में NEET-UG 2021 को रद्द करने की मांग की गई थी; कहा- "लाखों छात्रों को पीड़ित नहीं बनाया जा सकता"
सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक कदाचार और पेपर लीक के आरोपों के मद्देनजर 12 सितंबर, 2021 को आयोजित NEET-UG, 2021 परीक्षा को रद्द करने और NEET-UG परीक्षा नए सिरे आयोजित करने की मांग वाली याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, "छद्मरूपण और पेपर लीक के उदाहरण परीक्षा में बैठने वाले लाखों छात्रों के लिए हानिकारक नहीं हो सकते हैं।"पीठ ने याचिकाकर्ता की एडवेंचरस होने के कारण आलोचना की और चेतावनी दी कि मामले जुर्माना लगाया जाएगा।जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर...
राज्य COVID से मरने वाले व्यक्तियों के परिजनों को मुआवजे से इस आधार पर इनकार नहीं करेंगे कि मृत्यु प्रमाण पत्र में COVID कारण नहीं लिखा है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि कोई भी राज्य COVID से मरने वाले व्यक्तियों के परिजनों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि से केवल इस आधार पर इनकार नहीं करेगा कि मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु के कारण के रूप में COVID का उल्लेख नहीं है।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने COVID मौत के मामलों में मुआवजा देने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को मंजूरी देते हुए आदेश पारित किया।पीठ ने आदेश में कहा, "कोई भी राज्य इस आधार पर अनुग्रह राशि से इनकार नहीं...
किसान महापंचायत ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, "हम राजमार्ग अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों का हिस्सा नहीं"
किसान संगठन 'किसान महापंचायत' ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा है कि वह दिल्ली-एनसीआर सीमा पर राजमार्गों को अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों का हिस्सा नहीं है।'किसान महापंचायत' ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया है कि यह उन प्रदर्शनकारियों के समूह का हिस्सा नहीं है जिन्होंने पुलिस या सुरक्षाकर्मियों को रोका है।हलफनामे में कहा गया है कि,"...याचिकाकर्ता किसान महापंचायत न तो उन प्रदर्शनकारियों का हिस्सा है, जिन्हें किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस/सुरक्षा कर्मियों द्वारा रोका गया है और न...
केवल आपराधिक अपील के लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक अपील लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता है। मामले में आवेदक को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 468, 471, 477 ए सहपठित धारा 13 (2) सहपठित और 13(1) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दोषी ठहराया गया था। इसके खिलाफ उसने अपील दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। हालांकि मामले में सजा को घटाकर एक साल कर दिया गया। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील विचाराधीन है।अपीलकर्ता ने पासपोर्ट के...
'स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति' की मांग तभी की जा सकती है जब अधिकारी पात्रता मानदंड को पूरा करता हो; इस्तीफा कभी भी हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक व्यक्ति अपनी सेवा के दौरान किसी भी समय इस्तीफा दे सकता है, लेकिन वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए तभी मांग कर सकता है, जब वह पात्रता मानदंडों को पूरा करता हो।न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने 'भारत सरकार एवं अन्य बनाम अभिराम वर्मा' मामले में फैसले सुनाते हुए कहा, "एक व्यक्ति अपनी सेवा के दौरान किसी भी समय इस्तीफा दे सकता है, हालांकि, एक अधिकारी समय से पहले / स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए नहीं कह सकता है जब तक कि वह पात्रता मानदंडों को पूरा...
'हमारे सामने बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से जेल में बंद कैदियों से जुड़े हैं, कानूनी सहायता तक और अधिक पहुंच के लिए एक प्रणाली क्यों नहीं बनाई जा सकती?' : जस्टिस एस के कौल
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने शनिवार को कहा, "जब हम उपलब्ध कानूनी सहायता के साथ देश में नामांकित वकीलों की संख्या की तुलना करते हैं, विशेष रूप से समाज के सामाजिक-आर्थिक स्तर के संदर्भ में, जहां बड़ी संख्या में वादी मुकदमेबाजी का खर्च नहीं उठा सकते हैं, तो यह चिंता का विषय है।"साथ ही जस्टिस कौल ने जोर देकर कहा, ''कानूनी सहायता देने वाले को अपने काम के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए। नहीं तो आप जो करते हैं उसमें आपका दिल नहीं लगेगा। इसीलिए जस्टिस चंद्रचूड़ ने केवल पैनल में शामिल वकीलों के बजाय देश के...
मोटर दुर्घटना दावा - न्यूनतम वेतन अधिसूचना वेतन प्रमाण पत्र के अभाव में मृतक की आय तय करने का एक पूर्ण पैमाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना मामले में मुआवजे की गणना पर कहा है कि केवल इसलिए कि दावेदार ने मृतक की मासिक आय का दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया है, मृतक की आय की गणना के लिए न्यूनतम मजदूरी का निम्नतम स्तर अपनाने का कोई औचित्य नहीं है।कोर्ट ने चंद्रा@ चंदा बनाम मुकेश कुमार यादव और अन्य के मामले में कहा, "वेतन प्रमाण पत्र के अभाव में न्यूनतम वेतन अधिसूचना एक पैमाना हो सकती है लेकिन साथ ही मृतक की आय तय करने के लिए एक पूर्ण तरीका नहीं हो सकता है। रिकॉर्ड पर दस्तावेजी साक्ष्य के अभाव में कुछ...
कंपनी के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत के मामले में चेयरमैन, निदेशकों और अधिकारियों को उनकी व्यक्तिगत भूमिका पर लगाए गए विशिष्ट आरोपों के बिना समन नहीं किया जा सकताः सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि किसी कंपनी के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक/कार्यकारी निदेशक आदि को आपराधिक मामले में समन जारी नहीं किया जा सकता है(यदि शिकायत में उनकी भूमिका के बारे में विशिष्ट आरोप नहीं लगाए गए हैं), क्योंकि उन्हें कंपनी के अपराधिक कृत्यों के लिए वैकल्पिक रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है।सर्वाेच्च न्यायालय ने रवींद्रनाथ बाजपे बनाम मैंगलोर स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड व अन्य के मामले में कहा कि, ''केवल इसलिए कि वे ए1 और ए6 के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक/कार्यकारी निदेशक और/या उप...
हमारे सामने बड़ी संख्या में मामले लंबे समय से जेल में बंद कैदियों से जुड़े हैं, कानूनी सहायता तक और अधिक पहुंच के लिए एक प्रणाली क्यों नहीं बनाई जा सकती? : जस्टिस एस के कौल
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने शनिवार को कहा कि जब हम उपलब्ध कानूनी सहायता के साथ देश में नामांकित वकीलों की संख्या की तुलना करते हैं, विशेष रूप से समाज के सामाजिक-आर्थिक स्तर के संदर्भ में, जहां बड़ी संख्या में वादी मुकदमेबाजी का खर्च नहीं उठा सकते हैं, तो यह चिंता का विषय है।जस्टिस कौल ने जोर देकर कहा, ''कानूनी सहायता देने वाले को अपने काम के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए। नहीं तो आप जो करते हैं उसमें आपका दिल नहीं लगेगा। इसीलिए जस्टिस चंद्रचूड़ ने केवल पैनल में शामिल वकीलों के बजाय देश के सभी...
















