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अनुच्छेद 370| ये दलील कि अनुच्छेद 370 को पुनर्जीवित करना मूल संरचना का उल्लंघन होगा,  दूर की कौड़ी है : सुप्रीम कोर्ट [ दिन 15]
अनुच्छेद 370| ये दलील कि अनुच्छेद 370 को पुनर्जीवित करना मूल संरचना का उल्लंघन होगा, " दूर की कौड़ी" है : सुप्रीम कोर्ट [ दिन 15]

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष अनुच्छेद 370 की कार्यवाही के 15 वें दिन, केंद्र सरकार और अन्य उत्तरदाताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष अपनी दलीलें समाप्त कीं। पीठ ने प्रतिवादी पक्ष की दलीलों पर सुनवाई बंद कर दी।सुनवाई के दौरान पीठ ने सीनियर एडवोकेट वी गिरी के इस तर्क पर असहमति जताई कि यदि अनुच्छेद 370 को पुनर्जीवित किया गया तो यह भारतीय संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन होगा। पीठ ने...

निवारक हिरासत के आदेश ड्रॉप ऑफ ए हैट की तरह पारित नहीं किए जा सकते, कुछ अफसर स्वतंत्रता को कुचल रहे हैं: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना पुलिस को फटकार लगाई
निवारक हिरासत के आदेश 'ड्रॉप ऑफ ए हैट' की तरह पारित नहीं किए जा सकते, कुछ अफसर स्वतंत्रता को कुचल रहे हैं: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना पुलिस को फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तेलंगाना राज्य में भारत के संविधान के तहत लोगों को दी गई स्वतंत्रता की गारंटी पर विचार किए बिना 'ड्रॉप ऑफ ए हैट' की तरह निवारक हिरासत के आदेश पारित करने की बढ़ती प्रवृत्ति की निंदा की।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने तेलंगाना राज्य के अधिकारियों को याद दिलाया कि संविधान के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों पर विचार किए बिना निवारक हिरासत अधिनियम के कठोर प्रावधानों को लागू नहीं किया जाना चाहिए:“तेलंगाना राज्य में प्रचलित एक खतरनाक प्रवृत्ति हमारे ध्यान से...

धारा 323 सीआरपीसी| गवाही/गवाह की मुख्य जांच के बाद भी शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
धारा 323 सीआरपीसी| गवाही/गवाह की मुख्य जांच के बाद भी शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 323 के तहत शक्ति का प्रयोग मजिस्ट्रेट किसी गवाह की गवाही या मुख्य परीक्षण के बाद भी कर सकता है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि धारा 323 के तहत शक्ति के प्रयोग के ‌लिए मुख्य आवश्यकता यह है कि संबंधित विद्वान मजिस्ट्रेट को यह महसूस होना चाहिए कि मामला ऐसा है, जिसकी सुनवाई सत्र न्यायालय द्वारा की जानी चाहिए।धारा 323 उस प्रक्रिया से संबंधित है, जब जांच या सुनवाई शुरू होने के बाद मजिस्ट्रेट को लगता है कि मामला कमिट किया जाना...

जन्म से ही किसी को अपराधी करार देना और इसे वंशानुगत घटना मानना कुछ गलत ऐतिहासिक धारणाओं पर आधारित है: जस्टिस विश्वनाथन
जन्म से ही किसी को अपराधी करार देना और इसे वंशानुगत घटना मानना कुछ गलत ऐतिहासिक धारणाओं पर आधारित है: जस्टिस विश्वनाथन

(संदेश गांगुर्डे और विकास यादव)क्रिमिनल ट्राइब एक्ट, 1871 (सीटीए) को निरस्त करने की 71वां वर्षगांठ 31अगस्त को मनायी गयी।उल्लेखनीय है कि डिनोटिफाइड जनजा‌तियों से संबंधित कई समुदाय 31 अगस्त को विमुक्त दिवस के रूप में मनाते हैं। ‌य‌ह दिन 1952 में क्रिमिनल ट्राइब एक्ट को निरस्त किए जाने के बाद उस कानून से आजादी के दिन के रूप में मनाया जाता है।विमुक्त दिवस की पूर्व संध्या पर लाइव लॉ के सहयोग से आपराधिक न्याय और पुलिस जवाबदेही परियोजना ने एक व्याख्यान का आयोजन किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के...

सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 370 मामले के याचिकाकर्ता से भारत की संप्रभुता को स्वीकार करने और भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा जाहिर करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 370 मामले के याचिकाकर्ता से भारत की संप्रभुता को स्वीकार करने और भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा जाहिर करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं के समूह में प्रमुख याचिकाकर्ता नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और सांसद मोहम्मद अकबर लोन से एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा, जिसमें लोन बिना शर्त यह स्वीकार करें कि जम्मू-कश्मीर वह भारत का अभिन्न अंग है और वह भारत के संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं। आज सुबह, कश्मीरी पंडितों के संगठन "रूट्स इन कश्मीर" ने संविधान पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया था कि लोन ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाकिस्तान के समर्थन में नारे...

सुप्रीम कोर्ट ने कथित हेट स्पीच पर अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली बृंदा करात की याचिका पर सुनवाई  स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट ने कथित हेट स्पीच पर अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली बृंदा करात की याचिका पर सुनवाई स्थगित की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता बृंदा करात और केएम तिवारी की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। इस याचिका में भारतीय जनता पार्टी के नेता अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ जनवरी 2020 में चुनावी रैलियों के दौरान कथित नफरत भरे भाषण (Hate Speech) के आरोप में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने की मांग की गई है। अब सुनवाई 3 अक्टूबर को होनी है। हालांकि अदालत ने मामले को एक महीने बाद फिर से सूचीबद्ध करने का आदेश दिया, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि दिल्ली...

अनुच्छेद 370: मुख्य याचिकाकर्ता पर पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट जवाब मांगेगा
अनुच्छेद 370: मुख्य याचिकाकर्ता पर पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट जवाब मांगेगा

अनुच्छेद 370 मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में मुख्य याचिकाकर्ता, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता मोहम्मद अकबर लोन पर पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने का आरोप लगा है।मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ ने सोमवार को कहा कि वह इस संबंध में मुख्य याचिकाकर्ता से जवाब मांगेगी।आज सुबह जैसे ही पीठ बैठी, कश्मीरी पंडितों के संगठन "रूट्स इन कश्मीर" की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनकी जानकारी में एक "आश्चर्यजनक तथ्य" आया है, जिसके बारे में उन्होंने एक हलफनामा दायर किया है।उन्होंने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस...

वकील का रियल एस्टेट एजेंट के रूप में काम करना और क्लाइंट की संपत्ति बेचना कदाचार : सुप्रीम कोर्ट ने वकील पर बीसीआई का जुर्माना बरकरार रखा
वकील का रियल एस्टेट एजेंट के रूप में काम करना और क्लाइंट की संपत्ति बेचना कदाचार : सुप्रीम कोर्ट ने वकील पर बीसीआई का जुर्माना बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक वकील को घोर पेशेवर कदाचार (professional misconduct) के लिए 5 साल के लिए लॉ प्रैक्टिस से निलंबित करने के बार काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले को बरकरार रखा, क्योंकि यह पता चला था कि वकील ने संपत्ति से संबंधित मामले में अपने ही क्लाइंट से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल की थी और बाद में संपत्ति बेच दी। जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ बीसीआई के फैसले के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने पेशेवर कदाचार के कारण वकील को प्रैक्टिस से 5 साल के लिए निलंबित कर...

सुप्रीम कोर्ट ने टैक्सी सर्विस संचालित करने वाले वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने टैक्सी सर्विस संचालित करने वाले वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टैक्सी सर्विस संचालित करने वाले एक वकील के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को बरकरार रखा। बार ने वकील को उसके पेशेवर कदाचार के कारण एक वर्ष के लिए प्रैक्टिस से प्रतिबंधित कर दिया गया था। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ पेशेवर कदाचार के कारण लॉ प्रैक्टिस से रोकने के बीसीआई के फैसले के खिलाफ एक वकील द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। मामला दो प्रमुख आरोपों के इर्द-गिर्द है। सबसे पहले यह स्थापित किया गया कि...

मोटर एक्सीडेंट क्लेम- आय का कोई निश्चित प्रमाण न होने पर मृतक की सामाजिक स्थिति पर विचार किया जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
मोटर एक्सीडेंट क्लेम- आय का कोई निश्चित प्रमाण न होने पर मृतक की सामाजिक स्थिति पर विचार किया जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दिए गए उस अवार्ड को बहाल कर दिया, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्यों के मूल्यांकन में हाईकोर्ट द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण पर निराशा व्यक्त की और MACT का फैसले बहाल कर दिया।कोर्ट ने कहा,“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान प्रकृति के मामले में हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य का आकलन करते हुए मृतक की आय के संबंध में सख्त सबूत की मांग की। वर्तमान प्रकृति के मामले में जहां मुआवजे की मांग की जाती है, वहां आय के...

सीआरपीसी की धारा 311 - गवाह को वापस बुलाने की शक्ति का इस्तेमाल तब किया जाना चाहिए जब उचित फैसले के लिए आवश्यक हो : सुप्रीम कोर्ट
सीआरपीसी की धारा 311 - गवाह को वापस बुलाने की शक्ति का इस्तेमाल तब किया जाना चाहिए जब उचित फैसले के लिए आवश्यक हो : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 311 के तहत एक गवाह द्वारा दायर एक आवेदन को अनुमति दी, जिसमें उसे पूछताछ के लिए फिर से बुलाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया कि उनके प्रारंभिक बयान में, उनके पास कुछ तथ्य लाने का कोई अवसर नहीं था, जो विशेषज्ञ गवाह की जांच के बाद प्रासंगिक हो गए।कोर्ट ने एक मिसाल का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि सीआरपीसी की धारा 311 के तहत शक्ति का इस्तेमाल तब किया जाना चाहिए जब '...यह मामले के उचित...

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम - संपत्ति में उत्तराधिकारियों के हिस्से का पता लगाने के लिए, पहला कदम यह है कि सहदायिक संपत्ति में मृत्यु की तारीख पर मृतक का हिस्सा निर्धारित करे : सुप्रीम कोर्ट
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम - संपत्ति में उत्तराधिकारियों के हिस्से का पता लगाने के लिए, पहला कदम यह है कि सहदायिक संपत्ति में मृत्यु की तारीख पर मृतक का हिस्सा निर्धारित करे : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक सिविल अपील (1 सितंबर 2023) का निपटारा करते हुए टिप्पणी की कि कई बार आज़माया और परखा गया, मिताक्षरा सहदायिक संपत्ति के उत्तराधिकार का मुद्दा लर्ना झील के अमर दैत्य की तरह बार-बार अपना सिर उठाता रहता है। इस मामले में, एक विभाजन वाद वर्ष 1991 में दायर किया गया था और ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 1996 में उस पर फैसला सुनाया था। प्रथम अपीलीय अदालत ने 1999 में अपील खारिज कर दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने 2009 में आंशिक रूप से दूसरी अपील की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष, मुद्दा यह था...

NEET-PG: सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के एमईए नोटीफिकेशन के आधार पर ओसीआई कार्ड धारक के लाभ से वंचित महिला उम्मीदवार को राहत दी
NEET-PG: सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के एमईए नोटीफिकेशन के आधार पर ओसीआई कार्ड धारक के लाभ से वंचित महिला उम्मीदवार को राहत दी

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के जारी किए गए एमईए के एक नोटीफिकेशन के आधार पर ओसीआई कार्ड धारक के लाभ से वंचित की गई एक महिला उम्मीदवार को राहत प्रदान की है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड धारक महिला उम्‍मीदवार की उम्‍मीदवारी खारिज कर दी थी, जिससे परेशान होकर उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज खटखटाया था।सुप्रीम कोर्ट ने ओसीआई उम्मीदवार के रूप में उसके आवेदन की अस्वीकृति को अवैध पाया और उसकी उम्‍मीदवारी पर एम्स और NEET-PG मेडिकल सीटों के लिए काउंसलिंग के अन्य...

भगोड़े अपराधी को केवल असाधारण और दुर्लभ मामलों में अग्रिम जमानत दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
भगोड़े अपराधी को केवल असाधारण और दुर्लभ मामलों में अग्रिम जमानत दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भगोड़े अपराधी को अग्रिम जमानत केवल असाधारण और दुर्लभ मामले में ही दी जा सकती है। अदालत ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा प्रतिवादी को जमानत देने का आदेश रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। उक्त प्रतिवादी को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 82 के तहत भगोड़ा अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित किया गया है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी (हरियाणा राज्य बनाम धर्मराज) की खंडपीठ ने कहा,“प्रतिवादी खुद को भगोड़ा अपराधी घोषित करने वाले आदेश का...

अनुच्छेद 370 - याचिकाकर्ता  डूबते ताज पर भरोसा कर रहे हैं, जेएंडके में अब अवशिष्ट शक्ति नहीं बची : उत्तरदाताओं ने दलील दी [ दिन- 14]
अनुच्छेद 370 - याचिकाकर्ता ' डूबते ताज' पर भरोसा कर रहे हैं, जेएंडके में अब अवशिष्ट शक्ति नहीं बची : उत्तरदाताओं ने दलील दी [ दिन- 14]

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष अनुच्छेद 370 याचिका के 14 वें दिन, उत्तरदाताओं द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की राष्ट्रपति की शक्तियों और जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिशी शक्ति से संबंधित दलीलें पेश की गईं। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना,जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।राजशाही ख़त्म हो गई, याचिकाकर्ता 'डूबते ताज' पर भरोसा कर रहे हैं: सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदीसीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने पिछले...

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट सीजे को कोर्ट के आदेश अपलोड करने में देरी पर ध्यान देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट सीजे को कोर्ट के आदेश अपलोड करने में देरी पर ध्यान देने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को हाईकोर्ट के आदेश को अपलोड करने में कुछ अनियमितताओं पर ध्यान देने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मुद्दा 'गंभीर चिंता' पैदा करता है और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। जस्टिस एस. रवींद्र भट और जस्टिस अरविंद कुमार की खंडपीठ जमानत के एक आवेदन पर विचार कर रही थी। बेंच को इस दौरान हाईकोर्ट की कार्यवाही में अनियमितता दिखाई दी। हाईकोर्ट के दिनांक 20.04.2023 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट...

अर्चकों का ट्रांसफर: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा
अर्चकों का ट्रांसफर: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से एक आगमिक मंदिर से दूसरे आगमिक मंदिर में अर्चक (मंदिर का पुजारी) का ट्रांसफर करने और निर्वाचित ट्रस्टी की अनुपस्थिति में नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी की आवश्यक भूमिका के संबंध में जवाब मांगा है।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश के ‌खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में आगमों के अनुसार निर्मित मंदिरों को 2020 में तमिलनाडु सरकार की ओर से अर्चकों/पुजारियों की योग्यता और नियुक्तियों के संबंध...

असहिष्‍णु, सांप्रदायिक ताकतों के उभार के बीच अल्पसंख्यक डरे हुए हैं, जबकि अदालतें मूकदर्शक बनी हुई हैंः जस्टिस (रिटायर्ड) एपी शाह
असहिष्‍णु, सांप्रदायिक ताकतों के उभार के बीच अल्पसंख्यक डरे हुए हैं, जबकि अदालतें मूकदर्शक बनी हुई हैंः जस्टिस (रिटायर्ड) एपी शाह

दिल्ली हाइकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, जस्टिस (रिटायर्ड) एपी शाह ने देश में 'असहिष्णु और सांप्रदायिक' ताकतों के उभार पर चिंता व्यक्त की है। हाल ही में उन्होंने कहा, चरमपंथी विचारधारा ऐसी ताकतों के लिए ईंधन का काम कर रही है। नफरत, ध्रुवीकरण और अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों के तिरस्‍कार की संस्कृति पूरे देश में जड़ें जमा रही है। उन्होंने भारत में अदालत जैसी औपचारिक संस्थाओं के कमजोर होने और उनमें जनता के भरोसे के कम होने की भी आशंका जताई।जस्टिस शाह ने ये बातें 25वें डीएस बोर्कर मेमोरियल...

कावेरी नदी विवाद| सुप्रीम कोर्ट में सीडब्ल्यूएमए ने कर्नाटक द्वारा तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने के संबंध में रिपोर्ट दाखिल की
कावेरी नदी विवाद| सुप्रीम कोर्ट में सीडब्ल्यूएमए ने कर्नाटक द्वारा तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने के संबंध में रिपोर्ट दाखिल की

सुप्रीम कोर्ट को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने गुरुवार (31 अगस्त) को दायर हलफनामे में बताया कि उसे कर्नाटक राज्य द्वारा सूचित किया गया है कि 12.08.2023 से 26.08.2023 तक बिलीगुंडुलु में कुल 149898 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।तमिलनाडु सरकार ने 14 अगस्त, 2023 को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कर्नाटक को अपने जलाशयों से तुरंत 24,000 क्यूबिक फीट प्रति सेकंड (क्यूसेक) पानी छोड़ने के लिए बाध्य करने में हस्तक्षेप की मांग की थी। इसका उद्देश्य महीने के शेष भाग के लिए अंतरराज्यीय सीमा पर...