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S. 138 NI Act | शिकायतकर्ता के पास वित्तीय क्षमता साबित करने का कोई दायित्व नहीं: सुप्रीम कोर्ट
S. 138 NI Act | शिकायतकर्ता के पास वित्तीय क्षमता साबित करने का कोई दायित्व नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिर से पुष्टि की कि एक बार जब चेक जारी करने वाले ने चेक पर हस्ताक्षर करना स्वीकार कर लिया तो परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 139 के तहत अनुमान को केवल शिकायतकर्ता की ऋण देने की क्षमता पर सवाल उठाकर खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब आरोपी द्वारा जवाबी नोटिस में ऐसा बचाव नहीं किया गया हो।अदालत ने कहा,“शिकायतकर्ता पर यह दायित्व नहीं है कि वह अपनी क्षमता/वित्तीय क्षमता साबित करे, जिसके भुगतान के लिए कथित तौर पर चेक उसके पक्ष में जारी किया गया। केवल तभी जब यह आपत्ति...

Electricity Act, 2003 | राज्य आयोग राज्य के भीतर ग्रिड को प्रभावित करने वाली अंतर-राज्यीय बिजली आपूर्ति पर निगरानी बनाए रखते हैं: सुप्रीम कोर्ट
Electricity Act, 2003 | राज्य आयोग राज्य के भीतर ग्रिड को प्रभावित करने वाली अंतर-राज्यीय बिजली आपूर्ति पर निगरानी बनाए रखते हैं: सुप्रीम कोर्ट

विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का अधिनियम) के तहत एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि राज्य विद्युत विनियामक आयोग (SERC) अंतर-राज्यीय बिजली आपूर्ति के लिए भी खुली पहुंच को विनियमित कर सकता है, अगर यह उनके ग्रिड को प्रभावित करता है।कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जबकि केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) अंतर-राज्यीय बिजली संचरण पर अधिकार क्षेत्र रखता है, यह राज्य विद्युत विनियामक आयोगों (SERC) को अंतर-राज्यीय बिजली आपूर्ति को विनियमित करने से नहीं रोकता, जब ऐसे लेनदेन राज्य ग्रिड को...

BREAKING | सुप्रीम कोर्ट का फैसला, सभी जज अपनी संपत्ति की सार्वजनिक रूप से करेंगे घोषणा
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट का फैसला, सभी जज अपनी संपत्ति की सार्वजनिक रूप से करेंगे घोषणा

न्यायपालिका में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने अपनी संपत्ति की घोषणा सार्वजनिक करने पर सहमति जताई है।सूत्रों ने लाइव लॉ को बताया कि 1 अप्रैल को आयोजित फुल कोर्ट की बैठक में जजों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) के समक्ष अपनी संपत्ति का खुलासा करने का फैसला किया। साथ ही घोषणाओं को सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।यह फैसला जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली हाईकोर्ट के जज के रूप में सेवारत रहने के दौरान उनके...

BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में पश्चिम बंगाल SSC द्वारा की गई 25 हजार कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला बरकरार रखा
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में पश्चिम बंगाल SSC द्वारा की गई 25 हजार कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा, जिसमें 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल चयन आयोग (SSC) द्वारा की गई करीब 25000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को अमान्य करार दिया गया।कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस निष्कर्ष को मंजूरी दी कि चयन प्रक्रिया में धोखाधड़ी की गई और उसे सुधारा नहीं जा सकता। कोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने के हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ सरकारी स्कूलों में नियुक्तियों को रद्द करने के...

संपत्ति में रुचि रखने वाले पक्ष को पंजीकरण तिथि से सेल डीड के बारे में पता होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने 45 वर्ष बाद दायर बंटवारा मुकदमा खारिज किया
संपत्ति में रुचि रखने वाले पक्ष को पंजीकरण तिथि से सेल डीड के बारे में पता होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने 45 वर्ष बाद दायर बंटवारा मुकदमा खारिज किया

यह देखते हुए कि परिसीमा अवधि सेल डीड के रजिस्ट्रेशन की तिथि से शुरू होती है, जो रचनात्मक सूचना का गठन करती है, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को सेल डीड रजिस्ट्रेशन के 45 वर्ष बाद दायर बंटवारा मुकदमे में डिक्री बरकरार रखने का हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।सूरज लैंप इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड बनाम हरियाणा राज्य और अन्य (2012) 1 एससीसी 656 का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि सेल डीड का रजिस्ट्रेशन सार्वजनिक सूचना का गठन करता है। 12 वर्ष (सीमा अधिनियम, 1963 की धारा 65) के बाद दायर बंटवारा...

कोई सार्वभौमिक नियम नहीं कि पद के लिए मूल पात्रता से अधिक योग्य उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
कोई सार्वभौमिक नियम नहीं कि पद के लिए मूल पात्रता से अधिक योग्य उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अति-योग्यता अपने आप में अयोग्यता नहीं है, हालांकि ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है कि किसी पद के लिए आवश्यक बुनियादी योग्यता से अधिक योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सीधा-सादा नियम नहीं है कि बुनियादी योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों के बजाय उच्च योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों को चुना जाना चाहिए। प्रत्येक मामला उसके तथ्यों, चयन प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले नियमों, किए जाने वाले कर्तव्य की प्रकृति आदि पर निर्भर करेगा।कोर्ट ने कहा,...

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ शराब दुकानों के आवंटन पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की अंतरिम रोक को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ शराब दुकानों के आवंटन पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की अंतरिम रोक को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार ( एक अप्रैल) को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें चंडीगढ़ आबकारी नीति 2025-2026 के तहत शराब की दुकानों के आवंटन पर रोक लगाई गई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते समय कोई कारण दर्ज नहीं किया था।कोर्ट ने कहा,“यदि वास्तव में हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला पाया था और अन्य शर्तें, जैसे सुविधा/असुविधा का संतुलन और अपूरणीय क्षति और चोट को झेलना, भी इस...

सुप्रीम कोर्ट ने गांवों में पब्लिक लाइब्रेरी स्‍थापित करने का निर्देश देने से मना किया, कहा- साफ पानी, भोजन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छता ज्यादा जरूरी चिंताएं
सुप्रीम कोर्ट ने गांवों में पब्लिक लाइब्रेरी स्‍थापित करने का निर्देश देने से मना किया, कहा- साफ पानी, भोजन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छता ज्यादा जरूरी चिंताएं

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (2 अप्रैल) को राज्य सरकारों को ग्रामीण क्षेत्रों में पब्लिक लाइब्रेरी स्थापित करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ जल, भोजन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दे ग्रामीण विकास के ‌लिए अधिक आवश्यक चिंता बने हुए हैं और न्यायालय यह निर्देश नहीं दे सकता कि संसाधनों का आवंटन कैसे किया जाना चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने राज्य सरकारों से ग्रामीण क्षेत्रों में पब्लिक लाइब्रेरियों की कमी के लिए संभावित समाधान तलाशने का आग्रह किया और सुझाव...

BRS MLAs Defection | स्पीकर अगर वर्षों तक अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं लेते तो क्या अदालत को अपने हाथ बांध लेने चाहिए? : सुप्रीम कोर्ट
BRS MLAs' Defection | 'स्पीकर अगर वर्षों तक अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं लेते तो क्या अदालत को अपने हाथ बांध लेने चाहिए?' : सुप्रीम कोर्ट

तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में बीआरएस विधायकों के दलबदल और उसके परिणामस्वरूप अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की गई देरी से संबंधित मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने आज मौखिक रूप से टिप्पणी की कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पास एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है, जिसमें स्पीकर को केवल 4 सप्ताह के भीतर अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए समय-सारिणी तय करने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने मामले की सुनवाई...

अर्ध-न्यायिक निकाय रेस-ज्युडिकेटा के सिद्धांतों से बंधे हैं: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
अर्ध-न्यायिक निकाय रेस-ज्युडिकेटा के सिद्धांतों से बंधे हैं: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

यह देखते हुए कि अर्ध-न्यायिक निकाय भी उसी मुद्दे पर फिर से मुकदमा चलाने से रोकने के लिए रेस-ज्युडिकेटा के सिद्धांतों से बंधे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश खारिज कर दिया, जिसमें अर्ध-न्यायिक निकाय द्वारा पारित दूसरा आदेश बरकरार रखा गया, जबकि अर्ध-न्यायिक निकाय द्वारा पारित पहले आदेश का पालन नहीं किया गया और उसे चुनौती नहीं दी गई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें अर्ध-न्यायिक निकाय ने उसी मुद्दे पर फिर से मुकदमा चलाया था, जिस...

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में पुल ढहने पर जनहित याचिका को पटना हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में पुल ढहने पर जनहित याचिका को पटना हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार राज्य में बने पुलों के बार-बार ढहने के मुद्दे पर विचार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन की मांग वाली जनहित याचिका को पटना हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बिहार सरकार को संपूर्ण संरचनात्मक ऑडिट करने और किसी भी कमजोर पुल की पहचान करने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन के निर्देश देने की मांग की गई, जिसे गिराने या मजबूत करने की आवश्यकता हो सकती है।बिहार...

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक पर मुस्लिम महिला के स्थायी गुजारा भत्ता के अधिकार से संबंधित मुद्दों पर एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक पर मुस्लिम महिला के स्थायी गुजारा भत्ता के अधिकार से संबंधित मुद्दों पर एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे को कानून के इस सवाल पर अदालत की सहायता करने के लिए एमिक्स क्यूरी (प्रो बोनो) नियुक्त किया कि क्या फैमिली कोर्ट मुस्लिम महिला को स्थायी गुजारा भत्ता दे सकता है, जिसका विवाह मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 के अनुसार भंग हो गया और क्या महिला के पुनर्विवाह पर इस तरह के स्थायी गुजारा भत्ते को संशोधित किया जा सकता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने मामले में उठने वाले "मुद्दों के महत्व...

S.34 CPC | वाणिज्यिक लेन-देन में न्यायालय 6% से अधिक ब्याज दे सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट
S.34 CPC | वाणिज्यिक लेन-देन में न्यायालय 6% से अधिक ब्याज दे सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायालयों को डिक्री राशियों के लिए उचित ब्याज दर निर्धारित करने का अधिकार है। न्यायालय के पास यह निर्णय लेने का विवेकाधिकार भी है कि ब्याज किस तिथि से देय है- चाहे वाद दायर करने की तिथि से, उससे पहले की किसी तिथि से, या डिक्री की तिथि से।न्यायालय ने कहा कि वाणिज्यिक लेन-देन में राशि के विलंबित भुगतान पर ब्याज दर के संबंध में पक्षों के बीच समझौते के अभाव में, कानून के अनुसार तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता को ध्यान में रखते हुए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 ("सीपीसी") की...

सुप्रीम कोर्ट ने DHFL के लिए पीरामल की समाधान योजना को बरकरार रखा, NCLAT का आदेश खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने DHFL के लिए पीरामल की समाधान योजना को बरकरार रखा, NCLAT का आदेश खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने आज (1 अप्रैल) पिरामल कैपिटा एंड हाउसिंग फाइनेंस द्वारा पूर्ववर्ती दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) के लिए प्रस्तावित समाधान योजना को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने माना कि दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में धोखाधड़ी वाले लेन-देन से वसूले गए फंड पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड को जाएंगे।कोर्ट ने NCLAT के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) के लेनदारों को पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस द्वारा प्रस्तावित...

केवल गलत आदेश पारित करने के आधार पर अर्ध-न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
केवल गलत आदेश पारित करने के आधार पर अर्ध-न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व तहसीलदार के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट इस मामले में यह फैसला दिया कि दुर्भावना या बाहरी प्रभाव के आरोपों के बिना गलत अर्ध-न्यायिक आदेश अकेले अनुशासनात्मक कार्रवाई को उचित नहीं ठहरा सकते।कोर्ट ने कहा कि जब आदेश सद्भावनापूर्वक (हालांकि गलत) पारित किया गया तो यह अर्ध-न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का औचित्य नहीं रखता, जब तक कि आदेश बाहरी कारकों या किसी भी तरह के रिश्वत से प्रभावित न हो।जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस ए.जी....

S.319 CrPC | अतिरिक्त अभियुक्त को बिना क्रॉस एक्जामिनेशन के गवाह के बयान के आधार पर बुलाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
S.319 CrPC | अतिरिक्त अभियुक्त को बिना क्रॉस एक्जामिनेशन के गवाह के बयान के आधार पर बुलाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिर से पुष्टि की कि अतिरिक्त अभियुक्त को बुलाने की याचिका एक्जामिनेशन समाप्त होने की प्रतीक्षा किए बिना गवाह की अप्रतिबंधित चीफ एक्जाम जैसे प्री-ट्रायल साक्ष्य पर निर्भर हो सकती है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता-शिकायतकर्ता की अप्रतिबंधित गवाही (चीफ एक्जाम) के आधार पर प्रस्तावित अभियुक्तों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता का हवाला देते हुए CrPC की धारा 319 के तहत अपीलकर्ता का आवेदन स्वीकार कर लिया था।ट्रायल...

सुप्रीम कोर्ट ने POCSO पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में YouTuber के खिलाफ ट्रायल स्थगित किया
सुप्रीम कोर्ट ने POCSO पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में YouTuber के खिलाफ ट्रायल स्थगित किया

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के YouTuber सूरज पालकरन की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामले में पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में उसके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और मामले में मुकदमे पर रोक लगा दी, क्योंकि उनका मानना ​​था कि पुलिस अधिकारी पालकरन पर "मुकदमा चलाने" के बजाय "सता रहे" हैं।सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस कांत ने कहा...

क्या इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों को PhD के बिना एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पुनः नामित किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया
क्या इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों को PhD के बिना एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पुनः नामित किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इंजीनियरिंग संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर (15 मार्च, 2000 के बाद नियुक्त), जिनके पास नियुक्ति के समय PhD योग्यता नहीं है या जो अपनी नियुक्ति के सात साल के भीतर PhD हासिल करने में विफल रहे, वे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा जारी 2010 की अधिसूचना के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पुनः नामित होने का दावा नहीं कर सकते।साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि 15 मार्च, 2000 से पहले विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों में नियुक्त किए गए शिक्षक, जब PhD असिस्टेंट प्रोफेसर...

जस्टिस सूर्यकांत ने कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले कैदियों की पहचान करने के लिए अभियान की निगरानी की
जस्टिस सूर्यकांत ने कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले कैदियों की पहचान करने के लिए अभियान की निगरानी की

सुप्रीम कोर्ट जज और सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति (SCLSC) के अध्यक्ष जस्टिस सूर्यकांत ने वर्चुअल बैठक में भारत भर के राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों (SLSA) और उच्च न्यायालय विधिक सेवा समितियों (HCLSC) के अध्यक्षों के साथ बातचीत की। यह चर्चा जनवरी, 2025 में शुरू किए गए विधिक सहायता अभियान का अनुवर्ती है, जिसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील या विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने के लिए कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले कैदियों की पहचान करना था।सभी राज्यों में जेल महानिदेशकों/महानिरीक्षकों और...

सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अधिकारी के खिलाफ दिव्यांगता आयुक्त के निर्देशों को खारिज करने के हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि की
सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अधिकारी के खिलाफ दिव्यांगता आयुक्त के निर्देशों को खारिज करने के हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि की

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका खारिज की, जिसमें गोवा राज्य दिव्यांग व्यक्ति आयुक्त द्वारा केनरा बैंक के अधिकारी को बौद्धिक दिव्यांगता वाले व्यक्ति की देखभाल करने वाले के साथ असभ्य और भेदभावपूर्ण तरीके से व्यवहार करने के लिए फटकार लगाने के निर्देशों को खारिज कर दिया गया।आयुक्त ने संबंधित अधिकारी को आठ दिनों के लिए अनिवार्य दिव्यांगता प्रशिक्षण से गुजरने और सभी बैंक अधिकारियों को दिव्यांगता संवेदीकरण से गुजरने और देखभाल करने वाले को लिखित सार्वजनिक...