सरकारी लोन के लिए केंद्रीय आवास मंत्रालय की सिफ़ारिश से मोबाइल वेंडर की कैटेगरी 'फिक्स्ड वेंडर' में नहीं बदल सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
Shahadat
24 July 2026 9:47 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से किसी स्ट्रीट वेंडर को सरकारी स्कीम के तहत लोन दिलाने के लिए जारी की गई सिफ़ारिश, मोबाइल वेंडर को 'फिक्स्ड वेंडर' (एक जगह पर सामान बेचने वाला) में नहीं बदल सकती और न ही वेंडर के 'सर्टिफिकेट ऑफ़ वेंडिंग' (CoV) में बताई गई कैटेगरी को बदल सकती है।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की बेंच ने कहा कि वेंडिंग की कैटेगरी पूरी तरह से दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा जारी CoV से तय होती है।
कोर्ट स्ट्रीट वेंडर्स की कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन वेंडर्स का तर्क था कि PM SVANidhi स्कीम के तहत मंत्रालय की सिफ़ारिशों से पता चलता है कि उन्हें फिक्स्ड वेंडिंग लोकेशन (सामान बेचने की तय जगह) दी गई।
PM SVANidhi स्कीम एक माइक्रो-क्रेडिट सुविधा है जो शहरी स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी के वर्किंग कैपिटल लोन और ब्याज पर सब्सिडी देती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि वेंडर को ऐसी लोन सुविधाएँ दिलाने के लिए जारी सिफ़ारिशों का वेंडिंग की तय कैटेगरी पर कोई असर नहीं पड़ता।
कोर्ट ने कहा,
"PM SVANidhi स्कीम के तहत लोन सुविधाएं दिलाने के लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी किसी भी सिफ़ारिश पत्र का वेंडिंग की कैटेगरी पर कोई असर नहीं पड़ता और न ही वह इसे बदल सकता है। वेंडिंग की कैटेगरी पूरी तरह से MCD द्वारा जारी प्रोविज़नल CoV या फ़ाइनल CoV से तय होगी।"
याचिकाकर्ताओं के CoV की जांच करने पर कोर्ट ने पाया कि जो लोग "अन्य" (Others) कैटेगरी में आते थे, उन्हें मोबाइल वेंडर के तौर पर काम करना था। इसलिए वे फिक्स्ड लोकेशन से काम करने या 'नो-वेंडिंग' या 'नो-स्क्वैटिंग' ज़ोन में वेंडिंग गतिविधियां करने के अधिकार का दावा नहीं कर सकते थे।
ऐसे में कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को सख्ती से मोबाइल वेंडर के तौर पर काम करना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने MCD और पुलिस को निर्देश दिया कि अगर वे प्रतिबंधित इलाकों में वेंडिंग करते पाए जाएं तो उन्हें हटा दिया जाए, "ताकि पैदल चलने वालों के रास्ते में कोई रुकावट न आए"।
Case title: Phool Chand & Ors. v. MCD


