मृत व्यक्ति के नाम जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को Income Tax At की धारा 159 से वैध नहीं ठहराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
24 July 2026 1:26 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी मृत करदाता के नाम पर जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को आयकर अधिनियम (Income Tax At) की धारा 159 के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि करदाता की मृत्यु के बाद नोटिस जारी किया गया है तो आयकर विभाग को निर्धारित समयसीमा के भीतर उसके विधिक उत्तराधिकारियों के नाम नया नोटिस जारी करना होगा।
जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि धारा 159 तभी लागू होती है, जब करदाता के जीवित रहते उसके खिलाफ वैध रूप से कार्यवाही शुरू की गई हो। यदि प्रारंभिक नोटिस ही मृत व्यक्ति के नाम जारी किया गया तो उसे धारा 159 के सहारे वैध नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने कहा,
"राजस्व विभाग द्वारा धारा 159 का सहारा लेकर मृत व्यक्ति के नाम जारी नोटिस को वैध ठहराने का प्रयास पूरी तरह गलत है। सही प्रक्रिया यह थी कि विभाग निर्धारित समयसीमा के भीतर सीधे विधिक उत्तराधिकारी को नया नोटिस जारी करता, जो इस मामले में नहीं किया गया।"
मामले में याचिकाकर्ता के पति, जो उत्तर प्रदेश सचिवालय में मुख्य प्रबंधन अधिकारी थे, का 7 जनवरी 2024 को निधन हो गया। बाद में आयकर विभाग ने 28 मार्च 2025 को आकलन वर्ष 2021-22 के लिए उनके नाम पर पुनर्मूल्यांकन का नोटिस जारी किया। इसके बाद एक अन्य नोटिस भी भेजा गया।
याचिकाकर्ता ने विभाग को पति के निधन की जानकारी देते हुए कहा कि मृत व्यक्ति के नाम चल रही कार्यवाही शुरू से ही अवैध है। हालांकि, विभाग ने आपत्ति खारिज कर यह कहते हुए कार्यवाही जारी रखी कि उसे मृत्यु की जानकारी नहीं दी गई और बाद में याचिकाकर्ता का नाम प्रतिस्थापित कर पुनर्मूल्यांकन आदेश पारित किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि Income Tax At किसी विधिक उत्तराधिकारी पर यह कानूनी दायित्व नहीं डालता कि वह करदाता की मृत्यु की सूचना विभाग को दे। अदालत ने यह भी कहा कि मृत व्यक्ति के नाम इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना भले ही विधिसम्मत न हो, लेकिन इससे विभाग को ऐसा अधिकार नहीं मिल जाता जो कानून ने उसे दिया ही नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि करदाता की मृत्यु से पहले कोई कार्यवाही शुरू नहीं हुई थी, तो उसके बाद विधिक उत्तराधिकारियों के खिलाफ ही नए सिरे से नोटिस जारी करना अनिवार्य है। मृत व्यक्ति के नाम जारी नोटिस के आधार पर विधिक उत्तराधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने विभाग की कार्रवाई को कानून के विपरीत माना।


